Trailblazer Tenzin Yangki : अरुणाचल की पहली महिला IPS ने तोड़ा सब रिकॉर्ड

Tenzin Yangki

तवांग-जिले से आने वाली Tenzin Yangki ने Union Public Service Commission (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2022 में All India Rank 545 हासिल कर और आदिलु, कठिन क्षेत्र से निकलकर अरुणाचल प्रदेश की पहली महिला IPS अधिकारी बन गईं। उनका चयन AGMUT कैडर में हुआ और उन्होंने Sardar Vallabhbhai Patel National Police Academy, हैदराबाद में ट्रेनिंग पूरी की।

परिवारिक पृष्ठभूमि: सेवा और आदर्श की विरासत

Tenzin के पिता स्व. Thupten Tempa IAS अधिकारी व मंत्री थे और उनकी माता Jigmi Choden APPSC अधिकारी और सरल जीवन जीने वाली पूर्व सचिव थीं। परिवार में देश-सेवा का भाव था, जिसने Tenzin को छोटी उम्र से ही प्रेरणा दी।

शैक्षणिक सफर: Warwick-JNU से IPS तक

Tenzin ने यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक से BSc (Philosophy, Politics, Economics) किया और फिर JNU से MA तथा MPhil इन इंटरनेशनल रिलेशनस।

2017 में उन्होंने APPSC पास किया, इसके बाद प्रशासनिक अनुभव लिया और फिर UPSC में सफलता पाई।

Tenzin Yangki

सफलता का सफर: संघर्ष, जुनून और जज़्बा

दुर्गम पहाड़ी इलाके, सीमित संसाधन और समाज-अपेक्षाओं के बीच Tenzin ने हिम्मत नहीं छोड़ी। उन्होंने कहा है: “Being first is never easy… Don’t be afraid of walking alone today – others will follow.”

उनकी यह उपलब्धि सिर्फ निजी नहीं, बल्कि पूरे उत्तर-पूर्व की लड़कियों के लिए प्रेरणा बन गई है।

प्रेरक संदेश—Tenzin Yangki की जुबानी

“सपनों की ऊँचाई और जड़ों की गहराई दोनों जरूरी हैं। समाज की हर बंदिश तोड़ो, खुद पर भरोसा रखो—रास्ता खुद-ब-खुद बन जाता है।”

“अगर मैं सीमांत जिले से IPS बन सकती हूं, तो देश की हर बेटी कुछ भी कर सकती है।”

उनका यह संदेश हर उस लड़की तक पहुँच रहा है जो असंभव को संभव बनाना चाहती है।

समाज और युवा बेटियों के लिए मिसाल

Tenzin की उपलब्धि यह दिखाती है कि जज़्बा, अनुशासन, शिक्षा और परिवार-समर्थन से कोई भी मुकाम हासिल किया जा सकता है। उन्होंने उत्तर-पूर्व की नई पहचान “सशक्त, शिक्षित और साहसी” का पर्याय बनकर पेश की है।

Tenzin Yangki सिर्फ पुलिस अधिकारी नहीं, बल्कि बदलाव की मिसाल हैं। उनका सफर साबित करता है कि संघर्ष, जज़्बा और सेवा-भावना से कोई भी महिला-उम्मीदवार देश-सेवा की ऊँचाइयों तक पहुँच सकती है। आज इस तवांग-की बेटी ने यह दिखा दिया है कि “पहले चलना असान नहीं होता, लेकिन दूसरों के लिए राह आसान कर देना उसकी असली जीत है।”

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ORS Drinks Ka Comeback – क्या फिर शुरू होगी चीनी से भरी सेहत की धोखाधड़ी?

