Boycott Trend: Ind vs Pak मैच से लेकर बॉलीवुड तक! ‘बॉयकॉट’ के नाम पर जनता का दोगलापन (2 सबसे बड़ी मिसालें)

Boycott Trend

कल (15 फरवरी 2026) श्रीलंका के कोलंबो में ICC T20 World Cup 2026 का महामुकाबला खेला गया। भारत ने पाकिस्तान को 61 रनों से बुरी तरह रौंद दिया। पूरा देश जश्न मना रहा है, पटाखे फूट रहे हैं। एक खेल प्रेमी के नाते यह खुशी लाजमी है।

लेकिन आज मुझे उन ‘तथाकथित देशभक्तों’ से एक सवाल पूछना है, जो मैच से एक हफ्ते पहले तक सोशल मीडिया पर #BoycottIndVsPak ट्रेंड चला रहे थे। वो लोग जो छाती पीट-पीटकर कह रहे थे कि “सीमा पर जवान मर रहे हैं और हम उनके साथ क्रिकेट खेलेंगे? हम यह मैच नहीं देखेंगे!”

आज वही लोग टीवी स्क्रीन से चिपके बैठे थे। स्टेडियम खचाखच भरे थे। आखिर हमारा यह दोगलापन (Hypocrisy) कब तक चलेगा? आज हम क्रिकेट और बॉलीवुड के नाम पर चलने वाली इसी ‘भेड़चाल’ का कड़वा सच उजागर करेंगे।

Boycott Trend India Vs Pakistan

पहले बात मैच की: ईशान किशन के तूफान में उड़ा पाकिस्तान

मुद्दे पर आने से पहले कल के मैच का छोटा सा हाल जान लीजिए:

कोलंबो के आर. प्रेमदासा स्टेडियम में भारत ने पहले खेलते हुए 175/7 का मजबूत स्कोर बनाया। ईशान किशन ने मात्र 40 गेंदों में 77 रनों की तूफानी पारी खेली और ‘मैन ऑफ द मैच’ बने। जवाब में पाकिस्तान की पूरी टीम ताश के पत्तों की तरह ढह गई और 18 ओवर में मात्र 114 रनों पर ऑलआउट हो गई। भारत ने यह मैच 61 रनों के बड़े अंतर से जीत लिया और सुपर-8 में जगह पक्की कर ली। मैच शानदार था। लेकिन इसके पीछे जो हमारे समाज का ‘दिखावा’ है, वह बेहद शर्मनाक है।

Boycott Protest

‘बॉयकॉट’ का ढोंग: कल तक विरोध, आज ‘जय-जयकार’

जब भी भारत-पाकिस्तान का मैच होता है, तो सोशल मीडिया पर एक अलग ही देशभक्ति जाग जाती है। लोग व्हाट्सएप पर लंबे-लंबे मैसेज फॉरवर्ड करते हैं कि पाकिस्तान आतंकवाद फैलाता है, इसलिए हमें उनके साथ कोई खेल नहीं खेलना चाहिए। टीवी चैनलों पर डिबेट होती है।लेकिन जैसे ही मैच का दिन आता है, वही नेता जो बैन की मांग कर रहे होते हैं, वो VIP बॉक्स में बैठकर मैच देखते हैं। वही आम जनता जो कल तक बॉयकॉट चिल्ला रही थी, वो पिज्जा और पॉपकॉर्न लेकर मैच की हर बॉल पर तालियां पीटती है।

अगर आप सच में विरोध कर रहे थे, तो कल स्टेडियम में इतनी भारी भीड़ कहां से आई? अगर आपकी रगों में इतना ही उबाल था, तो आपने टीवी बंद क्यों नहीं किया? सच्चाई यह है कि हमें सिर्फ ‘ट्रेंड’ में शामिल होना आता है, उस पर टिके रहना नहीं।

Sushant singh Rajput

सुशांत सिंह राजपूत और ‘बॉयकॉट बॉलीवुड’ का ड्रामा

क्रिकेट से हटकर थोड़ा बॉलीवुड (Bollywood) की तरफ देखिए। यही भेड़चाल हमने वहां भी देखी है। जब सुशांत सिंह राजपूत (SSR) का दुखद निधन हुआ, तो पूरे देश में ‘बॉयकॉट बॉलीवुड’, ‘नेपोटिज्म खत्म करो’ का ऐसा तूफान आया जैसे लोग अब कभी सिनेमाघर का मुंह नहीं देखेंगे। लोगों ने कसम खा ली थी कि वो स्टार-किड्स की फिल्में नहीं देखेंगे।

लेकिन आज क्या हो रहा है? वही बॉलीवुड आज फिर से हजारों करोड़ (1000+ Crores) की कमाई कर रहा है। किसी बड़े सुपरस्टार की फिल्म आती है, तो वही लोग सुबह 6 बजे का शो देखने के लिए लाइन में धक्के खाते हैं। सुशांत सिंह राजपूत को न्याय मिला या नहीं, यह बात अब उन ‘सोशल मीडिया के शेरों’ को याद भी नहीं है। उन्होंने अपना गुस्सा निकाला, लाइक्स बटोरे और फिर से उन्हीं एक्टर्स की फिल्मों पर सीटी मारने पहुंच गए।

खुद को बेवकूफ बनाना बंद करें

हम भारतीयों को यह बात मान लेनी चाहिए कि हम ‘मनोरंजन’ (Entertainment) के बिना नहीं रह सकते। चाहे वो भारत-पाकिस्तान की क्रिकेट राइवलरी हो या बॉलीवुड की कोई मसाला फिल्म।

गलती मैच देखने या फिल्म देखने में नहीं है। गलती उस ‘फर्जी गुस्से’ में है जो हम सोशल मीडिया पर दिखाते हैं। अगर विरोध करना है, तो रीढ़ की हड्डी सीधी रखकर जीवन भर उस विरोध पर टिके रहिए। और अगर नहीं टिक सकते, तो कम से कम देशभक्ति और शहीदों के नाम का इस्तेमाल करके सोशल मीडिया पर लाइक्स और अटेंशन बटोरना बंद कर दीजिए।

आपकी राय: क्या आपको भी लगता है कि ‘बॉयकॉट’ के नाम पर भारत की जनता सिर्फ एक छलावा और भेड़चाल का शिकार है? कमेंट बॉक्स में अपनी बेबाक राय जरूर दें!

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