जम्मू-कश्मीर के कटरा में स्थित माता वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज के छात्रों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने कॉलेज में बुनियादी सुविधाओं की कमी का हवाला देते हुए एमबीबीएस (MBBS) कोर्स की मान्यता वापस ले ली है। इस फैसले के बाद न केवल 2026 के नए बैच के प्रवेश पर रोक लग गई है, बल्कि वर्तमान में पढ़ रहे सैकड़ों छात्रों का करियर भी अधर में लटक गया है।
NMC का बड़ा फैसला: क्यों छिनी गई मेडिकल
कॉलेज की मान्यता?
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की एक उच्च स्तरीय टीम ने हाल ही में श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) का औचक निरीक्षण किया था। इस निरीक्षण की रिपोर्ट के आधार पर कमीशन ने कॉलेज की मान्यता रद्द करने का कड़ा फैसला लिया है।

मान्यता रद्द होने के प्रमुख कारण:
• फैकल्टी की कमी: रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज में एनाटॉमी, फिजियोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जैसे महत्वपूर्ण विभागों में प्रोफेसरों और सीनियर रेजिडेंट्स की भारी कमी पाई गई।
• इंफ्रास्ट्रक्चर में खामियां: अस्पताल में बेड ऑक्यूपेंसी (मरीजों की संख्या) तय मानकों से काफी कम थी। साथ ही, आधुनिक लैबोरेट्री और डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधाएं भी अधूरी पाई गईं।
• तकनीकी मापदंड: एनएमसी के नए नियमों के तहत बायोमेट्रिक अटेंडेंस और सीसीटीवी कैमरों का फीड सीधे दिल्ली कार्यालय से जुड़ा होना चाहिए, जिसमें यह कॉलेज विफल रहा।
छात्रों और अभिभावकों का प्रदर्शन: “हमारा क्या कसूर?”
मान्यता रद्द होने की खबर फैलते ही कॉलेज परिसर में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। कड़कड़ाती ठंड के बावजूद छात्र धरने पर बैठे हैं। उनका तर्क है कि जब उन्होंने दाखिला लिया था, तब कॉलेज के पास सभी जरूरी अनुमतियां थीं।
छात्रों की मुख्य मांगें:
• भविष्य की सुरक्षा: वर्तमान बैच के छात्रों को किसी अन्य सरकारी मेडिकल कॉलेज में शिफ्ट (Migrate) किया जाए।
• अस्पताल का अपग्रेडेशन: श्राइन बोर्ड इस मामले में हस्तक्षेप करे और बुनियादी ढांचे को रातों-रात सुधारने के लिए निवेश करे।
• जिम्मेदारी तय हो: छात्रों ने प्रशासन से सवाल किया है कि जब सुविधाएं पूरी नहीं थीं, तो दाखिले की प्रक्रिया क्यों शुरू की गई?
माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड और प्रशासन का पक्ष
यह मेडिकल कॉलेज श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड (SMVDSB) के अंतर्गत आता है। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बयान जारी कर कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे।
बोर्ड का कहना है कि “मान्यता पूरी तरह रद्द नहीं हुई है, बल्कि कुछ कमियों के कारण इसे रोका गया है।” प्रशासन ने दावा किया है कि वे युद्धस्तर पर फैकल्टी की भर्ती कर रहे हैं और एनएमसी द्वारा बताई गई सभी कमियों को अगले 30 दिनों के भीतर दूर कर लिया जाएगा। हालांकि, एनएमसी के कड़े रुख को देखते हुए यह इतना आसान नहीं लग रहा।
जम्मू-कश्मीर में मेडिकल शिक्षा पर असर
जम्मू-कश्मीर पहले ही डॉक्टरों की कमी से जूझ रहा है। केंद्र शासित प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेज खुलना एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा था, लेकिन वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थान की मान्यता पर आंच आना पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़ा करता है।
आंकड़ों पर एक नजर:
• सीटों का नुकसान: अगर यह मान्यता बहाल नहीं होती है, तो जम्मू-कश्मीर के कोटे से एमबीबीएस की करीब 100 सीटें कम हो सकती हैं।
• निजी निवेश पर संशय: इस विवाद से भविष्य में राज्य में खुलने वाले अन्य मेडिकल प्रोजेक्ट्स के लिए निवेशकों और छात्रों का भरोसा कम हो सकता है।

क्या है समाधान?
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या का समाधान केवल दो ही तरीकों से संभव है। पहला, कॉलेज प्रशासन तत्काल प्रभाव से ‘कम्पलायंस रिपोर्ट’ (Compliance Report) जमा करे और एनएमसी से दोबारा निरीक्षण की मांग करे। दूसरा, यदि सुधार संभव नहीं है, तो सरकार को हस्तक्षेप कर इन छात्रों को राज्य के अन्य मेडिकल कॉलेजों (जैसे GMC Jammu या Srinagar) में समायोजित करना चाहिए ताकि उनका साल बर्बाद न हो।
क्या आपको लगता है कि मेडिकल कॉलेजों की कमियों की सजा छात्रों को मिलनी चाहिए? क्या एनएमसी को मान्यता रद्द करने के बजाय सुधार के लिए और समय देना चाहिए था? अपनी राय हमें कमेंट में बताएं।