बिहार में ‘आतंकी’ हमले की धमकी ? पटना तथा अन्य अदालतो को RDX से उड़ाने की साजिश आई सामने ,जानिए पूरी खबर

बिहार की न्यायिक व्यवस्था को दहलाने की एक बड़ी साजिश सामने आई है। राजधानी पटना के सिविल कोर्ट तथा राज्य के आधा दर्जन से अधिक जिला न्यायालयों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। ये संदेश ईमेल के जरिए भेजे गए ओर इस संदेश ने न केवल पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है, बल्कि आम नागरिकों और वकीलों के बीच भी दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। प्रशासन ने आनन-फानन में सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बना दिया है।

क्या है पूरा मामला?

बीते 8 जनवरी 2026 की सुबह पटना सिविल कोर्ट के रजिस्ट्रार को एक गुमनाम ईमेल प्राप्त हुआ। इस ईमेल में दावा किया गया कि कोर्ट परिसर के भीतर 3 RDX आधारित IED (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस) प्लांट किए गए हैं। धमकी देने वाले ने खुद को ‘अरुण कुमार’ बताया और अपना संबंध कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन LTTE से होने का दावा किया।

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चौंकाने वाली बात यह है कि धमकी केवल पटना तक सीमित नहीं थी। गया, अररिया, किशनगंज, दानापुर और भागलपुर के सभी न्यायालयों को भी इसी तरह की डराने वाले मेल भेजे गए। संदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि शाम 4 बजे तक धमाके किए जाएंगे।

हरकत में आई प्रशासन

धमकी मिलने के तुरंत बाद पटना पुलिस और एटीएस (ATS) की टीमें सक्रिय हो गईं। पीरबहोर थाने की पुलिस के साथ बम निरोधक दस्ता (Bomb Disposal Squad) और डॉग स्क्वायड की कई टीमें पटना सिविल कोर्ट पहुंचीं।

•सबसे पहले सुरक्षा कारणों से न्यायाधीशों, वकीलों और वादियों को तुरंत परिसर से बाहर निकाला गया।

• उसके बाद कोर्ट के चप्पे-चप्पे, वकीलों के चैंबर, कैंटीन और पार्किंग स्टैंड की गहन तलाशी ली गई।

• परिणाम स्वरूप घंटों चली मशक्कत के बाद पुलिस को कोई भी संदिग्ध वस्तु नहीं मिली, जिसके बाद राहत की सांस ली गई और इसे एक ‘होक्स’ (Hoax) या अफवाह करार दिया गया।

जांच में सामने आया तमिलनाडु कनेक्शन

बिहार पुलिस की प्रारंभिक जांच में एक महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगा है। पटना सिटी (सेंट्रल) एसपी दीक्षा के अनुसार, जिस ईमेल आईडी से यह धमकी भेजी गई थी, उसका डिजिटल फुटप्रिंट तमिलनाडु से जुड़ा हुआ मालूम हुआ ।

साइबर एक्सपर्ट्स के लिए दिक्कत

• VPN का उपयोग के कारण पुलिस को शक है कि अपराधी ने अपनी असली लोकेशन छिपाने के लिए वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क (VPN) का सहारा लिया है।

• तमिल भाषा का अंश: ईमेल के कंटेंट में कुछ शब्द तमिल भाषा में लिखे थे, जो जांच को दक्षिण भारत की ओर मोड़ रहे हैं।

• मल्टी-स्टेट लिंक: इसी तरह की धमकियां उसी दिन ओडिशा, केरल और पंजाब की अदालतों को भी मिली थीं, जिससे यह एक समन्वित साइबर अटैक या पैनिक क्रिएट करने की बड़ी साजिश लगती है।

नए सुरक्षा नियम

इस घटना के बाद पटना हाई कोर्ट के निर्देश पर राज्य की सभी निचली अदालतों का सुरक्षा ऑडिट (Security Audit) शुरू कर दिया गया है। पटना सिविल कोर्ट में अब बिना गहन तलाशी के किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जा रहा है।

• CCTV निगरानी

• मेटल डिटेक्टर

• अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती

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वकीलों का कहना “बार-बार क्यों हो रहा ऐसा?”

पटना बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और अन्य वरिष्ठ वकीलों ने इस घटना पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। वकीलों का कहना है कि साल 2025 में भी दो बार इसी तरह की धमकियां मिली थीं, लेकिन आज तक मुख्य अपराधी सलाखों के पीछे नहीं पहुंचा है।

बिहार की अदालतों को मिली यह धमकी फिलहाल एक ‘अफवाह’ साबित हुई है, लेकिन इसने सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर कर दिया है। पुलिस प्रशासन इसे गंभीरता से ले रही है और केंद्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर ईमेल के मूल स्रोत तक पहुँचने की कोशिश कर रही है।

क्या आपको लगता है कि अदालतों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम केवल ऐसी धमकियों के बाद ही होने चाहिए, या वहां स्थायी रूप से एयरपोर्ट जैसी सिक्योरिटी होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।

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