Rs 50 Voice Machine : कैसे बदली एक डॉक्टर ने अकेले हजारों आवाजों की तकदीर?

Voice Machine

जब डॉ. विशाल राव ने बैंगलोर के HCG Cancer Centre में गर्दन-गले (Head & Neck) के कैंसर के मरीजों का इलाज शुरू किया, तो उन्हें एक दर्दनाक सच का सामना करना पड़ा। जिन मरीजों का लैरिंक्स (Voice Machine) कैंसर के चलते निकाल दिया गया था, वे बोल नहीं पा रहे थे — उनकी आवाज़ खो गई थी।

उन्होंने कहा : “Speech is not a privilege but a right.”

उपलब्ध आवाज़-प्रोस्थेसिस आज भी भारत और विदेश में ₹15,000-₹35,000 तक की कीमतों में बिकती थीं, जिसके चलते तमाम गरीब मरीज सिर्फ चुप्पी का विकल्प चुनते थे।

समाधान: “Aum Voice Prosthesis” का इजाद

डॉ. राव ने अपने मित्र और सिलिकॉन विशेषज्ञ शशांक महेश के साथ मिलकर इस समस्या का हल खोजा। उन्होंने 2013-15 के बीच काम किया और विकसित किया Aum Voice Prosthesis — एक प्लैटिनम-सिलिकॉन वाल्व जो फूड-पाइप और एयर-पाइप के बीच एक छोटा मार्ग बनाता है।

इस प्रकार हवा फेफड़ों से फूड-पाइप की ओर जाती है → वहाँ कम्पन पैदा होती है → आवाज़ बनती है।

Voice Machine

एक-तरफ़ा वाल्व डिज़ाइन है जो खाना/पीना फेफड़ों में जाने से रोके। और सबसे बड़ी बात: कीमत मात्र ₹50 (लगभग US $1) — जो पहले की तुलना में लगभग 1/300वीं थी।

कितने लोगों की बदली लाइफ

वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी ऑर्गनाइजेशन (WIPO) की एक इंटरव्यू में बताया गया कि इस डिवाइस ने 1,700 से अधिक मरीजों को आवाज़ लौटाई है और 10 देशों में पहुंच चुकी है।

बंगालुरु के तमाम थ्रॉट-कैंसर विभागों में अब यह विकल्प देना शुरू हो गया है, जहाँ मरीज एक दिन में बोलना और खाना शुरू कर सकते हैं।

चुनौतियाँ और आगे की राह

हालाँकि यह इनोवेशन बेहद प्रेरक है, लेकिन कुछ सवाल अभी भी खड़े हैं:

  • क्या यह डिवाइस सभी कैंसर-सेंटरों तक पहुँच पाएगा, खासकर ग्रामीण और दूरदराज़ इलाकों में?
  • क्या सरकार इसे राशन-स्कीम / हेल्थ-इन्श्योरेंस के तहत सब्सिडी देगी, ताकि गरीब मरीज निशुल्क इसे प्राप्त कर सकें?
  • तकनीकी रूप से, “एक साइज़-फिट-सभी” मॉडल को कैसे स्वीकार्यता मिलेगी और लंबी अवधि में कैसे टिकेगा?

आवज़ की आज़ादी अब संभव

डॉ. विशाल राव का यह कदम यह साबित करता है कि टेक्नोलॉजी + मानवीय दृष्टि मिलकर ऐसे बदलाव ला सकती है जो कभी असंभव दिखते थे। Aum Voice Prosthesis सिर्फ एक मेडिकल डिवाइस नहीं — यह गुम-आवाज़ों की वापसी, मानव गरिमा का सम्मान और क्वालिटी के साथ सस्ते समाधान का प्रतीक है। अगर अब हर मरीज को बोलने का अधिकार मिले, तो यह एक छोटा उपकरण नहीं बल्कि बड़ी क्रांति बन जाएगा।

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