यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद पहली बार, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) भारत की धरती पर कदम रखने जा रहे हैं। आधिकारिक घोषणा के अनुसार, पुतिन 4 और 5 दिसंबर 2025 को भारत के दो दिवसीय दौरे पर रहेंगे। यह सिर्फ एक कूटनीतिक मुलाकात नहीं, बल्कि बदलती दुनिया में भारत की ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) का सबसे बड़ा सबूत है।
पूरी दुनिया की निगाहें इस 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन (India-Russia Annual Summit) पर टिकी हैं। जहाँ एक तरफ पश्चिमी देश प्रतिबंधों (Sanctions) का दबाव बना रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन अपनी पुरानी दोस्ती को नए आयाम देने की तैयारी में हैं।

दौरे का पूरा शेड्यूल
• तारीख: 4-5 दिसंबर 2025
•स्थान: नई दिल्ली
• मुख्य एजेंडा: रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी।
•विशेष: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रूसी राष्ट्रपति के सम्मान में एक विशेष राजकीय भोज (State Banquet) की मेजबानी करेंगी।
इस दौरे से क्या उम्मीदें हैं?
इस हाई-प्रोफाइल विजिट के दौरान कई अहम समझौतों पर मुहर लग सकती है। यहाँ मुख्य बिंदु दिए गए हैं:
1. रक्षा क्षेत्र: S-400 और ‘सुखोई’ पर बात
भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए रूस पर काफी हद तक निर्भर है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों नेताओं के बीच S-400 मिसाइल सिस्टम की बची हुई डिलीवरी को जल्द पूरा करने पर चर्चा होगी। इसके अलावा, Sukhoi-57 (Su-57) फाइटर जेट्स के सह-विकास (Co-development) और भारत में ही स्पेयर पार्ट्स के निर्माण पर भी बड़ी डील हो सकती है।
2. ऊर्जा सुरक्षा: सस्ता तेल और परमाणु ऊर्जा
पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद, भारत ने रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखा है। इस मुलाकात में तेल की सप्लाई को दीर्घकालिक (Long-term) बनाने और भुगतान के लिए ‘रुपया-रूबल’ (Rupee-Ruble) मैकेनिज्म को और मजबूत करने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही, तमिलनाडु के कुडनकुलम परमाणु संयंत्र की नई यूनिट्स पर भी चर्चा संभव है।
3. व्यापार: $100 बिलियन का लक्ष्य
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल व्यापार संतुलन रूस के पक्ष में है, इसलिए भारत अपने निर्यात (खासकर कृषि और फार्मा) को बढ़ाने की मांग करेगा।
4. भू-राजनीति (Geopolitics): यूक्रेन युद्ध
यह पुतिन का युद्ध के बाद पहला भारत दौरा है, इसलिए यूक्रेन मुद्दे पर चर्चा अनिवार्य है। पीएम मोदी ने हमेशा “बातचीत और कूटनीति” की वकालत की है। उम्मीद है कि भारत एक बार फिर शांति स्थापना के लिए मध्यस्थता की पेशकश कर सकता है।

दुनिया की नज़र क्यों है?
यह दौरा अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए एक कड़वा घूंट हो सकता है। अमेरिका ने कई बार भारत को रूस से दूरी बनाने की सलाह दी है। लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने राष्ट्रहित (National Interest) को सर्वोपरि रखेगा। यह मुलाकात यह संदेश देगी कि भारत किसी भी गुट का हिस्सा नहीं है, बल्कि वह एक स्वतंत्र ग्लोबल पावर है।
व्लादिमीर पुतिन का यह दौरा भारत-रूस संबंधों के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित होगा। क्या भारत पश्चिमी दबाव को संभालते हुए रूस के साथ अपनी दोस्ती को और गहरा कर पाएगा? यह 5 दिसंबर को होने वाले समझौतों से साफ हो जाएगा।
आपका क्या विचार है? क्या भारत को रूस के साथ अपने संबंध और मजबूत करने चाहिए या पश्चिम की बात माननी चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें!