पहली बार मिला डार्क मैटर का सुराग, ब्रह्मांड के सबसे बड़े रहस्य की झलक | पूरी खबर जानिए  

डार्क मैटर

विज्ञान की दुनिया से आई एक बड़ी खबर ने पूरी दुनिया के वैज्ञानिक समुदाय को उत्साहित कर दिया है। दशकों से खोजे जा रहे डार्क मैटर (Dark Matter) के बारे में पहली बार ऐसे संकेत मिले हैं, जो संभवतः इसके वास्तविक अस्तित्व की दिशा में सबसे बड़ा कदम साबित हो सकते हैं।

अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों की एक टीम ने दावा किया है कि भूमिगत प्रयोगशालाओं में किए गए शोध में उन्हें कुछ ऐसे अजीब संकेत मिले हैं, जिन्हें सामान्य वैज्ञानिक कारणों से समझाना बहुत मुश्किल है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संकेत डार्क मैटर कणों की टक्कर या विघटन से जुड़ा हो सकता है। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो यह आधुनिक विज्ञान के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण खोजों में से एक होगी।

डार्क मैटर

डार्क मैटर क्या है?

डार्क मैटर ब्रह्मांड का वह रहस्यमय पदार्थ है जिसे हम देख नहीं सकते। यह न प्रकाश छोड़ता है, न उसे रोकता है, न प्रतिबिंबित करता है। इसलिए इसे अदृश्य पदार्थ भी कहा जाता है।

वैज्ञानिक इसका पता इसके गुरुत्वाकर्षण प्रभाव से लगाते हैं, क्योंकि यह आकाशगंगाओं, तारों और ग्रहों की चाल को प्रभावित करता है। माना जाता है कि पूरे ब्रह्मांड का लगभग 85 प्रतिशत पदार्थ डार्क मैटर से बना है। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह WIMP (Weakly Interacting Massive Particles) नामक कणों से बना हो सकता है, जो सामान्य पदार्थ से बहुत कमजोर रूप से संपर्क करते हैं। इसी वजह से इनका पता लगाना बेहद कठिन है।

प्रयोग कैसे किया गया?

यह प्रयोग पृथ्वी की सतह से सैकड़ों मीटर नीचे स्थित विशेष भूमिगत प्रयोगशालाओं में किया गया, ताकि कॉस्मिक किरणों और रेडिएशन जैसे बाहरी स्रोतों का प्रभाव खत्म किया जा सके।

इन प्रयोगों में बड़े टैंकों में तरल ज़ेनॉन (Liquid Xenon) रखा जाता है। वैज्ञानिक लगातार इस बात की निगरानी करते हैं कि कहीं कोई बहुत छोटा प्रकाश संकेत या आयनीकरण तो नजर नहीं आता, जो डार्क मैटर के किसी कण की टक्कर से उत्पन्न हो सकता है।

हाल ही में प्राप्त डेटा में कुछ ऐसे संकेत मिले हैं जो सामान्य रेडिएशन या अन्य ज्ञात स्रोतों से नहीं समझाए जा सकते। इन संकेतों की ऊर्जा और पैटर्न WIMP मॉडल से मेल खाते हैं, जो इसे और महत्वपूर्ण बनाता है।

डार्क मैटर

क्या यह वास्तव में डार्क मैटर की खोज है?

वैज्ञानिकों ने कहा है कि डेटा में मिली घटनाएं सांख्यिक रूप से काफी मजबूत हैं, यानी यह साधारण संयोग नहीं लगतीं। लेकिन वे अभी सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं क्योंकि अंतिम पुष्टि तभी होगी जब:

•अन्य वैज्ञानिक समूह भी इसी तरह के परिणाम प्राप्त करें

•आंकड़ों की गहराई से जांच हो

•अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समीक्षा (Peer Review) पूरी हो

यह खोज इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?

•अगर यह संकेत सत्य सिद्ध होते हैं, तो यह खोज पूरी विज्ञान दुनिया की दिशा बदल देगी।

•यह साबित कर देगी कि डार्क मैटर वास्तव में मौजूद है

•स्टैंडर्ड मॉडल ऑफ पार्टिकल फिजिक्स से आगे का रास्ता खुलेगा

•आकाशगंगाओं की संरचना और ब्रह्मांड के निर्माण को समझना आसान होगा

•यह नोबेल पुरस्कार स्तर की खोज मानी जा सकती है

आगे क्या होगा?

अभी दुनिया भर के वैज्ञानिक इस डेटा की जांच कर रहे हैं। आने वाले महीनों में और परिणाम सामने आएंगे। अगर यह डेटा स्वतंत्र प्रयोगों में दोहराया गया, तो मानवता पहली बार डार्क मैटर की वास्तविक पहचान के बहुत करीब पहुंच जाएगी।

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