पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (NMCH) में खून के दलालों का काला कारोबार सामने आया है। SDO सत्यम सहाय और ASP राजकिशोर सिंह ने शिकायत पर छापेमारी की, जहां एक महिला से खून निकालकर पैसे वसूलने का मामला पकड़ा गया। मरीजों की परेशानी से प्रशासन सख्त हो गया है। यह घटना बिहार स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल रही है।
पटना NMCH खून दलाल छापा: पूरी घटना का खुलासा
नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) पटना में मरीजों को खून उपलब्ध कराने के नाम पर चल रहे अवैध कारोबार ने अब प्रशासन की नींद उड़ा दी है। स्थानीय लोगों की शिकायत पर SDO सत्यम सहाय और ASP राजकिशोर सिंह ने गुरुवार रात को अचानक छापा मारा। छापे में एक महिला को खून निकालते हुए पकड़ा गया, जिसके बदले दलालों ने परिजनों से हजारों रुपये वसूल लिए थे। मरीजों को समय पर खून न मिलने से कई जानें खतरे में पड़ रही हैं। NMCH प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। यह घटना बिहार के सरकारी अस्पतालों में ब्लड बैंक की लापरवाही को उजागर करती है।

महिला से खून चोरी: कैसे हुआ खुलासा?
घटना तब सामने आई जब एक मरीज के परिजन ने खून के दलालों से संपर्क किया। दलालों ने 5000 रुपये मांगते हुए एक महिला डोनर को अस्पताल लाया। लेकिन छापे के दौरान पता चला कि महिला से बिना किसी मेडिकल जांच के खून निकाला जा रहा था। SDO सत्यम सहाय ने बताया कि दलाल मरीजों की मजबूरी का फायदा उठा रहे थे। ASP राजकिशोर सिंह ने दलालों को हिरासत में ले लिया। महिला डोनर को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया। यह मामला NMCH के ब्लड बैंक की सुरक्षा में सेंध लगाने का सबूत है। बिहार में ऐसे कई अस्पतालों में खून की किल्लत आम है।
मरीजों की परेशानी: NMCH में खून की कालाबाजारी
NMCH पटना बिहार का प्रमुख सरकारी अस्पताल है, जहां रोज सैकड़ों मरीज भर्ती होते हैं। लेकिन खून की कमी से एक्सीडेंट पीड़ित, थैलेसीमिया रोगी और गर्भवती महिलाओं को भारी परेशानी हो रही है। दलालों का गिरोह बाहर से डोनर लाकर ऊंची कीमत वसूलता था। एक मरीज के परिजन ने बताया, “रातभर इंतजार के बाद भी खून नहीं मिला, दलालों ने 10 हजार मांगे।” प्रशासन ने अब ब्लड बैंक पर सख्त निगरानी बढ़ा दी है। स्वास्थ्य मंत्री की ओर से जल्द जांच टीम भेजने की घोषणा हुई है। यह घटना पूरे बिहार के स्वास्थ्य तंत्र पर सवाल खड़े कर रही है।

प्रशासन की कार्रवाई: SDO और ASP का सख्त रुख
SDO सत्यम सहाय ने कहा, “हम मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे, दोषियों को सजा मिलेगी।” ASP राजकिशोर सिंह ने छापे में दो दलालों को गिरफ्तार किया। NMCH अधीक्षक ने ब्लड बैंक स्टाफ की जांच शुरू कर दी। जिला मजिस्ट्रेट ने विशेष टीम गठित की है। आने वाले दिनों में और छापे की संभावना है। बिहार सरकार ने सरकारी अस्पतालों में ब्लड डोनेशन कैंप बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई मरीजों में भरोसा बहाल करने की दिशा में सकारात्मक कदम है।
बिहार स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल: आगे क्या?
यह घटना नालंदा मेडिकल कॉलेज को ही नहीं, बल्कि पटना और बिहार के सभी सरकारी अस्पतालों की पोल खोल रही है। खून के दलालों का नेटवर्क पूरे राज्य में फैला हुआ है। विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लड बैंक में CCTV, सख्त वेरिफिकेशन और 24×7 मॉनिटरिंग जरूरी है। सरकार को निजी डोनेशन पोर्टल से जोड़ना चाहिए। मरीजों को अब जागरूक रहना होगा। यदि ऐसी शिकायतें बढ़ीं तो बड़े सुधार संभव हैं। बिहार में स्वास्थ्य सुधार की यह एक कड़ी हो सकती है।