अयोध्या दीपोत्सव 2025 : 29 लाख दीयों से जगमगाएगी रामनगरी, सीएम योगी करेंगे प्रभु श्रीराम का राजतिलक

अयोध्या

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की नगरी अयोध्या एक बार फिर रोशनी, भक्ति और आस्था के संगम में डूबी हुई है। दीपोत्सव 2025 का आगाज़ हो चुका है और पूरी अयोध्या राममय हो उठी है। इस बार का दीपोत्सव अब तक का सबसे भव्य आयोजन बताया जा रहा है — सरयू नदी के किनारे 29 लाख से अधिक दीये जलाकर एक नया विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी है।

सीएम योगी करेंगे प्रभु श्रीराम का राजतिलक

इस दीपोत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होगा रामकथा पार्क में प्रभु श्रीराम का राजतिलक समारोह। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान के स्वरूपों की अगवानी करेंगे — जो पुष्पक विमान रूपी हेलीकॉप्टर से पधारेंगे।

सीएम योगी विधि-विधान से प्रभु श्रीराम का राज्याभिषेक करेंगे। इस अवसर पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, उप मुख्यमंत्री, और राज्य सरकार के कई मंत्री भी मौजूद रहेंगे। रामकथा पार्क को राजमहल की तरह सजाया गया है और पूरा क्षेत्र “जय श्रीराम” के नारों से गूंज उठा है।

लाखों दीपों से जगमगाएगी राम की पैड़ी

सरयू तट पर 56 घाटों पर इस बार 26 से 29 लाख दीये जलाए जाएंगे। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने की तैयारी है।

दीयों को सजाने, उनमें तेल और बाती डालने का काम अवध विश्वविद्यालय के 30,000 से अधिक स्वयंसेवकों द्वारा किया जा रहा है। पूरा शहर सुनहरी रोशनी में नहाया हुआ है — हर गली, मंदिर, और घाट पर दीपों की कतारें भक्ति का अद्भुत दृश्य बना रही हैं।

अयोध्या

संस्कृति और श्रद्धा का संगम

दीपोत्सव की शुरुआत भव्य शोभायात्रा से हुई, जिसमें देशभर की संस्कृतियों को दर्शाती 22 झांकियां निकाली गईं। इसके अलावा रामलीला मंडलियों ने देश और विदेश से आकर रामायण के प्रसंगों को मंचित किया। शाम को सरयू तट पर 2100 वेदाचार्य एक साथ महाआरती करेंगे, जिसके बाद लेज़र शो, ड्रोन शो और आतिशबाज़ी से पूरा आसमान रोशनी से भर जाएगा।

हर साल और भव्य होता जा रहा दीपोत्सव

2017 में जब सीएम योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव की शुरुआत की थी, तब सिर्फ 1.71 लाख दीपक जलाए गए थे। आज, नौवें दीपोत्सव में यह संख्या करीब 29 लाख तक पहुंच गई है — यानी 15 गुना से ज्यादा वृद्धि। यह आयोजन न केवल आस्था का प्रतीक बन चुका है, बल्कि अयोध्या को विश्व पर्यटन मानचित्र पर एक नई पहचान भी दे रहा है।

अयोध्या में श्रद्धालुओं की बाढ़

दीपोत्सव को देखने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचे हैं। इस साल अब तक 23 करोड़ से अधिक श्रद्धालु श्रीरामलला के दर्शन कर चुके हैं — जो एक नया रिकॉर्ड है। शहर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, 5,000 से अधिक पुलिसकर्मी और 200 ड्रोन निगरानी में तैनात हैं।

सीएम योगी का संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों को दीपोत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा — “अयोध्या की यह दिव्यता और भव्यता पूरे विश्व में रामराज्य की भावना को जगाएगी। यह आयोजन सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना का उत्सव है।”

अयोध्या का दीपोत्सव अब सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं रहा — यह भारत की संस्कृति, एकता और आस्था का जीवंत प्रतीक बन चुका है। जब सरयू किनारे लाखों दीप एक साथ जलेंगे, तो पूरी दुनिया फिर से गूंज उठेगी — “दीप जलें हजारों, फिर भी कम लगें राम तुम्हारे नाम के आगे।”

क्या चाहो तो मैं इस खबर के लिए एक पोस्टर (9:16 फॉर्मेट) भी बना दूँ — जिसमें “अयोध्या दीपोत्सव 2025” का खूबसूरत विजुअल हो?

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बेंगलुरु कॉलेज में सनसनीखेज वारदात : जूनियर छात्र ने सीनियर के साथ वॉशरूम में किया बलात्कार, पुलिस ने की गिरफ्तारी

बेंगलुरु

बेंगलुरु के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज में घटी एक भयावह घटना ने पूरे शहर को हिला कर रख दिया है। यहां 21 वर्षीय छात्र जीवन गौड़ा को अपनी सीनियर छात्रा के साथ कॉलेज के पुरुष वॉशरूम में बलात्कार करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। यह घटना 10 अक्टूबर 2025 को कॉलेज कैंपस में हुई थी, जबकि शिकायत 15 अक्टूबर को दर्ज की गई।

