Epstein Files में मोदी जी का नाम? भारत ने ‘कचरा’ बताकर खारिज किया विदेशी प्रोपगैंडा, जानें क्या है पूरा सच

Epstein Files

सोशल मीडिया के इस दौर में ‘फेक न्यूज़’ की आग कितनी तेजी से फैलती है, इसका ताज़ा उदाहरण जेफरी एपस्टीन फाइल्स (Jeffrey Epstein Files) से जुड़ा नया विवाद है। अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) द्वारा 30 जनवरी 2026 को जारी किए गए 35 लाख से अधिक पन्नों के नए दस्तावेजों के बाद भारत में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। दरअसल, इन फाइल्स में कथित तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम का ज़िक्र होने का दावा किया गया, जिसे भारत सरकार ने पूरी तरह से ‘आधारहीन’ और ‘कचरा’ (Trashy) करार दिया है।

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Epstein Files में मोदी जी का नाम

विदेश मंत्रालय का कड़ा प्रहार: “एक अपराधी की मनगढ़ंत बातें”

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने शनिवार, 31 जनवरी 2026 को एक आधिकारिक बयान जारी कर उन मीडिया रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया, जिनमें पीएम मोदी का नाम एपस्टीन से जोड़ने की कोशिश की गई थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने तथाकथित एपस्टीन फाइल्स से संबंधित एक ईमेल संदेश की खबरें देखी हैं, जिसमें प्रधानमंत्री और उनकी 2017 की इज़राइल यात्रा का संदर्भ दिया गया है।”

जायसवाल ने आगे स्पष्ट किया कि जुलाई 2017 में प्रधानमंत्री की इज़राइल की आधिकारिक यात्रा एक ऐतिहासिक तथ्य है, लेकिन उसके अलावा ईमेल में किए गए अन्य सभी दावे एक सजायाफ्ता अपराधी की दिमागी उपज और ‘ट्रैश’ हैं। भारत ने इसे ‘घोर तिरस्कार’ (Utmost Contempt) के साथ खारिज कर दिया है।

क्या है ईमेल विवाद की असली सच्चाई?

अमेरिकी जांच एजेंसी द्वारा जारी दस्तावेजों में एक ईमेल सामने आया है जो 2017 का बताया जा रहा है। इस ईमेल में जेफरी एपस्टीन कथित तौर पर अपने प्रभाव का दिखावा करने के लिए ‘नेम-ड्रॉपिंग’ (बड़े नामों का इस्तेमाल) कर रहा था। विशेषज्ञों का कहना है कि एपस्टीन जैसे लोग अपनी साख बढ़ाने के लिए अक्सर वैश्विक नेताओं के नाम का दुरुपयोग करते थे।

दस्तावेजों के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक अपराधी द्वारा की गई चर्चा थी, जिसका पीएम मोदी या भारत सरकार से कोई लेना-देना नहीं है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी स्पष्ट किया है कि किसी फाइल में नाम होने का मतलब यह कतई नहीं है कि वह व्यक्ति किसी गलत गतिविधि में शामिल था।

Epstein Files
Epstein Files में मोदी जी का नाम

विपक्ष के सवालों पर सरकार का पलटवार

भारत में इस मुद्दे ने तब तूल पकड़ा जब विपक्षी दल कांग्रेस के नेताओं ने इसे ‘राष्ट्रीय शर्म’ बताते हुए सरकार से स्पष्टीकरण मांगा। हालांकि, भाजपा और सरकार समर्थकों ने इसे भारत की छवि खराब करने की एक अंतरराष्ट्रीय साजिश बताया है। साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, AI-जनरेटेड तस्वीरों और एडिटेड स्क्रीनशॉट्स के जरिए इस खबर को सनसनीखेज बनाने की कोशिश की गई है।

सावधान रहें फेक न्यूज़ से यह पहली बार नहीं है जब पीएम मोदी की वैश्विक छवि को निशाना बनाया गया हो। G20 और अन्य वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती धाक से परेशान कुछ तत्व ऐसी अफवाहों को हवा दे रहे हैं। गूगल न्यूज़ और अन्य विश्वसनीय स्रोतों ने भी पुष्टि की है कि एपस्टीन की किसी भी ‘क्लाइंट लिस्ट’ या ‘क्राइम लिस्ट’ में किसी भी भारतीय नेता का कोई प्रमाणिक नाम नहीं है।

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Ajit Pawar Death: प्लेन क्रैश में अजित पवार का निधन! वो 10 मिनट जब बारामती में थम गईं सांसें (पूरी रिपोर्ट)

Ajit Pawar death

महाराष्ट्र की राजनीति के ‘दादा’ और उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Ajit Pawar) अब हमारे बीच नहीं रहे। बुधवार, 28 जनवरी 2026 की सुबह आई एक खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया। अपनी बेबाक शैली और कड़े फैसलों के लिए मशहूर अजित पवार का एक विमान दुर्घटना में निधन हो गया है। यह हादसा उनके अपने गृह क्षेत्र बारामती (Baramati) में हुआ, जहाँ वे हमेशा से जितते रहे थे।

आज हम इस रिपोर्ट में जानेंगे कि आखिर उस सुबह क्या हुआ था? उस वीवीआईपी (VVIP) प्लेन में क्या खराबी थी और कैसे महाराष्ट्र ने अपना एक कद्दावर नेता खो दिया।

आखिर कैसे हुआ हादसा?

