बलरामपुर में 11 करोड़ का खुलासा — 44 लोगों पर FIR, हिल गया सिस्टम यूपी के बलरामपुर ज़िले में मिड डे मील योजना में करीब 11 करोड़ रुपये के बड़े घोटाले का परदाफाश हुआ है। मिड डे मील चलाने वाले के साथ-साथ 44 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। ऐसा बताया जा रहा है कि यह घोटाला 2021 से 2025 के बीच स्कूलों और मदरसों के बच्चों के नाम पर फर्जी भुगतान, बढ़ी हुई छात्र संख्या और नकली उपभोग विवरण के जरिए हो रहा है।
कैसे सामने आया घोटाला? — शिकायत ने खोला पूरा खेल
कुछ प्राथमिक विद्यालयों ने BSA कार्यालय को शिकायत भेजी कि उन्हें कन्वर्ज़न कास्ट की राशि कम मिल रही है। इस पर PFMS पोर्टल की एंट्रियों की जांच शुरू हुई—और वहीं से सामने आया कि करोड़ों रुपये बिना असली भोजन कराए, फर्जी उपभोग रिपोर्ट लगाकर निकाल लिए गए।
जांच में यह भी पाया गया कि बच्चों की संख्या बढ़ाकर दिखाना, मदरसों के नाम पर फर्जी बिल, स्कूलों से सांठगांठ कर पेमेंट निकालना, बिना भोजन परोसे पैसे जारी करना घोटाले का मुख्य तरीका था।
- मास्टरमाइंड कौन? 44 नाम, संख्या 100 पार होने की आशंका
- FIR में जिला समन्वयक फिरोज अहमद खान सहित 44 लोगों को नामजद किया गया है।

इनमें शामिल हैं:
– कई मदरसों के प्रबंधक
– परिषदीय विद्यालयों से जुड़े लोग
– कुछ आउटसोर्सिंग सप्लायर
– और भुगतान प्रक्रिया में शामिल सहयोगी
सूत्रों का दावा है—बिना अन्य अधिकारियों की मिलीभगत के इतने बड़े स्तर पर हेराफेरी संभव नहीं, इसलिए जांच आगे बढ़ने पर आरोपी 100 से अधिक हो सकते हैं।
पुलिस की कार्रवाई — रातभर छापेमारी, कई हिरासत में
- SP बलरामपुर ने एक विशेष टीम बनाकर रात में कई स्थानों पर छापेमारी की।
- कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है।
- शिक्षा विभाग भी समानांतर जांच कर रहा है और विभागीय कार्रवाई की तैयारी में है।
बच्चों के अधिकार पर हमला — मिड डे मील योजना पर उठे सवाल
मिड डे मील योजना का उद्देश्य बच्चों को पौष्टिक भोजन देकर स्कूल में नामांकन, उपस्थिति और स्वास्थ्य बढ़ाना है। लेकिन बलरामपुर घोटाला दिखाता है कि मॉनिटरिंग और फील्ड वेरिफिकेशन की व्यवस्था में बहुत कमियां हैं, जिनका फायदा उठाकर भ्रष्ट लोगों ने बच्चों के हक का भोजन तक लूट लिया। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय पर जांच न होती, तो रकम और भी बड़ी हो सकती थी।