घटना कैसे हुई – पूरा घटनाक्रम

पुलिस और पीड़िता के बयान के अनुसार, आरोपी और पीड़िता एक-दूसरे को पहले से जानते थे। दोनों एक ही बैच के छात्र थे, लेकिन आरोपी कुछ विषयों में बैकलॉग आने के कारण जूनियर रह गया था। 10 अक्टूबर की दोपहर, लंच ब्रेक के दौरान आरोपी ने पीड़िता को फोन कर कहा कि वह उससे कुछ सामान — खासकर उसकी जैकेट — लौटाना चाहता है। पीड़िता जब कॉलेज के आर्किटेक्चर ब्लॉक में उससे मिलने पहुंची, तो आरोपी ने अचानक उसे जबर्दस्ती चूम लिया। पीड़िता ने तुरंत खुद को छुड़ाया और लिफ्ट से नीचे जाने लगी, लेकिन आरोपी ने उसका पीछा किया।

नीचे पहुंचकर आरोपी ने उसे छठी मंजिल पर पुरुषों के वॉशरूम में खींच लिया, दरवाज़ा बंद किया और उसके साथ बलात्कार किया। घटना के दौरान पीड़िता का एक दोस्त उसे फोन कर रहा था, मगर आरोपी ने उसका फोन छीन लिया ताकि वह मदद न मांग सके। इस भयावह कृत्य के बाद आरोपी ने उसी शाम पीड़िता को फोन करके पूछा — “क्या तुम्हें गोली चाहिए?” (गर्भनिरोधक गोली के संदर्भ में)।

पीड़िता ने यह बात अपने कुछ दोस्तों से साझा की, जिन्होंने उसे पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। हालांकि, वह शुरुआत में अपने माता-पिता की प्रतिक्रिया से डरकर कुछ दिन चुप रही। अंततः 15 अक्टूबर को उसने अपने माता-पिता को सब कुछ बताया और फिर हनुमंतनगर पुलिस स्टेशन जाकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।

बेंगलुरु

पुलिस की कार्रवाई और जांच

शिकायत दर्ज होते ही पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की। आरोपी जीवन गौड़ा को उसी दिन गिरफ्तार कर लिया गया और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64 (बलात्कार) के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दोनों का मेडिकल परीक्षण कराया गया है और पुलिस ने आरोपी को अपराध स्थल पर ले जाकर नाट्य रूपांतरण (spot mahazar) करवाया है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि आरोपी ने अपना बचाव करते हुए कहा है कि संबंध सहमति से बने थे, जबकि पीड़िता ने साफ कहा है कि यह जबरन बलात्कार था। पुलिस ने कहा है कि वे दोनों के बयान, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष निकालेंगे।

सीसीटीवी और जांच की चुनौती

इस मामले में जांच को एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है — जिस मंजिल पर यह वारदात हुई, वहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं था। इस वजह से घटना का वीडियो सबूत मौजूद नहीं है। हालांकि, पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन और कॉल रिकॉर्ड्स जब्त कर लिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना के बाद आरोपी ने पीड़िता से क्या बातचीत की थी।

बेंगलुरु

कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया

कॉलेज प्रशासन ने इस मामले पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए आरोपी छात्र को तत्काल निलंबित कर दिया है। साथ ही, कॉलेज ने आंतरिक जांच समिति (Internal Inquiry Committee) का गठन किया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई। कॉलेज ने छात्रों को सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए कहा कि “ऐसी घटनाएं बर्दाश्त नहीं की जाएंगी, और यदि किसी छात्रा या छात्र को कोई असुरक्षा महसूस हो, तो तुरंत प्रशासन को सूचित करें।”

वर्तमान स्थिति

पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है। आरोपी वर्तमान में न्यायिक हिरासत में है और पुलिस ने अदालत से फॉरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल सबूतों के लिए समय मांगा है। यह मामला न सिर्फ कॉलेज प्रशासन, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए सुरक्षा और संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है — खासकर उन जगहों पर जहां छात्रों को सबसे सुरक्षित महसूस करना चाहिए था।

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भारत का अपना स्पेस स्टेशन : 2035 तक ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ बनेगा हकीकत, पहला मॉड्यूल 2028 में लॉन्च होगा

स्पेस स्टेशन

भारत अब अंतरिक्ष की दुनिया में एक नई ऊंचाई छूने जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने ऐलान किया है कि भारत 2035 तक अपना खुद का स्पेस स्टेशन बनाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना का नाम होगा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (Bharatiya Antariksh Station – BAS)। इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि इस स्पेस स्टेशन का पहला मॉड्यूल 2028 तक अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। यह मिशन भारत के लिए वैसा ही ऐतिहासिक कदम है, जैसा अमेरिका के लिए International Space Station (ISS) था या चीन के लिए Tiangong Station है। इससे भारत उन कुछ चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिनके पास अपना मानवयुक्त स्पेस स्टेशन होगा।

कैसा होगा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS)?

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन पूरी तरह से मॉड्यूलर डिजाइन पर आधारित होगा — यानी इसे कई हिस्सों में बनाया जाएगा और चरणबद्ध तरीके से अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।
पहला मॉड्यूल : इसका पहला हिस्सा, जिसे “प्रारंभिक मॉड्यूल” कहा जा रहा है, लगभग 10 टन वजनी होगा। इसे 2028 में लॉन्च किया जाएगा।
पूरा स्टेशन : जब सभी मॉड्यूल जुड़ जाएंगे, तब स्टेशन का कुल वजन 52 टन होगा और इसमें पांच मुख्य मॉड्यूल होंगे।
स्थिति (Orbit) : BAS को पृथ्वी की Low Earth Orbit (LEO) में, लगभग 450 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया जाएगा।

स्पेस स्टेशन

यह स्टेशन ऐसा डिज़ाइन किया जा रहा है कि भविष्य में इसमें और भी मॉड्यूल जोड़े जा सकें। यह कई वर्षों तक अंतरिक्ष में काम करेगा और वैज्ञानिकों को सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण (Microgravity) में शोध करने की सुविधा देगा। भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन और प्रशिक्षित अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि “भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन एक तरह का ‘6 BHK अपार्टमेंट इन ऑर्बिट’ होगा, जहाँ अंतरिक्ष यात्री लंबे समय तक रह सकेंगे और प्रयोग कर पाएँगे।”

मिशन का मकसद क्या है?