अजित पवार मुंबई से सुबह-सुबह अपने निजी चार्टर्ड विमान से बारामती के लिए निकले थे। उन्हें वहां आगामी जिला परिषद चुनावों के लिए चार जनसभाओं को संबोधित करना था।

  • समय: सुबह करीब 8:40 से 8:48 के बीच।
  • स्थान: बारामती एयरपोर्ट, रनवे 11।
  • घटना: जैसे ही उनका Bombardier Learjet 45 विमान लैंडिंग के लिए नीचे आया, अचानक पायलट ने नियंत्रण खो दिया। विमान रनवे पर फिसलते हुए बगल में जा गिरा और उसमें जोरदार धमाका हुआ।

जिन्होने देखा उनके मुताबिक, धमाका इतना तेज था कि विमान के परखच्चे उड़ गए और वह तुरंत आग के गोले में बदल गया। किसी को भी संभलने या बाहर निकलने का मौका नहीं मिला।

Plane crash Ajit pawar
apnivani

कौन-कौन था विमान में? (No Survivors)

इस दर्दनाक हादसे में विमान में सवार सभी 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई:

  • अजित पवार (उपमुख्यमंत्री, महाराष्ट्र)
  • पायलट-इन-कमांड (PIC)
  • को-पायलट (First Officer)
  • निजी सुरक्षा अधिकारी (PSO)
  • अटेंडेंट

DGCA (नागरिक उड्डयन महानिदेशालय) ने पुष्टि की है कि हादसे में कोई भी जीवित नहीं बचा है।

विमान में क्या खराबी थी?

यह सबसे बड़ा सवाल है जो हर किसी के मन में है—इतने बड़े नेता के विमान में गड़बड़ी कैसे हो सकती है? यह एक Learjet 45 जेट था, जिसे दिल्ली की कंपनी VSR Aviation ऑपरेट कर रही थी। इसका रजिस्ट्रेशन नंबर VT-SSK था। शुरुआती जाँच में सामने आया है कि लैंडिंग के दौरान कोई ‘तकनीकी खराबी’ (Technical Malfunction) आ गई थी। कुछ रिपोर्ट्स यह भी कह रही हैं कि विमान लैंडिंग के वक्त स्थिर नहीं था और रनवे पर ठीक से उतर नहीं पाया।

बड़ा सवाल: एक डिप्टी सीएम के विमान की सुरक्षा जाँच (Pre-flight check) में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? क्या इंजन में खराबी थी या लैंडिंग गियर में? जाँच के आदेश दे दिए गए हैं, लेकिन यह लापरवाही एक भारी कीमत वसूल कर गई।

अजित पवार : परिचय

अजित पवार सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के अहम व्यक्ति थे।

  • जन्म: 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देवलाली प्रवरा में हुआ।
  • उम्र: 66 वर्ष।
  • कैरियर: वे अपने चाचा शरद पवार के कदम पर चलकर राजनीति में आए। 1991 में वे पहली बार बारामती से सांसद बने, लेकिन बाद में चाचा के लिए सीट छोड़कर राज्य की राजनीति में आ गए।
  • रिकॉर्ड: वे 7 बार बारामती से विधायक रहे और कई बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री का पद संभाला।

Ajit pawar

उन्हें ‘दादा’ इसलिए कहा जाता था क्योंकि वे कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा उपलब्ध रहते थे और प्रशासन पर उनकी पकड़ बहुत मजबूत थी। सहकारी क्षेत्र (Cooperative Sector) में उनका दबदबा बेमिसाल था।

आखिरी पल और वो अधूरा सपना

हादसे से कुछ ही देर पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट भी किया था, जिसमें उन्होंने देशभक्ति की बात की थी। नियति का खेल देखिए, वे अपने ही गढ़ बारामती में अपनों के बीच जा रहे थे, लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही सफर खत्म हो गया।

उनके निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा खालीपन आएगा जिसे भरना आसान नहीं होगा। पक्ष हो या विपक्ष, आज हर कोई इस खबर से स्तब्ध है।

ApniVani की श्रद्धांजलि

अजित पवार का जाना सिर्फ एक पार्टी या परिवार का नुकसान नहीं है, यह एक आक्रामक और कार्यकुशल नेतृत्व का अंत है। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और उनके परिवार को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करे।

आपका सवाल:

क्या वीवीआईपी (VVIP) विमानों की सुरक्षा जाँच और सख्त होनी चाहिए? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।

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बंगाल में सियासी भूचाल: भाजपा नेता के ‘सिर कलम’ वाले बयान पर मचा हड़कंप, ममता बनर्जी को कहा ‘चुड़ैल’

बंगाल

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की आहट के साथ ही नेताओं की जुबान फिसलने का सिलसिला तेज हो गया है। हाल ही में दक्षिण 24 परगना से आई एक खबर ने राज्य की राजनीति में तनाव पैदा कर दिया है। भाजपा नेता संजय दास का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ ऐसी टिप्पणी की है जिसे सुनकर हर कोई हैरान है।

ममता बनर्जी

मंच से दी विवादित धमकी

यह पूरी घटना एक ‘परिवर्तन सभा’ के दौरान हुई। वायरल वीडियो में भाजपा नेता संजय दास मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को ‘बूढ़ी चुड़ैल’ कहते नजर आ रहे हैं। विवाद सिर्फ नाम तक सीमित नहीं रहा; उन्होंने उत्तेजित होकर यहाँ तक कह दिया कि उनका सिर कलम कर देना चाहिए। हैरानी की बात यह है कि जब यह बयान दिया जा रहा था, तब मंच पर पार्टी के कई अन्य बड़े चेहरे भी मौजूद थे।

TMC का पलटवार और पुलिस केस

तृणमूल कांग्रेस ने इस मुद्दे को हाथों-हाथ लिया है और भाजपा पर करारा हमला बोला है। TMC का कहना है कि यह भाजपा की असली संस्कृति है, जहाँ महिलाओं और राज्य की मुख्यमंत्री के प्रति कोई सम्मान नहीं है। पार्टी ने इसे केवल एक बयान नहीं बल्कि ‘हिंसा भड़काने की साजिश’ बताया है और संजय दास के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करा दिया है।

