केंद्र सरकार पान मसाला और गुटखा उद्योग पर कड़ी पकड़ लगाने जा रही है। इसके लिए जल्द ही संसद की आगामी शीतकालीन सत्र में “Health Security to National Security Cess Bill 2025” पेश किया जाएगा। इस विधेयक का उद्देश्य सिर्फ उत्पादन या बिक्री पर नहीं, बल्कि उद्योग की प्रक्रिया और machinery तक नियंत्रण स्थापित करना है।
बिल की खास बातें — Machinery-level Cess, मासिक रजिस्ट्री, कड़ी सज़ा
इस कानून के तहत, गुटखा/पान मसाला मशीनों की उत्पादन क्षमता के आधार पर एक विशेष सेस (कर) लगाया जाएगा — मात्रा नहीं, मशीन की क्षमता पर टैक्स।चाहे पैकेज्ड प्रोडक्ट मशीन से बने हों या हस्तनिर्मित, हर निर्माता को मासिक रूप से सेस जमा करना और सरकार को उत्पादन प्रक्रिया की जानकारी देनी होगी।बिना पंजीकरण या नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और भारी जुर्माना।सरकार को अधिकार होगा कि जरूरत पड़ने पर सेस की दर दोगुनी कर दे।

क्यों ज़रूरी है यह — From Health Hazard to National Alarm
पान मसाला और गुटखा लंबे समय से स्वास्थ्य संकट बने हुए हैं—मुँह, जीभ, गले के कैंसर, दाँतों की बिमारियां और अन्य रोगों का सिलसिला। सरकार का यह कदम सिर्फ दुकान और निर्माता तक सीमित नहीं है बल्की यह स्वास्थ्य सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला है। Industry को transparent बनाने से टैक्स चोरी रुकेगी, अवैध उत्पादन/बिक्री घटेगी, स्वास्थ्य सेवा व जागरूकता के लिए संसाधन मिलेंगे।
उद्योग और जनता पर असर — नियम, Compliance और बदलाव की ज़रूरत
बड़े उद्योगों से लेकर छोटे थोक विक्रेता तक — सभी को मशीनरी, प्रक्रिया, रिकॉर्ड और नियमित रिपोर्टिंग की तैयारी करनी होगी। अनियमितता या गैर-पंजीकृत उत्पादन अब गैरकानूनी माना जाएगा। जो कंपनियाँ सरकार के नियमों के हिसाब से चलती हैं, अगर वे सारे नियम ठीक से मानने लगें और अपना सारा काम साफ़-साफ़ लोगों को दिखाने लगें, तो लोगों का उन पर विश्वास बहुत बढ़ जाएगा।
मगर इसके लिए, चीज़ें बनाने वाली कंपनियों को शुरुआत में थोड़ी परेशानी उठानी पड़ेगी और अपने काम के तरीकों को बदलना पड़ेगा।”

कानूनी अधिकार और Appeal — न्यायालय तक पहुँचने का अधिकार
बिल में यह प्रावधान भी है कि अगर कोई निर्माता इस कानून को लेकर असंतुष्ट है, तो वह हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट तक अपील कर सकता है। इससे small producers, SMEs, और स्थानीय दुकानदारों को न्याय का अवसर मिलेगा।
क्या बदलेगा उद्योग और समाज ?
बिल पास होने के बाद, केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर इसे लागू करेंगी। उत्पादन, वितरण, बिक्री और उपयोग, हर स्तर पर नियम बनाना ज़रूरी होगी। यह कदम स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण, और राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से—एक बड़ा बदलाव ला सकता है।
अगर बिल को सही से लागू किया गया, तो गुटखा/पान मसाले जैसी खतरनाक उद्योगों पर न सिर्फ पाबंदी, बल्कि रिसर्च, रिहैबिलिटेशन और जागरूकता भी बढ़ेगी।
यह बिल सिर्फ गुटखा उद्योग को नहीं—एक स्वस्थ, जागरूक और ज़िम्मेदार समाज बनाने का प्रयास है। स्वास्थ्य सुरक्षा, सामाजिक न्याय और आर्थिक पारदर्शिता की दिशा में यह सरकार का एक बहुत बड़ा कदम हो सकता है।