Holashtak Scientific Reason: होलाष्टक में शुभ काम क्यों हैं वर्जित? जानिए इसके पीछे के 2 बड़े धार्मिक और वैज्ञानिक रहस्य

होली का नाम सुनते ही दिमाग में रंग, गुझिया और मस्ती का ख्याल आता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतने बड़े और खुशियों वाले त्योहार से ठीक 8 दिन पहले अचानक बड़े-बुजुर्ग हमें हर शुभ काम करने से क्यों रोक देते हैं?

हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन शुक्ल अष्टमी से लेकर होलिका दहन तक के 8 दिनों को ‘होलाष्टक’ कहा जाता है। आज (24 फरवरी 2026) से होलाष्टक शुरू हो चुके हैं। इन दिनों में शादी, गृह प्रवेश या कोई भी नया बिजनेस शुरू करने की सख्त मनाही होती है। आज ‘ApniVani’ के इस विशेष लेख में हम सिर्फ डराने वाली पुरानी कहानियां नहीं, बल्कि इसका डीप एनालिसिस करेंगे। आइए जानते हैं होलाष्टक (Holashtak) के पीछे का धार्मिक डर और इसका असली वैज्ञानिक ‘तर्क’ (Scientific reason)।

Holashtak religious reasons
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धर्म की नज़र से: 8 दिन का खौफ और यातनाएं

पौराणिक कथाओं में होलाष्टक को नकारात्मकता और कष्ट का समय माना गया है। इसके पीछे दो सबसे बड़ी मान्यताएं हैं:

  • भक्त प्रह्लाद की यातनाएं: मान्यता है कि हिरण्यकश्यप ने अपने ही बेटे भक्त प्रह्लाद को भगवान विष्णु की भक्ति से रोकने के लिए इन्ही 8 दिनों तक लगातार भयानक यातनाएं (Torture) दी थीं। आठवें दिन होलिका उसे अपनी गोद में लेकर आग में बैठी थी।
  • कामदेव का भस्म होना: दूसरी कथा के अनुसार, जब शिवजी गहरी तपस्या में लीन थे, तब कामदेव ने उनका ध्यान भटकाने की कोशिश की थी। क्रोध में आकर भगवान शिव ने अपना तीसरा नेत्र खोला और फाल्गुन अष्टमी के दिन ही कामदेव को भस्म कर दिया था। प्रकृति में उस वक्त एक शोक की लहर दौड़ गई थी।

इन्हीं दुखद घटनाओं के कारण हिंदू धर्म में इन 8 दिनों को शुभ कार्यों के लिए वर्जित मान लिया गया।

Holashtak Scientific Reason
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विज्ञान का ‘तर्क’: आखिर क्यों कहा गया ‘घर में रहो’?

अब आते हैं असली मुद्दे पर! हमारे पूर्वज बहुत बड़े वैज्ञानिक थे। उन्होंने धर्म के नाम पर जो नियम बनाए, उनके पीछे गहरा विज्ञान छिपा था।

  • ऋतु संधि (Weather Transition): होलाष्टक का यह वो समय होता है जब सर्दियां पूरी तरह से जा रही होती हैं और गर्मियां शुरू हो रही होती हैं। विज्ञान की भाषा में इसे ‘ऋतु संधि’ (Ritu Sandhi) कहते हैं।
  • बीमारियों का हाई-रिस्क: इस मौसम में तापमान के अचानक बदलने से हमारे शरीर की इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) सबसे ज्यादा कमजोर होती है। इसी समय हवा में चिकनपॉक्स (Mata), खसरा और वायरल इन्फेक्शन के बैक्टीरिया सबसे तेजी से पनपते हैं।
  • भीड़ से बचाने की रणनीति: जरा सोचिए, अगर होलाष्टक के इन 8 दिनों में शादियां या बड़े आयोजन होते, तो हजारों की भीड़ जमा होती। ऐसे में एक इंसान से दूसरे इंसान में वायरल बीमारियां जंगल की आग की तरह फैलतीं। इसलिए हमारे पूर्वजों ने ‘अशुभ’ का डर दिखाकर इन दिनों में भीड़ जुटाने (विवाह/गृह प्रवेश) और बिना वजह घर से बाहर निकलने पर रोक लगा दी।
Planets and mental pressure during Holashtak
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मानसिक प्रभाव: ग्रहों की चाल या डिप्रेशन?

सिर्फ शारीरिक ही नहीं, यह मौसम हमारे दिमाग पर भी असर डालता है। ज्योतिष कहता है कि होलाष्टक में सूर्य, चंद्रमा, मंगल सहित 8 ग्रह उग्र (Aggressive) अवस्था में होते हैं।

अगर हम इसे मेडिकल साइंस से जोड़ें, तो सर्दियों के खत्म होने पर शरीर में ‘सेरोटोनिन’ (Serotonin) और ‘मेलाटोनिन’ हार्मोन्स का बैलेंस बिगड़ता है। इससे इंसान के स्वभाव में चिड़चिड़ापन, थकान और उदासी (Seasonal Affective Disorder) आती है। ऐसे बिगड़े हुए मूड में कोई बड़ा फैसला (जैसे बिजनेस डील या शादी) लिया जाए, तो उसके खराब होने के चांस ज्यादा होते हैं।

Prahalad and Lord Narsimha - Holashtak Scientific Reasons

ApniVani की बात(Conclusion)

होलाष्टक कोई अंधविश्वास नहीं है, बल्कि बदलते मौसम में खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से सुरक्षित रखने का एक बेहतरीन ‘मेडिकल अलर्ट’ (Medical Alert) है। धर्म ने इसे कहानियों में इसलिए पिरोया ताकि आम इंसान भी डर की वजह से ही सही, लेकिन इन स्वास्थ्य नियमों का पालन करे। इन 8 दिनों में शांत रहें, अपनी सेहत का ध्यान रखें और होली की तैयारियों पर फोकस करें!

आपकी राय: क्या आप होलाष्टक के इस वैज्ञानिक कारण से सहमत हैं? या आपके इलाके में इसके पीछे कोई और मान्यता है? हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आएं और इस मुद्दे पर हमारे साथ चर्चा करें।

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