Bihar Cabinet Richest Ministers: बिहार के 5 सबसे अमीर मंत्री, संपत्ति और कमाई का जरिया जानकर उड़ जाएंगे होश!

जब बात बिहार की सियासत की होती है, तो बाहुबल के साथ-साथ ‘धनबल’ (Wealth) की चर्चा होना भी आम है। हाल ही में गठित हुई बिहार की नई NDA सरकार और 2025-2026 के ताजा हलफनामों (ADR Report) ने कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार संपत्ति के मामले में अपने ही मंत्रियों से काफी पीछे हैं। सीएम नीतीश की कुल संपत्ति मात्र 1.65 करोड़ रुपये के आसपास है, जिसमें उनका दिल्ली का एक फ्लैट शामिल है। वहीं दूसरी तरफ, उनके कैबिनेट में ऐसे मंत्री बैठे हैं जिनकी संपत्ति करोड़ों में नहीं, बल्कि अरबों के करीब पहुंच रही है।

आज हम आपको पूरी गहराई से की गई रिसर्च के साथ बता रहे हैं बिहार कैबिनेट के उन 5 सबसे अमीर मंत्रियों के बारे में, जिनकी नेटवर्थ (Net Worth) सबसे ज्यादा है। ये किस पद पर हैं और इनके पास इतना पैसा कहां से आता है? आइए जानते हैं।Bihar Cabinet Richest Ministers

संजय कुमार सिंह (Sanjay Kumar Singh) – ₹45.21 करोड़

बिहार सरकार के मौजूदा मंत्रियों में संपत्ति के मामले में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के कोटे से मंत्री बने संजय कुमार सिंह का नाम टॉप पर आता है। वे सिमरी बख्तियारपुर से संबंध रखते हैं।

  • कुल संपत्ति: लगभग ₹45.21 करोड़।
  • पैसा कहां से आता है? MyNeta और चुनाव हलफनामे के अनुसार, संजय कुमार सिंह ने बांड, डिबेंचर और कई कंपनियों के शेयरों में करीब ₹6.7 करोड़ का तगड़ा निवेश (Investment) किया हुआ है। इनके पास लगभग ₹2 करोड़ की कीमत की खेती योग्य (Agricultural) जमीन भी है। इसके अलावा बैंक खातों में भारी जमा राशि और स्मार्ट वित्तीय निवेश इनकी कुल संपत्ति का मुख्य आधार हैं।

Bihar Cabinet Richest Ministers

अशोक चौधरी (Ashok Choudhary) – ₹42.68 करोड़

जेडीयू (JDU) के दिग्गज नेता और बिहार के ग्रामीण कार्य मंत्री (Rural Works Minister) अशोक चौधरी कैबिनेट के सबसे रईस मंत्रियों की सूची में दूसरे स्थान पर हैं।

  • कुल संपत्ति: ₹42.68 करोड़।
  • पैसा कहां से आता है? अशोक चौधरी साल 2000 से ही राजनीति में सक्रिय हैं और लगातार सत्ता के करीब रहे हैं। उनकी इस भारी-भरकम संपत्ति में उनकी पत्नी की संपत्ति भी शामिल है। इनकी नेटवर्थ पारिवारिक संपत्तियों, कमर्शियल निवेश और जीवनसाथी के व्यावसायिक एसेट्स से मिलकर बनी है।

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रमा निषाद (Rama Nishad) – ₹31.86 करोड़

मुजफ्फरपुर की औराई सीट से बीजेपी (BJP) विधायक रमा निषाद बिहार कैबिनेट की सबसे अमीर महिला मंत्री हैं। इन्हें नीतीश सरकार में कल्याण विभाग (Welfare Department) की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

  • कुल संपत्ति: ₹31.86 करोड़।
  • पैसा कहां से आता है? हलफनामे के मुताबिक, रमा निषाद के पास ₹25.8 करोड़ की भारी-भरकम अचल संपत्ति (Immovable Property) है। इनके पास 2 किलो सोना और 6 किलो चांदी है, जिसकी कीमत ही 3 करोड़ रुपये से ज्यादा है। इसके साथ ही बैंक में ₹1.33 करोड़ से अधिक नकद जमा है। इनके पति अजय निषाद मुजफ्फरपुर से पूर्व सांसद रह चुके हैं। परिवार का एक मजबूत राजनीतिक और व्यावसायिक बैकग्राउंड ही इनकी इतनी बड़ी संपत्ति का राज है।

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विजय कुमार सिन्हा (Vijay Kumar Sinha) – ₹11.62 करोड़

बिहार के उपमुख्यमंत्री (Deputy Chief Minister) और बीजेपी के कद्दावर नेता विजय कुमार सिन्हा भी ‘धनकुबेरों’ की इस लिस्ट में चौथे नंबर पर आते हैं।

  • कुल संपत्ति: लगभग ₹11.62 करोड़।
  • पैसा कहां से आता है? विजय सिन्हा के पास विभिन्न बैंकों में ₹59 लाख नकद जमा हैं। उन्होंने शेयर बाजार और बांड्स में भी करीब ₹91 लाख का निवेश किया हुआ है। इसके अलावा उनके पास लखीसराय और पटना में कीमती जमीनें और घर (अचल संपत्ति) मौजूद हैं, जो समय के साथ बढ़कर उनकी इस मजबूत नेटवर्थ का कारण बने हैं।

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सम्राट चौधरी (Samrat Choudhary) – ₹11.34 करोड़

बिहार के एक और उपमुख्यमंत्री (Deputy CM) और भाजपा के प्रदेश नेतृत्व का प्रमुख चेहरा, सम्राट चौधरी भी संपत्ति के मामले में पीछे नहीं हैं।

  • कुल संपत्ति: लगभग ₹11.34 करोड़।
  • पैसा कहां से आता है? सम्राट चौधरी के पास नकद (Cash) और बैंक बैलेंस का अच्छा खासा हिस्सा है, जिसमें से ₹26 लाख से ज्यादा बैंकों में जमा हैं। इनके पिता शकुनी चौधरी भी बिहार के दिग्गज राजनेता रहे हैं। ऐसे में पुश्तैनी जमीनों, पैतृक संपत्तियों और रियल एस्टेट निवेश से इनकी नेटवर्थ लगातार बढ़ती रही है।

ApniVani का निष्कर्ष

अगर हम ADR रिपोर्ट के समग्र आंकड़ों पर नजर डालें, तो बिहार कैबिनेट के 24 विश्लेषित मंत्रियों में से 21 (88%) करोड़पति हैं। इन मंत्रियों की औसत संपत्ति 5.32 करोड़ रुपये है। यह साफ दर्शाता है कि आज के दौर में चुनाव लड़ना और मंत्री पद तक पहुंचना केवल जनता के बीच लोकप्रियता का खेल नहीं रहा, बल्कि इसके लिए मजबूत आर्थिक स्थिति (Financial Power) का होना भी एक बड़ी जरूरत बन गया है।

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि राजनेताओं की लगातार बढ़ती संपत्ति और आम जनता की आर्थिक स्थिति के बीच की यह खाई भारतीय लोकतंत्र के लिए ठीक है? अपनी बेबाक राय हमें कमेंट सेक्शन में जरूर बताएं!

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