ममता बनर्जी

चुनावी माहौल में बढ़ी तल्खी

जैसे-जैसे बंगाल चुनाव नजदीक आ रहे हैं, दोनों पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर हिंसक होता जा रहा है। जहाँ भाजपा ‘परिवर्तन’ के नाम पर आक्रामक प्रचार कर रही है, वहीं इस तरह के विवादित बयान उसे रक्षात्मक स्थिति में डाल सकते हैं। फिलहाल भाजपा की ओर से इस पर कोई आधिकारिक सफाई नहीं आई है, लेकिन सोशल मीडिया पर जनता के बीच इस बयान को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है।

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National Voters Day: सिर्फ 1 दिन के ‘बादशाह’ हैं आप! बंगाल की हिंसा और आपके वोट की ताकत का कड़वा सच

National Voters' Day

आज 25 जनवरी है मतलब ‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’ (National Voters’ Day)। सारे जगह आपको बताया जाएगा कि आप देश के मालिक हैं। टीवी पर बड़े-बड़े नेता कहेंगे कि “वोट आपका अधिकार है।” लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस उंगली पर स्याही लगवाकर आप सेल्फी पोस्ट करते हैं, उसकी असली ताकत क्या है? क्या हम वाकई लोकतंत्र के राजा हैं, या सिर्फ 5 साल में एक दिन के लिए ‘इस्तेमाल’ किए जाने वाले लोग?

आज इस विशेष रिपोर्ट में हम बात करेंगे वोट की ताकत की, उन लोगों की जो राजनीति से नफरत करते हैं, और बंगाल (Bengal) जैसे राज्यों के उस अजीब सच की जहाँ वोट देना ‘अधिकार’ नहीं, बल्कि ‘जान जोखिम’ में डालना बन गया है।

Suppressing Voters in Bengal

“मुझे राजनीति में इंटरेस्ट नहीं”—यह सबसे बड़ी बेवकूफी है

आजकल के युवाओं का सबसे कॉमन डायलॉग है— “यार, पॉलिटिक्स गंदी है, मुझे इसमें कोई इंटरेस्ट नहीं है।”

अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो यह कड़वी बात सुन लीजिए: आप राजनीति में भाग लें या न लें, राजनीति आप में पूरी दिलचस्पी लेती है। जिस सड़क पर आप चलते हैं, उसका ठेका राजनीति तय करती है। जिस कॉलेज में आप पढ़ते हैं, उसकी फीस राजनीति तय करती है। आपकी गाड़ी का पेट्रोल और घर का राशन—सब कुछ राजनीति से जुड़ा है। अगर आप वोट नहीं देते, तो आपको शिकायत करने का भी कोई हक नहीं है। जब आप घर बैठते हैं, तो आप एक ‘गलत आदमी’ को चुनने में मदद कर रहे होते हैं।

प्लेटो ने कहा था— “राजनीति में भाग न लेने की सजा यह है कि आपको अपने से बुरे लोगों द्वारा शासित होना पड़ता है।”

5 साल के ‘नौकर’ और 1 दिन के ‘राजा’

हमारे लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना (Irony) यही है। जिस दिन चुनाव होता है, उस दिन बड़े से बड़ा नेता, जो 5 साल तक अपनी गाड़ी का शीशा नीचे नहीं करता, वो आपके पैरों में गिर जाता है। आपके सामने हाथ जोड़ता है, जाति-धर्म की दुहाई देता है, और दारू-मुर्गा भी बांटता है। क्यों? क्योंकि उसे पता है कि अगले 24 घंटे के लिए असली ‘बॉस’ आप हैं।

लेकिन सवाल यह है कि यह ताकत सिर्फ एक दिन क्यों?जैसे ही चुनाव खत्म होता है, वह नेता ‘राजा’ बन जाता है और जनता वापस ‘प्रजा’ बन जाती है। वोट की ताकत का यह असंतुलन हमें सोचना होगा। क्या हम सिर्फ एक दिन के मालिक हैं?

ECI chief Election commissioner -and others

बंगाल की हकीकत: जहाँ वोट देना ‘जुर्म’ बन जाता है

अब आते हैं सिक्के के दूसरे पहलू पर। हम कहते हैं “वोट देना हमारा हक है,” लेकिन क्या भारत के हर कोने में यह हक सुरक्षित है? पश्चिम बंगाल (West Bengal) के पिछले कुछ चुनावों को याद कीजिए। क्या मंजर था? वोट देने जाने वालों को डराया गया। चुनाव के बाद हिंसा (Post-Poll Violence) हुई, घर जलाए गए, और महिलाओं के साथ बदसलूकी हुई। पंचायत चुनावों में तो मतपेटियां (Ballot Boxes) तक तालाब में फेंक दी गईं।

यह कैसा लोकतंत्र है जहाँ अपनी मर्जी का बटन दबाने पर जान का खतरा हो? सिर्फ बंगाल ही नहीं, बिहार और यूपी के कई बाहुबली इलाकों में भी आज भी ‘साइलेंट कैप्चरिंग’ होती है। जब तक हर नागरिक बिना डरे वोट नहीं डाल सकता, तब तक National Voters’ Day की बधाई देना बेमानी है। प्रशासन और चुनाव आयोग (ECI) दावा करते हैं कि चुनाव निष्पक्ष हैं, लेकिन जब एक गरीब आदमी को डंडे के जोर पर वोट डालने से रोका जाता है, तो लोकतंत्र मर जाता है।

सुधार कैसे आएगा?

