क्या आपने कभी सोचा है कि आपके घर से निकलने वाला कूड़ा आखिर जाता कहाँ है? अक्सर वह शहर के बाहर बड़े-बड़े पहाड़ों (Landfills) का रूप ले लेता है। लेकिन नवाबों के शहर लखनऊ ने इस समस्या का एक ‘वैज्ञानिक’ और ‘स्थायी’ हल ढूंढ लिया है।
ताजा खबरों के मुताबिक, लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला शहर बन गया है जिसने 100% कचरा निस्तारण (Waste Processing) का लक्ष्य हासिल कर लिया है। अब वहां नया कूड़ा डंपिंग यार्ड में नहीं फेंका जाएगा, बल्कि उसका पूरा इस्तेमाल होगा। आखिर यह चमत्कार हुआ कैसे? और इंदौर या लखनऊ की तरह आपका शहर कब साफ होगा? आइए, इस ‘सफाई क्रांति’ की गहराई में चलते हैं।

लखनऊ मॉडल: आखिर कैसे हुआ यह चमत्कार? (The Process)
लखनऊ का यह बदलाव रातों-रात नहीं आया। इसके पीछे एक ठोस रणनीति और टेक्नोलॉजी का हाथ है। अगर आप अपने शहर या गाँव को साफ करना चाहते हैं, और waste हटाना चाहते हैं तो इस प्रोसेस को समझना होगा:
शिवरी प्लांट का जादू: लखनऊ नगर निगम (LMC) ने शिवरी में एक अत्याधुनिक सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट शुरू किया है। इसकी क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। अब शहर का सारा कूड़ा (करीब 2100 टन/रोज) वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस किया जा रहा है।
कूड़ा नहीं, संसाधन: यहाँ कूड़े को ‘कचरा’ नहीं बल्कि ‘रिसोर्स’ माना जाता है। गीले कूड़े (Organic) से खाद (Compost) और बायो-गैस बनाई जा रही है। वहीं, सूखे कूड़े (प्लास्टिक, कागज) से RDF (Refuse Derived Fuel) बनाया जा रहा है, जिसे सीमेंट और बिजली बनाने वाली फैक्ट्रियों में ईंधन के रूप में बेचा जाता है।
लिगेसी वेस्ट का खात्मा: सिर्फ नया कूड़ा ही नहीं, बल्कि वर्षों से जमा पुराने कूड़े (Legacy Waste) को भी बायो-माइनिंग तकनीक से खत्म किया जा रहा है और उस जमीन को खाली कराकर वहां ‘ग्रीन बेल्ट’ बनाई जा रही है।
आपका शहर और गाँव कैसे बन सकता है ‘जीरो वेस्ट’?
स्वच्छता सिर्फ सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। लखनऊ की सफलता का राज ‘जन-भागीदारी’ है। अगर हमें अपने गाँव या शहर को इंदौर या लखनऊ जैसा बनाना है, तो यह 3-स्टेप फॉर्मूला अपनाना होगा:
स्रोत पर ही बंटवारा (Source Segregation): यह सबसे अहम कदम है। अपने घर में ही गीला (सब्जी के छिलके, बचा खाना) और सूखा (प्लास्टिक, बोतल) कूड़ा अलग-अलग डिब्बों में रखें। लखनऊ में यह 70% से ज्यादा घरों में हो रहा है।
डोर-टू-डोर कलेक्शन: कूड़ा सड़क पर फेंकने के बजाय, सफाई गाड़ी आने का इंतजार करें। जब तक कूड़ा घर से सही तरीके से नहीं उठेगा, शहर साफ नहीं होगा।
कचरे से कमाई: ग्राम पंचायतों और नगर पालिकाओं को कूड़े से खाद बनाने के छोटे यूनिट्स लगाने चाहिए। इससे गंदगी भी खत्म होगी और पंचायत की कमाई भी होगी।

शर्म करो: वे लोग जो शहर को ‘डस्टबिन’ समझते हैं
यह कड़वा सच है, लेकिन बोलना जरूरी है। हम सरकार को कोसते हैं, लेकिन अपनी गिरेबान में नहीं झांकते। आप बाज़ार जाते हैं और शान से कहते हैं— “भैया, एक पन्नी (Polythene) देना।” यही वह ज़हर है जो नालियों को जाम करता है और गायों के पेट में जाता है। उन लोगों के लिए एक विशेष संदेश जो अपनी लग्जरी कार का शीशा नीचे करके गुटखा थूकते हैं या चिप्स का पैकेट सड़क पर फेंक देते हैं:
“आपकी महंगी गाड़ी और महंगे कपड़े आपकी ‘अमीरी’ नहीं दिखाते, बल्कि सड़क पर फेंका गया आपका कचरा आपकी ‘गरीबी’ और ‘मानसिकता’ दिखाता है। सड़क आपका पुश्तैनी डस्टबिन नहीं है। अगर आप अपना घर साफ रखते हैं, तो शहर गंदा करने का हक आपको किसने दिया?” सफाई कर्मचारी आपकी गंदगी( waste) साफ करने के लिए हैं, आपकी फैलाई हुई ‘बदतमीजी’ उठाने के लिए नहीं।
फैक्ट चेक: भारत और बिहार में कौन है सबसे साफ?
जब सफाई की बात आती है, तो स्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Competition) होनी चाहिए। आइए देखें अभी कौन बाजी मार रहा है:
भारत का नंबर 1: स्वच्छता सर्वेक्षण 2024-25 के अनुसार, मध्य प्रदेश का इंदौर (Indore) लगातार 8वीं बार भारत का सबसे साफ शहर बना है। यह शहर एक मिसाल है कि अगर जनता ठान ले, तो क्या नहीं हो सकता। इसके साथ ही सूरत और नवी मुंबई भी टॉप लिस्ट में हैं।
बिहार का गौरव: बिहार भी अब पीछे नहीं है। स्वच्छता सर्वेक्षण के ताजा आंकड़ों में गया (Gaya) ने बिहार में बाजी मारी है। 10 लाख की आबादी वाले शहरों की श्रेणी में गया सबसे आगे रहा है। वहीं, राजधानी पटना ने भी नागरिक फीडबैक (Citizen Feedback) में अच्छा सुधार किया है और टॉप शहरों में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही है।
बदलाव आपसे शुरू होगा
लखनऊ का ‘zero waste’ बनना एक सबूत है कि तकनीक और इच्छाशक्ति से पहाड़ों जैसे कूड़े को भी खत्म किया जा सकता है। लेकिन असली ‘जीरो वेस्ट’ शहर तब बनेगा जब हमारे दिमाग से ‘कचरा’ निकलेगा।
अगली बार सड़क पर कचरा फेंकने से पहले एक बार जरूर सोचें—क्या आप समस्या का हिस्सा बन रहे हैं या समाधान का? आइए, आज ही शपथ लें कि हम अपने शहर को अपने घर जैसा ही साफ रखेंगे।
आपकी राय: क्या आपको लगता है कि चालान (Fine) लगाने से लोग सुधरेंगे? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें।
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