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य है भारत की स्पेस साइंस, मेडिसिन, और टेक्नोलॉजी रिसर्च को अगले स्तर तक ले जाना।
यह स्टेशन एक राष्ट्रीय अंतरिक्ष प्रयोगशाला की तरह काम करेगा, जहाँ देश-विदेश के वैज्ञानिक माइक्रोग्रैविटी में प्रयोग कर सकेंगे।

BAS में कई उन्नत तकनीकें शामिल होंगी:

  • डॉकिंग सिस्टम : जिससे अलग-अलग मॉड्यूल जुड़ सकेंगे।
  • लाइफ सपोर्ट सिस्टम : जो अंतरिक्ष यात्रियों को ऑक्सीजन, तापमान नियंत्रण और पानी उपलब्ध कराएगा।
  • कम्युनिकेशन और एनर्जी सिस्टम : ताकि स्टेशन पृथ्वी से निरंतर जुड़ा रहे।
  • माइक्रोग्रैविटी लैब : जहाँ भौतिकी, जीवविज्ञान, औषधि निर्माण और सामग्री विज्ञान पर प्रयोग होंगे।

इस स्टेशन की मदद से भारत दीर्घकालिक अंतरिक्ष मिशन चलाने की क्षमता हासिल करेगा, जिससे भविष्य में चंद्रमा और मंगल ग्रह पर भी मानव मिशन की राह आसान होगी।

स्पेस स्टेशन

गगनयान मिशन से जुड़ा अगला कदम

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का सपना सीधे तौर पर गगनयान मिशन से जुड़ा है। गगनयान भारत का पहला मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन है, जिसे 2027 में लॉन्च किए जाने की योजना है। इस मिशन में भारत के चार टेस्ट पायलटों को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा, जो पहले से रूस और भारत में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।गगनयान की तकनीकें — जैसे क्रू मॉड्यूल, लाइफ सपोर्ट सिस्टम और सेफ रिएंट्री टेक्नोलॉजी — BAS के लिए आधार बनेंगी। इस तरह, गगनयान की सफलता भारत के स्पेस स्टेशन की दिशा में पहला ठोस कदम साबित होगी।

अगला लक्ष्य: 2040 तक चाँद पर भारतीय

इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि भारत का अगला बड़ा मिशन होगा —
2040 तक एक भारतीय को चाँद पर भेजना और सुरक्षित वापसी कराना। इसके लिए इसरो भविष्य में नए भारी रॉकेट इंजन, डीप स्पेस मिशन तकनीक, और लंबे समय तक मानव मिशन की तैयारी कर रहा है। भारत पहले ही चंद्रयान और मंगलयान मिशनों से यह साबित कर चुका है कि वह अंतरिक्ष अनुसंधान में आत्मनिर्भर और नवाचारी देश है।

भारत के लिए गौरव का क्षण

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) की योजना केवल एक वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह भारत की वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति बनने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। जब यह स्टेशन 2035 में पूरी तरह सक्रिय होगा, तब भारत उन देशों की कतार में होगा, जिनके पास स्वतंत्र मानवयुक्त स्पेस स्टेशन चलाने की क्षमता है — जैसे अमेरिका, रूस और चीन। यह परियोजना भारत की “विकसित भारत 2047” की दृष्टि से भी जुड़ी है, जिसमें देश विज्ञान, तकनीक और अनुसंधान के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की ओर अग्रसर है।

संक्षेप में

  • भारत का अपना स्पेस स्टेशन 2035 तक तैयार होगा।
  • पहला मॉड्यूल 2028 में लॉन्च होगा।
  • स्टेशन 450 किलोमीटर ऊँचाई पर पृथ्वी की कक्षा में रहेगा।
  • इसका मुख्य लक्ष्य वैज्ञानिक रिसर्च और लंबे समय तक मानव मिशन की तैयारी है।
  • 2040 तक भारत चाँद पर मानव भेजने का लक्ष्य भी रखता है।

भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) न केवल भारत के अंतरिक्ष इतिहास का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट होगा, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा भी बनेगा।
इस मिशन के साथ भारत यह साबित कर देगा कि वह अब सिर्फ अंतरिक्ष की खोज नहीं कर रहा, बल्कि वहाँ अपना ठिकाना बनाने की तैयारी में है।

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BAN ON USE OF ORS – किसके लिए, क्यों और कब?

