YouTuber सौरव जोशी Wedding With अवंतिका भट्ट: Full Details, Photos & amp; Viral Controversy और शादी की 5 बातें

Sourav Joshi

आखिरकार वह पल आ ही गया जिसका देश के करोड़ों फैंस बेसब्री से इंतजार कर रहे थे! भारत के नंबर 1 व्लॉगर सौरव जोशी (Sourav Joshi) ने अपनी लेडीलव अवंतिका भट्ट (Avantika Bhatt) के साथ सात फेरे ले लिए हैं।सोशल मीडिया पर जहां एक तरफ सौरव की ड्रीम वेडिंग की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी शादी से जुड़ी कुछ ऐसी बातें भी सामने आई हैं जिन्होंने सबको चौंका दिया है। अगर आप भी जानना चाहते हैं कि आखिर “मोहित” कौन है, सौरव और अवंतिका की शादी में कौन-कौन शामिल हुआ, तो यह ब्लॉग अंत तक जरूर पढ़ें।

गुपचुप शादी: कब और कहां हुई रस्में?

अक्सर अपनी हर छोटी-बड़ी बात व्लॉग में बताने वाले सौरव जोशी ने अपनी शादी को बेहद निजी (Private) रखा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह शादी 26 नवंबर 2025 को ही संपन्न हो गई थी, लेकिन इसकी आधिकारिक तस्वीरें सौरव ने 6 दिसंबर को सोशल मीडिया पर शेयर कीं।शादी का वेन्यू किसी बड़े शहर का 5-स्टार होटल नहीं, बल्कि देवभूमि उत्तराखंड के ऋषिकेश का एक शांत और सुंदर रिसॉर्ट था। तपोवन क्षेत्र में गंगा किनारे हुई इस शादी के लिए सौरव ने कैप्शन भी दिया— “पवित्र बंधन गंगा किनारे।”

सौरव जोशी

दूल्हा-दुल्हन का लुक और वह ‘रहस्यमयी’ दुपट्टा

शादी की तस्वीरों में सौरव और अवंतिका किसी शाही जोड़े से कम नहीं लग रहे थे।

सौरव का लुक: उन्होंने एक क्लासिक बेज (Beige) रंग की शेरवानी पहनी थी, जो बेहद सोबर और एलिगेंट लग रही थी।

अवंतिका का लुक: अवंतिका ने गुलाबी (Pink) रंग का लहंगा पहना था, जिसके साथ उन्होंने एक बड़ी नथ और पारंपरिक ज्वैलरी कैरी की थी।

सबसे बड़ा सस्पेंस (Viral Mystery):अवंतिका के दुपट्टे (Veil) ने इंटरनेट पर तहलका मचा दिया है। उनके दुपट्टे पर अंग्रेजी में कढ़ाई की गई थी— “I found my forever Mohit”। फैंस अब कन्फ्यूज हैं कि आखिर यह ‘मोहित’ कौन है? क्या यह सौरव का असली नाम है या कोई निकनेम? फिलहाल इस राज ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है।

ठेठ पहाड़ी अंदाज और रस्में

सौरव जोशी अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए जाने जाते हैं और उनकी शादी में भी यही देखने को मिला। यह शादी पूरी तरह से कुमाऊंनी और पहाड़ी रीति-रिवाजों से हुई।हल्दी की रस्म में सौरव की मां पारंपरिक ‘पिछौड़ा’ (उत्तराखंड का पारंपरिक परिधान) पहने नजर आईं। ढोल-दमाऊ की गूंज और लोकगीतों के बीच ‘सप्तपदी’ (सात फेरे) की रस्म अदा की गई। फैशन के नाम पर पश्चिमी सभ्यता को अपनाने के बजाय, इस जोड़े ने अपनी संस्कृति को चुनकर फैंस का दिल जीत लिया है।

सौरव जोशी

वीआईपी मेहमान और 37 मिलियन का परिवार

यह शादी भले ही ‘सीक्रेट’ थी, लेकिन मेहमानों की लिस्ट खास थी। खबरों के मुताबिक, शादी में दोनों परिवारों के बेहद करीबी लोग ही शामिल हुए थे।लड़की वालों की तरफ से लगभग 5 लोग और लड़के वालों की तरफ से करीब 10-15 लोग मौजूद थे।हालांकि, रिसेप्शन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) ने शिरकत कर नवविवाहित जोड़े को आशीर्वाद दिया। उनकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही हैं।

