पश्चिम एशिया (West Asia) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-इजरायल बनाम ईरान के बीच छिड़े संघर्ष ने अब भारतीय परिवारों की खुशियों को मातम में बदल दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी हालिया आंकड़ों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। ताजा जानकारी के अनुसार, इस युद्ध की चपेट में आने से अब तक 8 भारतीय नागरिकों की मौत हो चुकी है, जबकि 1 भारतीय अभी भी लापता बताया जा रहा है।
कुवैत से ओमान तक: कहाँ-कहाँ हुए हादसे?
यह संघर्ष केवल एक देश तक सीमित नहीं है। खाड़ी के अलग-अलग हिस्सों से दुखद खबरें सामने आ रही हैं:
• कुवैत: ईरान द्वारा किए गए एक हमले में कुवैत के पावर और वाटर डिसेलिनेशन प्लांट पर काम कर रहे एक भारतीय मजदूर की जान चली गई।
• ओमान: यहाँ हुए भीषण ड्रोन हमलों में 2 भारतीयों के मारे जाने की पुष्टि हुई है।
• सऊदी अरब: रियाद में 18 मार्च को हुई एक हिंसात्मक घटना में एक और भारतीय नागरिक की हत्या कर दी गई।
ये मौतें दर्शाती हैं कि मिडिल ईस्ट में काम कर रहे भारतीय प्रवासी इस समय कितने गंभीर खतरे के बीच रह रहे हैं।
कौन थे ये लोग और किस राज्य से थे?
हालांकि विदेश मंत्रालय ने सुरक्षा और निजता कारणों से अभी तक मृतकों के नाम और उनके गृह राज्यों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक नहीं की है, लेकिन प्राथमिक रिपोर्टों के अनुसार, ये सभी व्यक्ति खाड़ी देशों में ‘ब्लू-कॉलर’ वर्कर (मजदूर) के रूप में कार्यरत थे। भारत के केरल, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों से बड़ी संख्या में लोग इन क्षेत्रों में काम करने जाते हैं, इसलिए आशंका जताई जा रही है कि मृतक इन्हीं राज्यों से हो सकते हैं।

भारत सरकार का ‘रेस्क्यू ऑपरेशन’ और MEA की सक्रियता
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि सरकार इस स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रख रही है।
• पार्थिव शरीर की वापसी: कुवैत और ओमान स्थित भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर मृतकों के शवों को जल्द से जल्द भारत भेजने की प्रक्रिया में जुटे हैं।
• निकासी अभियान: 28 फरवरी से अब तक, भारत सरकार ने एक मेगा रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए लगभग 5.5 लाख भारतीयों को प्रभावित क्षेत्रों से सुरक्षित बाहर निकाला है।
• लापता की तलाश: जो एक भारतीय नागरिक लापता है, उसकी तलाश के लिए स्थानीय खुफिया एजेंसियों की मदद ली जा रही है।
क्यों भड़की है वेस्ट एशिया में यह आग?
यह पूरा विवाद फरवरी के अंत से तब तेज हुआ जब इजरायल और ईरान के बीच सीधी सैन्य कार्रवाई शुरू हुई। तेहरान पर हुए हमलों और उसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को युद्ध के मैदान में बदल दिया है। अमेरिकी हस्तक्षेप और आगामी कूटनीतिक वार्ताओं के बीच, वहां फंसे लाखों भारतीय कामगारों की सुरक्षा भारत के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गई है।

प्रवासियों के लिए एडवाइजरी
भारत सरकार ने वेस्ट एशिया में रह रहे भारतीयों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी की है। उन्हें अनावश्यक यात्रा से बचने और संबंधित देशों में भारतीय दूतावास के साथ पंजीकरण (Registration) कराने की सलाह दी गई है। किसी भी आपात स्थिति में, दूतावास की हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क किया जा सकता है।
वेस्ट एशिया का यह संकट न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खतरा है, बल्कि यह मानवीय त्रासदी का रूप भी ले चुका है। 8 भारतीयों की शहादत देश के लिए एक बड़ी क्षति है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या अंतरराष्ट्रीय कूटनीति इस युद्ध को रोक पाएगी या अभी और मासूमों को इसकी कीमत चुकानी होगी।
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