ORS Drinks

कुछ हफ़्ते पहले Food Safety and Standards Authority of India (FSSAI) ने एक अहम निर्देश जारी किया — अब कोई भी फूड या बेवरेज ब्रांड सिर्फ इसलिए “ORS Drinks”, “Hydra ORS”, “Smart ORS” जैसे टैग या नाम नहीं लगा सकता जब तक उसका फॉर्मूला World Health Organization (WHO) की मानक दिशानिर्देशों के अनुरूप न हो।

बड़ा कारण था: बाजार में कई ड्रिंक्स “ओआरएस” के नाम पर बिक रहे थे — लेकिन असलियत में वे हाई-शुगर, नकली इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक्स थे जिन्हें दस्त या निर्जलीकरण (dehydration) में इस्तेमाल किया जा रहा था। इससे खासकर बच्चों का स्वास्थ्य जोखिम में रहा।

डॉक्टरों और बाल-स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस बैन का स्वागत किया—उनका कहना था कि यह कदम लाखों जानों को बचाने वाला है।

दबाव और ‘ब्रेक’—क्या हुआ?

लेकिन इस बीच बड़ी कंपनियों ने खामोश नहीं बैठे। उन्होंने कोर्ट में याचिका दायर की और लाखों रुपये के “ओआरएस-ब्रांडेड” स्टॉक्स की वैल्यू को लेकर दबाव बनाया। इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने इस बैन पर अस्थायी तौर पर ‘स्टे’ लगा दिया—यानि अब वही पुराने मॉडल के फेक ORS-ड्रिंक्स फिर बाजार में आने की राह पर लग सकते हैं।

ORS Drinks

इस बीच यह भी उभरा कि ORS-टैग वाले ड्रिंक मार्केट का एक बहुत बड़ा सेक्टर बन चुके थे—₹1,000 करोड़ + तक का आंकड़ा सामने था।

विशेषज्ञों की चेतावनियाँ

प्रसिद्द बच्चों के चिकित्सक Dr Sivaranjani Santosh ने कहा कि ये नकली “ओआरएस” ड्रिंक्स बेहद ख़तरनाक थे—इनमें शुगर का स्तर WHO के मानक से १० गुना तक अधिक पाया गया। उनका मानना है कि यह सिर्फ शब्द का मुद्दा नहीं—यह मासूम बच्चों की जान से खेलने वाला विषय है।

इस कदम को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं: क्या स्वास्थ्य की जगह फर्क आर्थिक हितों ने ले ली है? क्या नियामक सही दिशा में कदम उठा रहा है या दबाव में फंसा हुआ है?

स्वास्थ्य बनाम मुनाफा

यह मामला बताता है कि जब “ज़िंदगियाँ” बाज़ार की शर्तों के सामने आती हैं, तो सवाल कौन-सा पक्ष अपनी जीत दर्ज करेगा—जनस्वास्थ्य या कंपनियों का मुनाफा? अब जिम्मेदारी उपभोक्ताओं, डॉक्टरों और नियामकों की है कि वे जागरूक रहें। लेबल पढ़ें, सामग्री जांचें और “ओआरएस” नाम वाले किसी भी पैकेट को डॉक्टर की सलाह के बिना स्वीकार न करें। आज यह मामला सिर्फ टैग का नहीं—यह भविष्य की पीढ़ियों की सेहत की लड़ाई है।

सामान्य नागरिक का सबसे पक्का हथियार है — जागरूकता। Labels पढ़ें, उत्पाद की जाँच करें और जब भी “too good to be true” लगे — सवाल उठाएँ।आपके इस बारे में क्या विचार हैं,नीचे कमेंट करें।

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Cyclone Montha ने Eastern India में मचाया कहर, क्या हम फिर से तैयारी से चूके?

Cyclone Montha

अक्टूबर 2025 के अंतिम दिनों में बंगाल की खाड़ी में एक निम्न-दबाव क्षेत्र विकसित हुआ, जिसे Cyclone Montha नाम दिया गया। यह धीरे-धीरे गहराता गया और 28-29 अक्टूबर को आंध्र प्रदेश के काकीनाडा तट के पास गंभीर स्पर्द्धा (Severe Cyclonic Storm) की श्रेणी में लैंडफॉल हुआ। हवाओं की गति 90-110 किमी/घंटा तक दर्ज की गई।

किन राज्यों पर पड़ा सबसे ज्यादा असर?