सिर्फ कमियां गिनाने से कुछ नहीं होगा। अगर हमें इस सिस्टम को सुधारना है, तो हमें अपनी एक दिन की ताकत को 5 साल की ताकत में बदलना होगा।

  • NOTA का सही इस्तेमाल: अगर आपको कोई कैंडिडेट पसंद नहीं है, तो घर मत बैठिए। बूथ पर जाइए और NOTA (None of the Above) दबाइए। यह नेताओं के मुंह पर तमाचा है कि “तुम में से कोई भी मेरे लायक नहीं है।”
  • सवाल पूछना सीखें: चुनाव के बाद अपने पार्षद/विधायक को सोशल मीडिया पर टैग करके सवाल पूछिए। उन्हें याद दिलाइए कि वो मालिक नहीं, सेवक हैं।
  • डर से आजादी: बंगाल हो या बिहार, गुंडागर्दी तब तक चलती है जब तक शरीफ आदमी चुप रहता है। जब पूरा मोहल्ला या पूरा गांव एक साथ खड़ा हो जाएगा, तो किसी बाहुबली की हिम्मत नहीं होगी।

अपना हक खुद मांगना सीखो

आज 25 जनवरी है। आज शपथ लीजिए कि चाहे धूप हो, बारिश हो या लंबी लाइन—अगले चुनाव में आप वोट जरूर डालेंगे। याद रखिए, आपकी उंगली पर लगी वह नीली स्याही (Ink) सिर्फ एक निशान नहीं है, वह इस देश के भ्रष्ट सिस्टम के खिलाफ आपका सबसे बड़ा हथियार है। अगर आप आज चूक गए, तो अगले 5 साल तक रोने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा।

जागो मतदाता, जागो!

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि भारत में ‘राइट टू रिकॉल’ (Right to Recall) यानी काम न करने पर नेता को हटाने का कानून होना चाहिए? कमेंट में अपनी राय जरूर दें।

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पूर्णिया में अतिक्रमण हटाने गए CO से भिड़ी पूर्व पार्षद की बेटी, जमकर हुई हाथापाई!

Purnea co photo

पूर्णिया: बिहार के पूर्णिया जिले में अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने सबको हैरान कर दिया। सरकारी जमीन को खाली कराने पहुँचे अंचलाधिकारी (CO) और पूर्व पार्षद की बेटी के बीच तीखी बहस देखते ही देखते हाथापाई में बदल गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए मुकदमा दर्ज कर लिया है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरी घटना पूर्णिया शहर के एक व्यस्त इलाके की है। नगर निगम की टीम पुलिस बल के साथ अवैध कब्जों को हटाने पहुँची थी। जैसे ही बुलडोजर ने अपना काम शुरू किया, स्थानीय लोग विरोध करने लगे। इसी बीच पूर्व पार्षद की बेटी रानी देवी वहां पहुँच गईं और कार्रवाई का विरोध करने लगीं।

रानी देवी का आरोप था कि प्रशासन बिना किसी पूर्व सूचना के उनके घर के सामने का हिस्सा तोड़ रहा है। बातचीत के दौरान मामला इतना बढ़ गया कि रानी देवी और अंचलाधिकारी (CO) के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। देखते ही देखते दोनों के बीच हाथापाई होने लगी, जिसे देख वहां मौजूद पुलिसकर्मी और लोग दंग रह गए।

CO aur purva parshad ki beti ke bich jhadap

सरकारी काम में बाधा और FIR

CO राकेश कुमार ने आरोप लगाया कि महिला ने न सिर्फ उनके साथ बदतमीजी की, बल्कि सरकारी काम में बाधा डालते हुए उन पर हमला भी किया। इस हंगामे के कारण अतिक्रमण हटाने का काम काफी देर तक रुका रहा। घटना के बाद CO ने स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने सरकारी कार्य में बाधा डालने और मारपीट की धाराओं के तहत पूर्व पार्षद की बेटी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है।

परिवार का पक्ष

दूसरी ओर, पूर्व पार्षद के परिवार का कहना है कि प्रशासन पक्षपात कर रहा है। उनका दावा है कि जिस जमीन को अतिक्रमण बताया जा रहा है, उसके कागजात उनके पास हैं। रानी देवी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अधिकारी उनकी बात सुनने को तैयार नहीं थे और महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिसके बचाव में उन्हें आगे आना पड़ा।

Purnea me atikarman htane ka kaam

शहर में चर्चा का विषय

पूर्णिया में इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे प्रशासन की मनमानी बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं है, चाहे वह रसूखदार परिवार से ही क्यों न हो।

प्रशासन की चेतावनी

जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान रुकने वाला नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि शहर को जाम मुक्त बनाने के लिए सड़कों के किनारे से अवैध कब्जे हटाना जरूरी है। जो भी व्यक्ति इस प्रक्रिया में बाधा डालेगा, उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल पुलिस इस मामले की बारीकी से जांच कर रही है और वायरल वीडियो के आधार पर गवाहों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। अब देखना यह है कि इस कानूनी लड़ाई में आगे क्या मोड़ आता है।

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बिहार सरकार का बड़ा तोहफा : ट्रैक्टर सहित 91 कृषि यंत्रों पर 90% तक की सब्सिडी, जानें आवेदन की पूरी प्रक्रिया

बिहार सरकार

बिहार कृषि यंत्रीकरण योजना 2025-26: बिहार के किसान भाइयों के लिए खेती को आधुनिक और मुनाफे का सौदा बनाने का सुनहरा मौका आ गया है। बिहार सरकार ने ‘कृषि यंत्रीकरण योजना 2025-26’ के तहत एक बहुत बड़ी घोषणा की है। इस योजना के जरिए अब छोटे से लेकर बड़े किसान तक, ट्रैक्टर और हार्वेस्टर जैसे महंगे कृषि यंत्र भारी छूट पर खरीद सकते हैं। सरकार ने इस बार कुल 91 प्रकार के यंत्रों को शामिल किया है, जिन पर 40% से लेकर 90% तक की भारी सब्सिडी दी जा रही है।

खेती में मशीनीकरण को बढ़ावा: क्यों खास है यह योजना?