ORS

पिछले कई सालों से बाजार में ऐसे ड्रिंक्स बिक रहे थे जो ‘ORS’ नाम के साथ पैक किया जाता था।इन्हें मेडिकल स्टोर्स, किराना, यहां तक कि अस्पतालों में भी धड़ल्ले से बेचा जा रहा था। मिठास, फ्रूट फ्लेवर और खूब सारे ब्रांड;लेकिन असली ORS फॉर्मूले वाला इलाज इनमें नहीं था। ज्यादातर कंपनियाँ “ORS” नाम बेचने में लगी थीं, जबकि उनके ड्रिंक में 10 गुना ज्यादा शुगर और कम इलेक्ट्रोलाइट्स मिलते थे। असलियत तब सामने आई जब कई बच्चे और मरीज दुकानों से “ORS Drink” ले गए और वो बीमार हो गए।

कैसे बढ़ा विवाद?

हैदराबाद की डॉक्टर सिवरांजनी संतोश पिछले 8 साल से इस फेक लेबलिंग के खिलाफ लड़ रही थीं। सोशल मीडिया, याचिका और सीधा FSSAI पर दबाव डालकर उन्होंने यह दिखाया कि किस तरह बच्चों और मरीजों के साथ धोखा हो रहा है। कई बच्चे, जिनको डायरिया या बर्न के बाद शरीर में पानी की कमी थी, उन्हें मेडिकल ORS के बजाय वही पैकेट वाला ड्रिंक दिया गया जिसमें असली रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन का फॉर्मूला ही नहीं था। उनकी जर्नी देशभर के माता-पिता के लिए चेतावनी साबित हुई।

ORS

सरकार का फैसला: अब कोई कंपनी “ORS” शब्द नहीं बेच सकेगी

15 अक्टूबर 2025 को FSSAI ने सख्त आदेश जारी करते हुए बोला—कोई भी ब्रांड, कोई भी ग्रोसरी, फ्रूट जूस, इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक, या रेडी-टू-ड्रिंक प्रोडक्ट अपने नाम, लेबल, पैकिंग, या विज्ञापन में “ORS” नहीं लिख सकेगा, जब तक WHO का असली फॉर्मूला न हो।

पुराने आदेश, जिसमें डिस्क्लेमर की छूट थी, सब वापस ले लिया गया। अब सिर्फ मेडिकल दुकान, फार्मा ब्रांड और डॉक्टर द्वारा दिया गया WHO अप्रूव्ड ORS ही मार्केट में मिलेगा।

असर: कौन-कौन ब्रांड बाहर, क्या बदल जाएगा?

सभी लोकल और नेशनल ब्रांड, जिनका ORS ड्रिंक था—सबको रीलबलिंग, नया नाम और नई फॉर्मूला की प्रक्रिया करनी होगी।दुकानें और मेडिकल स्टोर्स को आदेश दिया गया—फेक ORS या फ्लेवर्ड ORS बेचने पर लाइसेंस-सीज़ और भारी जुर्माना लगेगा।जिन मरीजों और बच्चों को फेक ORS की वजह से नुकसान हुआ था, उनकी सुरक्षा अब बढ़ेगी।असली ORS—जिसमें सटीक शुगर, इलेक्ट्रोलाइट और सॉल्ट बैलेंस हो, वही WHO स्टैण्डर्ड रहेगा।

पब्लिक हेल्थ और भविष्य

अब असली ORS—डायरिया, डिहाइड्रेशन, बर्न या मेडिकल एमरजेंसी में जान बचाने के लिए वैज्ञानिक प्रमाण के साथ बिकेगा।

फेक प्रोडक्ट, मार्केटिंग और सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट पर शिकंजा कस गया है।

डॉक्टर, मरीज और माता-पिता—सबको राहत मिली है; बच्चों की जान बचाने में ये आदेश महत्वपूर्ण शाबित होगा।

जनता की जीत

अब से भारत में ‘ORS’ सिर्फ असली इलाज रहेगा, न कि मीठा धोखा! डॉक्टर सिवरांजनी और जागरूक लोगों की मेहनत से FSSAI के इस फैसले ने देशभर में 8 साल का संघर्ष जीत में बदल दिया।

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अमृतसर-सहरसा गरीब रथ एक्सप्रेस में लगी आग, महिला यात्री झुलसी — बड़ा हादसा टला

गरीब रथ

शनिवार सुबह अमृतसर से सहरसा जा रही गरीब रथ एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12204) में अचानक आग लग गई। हादसा पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले के सरहिंद रेलवे स्टेशन के पास हुआ। घटना में एक महिला यात्री झुलस गई, हालांकि गनीमत रही कि कोई बड़ी जनहानि नहीं हुई।

कैसे हुआ हादसा

सुबह करीब 7:30 बजे, जब ट्रेन सरहिंद स्टेशन से अंबाला की ओर कुछ ही दूरी पर थी, तभी यात्रियों ने एक कोच से धुआं उठता देखा। ड्राइवर ने तुरंत ट्रेन रोक दी। कुछ ही मिनटों में आग ने तीन डिब्बों, जिनमें एक एसी कोच (G19) भी शामिल था, को अपनी चपेट में ले लिया। ट्रेन रुकते ही यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई और लोग अपने-अपने सामान लेकर बाहर निकलने लगे।

बचाव कार्य में तेजी

सूचना मिलते ही सरहिंद नगर कौंसिल की दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। रेलवे अधिकारियों और स्थानीय पुलिस ने यात्रियों को सुरक्षित निकालने में मदद की।

 

रेलवे के अनुसार, सभी यात्री सुरक्षित हैं, केवल एक महिला यात्री झुलस गई है जो अपना सामान निकालते समय घायल हुई। उसे तुरंत सरहिंद के सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है।