लैंडफॉल के सिलसिले में तटीय आंध्र प्रदेश बुरी तरह प्रभावित हुआ—पेड़ों के उखड़ने, बिजली खंभों के गिरने और भारी बारिश की वजह से सड़कों पर पानी भर गया। इसके साथ ही Odisha के आठ जिलों में रेड-अलर्ट जारी किया गया। Jharkhand, West Bengal और Chhattisgarh में भी अगले 30-31 अक्टूबर तक भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

राहत-और-बचाव आँच में

सरकारों ने हजारों लोगों को सुरक्षित क्षेत्रों में स्थानांतरित किया। आंध्र में 38,000 से अधिक लोग इवैक्यूएट किए गए। राज्यीय बचाव दल, एनडीआरएफ (NDRF)-एसडीआरएफ (SDRF) सक्रिय हैं। स्कूल-कॉलेज बंद किए गए और तटीय इलाकों में ड्रोन और नावों की मदद से राहत काम जारी है।

Cyclone Montha

जान-माल के नुकसान और अभी तक का आकलन

आंध्र प्रदेश ने इस तूफान से लगभग ₹53 बिलियन (US $603 million) का नुकसान आंका है, जिसमें सबसे अधिक असर कृषि क्षेत्र पर हुआ—लगभग ₹8.68 बिलियन। उधर, मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कम-से-कम एक व्यक्ति की मौत हुई और कई पशु प्रभावित हुए।

आगे क्या जोखिम है?

मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान कमजोर होते हुए भी 31 अक्टूबर तक झारखंड-बिहार-छत्तीसगढ़ में भारी-बहुत भारी बारिश की संभावना बनाये हुए है। यह चक्रवात एक बार फिर यह साबित करता है कि तटीय और अंतःक्षेत्रीय राज्यों को जलवायु-चक्र व इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयारियों को लेकर सतर्क रहना होगा। अब सवाल यह है—अगली बार बेहतर तैयारी होगी या फिर हम “चक्रवात का इंतज़ार” करते रहेंगे?

Cyclone Montha ने अपने साथ केवल बारिश-हवा नहीं बल्कि हमारी आपदा-प्रबंधन क्षमताओं पर भी सवाल किया है,राहत-कार्य तेजी से चल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हमें यह याद रखना होगा—तैयारी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।

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मुंबई पवई बंधक कांड : 17 बच्चों को छुड़ाने के दौरान आरोपी रोहित आर्य की मौत, सभी बच्चे सुरक्षित

पवई

मुंबई के पवई इलाके में गुरुवार को एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जब एक व्यक्ति ने एक एक्टिंग स्टूडियो में लगभग 20 बच्चों को बंधक बना लिया। पुलिस के एक घंटे से अधिक चले बचाव अभियान के बाद सभी बच्चों को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि आरोपी रोहित आर्य की ऑपरेशन के दौरान मौत हो गई।

क्या था पूरा मामला?

यह घटना आरए स्टूडियो, पवई की है, जहां आरोपी रोहित आर्य ने बच्चों को “ऑडिशन” के बहाने बुलाया था। पुलिस के अनुसार, आर्य मानसिक रूप से परेशान था और उसने एक वीडियो संदेश जारी कर प्रशासन से बात करने की मांग की थी। उसने धमकी दी थी कि अगर उसकी बातें नहीं सुनी गईं तो वह बच्चों को नुकसान पहुँचा सकता है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था) सत्यनारायण ने बताया कि आर्य के पास एक ऐसा हथियार था जो “बंदूक जैसा दिखता था।” जब पुलिस टीम अंदर दाखिल हुई, तो उसने एयर गन से फायरिंग की। जवाबी कार्रवाई में गोली लगने से वह घायल हुआ और अस्पताल में उसकी मौत हो गई।

पवई

क्यों हुआ यह कांड?

