क्या आपको कोरोना का वह भयानक दौर याद है? जब हम और आप घरों में बंद थे, तब डॉक्टर्स अपनी जान की परवाह किए बिना अस्पतालों में ‘देवदूत’ बनकर खड़े थे। दुख की बात यह है कि इस जंग में कई डॉक्टर्स ने अपनी जान गंवा दी। लेकिन जब मुआवजे की बात आई, तो कई प्राइवेट डॉक्टर्स (Private Doctors) के परिवारों को नियमों का हवाला देकर खाली हाथ लौटा दिया गया।
लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जिसने हजारों परिवारों को ‘इंसाफ’ की उम्मीद दी है। आइए जानते हैं क्या है यह पूरा मामला और कोर्ट ने अपने फैसले में क्या कहा।
सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: भेदभाव नहीं, सम्मान मिलेगा
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कोविड ड्यूटी (Covid Duty) के दौरान जान गंवाने वाले डॉक्टर्स, चाहे वे सरकारी हों या प्राइवेट, उनके परिवार 50 लाख रुपये के बीमा (Insurance Compensation) के हकदार हैं।

कोर्ट ने कहा कि कोरोना जैसी महामारी के दौरान प्राइवेट डॉक्टर्स ने भी उसी शिद्दत से सेवा की है जैसे सरकारी डॉक्टर्स ने। इसलिए, मुआवजे के समय उनके साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता।
बीमा कंपनियों की मनमानी पर लगाम
अक्सर देखा गया था कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज (PMGKP) के तहत जब प्राइवेट डॉक्टर्स के परिवार क्लेम करते थे, तो बीमा कंपनियां या प्रशासन “तकनीकी खामियों” का हवाला देकर क्लेम रिजेक्ट कर देते थे।
सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा : “कल्याणकारी योजनाओं का मकसद पीड़ित परिवारों को सहारा देना है, न कि तकनीकी आधार पर उन्हें उनके हक से वंचित करना। अगर डॉक्टर ड्यूटी पर था और कोविड से उसकी जान गई, तो परिवार को पैसा मिलना चाहिए।”
इस फैसले की 4 बड़ी बातें जो आपको जाननी चाहिए
- प्राइवेट डॉक्टर्स भी शामिल: अब यह बहस खत्म हो गई है कि डॉक्टर सरकारी पे-रोल पर था या नहीं। अगर उसने कोविड वार्ड या ड्यूटी के दौरान काम किया है, तो वह कवर होगा।
- कागजी अड़चनें खत्म: कोर्ट ने कहा है कि दस्तावेजों की कमी या छोटी-मोटी तकनीकी वजहों से क्लेम नहीं रोका जाएगा।
- समानता का अधिकार: कोर्ट ने माना कि वायरस यह देखकर हमला नहीं करता कि डॉक्टर सरकारी है या प्राइवेट, तो फिर सरकार भेदभाव क्यों करे?
- बीमा राशि: यह राशि 50 लाख रुपये है, जो पीड़ित परिवार के भविष्य के लिए एक बड़ा सहारा बनेगी।

यह फैसला क्यों जरूरी था?
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के मुताबिक, कोविड की दोनों लहरों में सैकड़ों डॉक्टर्स शहीद हुए थे। इनमें से बड़ी संख्या प्राइवेट प्रैक्टिशनर्स की थी जिन्होंने अपने क्लीनिक बंद कर सरकारी सिस्टम का साथ दिया था। यह फैसला उन परिवारों के लिए सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि उस ‘बलिदान का सम्मान’ है।
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला न केवल एक कानूनी जीत है, बल्कि यह मानवता की जीत है। यह संदेश देता है कि देश अपने ‘कोरोना वॉरियर्स’ के बलिदान को भूला नहीं है। अगर आपके संपर्क में भी ऐसा कोई परिवार है जिसे क्लेम नहीं मिला था, तो उन तक यह खबर जरूर पहुंचाएं।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q: क्या यह फैसला सिर्फ सरकारी डॉक्टरों के लिए है?
A: नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि कोविड ड्यूटी पर तैनात प्राइवेट डॉक्टर्स भी इसके हकदार हैं।
Q: मुआवजे की राशि कितनी है?
A: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज के तहत 50 लाख रुपये।
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