बिहार कृषि विभाग का मुख्य उद्देश्य किसानों की मेहनत को कम करना और पैदावार को बढ़ाना है। अक्सर देखा जाता है कि महंगे उपकरण न होने के कारण किसान पुरानी तकनीक से खेती करते हैं, जिससे लागत बढ़ जाती है। इस योजना के आने से अब गरीब किसान भी आधुनिक मशीनों का मालिक बन सकेगा। के अनुसार, इस साल सब्सिडी का दायरा बढ़ा दिया गया है ताकि राज्य के हर कोने तक मशीनीकरण का लाभ पहुंच सके। इससे न केवल समय की बचत होगी, बल्कि फसल की बर्बादी भी कम होगी।

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91 प्रकार के यंत्रों की लिस्ट

इस योजना में केवल ट्रैक्टर ही नहीं, बल्कि खेती से जुड़े लगभग हर छोटे-बड़े यंत्र को शामिल किया गया है। में बताया गया है कि ट्रैक्टर पर जहां 40-50% तक की सब्सिडी है, वहीं फसल अवशेष प्रबंधन (जैसे स्ट्रॉ मैनेजमेंट) वाले यंत्रों पर 75% से 90% तक की छूट मिल रही है। मुख्य यंत्रों की सूची इस प्रकार है:

  • भारी यंत्र: ट्रैक्टर (20-50 HP), कम्बाइन हार्वेस्टर और स्ट्रॉ रीपर।
  • बुआई के यंत्र: सीड ड्रिल, जीरो टिलेज मशीन और पोटैटो प्लांटर।
  • निराई-गुड़ाई: पावर वीडर और ब्रश कटर।
  • अन्य: पंप सेट, स्प्रेयर मशीन और थ्रेशर।

खास बात यह है कि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के किसानों को सामान्य वर्ग के मुकाबले अधिक सब्सिडी दी जा रही है।

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आवेदन के लिए जरूरी पात्रता और दस्तावेज

अगर आप बिहार के स्थायी निवासी हैं और खेती से जुड़े हैं, तो आप इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। आवेदन करने के लिए किसान के पास ‘DBT Agriculture’ पोर्टल पर पंजीकरण होना अनिवार्य है। के मुताबिक, आवेदन के समय आपके पास निम्नलिखित दस्तावेज होने चाहिए:

  • किसान पंजीकरण संख्या (13 अंकों का)।
  • जमीन के नवीनतम कागजात (LPC या करंट रसीद)।
  • आधार कार्ड और मोबाइल नंबर (जो बैंक खाते से लिंक हो)।
  • बैंक पासबुक की फोटोकॉपी।
  • पासपोर्ट साइज फोटो।

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ऑनलाइन आवेदन कैसे करें? स्टेप-बाय-स्टेप गाइड

बिहार कृषि यंत्रीकरण योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। आप नीचे दिए गए स्टेप्स का पालन कर खुद भी फॉर्म भर सकते हैं:

  • सबसे पहले बिहार कृषि विभाग की आधिकारिक वेबसाइट dbtagriculture.bihar.gov.in पर जाएं।
  • वहां ‘कृषि यंत्रीकरण योजना’ के लिंक पर क्लिक करें।
  • अपना पंजीकरण नंबर डालें और लॉग-इन करें।
  • इसके बाद यंत्रों की सूची से उस मशीन का चयन करें जिसे आप खरीदना चाहते हैं।
  • मांगी गई सभी जानकारी और दस्तावेज सावधानीपूर्वक अपलोड करें और फॉर्म सबमिट करें।  के अनुसार, आवेदन जमा होने के बाद विभाग द्वारा परमिट जारी किया जाता है, जिसके बाद आप अधिकृत डीलर से सब्सिडी काट कर यंत्र खरीद सकते हैं।

बिहार कृषि यंत्रीकरण योजना 2025-26 किसानों के लिए एक जीवन बदलने वाली योजना साबित हो सकती है। आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और यह अक्टूबर 2026 तक चलेगी, लेकिन हमारा सुझाव है कि आप जल्द से जल्द आवेदन करें क्योंकि हर जिले का एक निर्धारित लक्ष्य (Target) होता है। सीट फुल होने के बाद आवेदन बंद हो सकते हैं। अधिक जानकारी के लिए आप अपने नजदीकी प्रखंड कृषि कार्यालय (BAO) से संपर्क कर सकते हैं या विभाग की हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं।

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अस्पताल में धुआं उड़ाते दिखे बाहुबली विधायक अनंत सिंह, वायरल वीडियो ने बिहार की राजनीति में मचाया हड़कंप

अनंत सिंह

बिहार की राजनीति में इन दिनों एक वीडियो ने भूचाल ला दिया है। जेल में बंद जदयू (JDU) के बाहुबली विधायक अनंत सिंह (Anant Singh) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है। इस वीडियो में विधायक जी पटना के IGIMS अस्पताल में सरेआम सिगरेट पीते नजर आ रहे हैं। इस घटना के बाद विपक्ष, खासकर आरजेडी (RJD), नीतीश सरकार पर हमलावर हो गई है।

क्या है पूरा मामला?