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि रोहित आर्य सरकारी स्कूल प्रोजेक्ट के भुगतान न मिलने से नाराज़ था। वह इस मुद्दे पर पूर्व शिक्षा मंत्री से बातचीत करना चाहता था। पुलिस का कहना है कि वह पिछले कुछ दिनों से स्टूडियो में फर्जी ऑडिशन का आयोजन कर रहा था।

पुलिस और फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई

मुंबई पुलिस और फायर ब्रिगेड की संयुक्त टीम ने लगभग एक घंटे तक चले ऑपरेशन में सभी बच्चों को सुरक्षित बचा लिया। मौके पर भीड़ जमा न हो, इसके लिए पूरे इलाके को सील कर दिया गया था।

मुंबई का यह बंधक कांड शहर में सुरक्षा को लेकर कई सवाल खड़े करता है। फिलहाल सभी बच्चे सुरक्षित और सकुशल हैं, जबकि पुलिस ने घटना की गहराई से जांच शुरू कर दी है।

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तुर्की में 6.1 तीव्रता का भूकंप : पश्चिमी इलाके में हड़कंप, कई इमारतें क्षतिग्रस्त, लोग रातभर सड़कों पर

तुर्की

पश्चिमी तुर्की सोमवार देर रात एक शक्तिशाली भूकंप से कांप उठा। रिक्टर पैमाने पर 6.1 तीव्रता वाले इस भूकंप ने कई शहरों में तबाही मचा दी और लोगों में अफरा-तफरी का माहौल पैदा कर दिया। भूकंप का केंद्र बालिकेसिर प्रांत के सिंदिरगी (Sındırgı) शहर में था, जो जमीन से लगभग 6 किलोमीटर की गहराई पर स्थित था।

तुर्की की आपदा और आपातकालीन प्रबंधन एजेंसी (AFAD) के अनुसार, यह झटका स्थानीय समयानुसार रात 10:48 बजे महसूस किया गया। भूकंप इतना शक्तिशाली था कि इसके झटके इस्तांबुल, इज़मिर, बर्सा और मनीसा जैसे प्रमुख शहरों तक महसूस किए गए।

नुकसान का जायजा और राहत कार्य

प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक, सिंदिरगी क्षेत्र में तीन खाली इमारतें और एक दो मंजिला दुकान ढह गईं। राहत एजेंसियों का कहना है कि ये इमारतें पहले के भूकंपों से पहले ही कमजोर हो चुकी थीं।

कोई जनहानि नहीं : अब तक किसी के मारे जाने की खबर नहीं मिली है।

दो लोग घायल : घबराहट में गिरने से दो लोग हल्के रूप से घायल हुए, जिन्हें पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

तुर्की

भूकंप के बाद लोग घरों से बाहर निकलकर सड़कों पर आ गए। कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई और लोग पूरी रात खुले में डरे-सहमे रहे। आफ्टरशॉक (भूकंप के बाद के झटके) भी महसूस किए गए, जिससे डर और बढ़ गया।

तुर्की में भूकंप का इतिहास

तुर्की विश्व के सबसे भूकंप-संवेदनशील देशों में से एक है। यह देश सीरिया-अनातोलियन फॉल्ट लाइन पर स्थित है, जहां भूकंपीय गतिविधियां लगातार होती रहती हैं। वर्ष 2023 में आए विनाशकारी भूकंप में तुर्की और सीरिया में 53,000 से अधिक लोगों की मौत हुई थी। हाल का यह भूकंप उस त्रासदी की याद ताजा कर गया है।

