जब भारतीय क्रिकेट टीम का कोई खिलाड़ी एक छक्का भी मारता है, तो पूरा सोशल मीडिया ‘वाह-वाह’ करने लगता है। लेकिन क्या आपको पता है कि अभी-अभी चीन (China) में भारत के एक बेटे ने ऐसा कारनामा किया है, जिसके लिए उसे पलकों पर बिठा लेना चाहिए था?
जी हाँ, हम बात कर रहे हैं तेजस्विन शंकर (Tejaswin Shankar) की। हाल ही में संपन्न हुए Asian Indoor Athletics Championships 2026 में तेजस्विन ने गोल्ड मेडल (Gold Medal) जीतकर इतिहास रच दिया है।
लेकिन अफ़सोस, इस खबर पर न तो कोई ट्रेंड चल रहा है और न ही आतिशबाजियां हो रही हैं। आज के ब्लॉग में हम न सिर्फ इस जीत का जश्न मनाएंगे, बल्कि उस कड़वे सच का सामना भी करेंगे कि आखिर बाकी खेलों में हमारा ‘गोल्ड’ का सूखा खत्म क्यों नहीं हो रहा?
चीन में तेजस्विन का ‘गोल्डन’ रिकॉर्ड
चीन के तियानजिन (Tianjin) शहर में आयोजित इस चैंपियनशिप में भारत का प्रदर्शन मिला-जुला रहा, लेकिन तेजस्विन शंकर ने सबका सिर गर्व से ऊंचा कर दिया।
- इवेंट: हेप्टाथलान (Heptathlon) – यह 7 अलग-अलग खेलों का एक मुश्किल कॉम्बो होता है।
- कारनामा: तेजस्विन ने कुल 5993 पॉइंट्स हासिल किए और गोल्ड मेडल अपने नाम किया।
- रिकॉर्ड: उन्होंने 2021 में बनाया अपना ही नेशनल रिकॉर्ड (5650 पॉइंट्स) तोड़ दिया। यही नहीं, उन्होंने 2012 का बना चैंपियनशिप रिकॉर्ड भी ध्वस्त कर दिया।
सोचिए, एक खिलाड़ी अपना ही रिकॉर्ड तोड़ रहा है, नया इतिहास लिख रहा है, लेकिन देश में चर्चा सिर्फ आईपीएल ऑक्शन या टी20 सीरीज की होती है।

5 मेडल आए, लेकिन ‘सोना’ सिर्फ एक!
तेजस्विन की जीत जितनी शानदार है, भारत का कुल प्रदर्शन उतना ही चिंताजनक भी है। इस पूरे टूर्नामेंट में भारत को सिर्फ 1 गोल्ड मेडल मिला, वो भी तेजस्विन की बदौलत। जरा इस लिस्ट पर नजर डालें कि बाकी मेडल किसके हिस्से आए:
- सिल्वर: तजिंदरपाल सिंह तूर (Shot Put) और पूजा (High Jump)।
- ब्रॉन्ज: अंसी सोजन (Long Jump) और आदर्श राम (High Jump)।
- कुल मेडल: 5
वहीं दूसरी तरफ, चीन (China) ने 10 गोल्ड के साथ कुल 34 मेडल जीते। क्या 140 करोड़ के देश के लिए सिर्फ 1 गोल्ड काफी है?
क्रिकेट का नशा या खेलों की हत्या?
यह सवाल चुभता जरूर है, लेकिन पूछना जरूरी है। जब हम ओलंपिक्स या एशियन गेम्स में मेडल नहीं जीत पाते, तो हम सिस्टम को कोसते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि हमारा ‘सपोर्ट सिस्टम’ सिर्फ क्रिकेट के इर्द-गिर्द घूमता है।
- स्पॉन्सरशिप: क्रिकेटर्स के जूतों से लेकर बल्ले तक पर करोड़ों के विज्ञापन होते हैं, जबकि एथलेटिक्स वालों को ढंग के जूते (Spikes) के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है।
- मीडिया: टीवी पर डिबेट इस बात पर होती है कि कोहली ने कैच छोड़ा या नहीं, लेकिन इस बात पर नहीं कि हमारे एथलीट्स को इंडोर स्टेडियम क्यों नहीं मिल रहे?
तेजस्विन शंकर जैसे एथलीट अपनी मेहनत और जुनून के दम पर मेडल लाते हैं, सिस्टम के दम पर नहीं। जब तक हम बाकी खेलों को ‘सौतेला’ समझना बंद नहीं करेंगे, मेडल टैली में हम हमेशा नीचे ही मिलेंगे।

“मैं सबसे दुखी इंसान हूँ”—जीतकर भी क्यों रोये तेजस्विन?
गोल्ड जीतने के बाद जहां जश्न होना चाहिए था, वहां तेजस्विन ने एक दिल तोड़ने वाली बात कही। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा:
“मैंने गोल्ड जीता, रिकॉर्ड तोड़ा… लेकिन मैं आज सबसे दुखी इंसान हूँ। 2 दिन की कड़ी मेहनत और सिर्फ 7 पॉइंट्स कम रह गए।”
दरअसल, वो 6000 पॉइंट्स का जादुई आंकड़ा छूना चाहते थे, जिससे वो सिर्फ 7 पॉइंट्स से चूक गए। यह है एक असली खिलाड़ी का जज्बा! गोल्ड मिल गया, लेकिन खुद से संतुष्टि नहीं मिली। क्या हमारे युवा क्रिकेटर्स में आज यह भूख बची है?
ApniVani का निष्कर्ष (Our Verdict)
तेजस्विन शंकर की यह जीत भारत के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ (Wake-up Call) है। हमें समझना होगा कि खेल सिर्फ क्रिकेट नहीं है। अगर हम चाहते हैं कि अगली बार मेडल टैली में 1 नहीं, 10 गोल्ड हों, तो हमें तेजस्विन, पूजा और तजिंदरपाल जैसे खिलाड़ियों का भी उतना ही नाम लेना होगा जितना हम रोहित या गिल का लेते हैं। आओ मिलकर इस गोल्ड का जश्न मनाएं, ताकि अगली बार कोई एथलीट यह न सोचे कि वो ‘अकेला’ खेल रहा है।
आपकी राय: क्या आपको लगता है कि भारत में क्रिकेट के कारण बाकी खेल दब गए हैं? कमेंट में अपनी बेबाक राय जरूर लिखें। 🇮🇳🥇