ISRO का अगला बड़ा धमाका: चंद्रयान-4 और गगनयान मिशन पर ताज़ा अपडेट, जानें भारत का फ्यूचर स्पेस प्लान

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भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) एक बार फिर अंतरिक्ष की दुनिया में इतिहास रचने के लिए तैयार है। चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता के बाद, अब पूरी दुनिया की नजरें चंद्रयान-4 (Chandrayaan-4) और भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान (Gaganyaan) पर टिकी हैं। ISRO न केवल चंद्रमा पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है, बल्कि इंसानों को अंतरिक्ष में भेजने और अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है।

चंद्रयान-4: चंद्रमा से मिट्टी लाने की तैयारी

चंद्रयान-4 भारत का एक अत्यंत महत्वाकांक्षी ‘लूनर सैंपल रिटर्न मिशन’ है। इसका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह से लगभग 3 किलोग्राम मिट्टी और चट्टानों के नमूने इकट्ठा करके उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है।

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ISRO चेयरमैन के अनुसार, इस मिशन को 2028 तक लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है। यह मिशन चंद्रयान-3 की लैंडिंग साइट ‘शिव शक्ति पॉइंट’ के पास ही उतरेगा। लगभग ₹2104 करोड़ के बजट वाले इस मिशन में एक एडवांस्ड लैंडर, एसेंडर और रिटर्न सिस्टम का उपयोग किया जाएगा। यह तकनीक भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगी जिनके पास चंद्रमा से नमूने वापस लाने की क्षमता है।

गगनयान मिशन: अंतरिक्ष में गूंजेगा ‘जय हिंद’

गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है, जो देश के विज्ञान और तकनीक के इतिहास में एक नया अध्याय लिखेगा। इस मिशन का लक्ष्य तीन से चार अंतरिक्ष यात्रियों को ‘लो अर्थ ऑर्बिट’ (LEO) में भेजना और उन्हें कम से कम सात दिनों तक वहां रखकर सुरक्षित वापस लाना है।

ताजा अपडेट्स के अनुसार, इस मिशन का अनक्रूड (बिना मानव वाला) वर्जन 2026 में लॉन्च होने की उम्मीद है, जबकि मानवयुक्त उड़ान 2027 तक संभव है। अब तक ISRO ने TV-D1 और TV-D2 जैसे कई महत्वपूर्ण क्रू एस्केप सिस्टम टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। इस मिशन की सफलता के साथ ही भारत, अमेरिका, रूस और चीन के बाद मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाला दुनिया का चौथा देश बन जाएगा।

नए सैटेलाइट लॉन्च और भविष्य का रोडमैप

2026 में ISRO की योजना सात से अधिक महत्वपूर्ण सैटेलाइट लॉन्च करने की है। इसमें PSLV और GSLV के जरिए कई कमर्शियल और कम्युनिकेशन सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेजे जाएंगे। जनवरी 2026 में ISRO ने ‘SPADEX’ डॉकिंग टेस्ट को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है, जो भविष्य के अंतरिक्ष स्टेशन के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

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ISRO का विजन केवल यहीं तक सीमित नहीं है:

2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bhartiya Antariksha Station): भारत अपना खुद का स्पेस स्टेशन स्थापित करेगा, जिसका पहला मॉड्यूल 2028 तक ऑर्बिट में भेजा जा सकता है।

2040 तक चंद्रमा पर मानव: भारत ने 2040 तक चंद्रमा की सतह पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री को उतारने का बड़ा लक्ष्य रखा है।

ISRO के ये मिशन न केवल भारत की तकनीकी शक्ति का प्रदर्शन हैं, बल्कि ये वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी को 10% तक ले जाने का मार्ग भी प्रशस्त करेंगे। चंद्रयान-4 और गगनयान जैसे मिशन आने वाली पीढ़ी के वैज्ञानिकों के लिए प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत साबित होंगे।

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