सरकार की अपील और अगली तैयारी

तुर्की सरकार ने सभी राहत एजेंसियों को सतर्क रहने और क्षतिग्रस्त इलाकों में तुरंत सर्वे शुरू करने के निर्देश दिए हैं। AFAD और स्थानीय प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। विशेषज्ञों ने लोगों से घरों की संरचना जांचने और आफ्टरशॉक से सावधान रहने की सलाह दी है।

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Justice सूर्यकांत बने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश, 24 नवंबर को संभालेंगे पदभार

मुख्य न्यायाधीश

देश की न्यायपालिका में एक नया अध्याय जुड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार के न्याय विभाग (Department of Justice) ने गुरुवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी है।

जस्टिस सूर्यकांत 24 नवंबर 2025 को मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभालेंगे। वे मौजूदा CJI जस्टिस जे.बी. पारदीवाला का स्थान लेंगे, जो 23 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।

न्यायाधीश

जस्टिस सूर्यकांत का सफर

जन्म 10 फरवरी 1962 को हुआ। उन्होंने 1984 में हरियाणा के हिसार जिला अदालत से अपने वकालत करियर की शुरुआत की और एक साल बाद पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। वे हरियाणा के एडवोकेट जनरल भी रहे। जनवरी 2004 में उन्हें पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। इसके बाद वे हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने और फिर 24 मई 2019 को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत हुए।

मुख्य न्यायाधीश के रूप में उनका कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा। सुप्रीम कोर्ट में रहते हुए उन्होंने कई महत्वपूर्ण संविधान पीठों (Constitution Benches) का हिस्सा बनकर अहम फैसले दिए हैं।

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शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव : बुधवार की तेजी गुरुवार को गिरावट में बदली

शेयर बाजार

भारतीय शेयर बाजार में इस हफ्ते जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बुधवार को आई जबरदस्त तेजी के बाद गुरुवार को बाजार ने करवट बदली और भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। दो दिनों के इस उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की उम्मीदों और मुनाफे — दोनों को झटका दिया।

29 अक्टूबर : निफ्टी और सेंसेक्स में जोरदार तेजी, ऑल-टाइम हाई के करीब पहुंचा बाजार

बुधवार को शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी रही। BSE सेंसेक्स 368.97 अंक की बढ़त के साथ 84,997.13 पर बंद हुआ। NSE निफ्टी 117.70 अंक उछलकर 26,053.90 के स्तर पर पहुंच गया। यह तेजी मुख्य रूप से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक रुझान, अमेरिकी फेड की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों, और घरेलू निवेशकों की खरीदारी से प्रेरित थी। बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली।

HDFC Bank, Infosys, Maruti Suzuki और TCS जैसे शेयरों ने बाजार को ऊपर खींचा। निफ्टी अपने ऑल-टाइम हाई 26,100 के स्तर को छूने के करीब पहुंच गया था।

शेयर बाजार

30 अक्टूबर : एक दिन में पलटी तस्वीर, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में

गुरुवार को बाजार ने अचानक ब्रेक लगा दिए।

सेंसेक्स 592.67 अंक (0.70%) गिरकर 84,404.46 पर बंद हुआ। निफ्टी 176.05 अंक (0.68%) की गिरावट के साथ 25,877.85 पर आ गया। इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में करीब ₹3.5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणी, FII द्वारा भारी बिकवाली, और वैश्विक बाजारों की कमजोरी इस गिरावट के मुख्य कारण रहे। रिलायंस, टाटा स्टील, और SBI जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मुनाफावसूली हावी रही।

निवेशकों के लिए संकेत

मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट एक स्वाभाविक करेक्शन (natural correction) है और फिलहाल 25,800–26,000 के दायरे में सपोर्ट बनता दिख रहा है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लंबी अवधि के निवेशक घबराएं नहीं, बल्कि अच्छी कंपनियों में हर गिरावट पर धीरे-धीरे निवेश बढ़ाएं।

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दिल्ली में क्यों फेल हुई आर्टिफिशियल बारिश? मौसम की बेरुखी बनी सबसे बड़ी वजह

आर्टिफिशियल बारिश

दिल्ली में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए आर्टिफिशियल बारिश कराने की बहुप्रतीक्षित कोशिश असफल हो गई है। IIT कानपुर के विशेषज्ञों के नेतृत्व में किया गया यह क्लाउड सीडिंग का पहला परीक्षण था, लेकिन मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण यह बारिश कराने में नाकाम रहा।

क्या है असफलता का कारण?

