टू-व्हीलर सवारों की सुरक्षा में बड़ी क्रांति: अब सभी बाइक-स्कूटर के लिए ABS हुआ अनिवार्य, जानिए क्या है सरकार का नया मास्टरप्लान

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सड़कों पर बढ़ते जानलेवा हादसों और असमय होने वाली मौतों के ग्राफ को नीचे लाने के लिए भारत सरकार ने ऑटोमोबाइल सेक्टर में एक युगांतरकारी फैसला लिया है। अब देश में बिकने वाले सभी नए टू-व्हीलर्स के लिए एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) को पूरी तरह अनिवार्य कर दिया गया है, चाहे उनके इंजन की क्षमता कितनी भी क्यों न हो। यह कदम न केवल लाखों लोगों की जान बचाने की क्षमता रखता है, बल्कि भारतीय सड़कों को वैश्विक सुरक्षा मानकों के करीब लाने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

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सड़क सुरक्षा की दिशा में मंत्रालय का कड़ा फैसला

भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है जहाँ सड़क दुर्घटनाओं की दर सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) के हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश में होने वाले कुल सड़क हादसों में लगभग 45 प्रतिशत हिस्सेदारी दोपहिया वाहनों की होती है। इन्ही डरावने आंकड़ों को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने पहले केवल 125cc से ऊपर के वाहनों के लिए ABS अनिवार्य किया था, लेकिन अब इस दायरे को बढ़ाकर सभी श्रेणियों के लिए लागू कर दिया गया है ताकि कम बजट वाली बाइक चलाने वाले लोग भी सड़क पर सुरक्षित रह सकें।

क्या है ABS तकनीक और यह जीवन कैसे बचाती है?

एंटी-लॉक ब्रेकिंग सिस्टम (ABS) को समझने के लिए इसकी कार्यप्रणाली पर गौर करना जरूरी है। यह एक ऐसी आधुनिक सुरक्षा तकनीक है जो अचानक ब्रेक लगाने की स्थिति में पहियों को पूरी तरह ‘लॉक’ या जाम होने से रोकती है। इसमें लगे विशेष सेंसर लगातार पहियों की गति की निगरानी करते हैं और जैसे ही सेंसर को पता चलता है कि पहिया रुकने वाला है, जिससे गाड़ी फिसल सकती है, यह ब्रेक के दबाव को एक सेकंड में कई बार कम और ज्यादा करता है। इससे चालक को पैनिक ब्रेकिंग के दौरान भी वाहन पर नियंत्रण बनाए रखने और उसे सही दिशा में मोड़ने में मदद मिलती है।

125cc से कम इंजन वाली बाइक्स पर प्रभाव

अब तक के नियमों के अनुसार, 125cc से कम इंजन वाले स्कूटर और बाइक में केवल कॉम्बी ब्रेकिंग सिस्टम (CBS) का विकल्प दिया जाता था। CBS की तकनीक में एक ब्रेक दबाने पर दोनों पहियों पर बल तो लगता है, लेकिन यह पहियों को लॉक होकर फिसलने से नहीं बचा पाता था। नए सरकारी नियमों के लागू होने के बाद, एंट्री-लेवल कम्यूटर बाइक्स जैसे कि 100cc और 110cc की श्रेणियों में भी ABS अनिवार्य होने से इनकी सुरक्षा क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी।

सुरक्षा के साथ बढ़ती कीमतों का गणित

हालांकि, इस तकनीकी अपग्रेड का सीधा असर ग्राहकों की जेब पर भी पड़ेगा। ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों का अनुमान है कि एंट्री-लेवल टू-व्हीलर्स में ABS यूनिट लगाने से उनकी कीमत में 5,000 से 10,000 रुपये तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है। वाहन विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन की सुरक्षा के सामने यह बढ़ी हुई कीमत काफी कम है क्योंकि यह तकनीक हादसों के समय होने वाले भारी आर्थिक और शारीरिक नुकसान को काफी हद तक कम कर देती है।

एक्सीडेंट के आंकड़ों में छिपा सुरक्षा का राज

सड़क सुरक्षा पर काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर साल लगभग 1.5 लाख से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाते हैं, जिनमें से 70,000 से अधिक मौतें केवल दोपहिया वाहन चालकों की होती हैं। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि ABS तकनीक के उपयोग से गीली या फिसलन भरी सड़कों पर होने वाले हादसों को 30 से 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है। यह भारत जैसे देश के लिए बहुत जरूरी है जहाँ मानसून के दौरान बारिश और खराब सड़कें दोपहिया चालकों के लिए काल बन जाती हैं।

वाहन निर्माताओं और बाजार के लिए नई चुनौतियां

इस नए बदलाव से वाहन निर्माताओं के सामने भी कई बड़ी चुनौतियां खड़ी होने वाली हैं। अब कंपनियों को अपने पुराने प्रोडक्शन लाइनअप में बड़े तकनीकी बदलाव करने होंगे क्योंकि ABS सिस्टम मुख्य रूप से डिस्क ब्रेक के साथ सबसे बेहतर और सटीक काम करता है। ऐसे में कंपनियों को ड्रम ब्रेक वाले मॉडल धीरे-धीरे बंद करने पड़ सकते हैं और पूरी सप्लाई चेन को नए सिरे से व्यवस्थित करना होगा। साथ ही, छोटे इंजनों के साथ ABS तकनीक को इंटीग्रेट करने के लिए बाइक के चेसिस और इलेक्ट्रिकल सिस्टम में भी मामूली इंजीनियरिंग बदलाव की आवश्यकता होगी।

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आम जनता और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया

जहाँ तक आम जनता और विशेषज्ञों की राय का सवाल है, ऑटोमोबाइल सेक्टर ने इस फैसले को ‘देर आए दुरुस्त आए’ जैसा बताया है। विशेषज्ञों का तर्क है कि विकसित देशों में ABS दशकों से अनिवार्य है, जिसके कारण वहां सड़क मृत्यु दर भारत के मुकाबले काफी कम है। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बढ़ती कीमतें निश्चित रूप से एक चिंता का विषय हैं, लेकिन धीरे-धीरे लोग सुरक्षा को अन्य फीचर्स से ऊपर रखने लगे हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नियम केवल नए बिकने वाले वाहनों पर लागू होगा, जिससे पुराने वाहनों के मालिकों को कोई कानूनी परेशानी नहीं होगी।

क्या आप अपनी अगली बाइक खरीदने के लिए सुरक्षा फीचर्स की वजह से ₹10,000 अतिरिक्त खर्च करना पसंद करेंगे? अपनी राय हमें जरूर बताएं।

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