बेउर जेल में बंद मोकामा विधायक अनंत सिंह को नियमित स्वास्थ्य जांच (Check-up) के लिए पटना के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (IGIMS) लाया गया था। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि अस्पताल परिसर के भीतर, जहां ‘नो स्मोकिंग’ का सख्त नियम होता है, वहां विधायक अनंत सिंह बेफिक्र होकर सिगरेट के कश लगा रहे हैं।

अनंत सिंह

बता दें कि अनंत सिंह हत्या के मामले में सजा काट रहे हैं, लेकिन 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने जेल में रहते हुए भी मोकामा सीट से 28,260 वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी।

RJD ने उठाए गंभीर सवाल: “क्या यही है सुशासन?”

वीडियो वायरल होते ही राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने नीतीश सरकार की कानून-व्यवस्था और ‘सुशासन’ के दावों पर कड़े प्रहार किए हैं:

• प्रियंका भारती (RJD प्रवक्ता): उन्होंने वीडियो साझा करते हुए तंज कसा कि अनंत सिंह कानून और सुशासन को धुएं में उड़ा रहे हैं।

• एजाज अहमद (RJD नेता): उन्होंने सवाल किया कि “जो सरकार जीरो टॉलरेंस की बात करती है, वह अपने विधायक की इस वीआईपी (VIP) संस्कृति पर चुप क्यों है? क्या जेल के नियम सिर्फ आम जनता के लिए हैं?”

NDA और भाजपा की सफाई

मामले के तूल पकड़ने पर भाजपा प्रवक्ता कौशल कृष्ण ने इस घटना को “अस्वीकार्य और निंदनीय” बताया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में धूम्रपान करना नियमों का उल्लंघन है और अनंत सिंह को इसके लिए माफी मांगनी चाहिए। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक किसी बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की घोषणा नहीं की गई है।

अनंत सिंह

जनता में भारी आक्रोश

सोशल मीडिया पर आम लोग इस वीडियो को लेकर काफी नाराज हैं। यूजर्स का कहना है कि एक तरफ आम आदमी पर सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने पर जुर्माना लगाया जाता है, वहीं दूसरी तरफ एक सजायफ्ता विधायक अस्पताल जैसी संवेदनशील जगह पर कानून की धज्जियां उड़ा रहा है।

यह पहली बार नहीं है जब अनंत सिंह सुर्खियों में हैं, लेकिन अस्पताल के भीतर सिगरेट पीने के इस कृत्य ने बिहार की जेल प्रणाली और पुलिस अभिरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिया है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस पर कोई कड़ा संज्ञान लेता है या यह मामला भी राजनीति की भेंट चढ़ जाएगा।

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नितिन नवीन निर्विरोध बने बीजेपी के 12वें राष्ट्रीय अध्यक्ष, दिल्ली से लेकर बिहार तक जश्न

नितिन नवीन

भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में आज एक नए युग की शुरुआत हुई है। बिहार की राजनीति में अपनी धाक जमाने वाले दिग्गज नेता नितिन नवीन को आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का 12वां राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है। दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में हुई केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद यह स्पष्ट हो गया कि इस पद के लिए नितिन नवीन के सामने कोई अन्य उम्मीदवार मैदान में नहीं था, जिसके बाद उन्हें निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया।

नितिन नवीन

सर्वसम्मति से हुआ ऐतिहासिक फैसला

बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए हुआ यह चुनाव पार्टी की आंतरिक एकजुटता का बड़ा संदेश माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा थी कि इस बार मुकाबला कड़ा हो सकता है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की रणनीतिक सहमति के बाद नितिन नवीन के नाम पर मुहर लगा दी गई। पूर्व अध्यक्ष जेपी नड्डा के कार्यकाल की समाप्ति के बाद से ही एक ऐसे चेहरे की तलाश थी जो संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती दे सके। नितिन नवीन की निर्विरोध नियुक्ति यह दर्शाती है कि पार्टी का शीर्ष नेतृत्व और कार्यकर्ता उनके विजन पर पूरी तरह भरोसा करते हैं।

कौन हैं नितिन नवीन? बिहार से राष्ट्रीय फलक तक का सफर

नितिन नवीन का राजनीतिक सफर संघर्ष और सांगठनिक कौशल की मिसाल रहा है। बिहार विधानसभा में अपनी सक्रियता और युवा मोर्चा के अध्यक्ष के रूप में उनकी कार्यशैली ने उन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की नजरों में ला खड़ा किया। एक साफ-सुथरी छवि और कार्यकर्ताओं के बीच गहरी पैठ रखने वाले नवीन को बिहार में बीजेपी के विस्तार का एक मुख्य स्तंभ माना जाता है। जानकारों का कहना है कि उनकी नियुक्ति के पीछे पार्टी की ‘ईस्टर्न इंडिया’ यानी पूर्वी भारत में अपनी पकड़ को और अधिक मजबूत करने की सोची-समझी रणनीति है।

2027 लोकसभा चुनाव और आगामी चुनौतियां

नए अध्यक्ष के रूप में नितिन नवीन के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2027 के लोकसभा चुनाव हैं। उनके कंधों पर न केवल पार्टी के सदस्यता अभियान को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी है, बल्कि विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ (INDIA) की घेराबंदी का मुकाबला करने का भी बड़ा जिम्मा है। माना जा रहा है कि उनके नेतृत्व में बीजेपी युवाओं और महिलाओं को जोड़ने के लिए नए अभियान शुरू करेगी। नितिन नवीन ने पदभार ग्रहण करने के संकेतों के साथ ही यह स्पष्ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता संगठन को डिजिटल और जमीनी दोनों स्तरों पर अजेय बनाना है।

विपक्ष का वार और समर्थकों का उत्साह

नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर बधाई देने वालों का तांता लग गया है। जहां बीजेपी समर्थक इसे ‘युवा नेतृत्व का उदय’ बता रहे हैं, वहीं विपक्षी दलों ने इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस और आरजेडी जैसे दलों ने इसे पार्टी के भीतर का आंतरिक फैसला बताते हुए कटाक्ष किया है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नितिन नवीन की नियुक्ति से आगामी विधानसभा चुनावों और 2027 के महाकुंभ के लिए बीजेपी ने अपनी बिसात बिछा दी है।

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Manoj Tiwari Theft: रात के 9 बजे CCTV ने उगला वो ‘काला सच’, जिसे देख सांसद के पैरों तले जमीन खिसक गई!