क्लाउड सीडING की सफलता पूरी तरह से मौसम की कुछ खास स्थितियों पर निर्भर करती है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तकनीक के लिए आसमान में पर्याप्त मात्रा में नमी वाले घने बादलों का होना अनिवार्य है।

बादलों की कमी:

परीक्षण के समय दिल्ली के आसमान में ऐसे बादल मौजूद नहीं थे जो कृत्रिम बारिश के लिए उपयुक्त हों। इस प्रक्रिया के लिए कम ऊंचाई वाले और नमी से भरे  ‘क्यूम्यलस ‘बादलों की जरूरत होती है, जो उस दिन नहीं थे।

हवा में नमी का अभाव:

क्लाउड सीडिंग में सिल्वर आयोडाइड जैसे रसायन बादलों में मौजूद नमी को संघनित करके बारिश की बूंदों में बदलते हैं। यदि हवा ही सूखी हो और नमी की मात्रा बहुत कम हो, तो यह प्रक्रिया सफल नहीं हो सकती। गुरुवार को दिल्ली की हवा में नमी का स्तर काफी कम था।

आर्टिफिशियल बारिश

अनुकूल तापमान का न होना:

इस प्रक्रिया के लिए बादलों का तापमान भी एक निश्चित स्तर (आमतौर पर शून्य से नीचे) पर होना चाहिए, ताकि बर्फ के कण बन सकें जो बाद में पिघलकर बारिश के रूप में गिरें। ये सभी अनुकूल परिस्थितियाँ एक साथ न मिलने के कारण परीक्षण विफल हो गया।

IIT कानपुर की टीम ने पहले ही स्पष्ट किया था कि यह सफलता की गारंटी नहीं है, बल्कि यह मौसम पर निर्भर करेगा। सरकार का कहना है कि यह एक पायलट प्रोजेक्ट था और भविष्य में मौसम अनुकूल होने पर दोबारा प्रयास किया जाएगा।

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अमेज़ॅन में फिर बड़ी Layoffs : हजारों कर्मचारियों को टेक्स्ट मैसेज से मिली नौकरी जाने की सूचना

अमेज़ॅन

ई-कॉमर्स दिग्गज अमेज़ॅन ने एक बार फिर वैश्विक स्तर पर हजारों कर्मचारियों की छंटनी कर कॉर्पोरेट जगत को चौंका दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने 14,000 से 30,000 तक कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का निर्णय लिया है। हैरानी की बात यह है कि कई कर्मचारियों को टेक्स्ट मैसेज या ईमेल के ज़रिए ही नौकरी से निकाले जाने की सूचना दी गई।

यह कदम 2022-23 में हुई 27,000 कर्मचारियों की छंटनी के बाद अमेज़ॅन की अब तक की सबसे बड़ी कटौती मानी जा रही है।

छंटनी की वजह — AI और लागत में कटौती

अमेज़ॅन के अनुसार, यह फैसला कंपनी की AI (Artificial Intelligence) और ऑटोमेशन तकनीक को अपनाने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी अपने परिचालन खर्च को घटाकर दक्षता बढ़ाना चाहती है। साथ ही, महामारी के दौरान हुई ओवरहायरिंग यानी ज़रूरत से ज़्यादा भर्तियों को भी अब संतुलित किया जा रहा है।