गरीब रथ

शॉर्ट सर्किट बना आग का कारण

प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है। रेलवे ने संबंधित डिब्बों को ट्रेन से अलग कर दिया है और सुरक्षा जांच के बाद ट्रेन को आगे सहरसा की ओर रवाना करने की तैयारी की जा रही है।

रेलवे की प्रतिक्रिया

नॉर्दर्न रेलवे के अधिकारियों ने बताया कि इस हादसे में किसी की जान नहीं गई और स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण पा लिया गया है। रेलवे ने कहा कि “आग लगने की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन सभी यात्रियों को सुरक्षित निकाल लिया गया। प्रभावित कोचों की जांच के लिए तकनीकी टीम गठित कर दी गई है।”

यात्रियों में डर और भगदड़

घटना के दौरान ट्रेन में सवार यात्रियों ने बताया कि आग लगते ही कोच में धुआं भर गया और लोगों में घबराहट फैल गई। कई यात्री कोच के दरवाजे खोलकर बाहर कूदने लगे। एक यात्री ने बताया, “हमने तुरंत चेन खींची और ट्रेन रुकने पर सभी बाहर निकल आए। रेलवे और दमकल विभाग ने समय रहते आग बुझा दी, वरना बड़ा हादसा हो सकता था।”

जांच जारी

रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और जीआरपी ने मौके का मुआयना किया और बयान दर्ज किए। अधिकारियों ने बताया कि ट्रेन की वायरिंग और एसी सिस्टम की जांच के आदेश दिए गए हैं ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों।

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Israel-Hamas War Ended? क्या अब गाजा में लौटेगी Real Peace या फिर होगी नई जंग की शुरुआत?

Israel-Hamas

Israel-Hamas के बीच इस संघर्ष की शुरुआत एक भयंकर तूफ़ान की तरह हुई—7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा इज़राइल पर अचानक हमला किया गया। जवाब में इज़राइल ने गाजा पर दबदबा जमा दिया—बारूद फूटा, बमबारी, ग्राउंड ऑपरेशन, और नाकेबंदी ने मिलकर एक दो साल लंबे विनाश का सफर बना दिया। इस युद्व ने न केवल मानवीय संकट को जन्म दिया बल्कि राजनीति, कूटनीति और जीवन की सीमाओं को भी चुनौती दी।

आंकड़ों की धार: मौत, तबाही और त्रासदी

  • गाजा से मिल रही रिपोर्ट्स के अनुसार, इस लड़ाई में 67,200 से ज़्यादा फिलिस्तीनी नागरिक मारे गए हैं।
  • सैकड़ों हजार घायल हुए, अस्पताल बर्बाद हुए, स्कूल, बुनियादी ढांचे — लगभग हर चीज — तबाह हो गई।
  • इज़राइल में  रिपोर्ट के अनुसर 1139 मौते हुई है।
  • अब भी हजारों शव मलबे में दबे मिले हैं, कई परिवारों ने अब तक अपनों को खो दिया है या उनसे बिछड़ गए हैं।

Ceasefire की ओर पहला कदम

2025 के अक्टूबर में अचानक हलचल महसूस हुई—मिस्र, क़तर और अमेरिका की मध्यस्थता में इज़राइल और हमास ने Sharm el-Sheikh में पहला चरण Ceasefire Deal साइन किया। इस डील के तहत दोनों पक्षों ने बंदियों की अदला-बदली, सैनिकों की सीमित वापसी, और मानवीय राहत की अनुमति देने पर सहमति दी। इज़राइल ने कहा कि वह अपने लड़ाकू वाहनों को कुछ ज़मीनों से हटा लेगा, और हमास को शहरों की सुरक्षा शासन और निगरानी देने का दायित्व होगा। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इस समझौते का स्वागत किया, कहा कि यह “पैलेस्टीन की स्वायत्तता और दो-राज्य समाधान की दिशा में” एक महत्वपूर्ण कदम है।

Israel-Hamas

नए सवाल: शांति कितनी टिकेगी?

हालाँकि यह समझौता इतिहास का पल था, लेकिन वास्तवीकता ज़मीनी है और चुनौतियाँ भारी हैं। कुछ इलाकों में अभी भी हवाई हमले हो रहे हैं—Ceasefire लागू होते ही भी गोलीबारी की खबरें आईं। दूसरी समस्या है भरोसे की कमी—दोनों पक्षों पर शक बरकरार है कि कहीं फिर से संघर्ष की शुरुआत न हो जाए।

गाजा की अर्थव्यवस्था बुरी तरह टूट चुकी है, सड़कों पर बुनियादी सेवाओं की कमी और बुनियादी राहत सामग्री तक पहुंच न हो पाना एक बड़ी चुनौती है। इज़राइल का आंतरिक दबाव, हमास के कट्टरपंथी गुटों की मौजूदगी, और मध्यस्थों की भूमिका—सब मिलकर इस शांति को स्थायी करने की राह को कठिन बना देते हैं।

इस युद्व ने एक बार फिर याद दिलाया कि शांति सिर्फ एक दस्तावेज़ नहीं, बल्कि भरोसा, कार्रवाई और न्याय का मिलाजुला सफर है। Ceasefire ने आशा दी है, मगर अब देखना यह है कि कब तक यह आशा साकार होती है या फिर से संघर्ष की आग में धंस जाएगी।

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सरकार और Zomato की साझेदारी से गिग वर्कर्स को मिलेगा बड़ा अवसर : हर साल 2.5 लाख नई नौकरियां बनेंगी

