देश की राजधानी दिल्ली में आज (2 दिसंबर) से संसद का शीतकालीन सत्र शुरू हो गया है, लेकिन उम्मीद के मुताबिक सत्र का पहला ही दिन बेहद हंगामेदार रहा। ठंड के मौसम में भी दिल्ली का सियासी पारा सातवें आसमान पर है।
विपक्ष ने पहले से ही संकेत दे दिए थे कि वे सरकार को आसानी से काम नहीं करने देंगे, और आज सुबह संसद भवन के ‘मकर द्वार’ पर जो नजारा दिखा, उसने यह साबित भी कर दिया। अडानी मामले और संभल हिंसा जैसे गंभीर मुद्दों पर विपक्ष और सरकार आमने-सामने है। आइए विस्तार से जानते हैं कि आज संसद में क्या हुआ, विपक्ष की क्या मांगें हैं और सरकार की क्या रणनीति है।

मकर द्वार पर विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
- सत्र शुरू होने से ठीक पहले, संसद भवन का मुख्य प्रवेश द्वार कहे जाने वाले ‘मकर द्वार’ पर विपक्षी गठबंधन (INDIA Alliance) के सांसदों ने जोरदार प्रदर्शन किया।
- कौन-कौन था शामिल? कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कई बड़े विपक्षी नेता हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए।
- क्या थे नारे? सांसदों ने “संविधान बचाओ”, “अडानी मामले की जेपीसी (JPC) जांच कराओ” और “संभल हिंसा पर जवाब दो” जैसे नारे लगाए।
- माहौल: विपक्ष के तेवर देखकर साफ है कि वे इस सत्र में सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ेंगे |
किन मुद्दों पर मचा है घमासान?
इस बार का शीतकालीन सत्र सरकार के लिए किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होगा। विपक्ष ने अपनी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ के लिए मुख्य रूप से दो बड़े मुद्दे चुने हैं:
1. अडानी समूह विवाद
हाल ही में अडानी समूह पर लगे नए आरोपों (रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के अमेरिकी आरोप) ने भारतीय राजनीति में भूचाल ला दिया है।
विपक्ष की मांग: कांग्रेस और अन्य दलों की मांग है कि इस पूरे मामले की JPC (संयुक्त संसदीय समिति) से जांच कराई जाए और संसद में इस पर विस्तृत चर्चा हो। विपक्ष का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा से भाग रही है।
2. संभल हिंसा
उत्तर प्रदेश के संभल में हाल ही में हुई हिंसा और तनाव का मुद्दा भी संसद में गूंज रहा है। विपक्ष ने इसे कानून व्यवस्था की विफलता बताया है और गृह मंत्रालय से जवाब मांगा है। सपा (SP) और कांग्रेस के सांसदों ने आरोप लगाया है कि प्रशासन ने वहां स्थिति को सही से नहीं संभाला।
प्रधानमंत्री मोदी ने क्या कहा?
परंपरा के अनुसार, सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मीडिया को संबोधित किया। उन्होंने विपक्ष से सहयोग की अपील की।
पीएम मोदी ने कहा, “संसद का समय देश के लिए बहुत कीमती है। हम हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार हैं, लेकिन चर्चा नियमों के तहत होनी चाहिए। विपक्ष को संसद की कार्यवाही में बाधा डालने के बजाय स्वस्थ बहस करनी चाहिए।”
सरकार का प्रयास है कि इस सत्र में वक्फ संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill) और ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ जैसे महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा आगे बढ़ाई जाए।

क्यों खास है यह शीतकालीन सत्र?
यह सत्र 2 दिसंबर से शुरू होकर 20 दिसंबर तक चलने की संभावना है। इस छोटे से सत्र में सरकार के पास कई पेंडिंग बिल पास कराने की चुनौती है, वहीं विपक्ष के पास हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद खुद को साबित करने का मौका है।
महंगाई, मणिपुर के हालात और बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे भी इस सत्र में गाहे-बगाहे उठने की पूरी संभावना है।
आज के घटनाक्रम से यह साफ हो गया है कि संसद का यह शीतकालीन सत्र ‘शीतल’ तो बिल्कुल नहीं रहने वाला। अडानी और संभल जैसे मुद्दों पर रस्साकशी जारी रहेगी। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार विपक्ष के भारी विरोध के बीच अपने महत्वपूर्ण बिल पास करा पाती है या फिर यह पूरा सत्र हंगामे की भेंट चढ़ जाएगा।
सवाल: क्या आपको लगता है कि संसद में हंगामे की वजह से जनता के असली मुद्दे (महंगाई, बेरोजगारी) पीछे छूट जाते हैं? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें।
FAQ: पाठकों के सवाल
Q1: संसद का शीतकालीन सत्र कब तक चलेगा?
A. यह सत्र आज (2 दिसंबर) से शुरू होकर 20 दिसंबर 2025 तक चलने की उम्मीद है।
Q2: मकर द्वार क्या है?
A. मकर द्वार नए संसद भवन का एक प्रमुख प्रवेश द्वार है, जिसका इस्तेमाल अक्सर सांसद और वीवीआईपी (VVIP) करते हैं। इसका नाम पौराणिक जीव ‘मकर’ पर रखा गया है।
Q3: विपक्ष अडानी मामले पर JPC की मांग क्यों कर रहा है?
A. विपक्ष का मानना है कि सामान्य जांच एजेंसियां निष्पक्ष जांच नहीं कर पा रही हैं, इसलिए सभी पार्टियों के सांसदों वाली कमेटी (JPC) से इसकी जांच होनी चाहिए।
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