खुशियों के बीच विवाद का साया (Controversy)

सौरव जोशी

जैसे ही सौरव ने अवंतिका का चेहरा दुनिया के सामने रिवील किया, एक विवाद भी खड़ा हो गया। एक कंटेंट क्रिएटर, अनीषा मिश्रा, ने अवंतिका पर बुलिंग (Bullying) के गंभीर आरोप लगाए हैं।अनीषा का दावा है कि स्कूल के दिनों में अवंतिका ने उन्हें उनके लुक्स को लेकर काफी परेशान किया था। हालांकि, सौरव या अवंतिका की तरफ से इस पर कोई सफाई नहीं आई है। फैंस का मानना है कि शादी के शुभ मौके पर इन पुरानी बातों को तूल देना सही नहीं है।विवादों से परे, सौरव जोशी और अवंतिका भट्ट की यह नई शुरुआत बेहद खूबसूरत है।

एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवार से निकलकर देश के सबसे बड़े यूट्यूबर बनने और फिर अपने प्यार को जीवनसाथी बनाने का सौरव का सफर प्रेरणादायक है।हम इस नई जोड़ी को ढेर सारी शुभकामनाएं देते हैं! ❤️

आपका क्या कहना है?क्या आपको भी अवंतिका के दुपट्टे पर लिखे नाम ने कंफ्यूज किया? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं!

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Uttarakhand’s 25-Year Miracle: ‘Devbhoomi’ की स्थापित यात्रा, प्रकृति से प्रगति तक

Devbhoomi

उत्तराखंड स्थापना दिवस की पृष्ठभूमि 9 नवंबर 2000 को भारत के उत्तर-प्रदेश से अलग होकर 27वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया उत्तराखंड — जिसे बाद में Devbhoomi कहा जाने लगा। आज वही राज्य हर 9 नवंबर को अपने स्थापना दिवस पर गर्व की नई परतें गढ़ता है।

देवभूमि-की पहचान: आस्था, प्रकृति, संस्कृति

उत्तराखंड को इसलिए “Devbhoomi” कहा जाता है क्योंकि यहाँ चारधाम – बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री – जैसे पवित्र तीर्थ मौजूद हैं। साथ ही नैनीताल, मसूरी, जिम कॉर्बेट जैसे प्राकृतिक स्थलों ने इसे देश-विदेश में प्रसिद्धि दी।

सांस्कृतिक विविधता और लोकजीवन

Devbhoomi

गढ़वाली, कुमाऊँनी बोलीभाषा, छोलिया-झोड़ा जैसे लोकनृत्य और पारंपरिक व्यंजन जैसे भट्ट-की चुरकनी-फाणू—ये सब उत्तराखंड की लोक-संस्कृति को जीवंत बनाते हैं। स्थापना दिवस पर स्कूल-कॉलेज-गांवों में मेले, रैलियाँ और लोकगान-भजन का रंग छा जाता है।

विकास-और-प्रकृति: संतुलन की चुनौती

उत्तराखंड न सिर्फ धार्मिक और प्राकृतिक धरोहर है, बल्कि भारत के लिए जलवायु-सुरक्षा की दिशा में अहम भूमिका निभाता है—यहाँ से निकलती गंगा-यमुनाओं की धार ने करोड़ों जीवन को पोषण दिया। उसी समय पर्यटन, जल-विद्युत, हर्बल उत्पादन जैसे क्षेत्र विकास की राह पर हैं। लेकिन हिमालय की नाजुक स्थिति और पलायन-चुनौतियों ने ये सवाल उठाया है कि विकास कितनी टिकाऊ है?

भविष्य-के लिए संकल्प

उत्तराखंड सिर्फ एक राज्य नहीं—यह आस्था, प्रकृति, संघर्ष और नवाचार का संगम है। 9 नवंबर को हम सिर्फ स्थापना दिवस नहीं मनाते, बल्कि यह संकल्प लेते हैं कि “हमारी संस्कृति, हमारा पर्यावरण और हमारी आधुनिकता साथ चलेंगी”। नए दशक में उत्तराखंड का उद्देश्य है—नयी ऊँचाइयाँ, लेकिन जड़ों से बँधी हुई।

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