Zomato

भारत में तेजी से बढ़ती गिग इकॉनमी (Gig Economy) को औपचारिक रूप देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour & Employment) ने ऑनलाइन फूड डिलीवरी कंपनी Zomato के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत हर साल लगभग 2.5 लाख नई नौकरियों के अवसर नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल के माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे।

समझौते पर हस्ताक्षर नई दिल्ली में मंगलवार को हुए, जिसमें केंद्रीय श्रम एवं रोजगार और युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे और श्रम सचिव वंदना गुर्नानी उपस्थित रहीं।

गिग वर्कर्स के लिए बनेगा नया ‘Aggregator’ Category

इस समझौते के तहत NCS पोर्टल पर एक नया “Aggregator” सेक्शन जोड़ा जाएगा, जहां Zomato अपने डिलीवरी पार्टनर्स और अन्य गिग वर्कर्स के लिए लचीले रोजगार के अवसर सूचीबद्ध करेगा। इससे युवाओं और महिलाओं को टेक्नोलॉजी-सक्षम, सम्मानजनक और औपचारिक रोजगार तक पहुंच मिलेगी।

डॉ. मांडविया ने कहा, “यह कदम युवाओं और महिलाओं को गरिमामय, तकनीक-आधारित जीविकोपार्जन से जोड़ेगा। यह प्लेटफ़ॉर्म इकॉनमी की नौकरियों को औपचारिक रोजगार व्यवस्था में एकीकृत करने की दिशा में बड़ा कदम है।”

NCS पोर्टल की बढ़ती सफलता

2015 में शुरू किया गया नेशनल करियर सर्विस (NCS) पोर्टल अब तक 7.7 करोड़ से अधिक नौकरियों का सृजन कर चुका है। यह पोर्टल देशभर के नियोक्ताओं और नौकरी तलाशने वालों के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु बन चुका है।

 

श्रम सचिव वंदना गुर्नानी ने कहा कि दिवाली के आसपास पोर्टल पर Zomato की नई जॉब लिस्टिंग शुरू होगी, जिससे युवाओं को त्योहार के मौसम में अतिरिक्त रोजगार के अवसर मिलेंगे।

सामाजिक सुरक्षा कवरेज में बड़ी बढ़ोतरी

उन्होंने आगे बताया कि भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज (Social Security Coverage) में उल्लेखनीय सुधार हुआ है — जो 2015 में 19% था, वह अब 2025 में बढ़कर 64.3% तक पहुंच गया है। इस कवरेज से लगभग 94 करोड़ नागरिकों को लाभ मिल रहा है।

Zomato

राज्यमंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जाए।

‘विकसित भारत 2047’ और PM-VBRY से जुड़ा मिशन

यह पहल सरकार के प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना (PM-VBRY) और विकसित भारत 2047 विज़न का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है। इस दिशा में सरकार टेक्नोलॉजी, प्रशिक्षण और उद्यमशीलता के माध्यम से नए युग की रोजगार व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है।

Zomato के साथ साझेदारी का व्यापक प्रभाव

Zomato के साथ हुआ यह समझौता श्रम मंत्रालय की निजी क्षेत्र के साथ 15वीं बड़ी साझेदारी है। इससे पहले मंत्रालय Amazon, Swiggy, Rapido, Zepto जैसी 14 अन्य कंपनियों के साथ भी MoU पर हस्ताक्षर कर चुका है, जिनके ज़रिए अब तक 5 लाख से अधिक रोजगार अवसर सृजित किए जा चुके हैं। Zomato ने बयान जारी कर कहा कि कंपनी हर महीने 20,000 से अधिक रोजगार अवसर पोस्ट करेगी, जिससे युवाओं को लचीले व औपचारिक काम के मौके मिलेंगे।

भारत की गिग इकॉनमी का भविष्य

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में गिग इकॉनमी अगले पांच वर्षों में $455 बिलियन के स्तर तक पहुंच सकती है। सरकार और निजी क्षेत्र के इस तरह के सहयोग से लाखों युवाओं को नए अवसर मिलेंगे और देश की आर्थिक गतिशीलता को मजबूती मिलेगी। डॉ. मांडविया ने अंत में कहा “हमारा उद्देश्य केवल नौकरियां देना नहीं, बल्कि युवाओं को सम्मानजनक, सुरक्षित और स्थायी रोजगार से जोड़ना है। Zomato के साथ यह साझेदारी उसी दिशा में एक ठोस कदम है।”

Zomato और श्रम मंत्रालय के बीच हुआ यह समझौता न केवल गिग वर्कर्स को औपचारिक रोजगार व्यवस्था से जोड़ने में मदद करेगा, बल्कि भारत के श्रम बाज़ार को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप ढालने की दिशा में भी अहम भूमिका निभाएगा। यह पहल सरकार की “विकसित भारत 2047” की दृष्टि को साकार करने में एक और मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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सेंट्रल बैंकों की सुनामी खरीद : गोल्ड ETFs ने रचा इतिहास, Dhanteras पर ₹1.3 लाख तक पहुंच सकता है सोना

गोल्ड

सोना एक बार फिर निवेशकों का सबसे बड़ा “सेफ हेवन” बनकर उभरा है। सेंट्रल बैंकों और एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETFs) की अभूतपूर्व खरीदारी ने गोल्ड की कीमतों को नए शिखर पर पहुंचा दिया है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार, सितंबर 2025 में भारतीय गोल्ड ETFs में अब तक की सबसे बड़ी मासिक इनफ्लो दर्ज हुई — $902 मिलियन, जो अगस्त के $232 मिलियन की तुलना में 285% ज्यादा है।

