राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर से बड़े आंदोलनों का अखाड़ा बन चुकी है। 20 जुलाई 2026 से ही दिल्ली की सड़कों पर भारी तनाव का माहौल है। एक तरफ देश के युवा और छात्र नीट (NEET) पेपर लीक और शिक्षा प्रणाली में हुई गड़बड़ियों के खिलाफ अपना गुस्सा निकाल रहे हैं, तो वहीं दूसरी तरफ पंजाब और अन्य राज्यों से हजारों किसान आज यानी 21 जुलाई 2026 को ‘देश बचाओ आंदोलन’ के तहत दिल्ली कूच कर चुके हैं। यह दोनों बड़े मोर्चे सिस्टम के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन गए हैं। Apni Vani आज आपके लिए इन दोनों महा-आंदोलनों की एकदम सटीक और ग्राउंड ज़ीरो की आधिकारिक रिपोर्ट लेकर आया है।
नीट (NEET) पेपर लीक और छात्रों का जंतर-मंतर पर कब्ज़ा
छात्रों के आंदोलन की आग तब भड़की जब 2026 की नीट-यूजी (NEET-UG) मेडिकल प्रवेश परीक्षा के पेपर लीक और सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग में भारी अनियमितताएं सामने आईं। इसके विरोध में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और युवाओं के नेतृत्व में हजारों छात्रों ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर डेरा डाल दिया। छात्रों की सबसे बड़ी और मुख्य मांग यह है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें।
इसके अलावा, प्रदर्शनकारी इस पेपर लीक के तनाव में आत्महत्या करने वाले हर छात्र के परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की भी मांग कर रहे हैं। इस आंदोलन का समर्थन कर रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को भी दिल्ली पुलिस ने 18 जुलाई को उनकी भूख हड़ताल के 21वें दिन जबरन अस्पताल में भर्ती करा दिया था।
संसद मार्च पर पुलिस का लाठीचार्ज और भयानक झड़प
सोमवार को हालात तब बेकाबू हो गए जब दस हजार से ज्यादा छात्रों की भीड़ ने संसद भवन की तरफ मार्च करने की कोशिश की। दिल्ली पुलिस ने इस मार्च को रोकने के लिए भारी बैरिकेडिंग की हुई थी, और पूरे इलाके में मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया था। जब छात्रों ने बैरिकेड्स पार करने का प्रयास किया, तो पुलिस को उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले दागने पड़े और हल्का बल प्रयोग भी करना पड़ा।
इस भयानक झड़प में 50 से ज्यादा प्रदर्शनकारी और कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने जंतर-मंतर पर बने प्रदर्शनकारियों के मंच को भी तोड़ दिया था, जिसे छात्रों ने रात में फिर से अपने कब्ज़े में ले लिया।
किसानों का ‘देश बचाओ आंदोलन’ और दिल्ली कूच
छात्रों का आंदोलन अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब किसानों ने एक नए मोर्चे से सिस्टम की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। किसान मजदूर संघर्ष समिति के नेता सरवन सिंह पंधेर की अगुवाई में 550 से अधिक किसान यूनियनों ने आज 21 जुलाई को दिल्ली के किसान घाट पर एक महा-रैली का ऐलान किया है। इस रैली को ‘देश बचाओ मोर्चा‘ का नाम दिया गया है। इससे पहले 15 जुलाई को किसानों ने पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में मोटरसाइकिल रैलियां निकालकर अपना शक्ति प्रदर्शन किया था।
अब पंजाब के ब्यास से सैकड़ों किसान बसों और ट्रैक्टरों के काफिले में शंभू बॉर्डर होते हुए दिल्ली पहुँच रहे हैं। इस आंदोलन में पंजाब के अलावा हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के किसान भी बड़ी संख्या में हिस्सा ले रहे हैं।

आखिर क्यों फिर से सड़क पर उतरे हैं किसान?
किसानों के इस नए आक्रोश की मुख्य वजह प्रस्तावित ‘भारत-अमेरिका व्यापार समझौता’ है। किसान नेताओं का स्पष्ट आरोप है कि इस विदेशी समझौते से भारतीय कृषि, डेयरी सेक्टर, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली और छोटे व्यापारियों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। किसानों का मजबूत तर्क है कि अमेरिका में भारी सब्सिडी वाले कृषि और डेयरी उत्पाद आसानी से भारतीय बाज़ारों में भर जाएंगे, जिससे हमारे देश के छोटे और सीमांत किसानों की आय पूरी तरह से खत्म हो जाएगी। किसान यह भी मांग कर रहे हैं कि सरकार इस व्यापार समझौते से जुड़े सभी दस्तावेज़ सार्वजनिक करे और किसी भी फैसले से पहले सभी हितधारकों से विस्तृत चर्चा करे।
सिस्टम के सामने दोहरी चुनौती
वर्तमान स्थिति यह है कि दिल्ली की सीमाओं और मध्य हिस्से में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। एक ओर देश का युवा अपनी शिक्षा, निष्पक्ष परीक्षा और भविष्य की सुरक्षा के लिए सड़कों पर आंसू गैस के गोले झेल रहा है, और दूसरी ओर अन्नदाता अपने हक़ और कृषि अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए फिर से संघर्ष कर रहा है।
अब आप बेबाक होकर बताइये: क्या सरकार को शिक्षा मंत्री का इस्तीफा ले लेना चाहिए और किसानों के साथ होने वाले इस अमेरिकी व्यापार समझौते पर पुनर्विचार करना चाहिए? अपनी राय हमें नीचे कमेंट्स में ज़रूर दें!
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