इंजीनियरिंग कैंपस से सीधे पंचायत की कुर्सी—22 की उम्र में इतिहास रच दिया उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल के कुई गांव में पंचायत चुनाव ने इस बार ऐतिहासिक पल देखा। सिर्फ 22 साल की बीटेक ग्रेजुएट साक्षी रावत को ग्रामीणों ने भारी मतों से ग्राम प्रधान चुनकर सबसे कम उम्र की महिला नेता बना दिया। देहरादून से इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद जहाँ बाकी युवा कॉर्पोरेट जॉब की ओर बढ़ते हैं,
वहीं साक्षी ने अपने गांव की दिशा बदलने का फैसला किया। ग्रामीणों का कहना है—“हमने उनकी पढ़ाई, सोच और साफ नीयत में बदलाव की उम्मीद देखी।”
गाँव की तालियों के बीच पहला भाषण—

महिलाएं, किसान और बच्चे फोकस में जीत के बाद साक्षी रावत ने पंचायत भवन में अपने पहले संबोधन में कहा— “गाँव की महिलाओं, बच्चों, किसानों और युवाओं को आगे बढ़ाना मेरी प्राथमिकता है—हम भी स्मार्ट और आत्मनिर्भर ग्राम बन सकते हैं।”
गाँव की बुजुर्ग महिलाएं, युवा और बच्चे सभी उन्हें ‘नई पीढ़ी की नेता’ कह रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी उनकी जीत वायरल हो गई—लोगों ने उन्हें ‘Mountain Girl Rising’, ‘Tech-Leader Sarpanch’ जैसे नामों से सराहा।
ई-गवर्नेंस, डिजिटल सेंटर और LED गाँव—साक्षी की आधुनिक प्लानिंग ने उम्मीद जगाई साक्षी सिर्फ पारंपरिक विकास नहीं बल्कि आधुनिक टेक्नोलॉजी को गाँव में लाना चाहती हैं।
उनके प्लान में शामिल हैं—
- डिजिटल शिकायत और फीडबैक सिस्टम
- LED स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट
- महिलाओं के लिए मजबूत सेल्फ-हेल्प समूह
- गाँव में डिजिटल लर्निंग सेंटर
- युवाओं के लिए खेती आधारित स्टार्टअप मॉडल
- बच्चों के लिए “स्मार्ट लाइब्रेरी” और टेक-स्किल प्रोग्राम
गाँव के लोग कह रहे हैं—“ये सिर्फ नेता नहीं, टेक्नोलॉजी वाली नई सोच की मिसाल है।” सिर्फ चुनाव नहीं—ग्रामीण भारत में बदलाव की शुरूआत साक्षी रावत की जीत सिर्फ एक पंचायत की जीत नहीं, बल्कि उस संदेश की जीत है कि— “शिक्षा + तकनीक + साहस = ग्रामीण भारत की नई ताकत।”
उनकी कहानी हर युवा, खासकर हर बेटी के लिए प्रेरणा है कि बदलाव की शुरुआत गाँव से भी की जा सकती है—और दिल से की गई शुरुआत दुनिया बदल सकती है।