इस बूम के चलते भारत के गोल्ड ETF का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) अब $10 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। SMC ग्लोबल सिक्योरिटीज की हेड ऑफ कमोडिटी रिसर्च वंदना भारती के अनुसार, “सेंट्रल बैंकों और ETFs की मजबूत खरीदारी, रिकॉर्ड कीमतों के बावजूद जारी है। गिरते फिएट करंसी पर भरोसे में कमी और ब्याज दरों में संभावित कटौती ने सोने की कीमतों को मजबूती दी है।”

सितंबर में भारतीय गोल्ड ETF निवेशों के मामले में भारत ने दुनिया में चौथा स्थान हासिल किया, अमेरिका, ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड के बाद। साल की शुरुआत से सितंबर तक भारतीय गोल्ड ETFs में $2.18 बिलियन का इनफ्लो दर्ज हुआ, जो अब तक के सभी वार्षिक रिकॉर्ड को पार कर गया।

 वैश्विक कारक भी दे रहे हैं सोने को रफ्तार

दुनिया भर में बढ़ती आर्थिक अनिश्चितता और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्पों की ओर मोड़ दिया है। अमेरिका और चीन के बीच नए व्यापारिक तनाव तथा अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में संभावित कटौती की उम्मीदों ने डॉलर को कमजोर किया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए सोना और आकर्षक बन गया है।

गोल्ड

रिलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्रा ने बताया : “वैश्विक अनिश्चितता, जियोपॉलिटिकल तनाव और फेड की रेट-कट उम्मीदों ने गोल्ड रैली को मजबूत किया है।” अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 13 अक्टूबर को पहली बार $4,000 प्रति औंस के पार जाकर $4,076 प्रति औंस पर पहुंच गया।

दूसरी ओर, दुनियाभर के सेंट्रल बैंक डॉलर रिजर्व पर निर्भरता घटाकर गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं। इससे सोने के लिए एक मजबूत प्राइस फ्लोर (Price Floor) बन गया है। खुदरा निवेशक भी मुद्रास्फीति और करेंसी डिप्रिसिएशन से बचाव के लिए गोल्ड को तरजीह दे रहे हैं।

धनतेरस 2025 पर सोने का क्या रहेगा भाव?

बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस साल धनतेरस पर सोना ₹1,20,000 से ₹1,30,000 प्रति 10 ग्राम के बीच कारोबार कर सकता है। हालांकि, विशेषज्ञ फिलहाल ₹1.5 लाख के स्तर को पार करने की संभावना से इनकार कर रहे हैं। अजीत मिश्रा का कहना है, “अगर कोई बड़ी आर्थिक या भू-राजनीतिक घटना नहीं होती, तो सोना ₹1.5 लाख तक तुरंत नहीं पहुंचेगा। निकट भविष्य में ₹1,26,000 से ₹1,28,000 का दायरा अधिक यथार्थवादी है।”

वहीं, ऑगमॉन्ट गोल्ड के रिसर्च हेड रेनीशा चैनानी का मानना है कि अगर मौजूदा आर्थिक परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं, तो सोना मध्य से लेकर 2026 के अंत तक ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है। उनका कहना है कि, “भारत में निवेश का स्वरूप बदल रहा है। अब शहरी निवेशक फिजिकल गोल्ड के बजाय ETFs में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं — खासकर तब, जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हैं।”

संक्षेप में –

  • सितंबर 2025 में भारत के गोल्ड ETF में $902 मिलियन की रिकॉर्ड इनफ्लो
  • कुल AUM पहुंचा $10 बिलियन — अब तक का सबसे ऊंचा स्तर
  • भारत बना दुनिया का चौथा सबसे बड़ा गोल्ड ETF निवेशक
  • अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना पहली बार $4,000 प्रति औंस के पार
  • Dhanteras 2025 पर सोना ₹1.2 से ₹1.3 लाख के बीच रहने का अनुमान
  • 2026 तक ₹1.5 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंचने की संभावना

सेंट्रल बैंकों की गोल्ड-खरीद रणनीति, ETFs में ऐतिहासिक निवेश और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता ने सोने को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है। निवेशक अब इसे केवल एक आभूषण नहीं, बल्कि एक मजबूत वित्तीय कवच (financial hedge) के रूप में देख रहे हैं। आने वाले महीनों में, गोल्ड मार्केट भारत सहित दुनिया भर में निवेश ट्रेंड की दिशा तय कर सकता है।

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Uttarakhand’s Education Reform : पहला राज्य जिसने Madrasa Board को पूरी तरह खत्म किया

Education

उत्तराखंड ने अक्टूबर 2025 में शिक्षा के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा है, जब राज्य सरकार ने Minority Education Bill, 2025 को पारित कर Madrasa Board Act, 2016 और संबंधित नियमों को समाप्त करने का ऐलान किया। इस बिल की मंज़ूरी मिलने के बाद, अब राज्य के सभी मदरसे एवं अल्पसंख्यक विद्यालयों को Uttarakhand State Minority Education Authority (USMEA) के तहत काम करना होगा और Board of School Education Uttarakhand से मान्यता लेनी होगी।

कानूनी बदलाव: मदरसा बोर्ड से मुख्यधारा तक

इस नए कानून के अनुसार, Madrasa Board Act, 2016 और Non-Government Arabic & Persian Madrasa Recognition Rules, 2019 को 1 जुलाई 2026 से प्रभावी रूप से समाप्त कर दिया जाएगा।

