क्या आपको भी लग रहा है कि पिछले कुछ दिनों से आपके घर का राशन, सब्जियों का बिल और रोजमर्रा का खर्चा अचानक बढ़ गया है? अगर हाँ, तो यह आपका वहम नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था (Economy) से एक ऐसी खबर आई है जो आम आदमी के घर का बजट पूरी तरह से बिगाड़ कर रख देगी।
देश में थोक महंगाई दर यानी WPI (Wholesale Price Index) 10 महीने के सबसे उच्चतम स्तर (Highest Level) पर पहुंच गई है। अब आप सोच रहे होंगे कि “मैं तो थोक बाजार (Wholesale) से सामान खरीदता ही नहीं, तो मुझे क्या नुकसान?”
यहीं पर आम आदमी धोखा खा जाता है! सच यह है कि WPI का सीधा कनेक्शन आपकी जेब, आपकी बैंक EMI और आपकी थाली से है। आज ‘ApniVani’ की इस स्पेशल रिपोर्ट में हम एकदम आसान भाषा में समझेंगे कि WPI क्या होता है, यह अचानक इतना क्यों बढ़ गया, और आप पर इसका क्या सीधा असर पड़ने वाला है।

आखिर WPI होता क्या है? (आसान भाषा में समझें)
जब भी किसी फैक्ट्री या खेत से सामान निकलकर बड़े थोक बाजार (मंडी) में आता है, तो वहां जिस रेट पर सामान बिकता है, उसकी महंगाई को WPI (Wholesale Price Index) कहते हैं।
मान लीजिए, फैक्ट्री में बनने वाले साबुन या खेत से आने वाले गेहूं का दाम थोक बाजार में ही बढ़ गया, तो यह WPI का बढ़ना कहलाता है। इसमें सीधा ग्राहक (Consumer) नहीं बल्कि बिजनेसमैन आपस में लेन-देन करते हैं। लेकिन जब पीछे से ही सामान महंगा आएगा, तो आगे सस्ता कैसे बिकेगा?
WPI अचानक इतना ऊपर कैसे चला गया?
पिछले कुछ महीनों में WPI काफी कंट्रोल में था, लेकिन अब इसने अचानक रफ्तार पकड़ ली है। इसके पीछे दो सबसे बड़े कारण हैं:
- खाने-पीने की चीजों में आग (Food Inflation): बेमौसम बरसात और सप्लाई चेन बिगड़ने के कारण मंडियों में सब्जियों, दाल, प्याज और आलू के दाम आसमान छू रहे हैं। जब मंडी में ही अनाज महंगा मिलेगा, तो आपके घर तक आते-आते उसकी कीमत और बढ़ जाएगी।
- कच्चा तेल और ट्रांसपोर्ट: दुनिया भर में चल रहे तनाव (Global Conflicts) की वजह से पेट्रोल-डीजल और ट्रांसपोर्टेशन का खर्चा बढ़ गया है। इससे फैक्ट्रियों में सामान बनाने की लागत (Cost of Production) में भारी उछाल आया है।

आम आदमी पर इसका क्या असर पड़ेगा? (ये हैं 3 सीधी मार)
अब आते हैं सबसे जरूरी मुद्दे पर। थोक की यह महंगाई आपको कैसे रुला सकती है? आम आदमी पर इसकी 3 सीधी मार पड़ेगी:
- पहली मार – रिटेल महंगाई (CPI) बढ़ेगी: जब किसी दुकानदार या कंपनी को ही पीछे (होलसेल) से सामान महंगा मिलेगा, तो वो अपनी जेब से नुकसान थोड़ी सहेंगे? वो अपना मुनाफा जोड़कर आपको और महंगा सामान बेचेंगे। यानी FMCG प्रोडक्ट्स, गाड़ियों के पार्ट्स और रोजमर्रा का सामान बहुत जल्द और महंगा होने वाला है।
- दूसरी मार – लोन की EMI कम नहीं होगी: मिडिल क्लास लोग उम्मीद लगाए बैठे थे कि रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरें कम करेगा, तो होम लोन और कार लोन की EMI सस्ती होगी। लेकिन WPI बढ़ने से RBI अलर्ट मोड में आ जाएगा और रेट्स कम नहीं करेगा। यानी आपकी भारी-भरकम EMI वैसी की वैसी ही रहेगी।
- तीसरी मार – आपकी ‘सेविंग्स’ (Bachat) खत्म: जब खाने-पीने की चीजें और रोज का खर्च बढ़ता है, तो मिडिल क्लास परिवार का पूरा बजट हिल जाता है। आपकी सैलरी तो उतनी ही है, लेकिन खर्चे बढ़ जाने से महीने के अंत में आपकी बचत (Savings) जीरो हो जाएगी।

ApniVani का सच :- खुद को तैयार रखें
WPI का 10 महीने के हाई लेवल पर जाना अर्थव्यवस्था के लिए खतरे की घंटी है। सरकार को जल्द ही सप्लाई चेन और महंगाई पर कंट्रोल करना होगा। लेकिन जब तक सिस्टम कुछ करता है, तब तक आम जनता को ही पिसना पड़ता है।
हम मिडिल क्लास वालों के लिए यही सलाह है कि फिलहाल अपने फिजूलखर्चों पर लगाम लगाएं। दिखावे के चक्कर में पड़कर कोई नया लोन न लें और अपनी इमरजेंसी सेविंग्स को बचा कर रखें, क्योंकि आने वाले कुछ महीनों में बाजार में यह महंगाई और भी ज्यादा चुभने वाली है।
आपकी राय: क्या आपको भी बाजार में राशन और सब्जियां खरीदते वक्त लग रहा है कि अचानक से सब कुछ बहुत महंगा हो गया है? कमेंट करके अपना अनुभव हमारे साथ जरूर शेयर करें!
