Invention of Clock: जानिए आपके घर के घड़ी की 5 सबसे रोचक कहानियां ! समय बताने वाली मशीन का पूरा सफर

आजकल हम दिन भर में 100 बार अपनी कलाई या मोबाइल पर समय देखते हैं। जरा सोचिए, अगर घड़ी का आविष्कार (Invention of Clock) ही न हुआ होता, तो क्या होता? न ऑफिस पहुंचने की टेंशन होती, न रेलवे स्टेशन पर ट्रेन छूटने का डर, और न ही कोई बॉस आपको “लेट क्यों आए?” कहकर डांट पाता!

लेकिन इंसानी दिमाग को ‘जुगाड़’ की आदत है। समय को बांधने और नापने की यह खुजली आज की नहीं, बल्कि हजारों साल पुरानी है। आज ‘ApniVani’ के इस टेक और हिस्ट्री ब्लॉग में हम जानेंगे कि आखिर यह घड़ी किसने बनाई, दीवार घड़ी से कलाई घड़ी (Handwatch) तक का सफर कैसे तय हुआ, और भविष्य में हम समय कैसे देखेंगे। तैयार हो जाइए इस टाइम-ट्रैवल के लिए!

शुरुआत: जब सूरज चाचा और पानी बताते थे समय

हजारों साल पहले जब कोई मशीन नहीं थी, तो लोग आसमान की तरफ देखकर टाइम पास… मेरा मतलब है, टाइम का पता लगाते थे।

  • धूप घड़ी (Sun Dial): मिस्र (Egypt) के लोगों ने सबसे पहले धूप घड़ी बनाई। एक खंभा गाड़ दिया जाता था, और उसकी परछाई जिस तरफ जाती, लोग समय का अंदाजा लगा लेते थे। लेकिन इसमें एक तगड़ा मजाक था—अगर बादल छा गए या रात हो गई, तो समय देखना बंद!
  • जल घड़ी और रेत घड़ी: इस ‘बादल वाली’ समस्या को सुलझाने के लिए पानी की घड़ी (Clepsydra) और रेत घड़ी (Hourglass) आई। एक बर्तन से दूसरे बर्तन में पानी या रेत गिरने की रफ्तार से समय नापा जाता था।

Wall watch - Invention Of Clock

पहली मैकेनिकल और दीवार घड़ी: पादरियों की नींद का जुगाड़

13वीं और 14वीं सदी में यूरोप के मठों (Monasteries) में भिक्षुओं और पादरियों को एक बड़ी समस्या आ रही थी। उन्हें दिन में कई बार फिक्स टाइम पर प्रार्थना करनी होती थी, जिसके लिए उन्हें नींद से उठना पड़ता था। यहीं से मैकेनिकल घड़ियों का जन्म हुआ। ये घड़ियां बहुत बड़ी होती थीं और इनमें सूई नहीं, बल्कि सिर्फ घंटी बजती थी।

बाद में साल 1656 में क्रिश्चियन हाइगेंस (Christiaan Huygens) ने ‘पेंडुलम घड़ी’ (Pendulum Clock) का आविष्कार किया, जिसे हम आज दीवार घड़ी (Wall Clock) के रूप में जानते हैं। यही वो पहली घड़ी थी जो एकदम सटीक समय बताने लगी थी।

Pocket Watch - Invention Of Clock

पॉकेट वॉच का जन्म: पीटर हेनलीन (Peter Henlein)

दीवार घड़ियां तो बन गईं, लेकिन उन्हें आप अपनी जेब में लेकर नहीं घूम सकते थे। साल 1505 में जर्मनी के एक ताला बनाने वाले कारीगर पीटर हेनलीन (Peter Henlein) ने कमाल कर दिया। उन्होंने दुनिया की पहली पोर्टेबल घड़ी बनाई, जिसे “Nuremberg Egg” कहा गया।

यह घड़ी पॉकेट वॉच जैसी थी। उस जमाने में इसे पास रखना किसी ‘आईफोन’ (iPhone) से कम नहीं माना जाता था। सिर्फ रईस लोग ही अपनी जेब में सोने की जंजीर वाली घड़ी लटकाकर भौकाल टाइट करते थे।

Wrist Watch - Invention Of Clock

कलाई घड़ी (Handwatch): औरतों का गहना और विश्व युद्ध!

कलाई घड़ी का इतिहास सबसे ज्यादा मजेदार है। 19वीं सदी के अंत तक ‘हाथ में घड़ी पहनना’ सिर्फ महिलाओं का शौक माना जाता था। वे इसे ब्रेसलेट या गहने की तरह पहनती थीं। उस समय के मर्द कहते थे, “हम तो पॉकेट वॉच ही रखेंगे, हाथ में घड़ी पहनना तो जनाना काम है!”

लेकिन फिर आया प्रथम विश्व युद्ध (World War I)। युद्ध के मैदान में गोलियां चलाते हुए सैनिकों के लिए बार-बार जेब से पॉकेट वॉच निकालना और समय देखना नामुमकिन हो गया। तब सैनिकों ने अपनी पॉकेट वॉच को चमड़े की पट्टी (Strap) से कलाई पर बांधना शुरू कर दिया। युद्ध के बाद यह इतना बड़ा ट्रेंड बना कि मर्दों ने पॉकेट वॉच को हमेशा के लिए फेंक दिया और रिस्ट वॉच (Wristwatch) फैशन बन गई।

Watch - Invention Of Clock

भविष्य का स्कोप: अब नसें बताएंगी समय!

आज हम दीवार घड़ी से निकलकर एप्पल (Apple) और सैमसंग (Samsung) की स्मार्टवॉच (Smartwatch) तक आ चुके हैं, जो समय के साथ हमारी हार्ट बीट और ब्लड प्रेशर भी नापती हैं। आने वाले 10-15 सालों में शायद हमें कलाई पर भी कुछ बांधने की जरूरत न पड़े।

  • स्मार्ट कॉन्टैक्ट लेंस (AR Lenses): आपकी आंखों में लगे लेंस पर ही टाइम ब्लिंक होगा।
  • बायो-सिंकिंग (Bio-syncing): एलन मस्क के ‘न्यूरालिंक’ (Neuralink) जैसी चिप आपके दिमाग में होगी। आपको सिर्फ सोचना होगा “टाइम क्या हुआ है?” और समय आपकी आंखों के सामने प्रोजेक्ट हो जाएगा।

ApniVani की बातें

धूप की परछाई से लेकर आज की स्मार्टवॉच तक, इंसान ने समय को मुट्ठी में कैद करने की पूरी कोशिश की है। समय बताने वाली मशीनें तो बदल गईं, लेकिन एक सच आज भी वही है—’समय किसी के लिए नहीं रुकता।’ इसलिए जो भी वक्त आपके पास है, उसे रील्स देखने के बजाय कुछ अच्छा करने में लगाइए!

आपकी राय: आपको क्या लगता है, क्या भविष्य में घड़ियां पूरी तरह से गायब हो जाएंगी और स्मार्ट चिप्स उनका रूप ले लेंगी? कमेंट करके जरूर बताएं!

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