नन्हे सिरों की सुरक्षा का ‘Ather’ प्रॉमिस: बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस को गिफ्ट किए 100 बच्चों के हेलमेट!

बेंगलुरु की सड़कों पर अब नन्हे सवार ज्यादा सुरक्षित नजर आएंगे। हाल ही में, भारत की जानी-मानी इलेक्ट्रिक स्कूटर निर्माता कंपनी Ather Energy ने एक नेक पहल करते हुए बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस को 100 जूनियर हेलमेट दान किए हैं। यह कदम ‘नेशनल रोड सेफ्टी मंथ’ के तहत उठाया गया है, ताकि बच्चों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।

छोटे बच्चों के लिए बड़ा कदम

अक्सर देखा जाता है कि माता-पिता खुद तो हेलमेट पहन लेते हैं, लेकिन पीछे बैठे बच्चों की सुरक्षा को नजरअंदाज कर देते हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए Ather ने अपने खास ISI-सर्टिफाइड जूनियर हेलमेट पुलिस को सौंपे हैं। ये हेलमेट वजन में हल्के हैं लेकिन मजबूती में अव्वल, ताकि बच्चों को इन्हें पहनने में बोझ न लगे और वे सुरक्षित भी रहें।

Ather helmet
Ather

क्या यह सिर्फ एक ‘TRP’ स्टंट है?

आजकल जब भी कोई बड़ी कंपनी ऐसा कुछ करती है, तो मन में सवाल आता है कि क्या यह सिर्फपब्लिसिटी के लिए है? लेकिन अगर गहराई से देखें, तो इसके पीछे की मंशा साफ नजर आती है:

  • सच्चा प्रयास: यह दान किसी रैंडम मार्केटिंग कैंपेन का हिस्सा नहीं था, बल्कि ‘रोड सेफ्टी मंथ’ के तहत एक जिम्मेदार कॉर्पोरेट नागरिक की भूमिका निभाना था।
  • दिखावा नहीं, जरूरत: बेंगलुरु जैसे शहर में, जहां ट्रैफिक और दुर्घटनाएं आम हैं, बच्चों के लिए हेलमेट की उपलब्धता बहुत कम है। Ather ने उसी गैप को भरने की कोशिश की है।
  • कोई फिल्मी ड्रामा नहीं: हाल ही में बेंगलुरु में ‘AI हेलमेट’ वाले टेक-एक्सपर्ट की खबरें काफी वायरल हुई थीं, लेकिन Ather का यह कदम बिना किसी शोर-शराबे के जमीनी स्तर पर सुरक्षा सुधारने वाला है। इसमें कोई ‘प्रमोशनल डिस्काउंट’ या सेल्स पिच नहीं थी, सिर्फ सुरक्षा का संदेश था।
Ather helmet
Ather

ट्रैफिक पुलिस कैसे करेगी इस्तेमाल?

बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस इन हेलमेट्स को उन परिवारों को बांटेगी जो अक्सर अपने बच्चों के साथ सफर करते हैं लेकिन सुरक्षा के साधनों की कमी रखते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य चालान काटना नहीं, बल्कि लोगों को यह समझाना है कि “सुरक्षा हर उम्र के लिए जरूरी है।”

हमारा नजरिया

सड़क सुरक्षा सिर्फ सरकार या पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। जब Ather जैसे ब्रांड्स आगे बढ़कर ऐसी पहल करते हैं, तो समाज में एक सकारात्मक संदेश जाता है। उम्मीद है कि इस पहल के बाद बेंगलुरु के माता-पिता अपने बच्चों के लिए हेलमेट खरीदना अपनी प्राथमिकता बनाएंगे।

अगली बार जब आप अपने बच्चे के साथ स्कूटर पर निकलें, तो याद रखें: उनका सिर भी उतना ही कीमती है जितना आपका।

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