नोएडा बना ‘रणक्षेत्र’: सुलग उठा औद्योगिक इलाका, मजदूरों के प्रदर्शन में आगजनी और भारी पत्थरबाजी

नोएडा बना 'रणक्षेत्र

दिल्ली से सटे हाईटेक शहर नोएडा में मंगलवार को उस वक्त स्थिति नियंत्रण से बाहर हो गई, जब अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे हजारों मजदूरों का गुस्सा फूट पड़ा। देखते ही देखते नोएडा का शांत दिखने वाला औद्योगिक क्षेत्र ‘वॉरजोन‘ में तब्दील हो गया। फेज-2 और सेक्टर 60-63 के इलाकों में प्रदर्शनकारियों ने न केवल सड़कों पर जाम लगाया, बल्कि दर्जनों वाहनों को आग के हवाले कर दिया। आसमान में उठते काले धुएं और चारों तरफ बिखरे पत्थरों ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शांतिपूर्ण मार्च से हिंसक तांडव तक की कहानी

प्रदर्शन की शुरुआत सुबह बेहद शांतिपूर्ण तरीके से हुई थी। नोएडा के विभिन्न होजरी और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के मजदूर अपनी न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग को लेकर एकत्रित हुए थे। लेकिन जैसे ही भीड़ होजरी कॉम्प्लेक्स के पास पहुंची, वहां कुछ असामाजिक तत्वों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुलिस द्वारा भीड़ को पीछे धकेलने के लिए किए गए हल्के बल प्रयोग ने आग में घी डालने का काम किया। इसके बाद शुरू हुआ पत्थरबाजी का वो दौर, जिसने पुलिस प्रशासन को बैकफुट पर धकेल दिया।

क्यों भड़का मजदूरों का आक्रोश? (मुख्य मांगें)

इस हिंसा के पीछे लंबे समय से सुलग रहा असंतोष है। मजदूरों का आरोप है कि बढ़ती महंगाई के दौर में उन्हें दी जाने वाली मजदूरी ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • वेतन में वृद्धि: मजदूर उत्तर प्रदेश सरकार से कम से कम ₹20,000 प्रति माह न्यूनतम मजदूरी की मांग कर रहे हैं।
  • हरियाणा मॉडल की तर्ज पर लाभ: श्रमिकों का तर्क है कि बगल के राज्य हरियाणा में वेतन संशोधन लागू हो चुका है, तो यूपी में देरी क्यों?
  • काम के घंटे और सुरक्षा: 8 घंटे की शिफ्ट की सख्ती और पीएफ (EPF) व ईएसआई (ESI) जैसे सामाजिक सुरक्षा लाभों को जमीनी स्तर पर लागू करना।

आगजनी और तोड़फोड़: करोड़ों का नुकसान

हिंसा के दौरान उपद्रवियों ने निजी कारों, डिलीवरी वैन और यहां तक कि पुलिस की पीसीआर वैन को भी निशाना बनाया। फेज-2 के पास खड़ी कम से कम 5-6 गाड़ियों को पूरी तरह जला दिया गया। पत्थरों की बारिश इतनी तेज थी कि आसपास की फैक्ट्रियों की कांच की खिड़कियां चकनाचूर हो गईं। इस हंगामे के कारण नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे से जुड़ने वाले कई रास्तों पर घंटों लंबा जाम लगा रहा, जिससे ऑफिस जाने वाले लोगों और एम्बुलेंस सेवाओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई और वर्तमान स्थिति

हालात बिगड़ते देख कमिश्नरेट पुलिस ने मोर्चा संभाला। मौके पर भारी संख्या में पीएसी (PAC) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती की गई है। पुलिस ने उपद्रवियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। नोएडा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि “वीडियो फुटेज के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा रही है जिन्होंने भीड़ को भड़काया और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।” मुख्यमंत्री कार्यालय ने भी इस घटना का संज्ञान लेते हुए साफ किया है कि मांगों पर विचार किया जा सकता है, लेकिन कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

औद्योगिक जगत में दहशत का माहौल

इस हिंसा ने नोएडा के उद्यमियों और व्यापारियों में डर पैदा कर दिया है। नोएडा होजरी कॉम्प्लेक्स के कई मालिकों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से विदेशी क्लाइंट्स के बीच गलत संदेश जाता है और भविष्य में निवेश प्रभावित हो सकता है। फिलहाल, पूरे इलाके में धारा 144 लागू कर दी गई है और पुलिस बल चप्पे-चप्पे पर गश्त कर रहा है।

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