हालांकि, कंपनी ने हाल ही में मुनाफे में भारी वृद्धि दर्ज की थी, ऐसे में यह छंटनी उद्योग जगत और कर्मचारियों के लिए चौंकाने वाली साबित हुई है।

अमेज़ॅन

भारत में भी असर

अमेज़ॅन की इस वैश्विक छंटनी का असर भारत में भी देखने को मिलेगा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में 800 से 1,000 कर्मचारियों की नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। इसका असर खासकर फाइनेंस, मार्केटिंग, HR और टेक्नोलॉजी विभागों पर पड़ेगा।

टेक इंडस्ट्री में छंटनी की लहर

2025 में माइक्रोसॉफ्ट, इंटेल और TCS जैसी कई कंपनियों द्वारा बड़े पैमाने पर छंटनी के बाद, अमेज़ॅन की यह घोषणा टेक सेक्टर में बढ़ती अस्थिरता को और गहरा कर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रेंड दिखाता है कि AI के बढ़ते प्रभाव के चलते कई पारंपरिक नौकरियों का भविष्य अब अस्थिर होता जा रहा है।

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बोइंग को 777X प्रोग्राम में झटका, 5 अरब डॉलर का नुकसान और डिलीवरी 2027 तक टली

बोइंग

दुनिया की दिग्गज विमान निर्माता कंपनी बोइंग (Boeing) को अपने महत्वाकांक्षी 777X जेट प्रोग्राम में देरी के कारण एक बड़ा झटका लगा है। कंपनी ने बताया कि उसे इस प्रोजेक्ट में लगभग 4.9 अरब डॉलर (करीब ₹41,000 करोड़) का नुकसान झेलना पड़ा है। इसके चलते बोइंग की तीसरी तिमाही में कुल घाटा 5.4 अरब डॉलर तक पहुँच गया है।

देरी की वजह क्या है

बोइंग ने बताया कि 777X विमान की प्रमाणन प्रक्रिया (Certification) में अमेरिकी एविएशन रेगुलेटर FAA से मंजूरी मिलने में उम्मीद से ज्यादा समय लग रहा है। इस कारण कंपनी ने विमान की पहली डिलीवरी की तारीख को फिर से आगे बढ़ा दिया है — अब यह 2027 में होगी, जबकि पहले यह 2026 तय की गई थी। दरअसल, यह प्रोजेक्ट 2020 में लॉन्च होना था, लेकिन लगातार तकनीकी और नियामक कारणों से इसकी टाइमलाइन बढ़ती चली गई।

कंपनी का बयान

बोइंग के सीईओ केली ऑर्टबर्ग (Kelly Ortberg) ने कहा, “हम 777X शेड्यूल में देरी से निराश हैं, लेकिन विमान उड़ान परीक्षण में अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। हमें पता है कि प्रमाणन प्रक्रिया को पूरा करने के लिए अभी बहुत काम बाकी है।”

बोइंग

लगातार बढ़ता नुकसान

777X प्रोग्राम में अब तक बोइंग को कुल 15 अरब डॉलर से ज्यादा का झटका लग चुका है। यह स्थिति तब आई है जब कंपनी पहले से ही 737 MAX हादसों (2018-2019) के बाद से FAA की कड़ी निगरानी में है।

एयरबस को मिला फायदा

बोइंग की मुश्किलों का फायदा उसके प्रतिद्वंद्वी एयरबस (Airbus) को मिल रहा है, जिसका A350 मॉडल वाइडबॉडी विमान बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।

कंपनी पर बढ़ता दबाव

यह बोइंग की लगातार 17वीं घाटे वाली तिमाही है, जो बताती है कि कंपनी अब भी अपने पुराने संकटों से उबर नहीं पाई है। हालांकि, बोइंग ने उम्मीद जताई है कि 777X की सफल डिलीवरी के बाद उसके वित्तीय हालात में सुधार आएगा।

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