Manoj Tiwari

कहते हैं कि इंसान बाहर की दुनिया से लड़ सकता है, दुश्मनों का सामना कर सकता है, लेकिन जब वार ‘घर के अंदर’ से हो, तो बड़े-बड़े शूरवीर भी टूट जाते हैं। भोजपुरी सुपरस्टार और बीजेपी सांसद मनोज तिवारी (Manoj Tiwari) के साथ मुंबई में कुछ ऐसा ही हुआ है। उनके घर में चोरी हुई, लेकिन यह खबर पैसों के जाने की नहीं, बल्कि उस ‘भरोसे’ के कत्ल की है, जो उन्होंने अपने एक पुराने कर्मचारी पर किया था।

15 जनवरी की रात, जब पूरा शहर अपनी रफ्तार में था, मनोज तिवारी के घर की चारदीवारी के अंदर एक ऐसी साजिश का पर्दाफाश हो रहा था, जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। 5 लाख 40 हजार रुपये की चोरी का इल्जाम जिस शख्स पर लगा है, वो कोई पेशेवर अपराधी नहीं, बल्कि तिवारी परिवार का ‘अपना’ माना जाने वाला सुरेंद्र कुमार है।

दिसंबर की वो पहेली: जब हवा में गायब होने लगे पैसे

यह कहानी 15 जनवरी को शुरू नहीं हुई। इसकी पटकथा पिछले साल दिसंबर (2025) में ही लिखी जा रही थी। मनोज तिवारी के मैनेजर, प्रमोद जोगेंदर पांडेय, पिछले कुछ हफ्तों से बेहद परेशान थे। घर की दराजों में रखे पैसे रहस्यमयी तरीके से गायब हो रहे थे।

कभी 10 हजार, कभी 50 हजार… देखते ही देखते 4 लाख 40 हजार रुपये गायब हो चुके थे। सबसे अजीब बात यह थी कि न तो घर का ताला टूटा था, न ही खिड़कियों से कोई छेड़छाड़ हुई थी। ऐसा लगता था जैसे कोई ‘अदृश्य साया’ घर में आता है और सफाई से हाथ साफ करके चला जाता है। शक की सुई कई लोगों पर घूमी, लेकिन बिना सबूत के किसी अपने पर उंगली उठाना मनोज तिवारी जैसे दरियादिल इंसान के लिए मुश्किल था।

आखिरकार, इस ‘चोर’ को रंगे हाथों पकड़ने के लिए एक जाल बिछाया गया। घर के अंदर चुपचाप CCTV कैमरे इंस्टॉल कर दिए गए। घर के लोगों और कर्मचारियों को शायद इसका आभास भी नहीं था कि अब उनकी हर हरकत रिकॉर्ड हो रही है।

Manoj tiwari sansad

15 जनवरी: रात 9 बजे का वो खौफनाक फुटेज

इंतजार की घड़ियां खत्म हुईं 15 जनवरी 2026 की रात को। मैनेजर प्रमोद पांडेय और सिक्योरिटी टीम की नजरें सीसीटीवी मॉनिटर पर थीं। घड़ी में रात के 9 बज रहे थे। तभी स्क्रीन पर एक हलचल हुई।

एक शख्स घर के अंदर दाखिल हुआ। उसकी चाल में कोई डर नहीं था। उसे पता था कि कौन सा दरवाजा कैसे खुलता है। जैसे ही उसका चेहरा कैमरे की रोशनी में आया, देखने वालों के होश उड़ गए। वो सुरेंद्र कुमार था—मनोज तिवारी का पूर्व कर्मचारी।

फुटेज में जो दिखा, वो रोंगटे खड़े करने वाला था। सुरेंद्र के पास घर के मेन गेट की चाबी तो थी ही, लेकिन हद तो तब हो गई जब उसने अपनी जेब से बेडरूम और कपाट (लॉकर) की भी चाबियां निकाल लीं। वो असली चाबियां नहीं थीं, वो ‘डुप्लीकेट चाबियां’ थीं।

यह दृश्य देखकर यह समझना मुश्किल नहीं था कि सुरेंद्र ने यह चोरी अचानक नहीं की। उसने महीनों पहले ही यह पूरी साजिश रच ली थी। शायद जब वह नौकरी पर था, तभी उसने चाबियों के सांचे ले लिए थे और डुप्लीकेट चाबियां बनवा ली थीं। वह बस सही मौके का इंतजार कर रहा था।

मजबूरी का नाम देकर ‘लालच’ का खेल

अक्सर जब किसी गरीब कर्मचारी पर चोरी का इल्जाम लगता है, तो समाज का एक तबका सहानुभूति रखता है। लोग सोचते हैं— “शायद कोई मजबूरी रही होगी, शायद घर में कोई बीमार होगा।”

लेकिन सुरेंद्र का यह अपराध ‘मजबूरी’ की परिभाषा में फिट नहीं बैठता। पुलिस सूत्रों की मानें तो यह ‘लालच’ (Greed) का मामला है।