इसका मतलब है कि मदरसे अब अलग प्रणाली से नहीं चलेंगे, बल्कि उन्हें समान शिक्षा मानदंडों, पारदर्शी मूल्यांकन और मुख्यधारा के पाठ्यक्रम (NEP-2020, NCF) के अनुरूप तैयार होना होगा।

Education

अधिकार क्षेत्रों का विस्तार: सभी अल्पसंख्यक शामिल होंगे

पहले अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थानों में मान्यता सिर्फ मुस्लिम-समुदाय के मदरसे ही पाते थे। अब इस बिल के अनुसार, Sikh, Jain, Christian, Buddhist और Parsi संस्थाएँ भी उसी मान्यता और सामाजिक अधिकार की श्रेणी में आएँगी।

यह कदम शिक्षा में समानता को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण है—हर बच्चा, चाहे किसी समुदाय से हो, मुख्यधारा की शिक्षा और बेहतर अवसर पाने में पीछे न रहे।

कार्यवाही और लागू होने की प्रक्रिया

राज्य सरकार ने इस कानून को अगस्त 2025 में कैबिनेट की मंज़ूरी दी थी और बाद में विधानसभा सत्र में पारित किया गया था।

1 जुलाई 2026 से सभी अल्पसंख्यक विद्यालयों और मदरसों को नई व्यवस्था के तहत USMEA से पंजीकरण करना अनिवार्य होगा, और जो संस्थाएँ इस नियम का पालन नहीं करेंगी, उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी।

समर्थन और विवाद: संतुलन की चुनौती

मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने कहा कि यह निर्णय पारदर्शिता, गुणवत्ता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में है।

वहीं, कुछ अल्पसंख्यक संगठन इस बदलाव को धार्मिक शिक्षा की स्वायत्तता पर हमला मान रहे हैं और सवाल उठा रहे हैं कि क्या इस नई व्यवस्था में धार्मिक, सांस्कृतिक और भाषाई विविधता का सम्मान होगा या नहीं।

उत्तराखंड द्वारा पास किया गया this reform एक बड़े और साहसिक कदम की तरह है — मदरसा बोर्ड को खत्म कर, शिक्षा को समान दर्जा देना, और समाज में समान अवसर सुनिश्चित करना। यह न केवल इस राज्य के लिए, बल्कि पूरे देश के शिक्षा नीतियों के लिए मिसाल बन सकता है कि कैसे अल्पसंख्यक शिक्षा को मुख्यधारा में शामिल कर सामाजिक न्याय और विकास को आगे बढ़ाया जाए।

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India’s First Mrs. Universe Crown : Sherry Singh का Golden Moment जिसने भारत को कर दिया Proud

Mrs. Universe

2025 की अक्टूबर की बात है, जब भारत ने दुनिया के सामने एक ऐसा इतिहास रचा जिसे कोई भूल नहीं पाएगा। दिल्ली की Sherry Singh ने Okada, Manila, Philippines में आयोजित Mrs. Universe 2025 के फिनाले में धमाकेदार प्रदर्शन किया—120 से अधिक देशों की प्रतिभागियों को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने वह महिला ताज जीता जिसे भारत ने कभी नहीं जीता था। यह वह पल था जब देश का नाम गर्व के साथ दुनिया की मानचित्र पर चमका।

शुरुआत और तैयारी

Sherry ने पहले Mrs. India 2025 का खिताब जीता और उसी से प्रेरणा लेकर विश्व मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। प्रतियोगिता में उनका विषय था महिला सशक्तिकरण और मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता—दो ऐसे मुद्दे जो दिल से करीब हैं। उनके आत्मविश्वास, निर्भीक अंदाज़ और गहरा संदेश जजेस और दर्शकों को उसी वक्त लुभा गया।

मुकाबले का नतीजा

शेरी सिंह ने Mrs. Universe 2025 का खिताब जीता, जबकि रनर-अप स्थान पर Saint Petersburg (रूस) को रखा गया। इसके अतिरिक्त Philippines, Asia और Russia को क्रमशः 2nd, 3rd और 4th रनर-अप स्थान मिले। प्रतियोगिता में USA, Japan, UAE और अन्य देशों की प्रतिभाएँ भी शामिल थीं।

Mrs. Universe

Mrs. Universe क्यों खास मंच है?

यह प्रतियोगिता सिर्फ सुंदरता नहीं देखती—शिक्षा, नेतृत्व, सामाजिक जिम्मेदारी, आत्मविश्वास और सामुदायिक योगदान भी महत्वपूर्ण है। 2025 संस्करण में खास फोकस mental health और empowerment पर था। यह मंच उन महिलाओं को पहचान देता है जो सौंदर्य के साथ सामाजिक चेतना और उद्यमशीलता को भी साथ ले चलती हैं।

क्या संदेश देती है यह जीत?

Sherry Singh की यह जीत नई पीढ़ी की महिलाओं को प्रेरणा देती है कि यदि संकल्प हो, तो कोई भी सपना दूर नहीं है। यह ताज केवल एक व्यक्ति की नहीं—सभी भारतीय महिलाओं की शक्ति, संघर्ष और आत्मविश्वास की जीत है। इस जीत ने भारत की अंतरराष्ट्रीय पेजेंट्री प्रतिष्ठा को एक नया आयाम दिया।

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