महंगाई की मार से बिहार का आम आदमी पहले ही परेशान था, लेकिन अब गैस सिलेंडरों के बढ़ते दाम और सप्लाई की कमी ने जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। दुनिया के एक कोने (मिडिल-ईस्ट) में चल रहे युद्ध का सीधा असर अब पटना की सड़कों और बिहार के छोटे-बड़े होटलों तक पहुंच गया है।
कमर्शियल एलपीजी (19kg) के दामों में आए हालिया उछाल ने रेस्टोरेंट मालिकों से लेकर सड़क किनारे ठेला लगाने वालों तक की कमर तोड़ दी है। आज ‘ApniVani’ के इस डीप एनालिसिस में हम समझेंगे कि आखिर बिहार में गैस की कीमतों में अचानक यह आग क्यों लगी है और इसके पीछे के 3 सबसे बड़े और कड़वे सच क्या हैं।

होटलों और छोटे व्यापारियों पर डबल मार
बिहार में चाहे पटना का कोई बड़ा रेस्टोरेंट हो या नुक्कड़ पर लिट्टी-चोखा और समोसे की दुकान, हर जगह कमर्शियल एलपीजी (19kg सिलेंडर) का इस्तेमाल होता है।
हाल ही में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडर पर दी जाने वाली छूट खत्म कर दी है और बेस प्राइस में भी भारी इजाफा किया है। इसके चलते पटना में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब 2000 रुपये के आंकड़े को पार कर गई है (अलग-अलग जिलों में ट्रांसपोर्टेशन के हिसाब से रेट थोड़ा बदल सकता है)। इसका सीधा असर यह हो रहा है कि होटलों का मेन्यू महंगा हो रहा है और कुछ छोटे दुकानदारों को तो अपना काम कुछ दिनों के लिए बंद करने की नौबत आ गई है।

ईरान-इजरायल युद्ध: दुनिया का संकट, बिहार का नुकसान
अगर आप सोच रहे हैं कि सिर्फ तेल कंपनियां दाम बढ़ा रही हैं, तो कहानी का एक बड़ा हिस्सा आप मिस कर रहे हैं। इस महंगाई की असली जड़ें मिडिल-ईस्ट में चल रहे ‘ईरान-इजरायल’ युद्ध में हैं।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी बाहर से मंगाता है, जिसका एक बहुत बड़ा हिस्सा मिडिल-ईस्ट से होते हुए समुद्री रास्ते (Strait of Hormuz) से आता है। इस वक्त युद्ध के कारण वहां जहाजों पर हमले हो रहे हैं, जिससे सप्लाई चेन बुरी तरह टूट गई है। पीछे से माल (गैस) आ ही नहीं रहा है, और जब मार्केट में गैस की सप्लाई कम होगी और डिमांड ज्यादा होगी, तो जाहिर सी बात है कि बिहार तक आते-आते इसके दाम आसमान छूने लगेंगे।

घरेलू गैस (14.2kg) और आम आदमी का बजट
सिर्फ कमर्शियल सिलेंडर ही नहीं, आम आदमी के घर में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमतों में भी बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है।
हालांकि सरकार ने चुनाव और आम जनता की नाराजगी से बचने के लिए घरेलू गैस के दामों को काफी हद तक कंट्रोल करने की कोशिश की है, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल और गैस की कीमतें जिस तरह से बढ़ रही हैं, उससे यह तय माना जा रहा है कि घरेलू बजट भी जल्द ही बिगड़ने वाला है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से खाने के तेल और दालों जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बिहार के लोकल मार्केट्स में तेज होने लगे हैं।
ApniVani की बात
यह संकट साफ तौर पर यह दिखाता है कि आज की ग्लोबल दुनिया में जब बाहर कहीं सप्लाई चेन टूटती है, तो उसकी सीधी मार हमारे और आपके किचन पर पड़ती है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बिहार के लोगों और होटल मालिकों को इस महंगाई का डटकर सामना करना ही पड़ेगा।
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