सोचिए, अगर किसी को सच में पैसों की सख्त जरूरत होती, तो वह मनोज तिवारी जैसे व्यक्ति के सामने हाथ फैला सकता था। तिवारी अपनी उदारता के लिए जाने जाते हैं, वे मदद जरूर करते। लेकिन सुरेंद्र ने मांगने का नहीं, छीनने का रास्ता चुना।

उसने एक बार में सारे पैसे नहीं चुराए। वह किस्तों में चोरी करता रहा ताकि किसी को शक न हो। यह एक शातिर अपराधी का दिमाग है, मजबूर इंसान का नहीं। उसने उस थाली में छेद किया, जिसमें उसने खाया था।

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पुलिस की एंट्री और टूटा हुआ विश्वास

सच्चाई सामने आते ही मैनेजर प्रमोद पांडेय ने एक पल की भी देरी नहीं की। मामला तुरंत अंबोली पुलिस थाने (Amboli Police Station) पहुँचा। सबूत के तौर पर वो सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंप दिया गया है, जिसमें सुरेंद्र की काली करतूत कैद है।

पुलिस ने आईपीसी (अब बीएनएस) की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। कुल मिलाकर 5 लाख 40 हजार रुपये की चोरी की पुष्टि हुई है। पुलिस अब सुरेंद्र की तलाश कर रही है और उससे यह उगलवाने की कोशिश करेगी कि क्या इस साजिश में घर का कोई और भेदी भी शामिल है? क्या उसने वो डुप्लीकेट चाबियां किसी और को भी दी हैं?

एक सबक हम सबके लिए

मनोज तिवारी के पैसे शायद पुलिस बरामद कर लेगी। 5 लाख रुपये उनके लिए बड़ी रकम नहीं हो सकती, लेकिन जो ‘भरोसा’ इस घटना ने तोड़ा है, उसकी भरपाई कभी नहीं हो सकती।

यह घटना हम और आप जैसे आम लोगों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है। हम अक्सर पुराने नौकरों, ड्राइवरों या कर्मचारियों पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं। हम घर की चाबियां मेज पर छोड़ देते हैं। लेकिन याद रखिए, इंसान की नीयत बदलते देर नहीं लगती।

अगर आपके घर से कोई कर्मचारी काम छोड़ कर जा रहा है, तो भावुक होने के बजाय व्यावहारिक बनें। घर के ताले बदल दें। क्योंकि सावधानी ही सुरक्षा है। सुरेंद्र जैसा ‘अपना’ कब ‘पराया’ हो जाए, यह सीसीटीवी लगने तक पता नहीं चलता।

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बिहार में 26 जनवरी से जमीन मापी का मेगा अभियान : विवादित-अविवादित प्लॉट्स की 14 दिनों में ऑनलाइन रिपोर्ट, राजस्व विभाग की बड़ी पहल

जमीन मापी

बिहार में 26 जनवरी से जमीन मापी का मेगा अभियान : बिहार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने गणतंत्र दिवस से ठीक पहले एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। 26 जनवरी 2026 से राज्यव्यापी विशेष अभियान शुरू होगा, जिसमें विवादित और अविवादित दोनों जमीनों की मापी की जाएगी। यह कार्य 14 दिनों के अंदर पूरा कर रिपोर्ट ऑनलाइन जारी की जाएगी। यह कदम भूमि विवादों को कम करने और पारदर्शी राजस्व प्रणाली सुनिश्चित करने की दिशा में बहुत अच्छा साबित होगा।

अभियान का उद्देश्य: भूमि विवादों पर लगाम

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अनुसार, यह अभियान बिहार के हर जिले में एक साथ चलेगा। विवादित जमीनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां मालिकाना हक को लेकर लंबे समय से झगड़े चल रहे हैं। अविवादित प्लॉट्स की मापी से रिकॉर्ड को अपडेट किया जाएगा, ताकि भविष्य में कोई असमंजस न रहे। विभाग के सचिव ने कहा, “यह अभियान डिजिटल इंडिया के अनुरूप है। सभी रिपोर्टें ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध होंगी, जिससे आम लोग घर बैठे जांच सकेंगे।”

जमीन मापी

अभियान की समयसीमा सख्त है—मापी का काम शुरू होते ही 14 दिनों में रिपोर्ट अपलोड हो जाएगी। इससे न केवल समय बचेगा, बल्कि भ्रष्टाचार की गुंजाइश भी कम होगी। पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर जैसे जिलों में पायलट प्रोजेक्ट सफल होने के बाद इसे पूरे राज्य में विस्तार दिया जा रहा है।

कैसे होगा अभियान ?

  • प्रथम चरण (26 जनवरी से): टीमों का गठन और जमीनों की सूची तैयार।
  • द्वितीय चरण: GPS-आधारित मापी और ड्रोन सर्वे का उपयोग।
  • अंतिम चरण (14 दिनों में): रिपोर्ट ऑनलाइन जारी, आपत्ति दर्ज करने का अवसर।

विभाग ने 5000 से अधिक कर्मचारियों की टीमें तैयार की हैं। ड्रोन और सैटेलाइट इमेजरी से मापी की सटीकता बढ़ेगी।

जमीन मापी

जनता को लाभ:

किसान और भूमि मालिकों में उत्साह है। एक पटना के किसान ने बताया, “लंबे समय से जमीन विवाद में फंसे हैं। यह अभियान राहत देगा।” विशेषज्ञों का कहना है कि इससे कोर्ट केस 30% कम हो सकते हैं। सरकार ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है, जहां लोग अपनी जमीन की स्थिति चेक कर सकेंगे।

यह अभियान बिहार में भूमि सुधार की नई क्रांति लाएगा और क्या यह विवादों को हमेशा के लिए खत्म कर पाएगा? आप कमेंट्स में बता सकते है|

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