सऊदी अरब से इस वक्त की एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। सऊदी सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए 24,000 पाकिस्तानी नागरिकों को अपने देश से वापस पाकिस्तान भेज (Deport) दिया है। इन सभी पर आरोप है कि ये लोग सऊदी अरब में ‘भीख’ मांग कर अपना गुजारा कर रहे थे और वीजा नियमों का सरेआम उल्लंघन कर रहे थे।
यह जानकारी किसी और ने नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान की फेडरल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (FIA) के प्रमुख रिफ्फत मुख्तार ने संसद की एक स्थायी समिति के सामने दी है।

क्या है पूरा मामला?
पाकिस्तान की आर्थिक बदहाली और बेरोजगारी अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसकी छवि को नुकसान पहुंचा रही है। FIA की रिपोर्ट के मुताबिक:
• वीजा का दुरुपयोग: डिपोर्ट किए गए ज्यादातर पाकिस्तानी नागरिक उमराह (Umrah) या टूरिस्ट वीजा पर सऊदी अरब गए थे।
• पवित्र स्थलों पर भीख: ये लोग मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों के आसपास सक्रिय थे, जहाँ ये जायरीनों (तीर्थयात्रियों) से भीख मांगा करते थे।
• सुनियोजित नेटवर्क: जांच में यह भी सामने आया है कि इसके पीछे कई ऐसे एजेंट सक्रिय हैं जो लोगों को ‘कमाई’ का लालच देकर विदेश भेजते हैं और फिर उन्हें भीख मांगने के काम में धकेल देते हैं।
सऊदी अरब का सख्त रुख
सऊदी अरब अपनी कानून व्यवस्था और ‘विजन 2030’ के तहत देश की छवि को लेकर बेहद सख्त है। सार्वजनिक स्थानों पर भीख मांगना सऊदी कानून के तहत एक गंभीर अपराध है। सऊदी प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि पवित्र स्थलों की गरिमा बनाए रखने के लिए किसी भी तरह की अवैध गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पाकिस्तान की वैश्विक साख पर संकट
यह पहली बार नहीं है जब पाकिस्तान को इस तरह की शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। पिछले साल भी सऊदी अधिकारियों ने शिकायत की थी कि जेलों में बंद जेबकतरों और भिखारियों में से एक बड़ी संख्या पाकिस्तानियों की है।
FIA प्रमुख रिफ्फत मुख्तार का बयान:
“सऊदी अरब ने अब तक 24,000 ऐसे लोगों को वापस भेजा है जो भीख मांगने की गतिविधियों में शामिल थे। यह संख्या चिंताजनक है और हम उन एजेंटों पर नकेल कस रहे हैं जो इस तरह के अवैध कार्यों को बढ़ावा दे रहे हैं।”

इस कार्रवाई का पाकिस्तान पर क्या असर होगा?
• वीजा नियमों में सख्ती: भविष्य में आम पाकिस्तानी नागरिकों के लिए सऊदी अरब का उमराह या टूरिस्ट वीजा मिलना और कठिन हो सकता है।
• अंतरराष्ट्रीय बदनामी: खाड़ी देशों (Gulf Countries) में पाकिस्तानी कामगारों की छवि धूमिल हो रही है, जिससे रोजगार के अवसरों पर सीधा असर पड़ सकता है।
• आर्थिक दबाव: विदेशों से आने वाला रेमिटेंस (Remittance) पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। ऐसी घटनाओं से वैध रोजगार पाने वालों को भी संदेह की दृष्टि से देखा जा रहा है।
सऊदी अरब का यह कदम उन सभी के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो धार्मिक यात्रा के नाम पर अवैध गतिविधियों में शामिल होते हैं। पाकिस्तान के लिए यह समय आत्ममंथन का है कि आखिर क्यों उसके नागरिक विदेशी धरती पर इस तरह के हालात का सामना करने को मजबूर हैं।
आपकी क्या राय है? क्या पाकिस्तान सरकार को इन एजेंटों के खिलाफ और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए? हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।