पूर्व Xiaomi CEO दिल्ली की हवा से इतने परेशान हुए कि तुरंत वापस भागना पड़ा”

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Summary (Bullet Points में):

  • पूर्व Xiaomi CEO और G42 India के प्रमुख मनु जैन दिल्ली की प्रदूषित हवा से कुछ ही घंटों में बीमार महसूस करने लगे।
  • आंखों में जलन, गले में सूजन, खांसी और सिरदर्द के कारण उन्हें अपनी बिज़नेस ट्रिप बीच में छोड़कर जल्दी फ्लाइट से वापस लौटना पड़ा।
  • दिल्ली में उनकी मौजूदगी के दौरान AQI 373 से 400+ के बीच रहा, कई इलाकों में हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज हुई।
  • प्रदूषण के मुख्य कारण—पराली जलाना, वाहनों का धुआं, निर्माण धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और सर्दियों में हवा का ठहराव।
  • WHO के अनुसार दिल्ली की हवा का स्तर फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग, स्ट्रोक और कैंसर तक का खतरा बढ़ा सकता है।
  • मनु जैन ने कहा कि यह समस्या सिर्फ सरकार की नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है और इसके लिए लॉन्ग-टर्म सॉल्यूशंस जरूरी हैं।
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दिल्ली पहुंचते ही बिगड़ी तबियत

पूर्व शाओमी इंडिया प्रमुख और वर्तमान G42 इंडिया के सीईओ मनु कुमार जैन ने दिल्ली की खतरनाक वायु गुणवत्ता के साथ अपना बेहद परेशान करने वाला अनुभव साझा किया है। वह एक छोटी बिज़नेस यात्रा के लिए दिल्ली पहुंचे थे, लेकिन यहां की जहरीली हवा ने उन्हें कुछ ही घंटों में इतना असहज कर दिया कि उन्हें अपनी ट्रिप बीच में ही रोककर जल्दी फ्लाइट लेकर वापस लौटना पड़ा। मनु जैन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि दिल्ली की हवा ने उनकी आंखों में पानी ला दिया, गले में सूजन पैदा कर दी और खांसी व सिरदर्द शुरू हो गया। दिल्ली में पले-बढ़े होने के कारण यह अनुभव उनके लिए और भी ज्यादा भावनात्मक था।

AQI 400 के पार, कई इलाकों में ‘गंभीर’ स्तर

मनु जैन के दिल्ली में होने के दौरान शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) ‘बहुत खराब’ कैटेगरी में 373 दर्ज किया गया था। कई इलाकों में यह स्तर 400 से ऊपर चला गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी है। वज़ीरपुर जैसे इलाकों में तो AQI 440 से भी ज्यादा पाया गया, जिससे साफ दिखता है कि राजधानी की हवा स्वास्थ्य के लिए कितनी हानिकारक हो चुकी है। आज भी कई क्षेत्रों में AQI ‘खतरनाक’ स्तर पर बना हुआ है।

प्रदूषण बढ़ने के मुख्य कारण

हर साल सर्दियों के आते ही दिल्ली प्रदूषण की गिरफ्त में आ जाती है। इसके प्रमुख कारणों में पड़ोसी राज्यों में पराली जलाना, वाहनों का बढ़ता धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण स्थल की धूल और सर्दियों की ठंडी हवा शामिल है, जो प्रदूषकों को नीचे रोक लेती है। सरकार समय-समय पर प्रतिबंध लगाती है, लेकिन असर सीमित रहता है।

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स्वास्थ्य पर गंभीर असर

WHO और अन्य स्वास्थ्य संस्थाओं के अनुसार, ऐसे प्रदूषण का असर बेहद खतरनाक हो सकता है। इससे दमा, फेफड़ों की बीमारियाँ, हृदय रोग, स्ट्रोक, COPD और फेफड़ों के कैंसर के मामले बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे, बुजुर्ग और बीमार लोग इससे सबसे जल्दी प्रभावित होते हैं।

मनु जैन का संदेश: “यह सामूहिक जिम्मेदारी है”

मनु जैन ने किसी भी संस्था को दोष नहीं दिया बल्कि कहा कि यह समस्या भविष्य की पीढ़ियों से जुड़ी है, इसलिए इसका स्थायी समाधान सभी को मिलकर खोजना होगा। उनका अनुभव फिर साबित करता है कि दिल्ली का प्रदूषण मौसमी नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट है।

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