Hospital वह जगह है जहां लोग जान बचाने आते हैं, लेकिन उत्तर प्रदेश के मथुरा में एक ऐसा वाकया हुआ जिसने डॉक्टरों और मरीजों को अपनी जान बचाने के लिए भागने पर मजबूर कर दिया। सोचिए, आप इमरजेंसी वार्ड में इलाज करा रहे हों और बगल के बेड पर लेटा मरीज अपनी जैकेट की जेब से जिंदा सांप निकाल कर मेज पर रख दे! जी हाँ, यह कोई फिल्मी सीन नहीं, बल्कि मथुरा जिला अस्पताल (District Hospital) की हकीकत है।
12-13 जनवरी की दरमियानी रात, एक ई-रिक्शा चालक ने वह किया जिसे सुनकर ही रूह कांप जाए। सांप के काटने के बाद वह रोया नहीं, बल्कि सांप को पकड़कर अपनी जेब में भर लाया। आखिर उसने ऐसा क्यों किया? क्या यह पागलपन था या कोई अजीबोगरीब समझदारी? आइए जानते हैं इस 12 जनवरी की रात की पूरी कहानी।

खौफनाक शुरुआत: दीपक और वो जहरीला मेहमान
घटना मथुरा के मांट (Mant) इलाके की है। दीपक नाम का एक ई-रिक्शा चालक अपना दिन खत्म करके घर लौट रहा था। सर्दी का मौसम था, इसलिए उसने जैकेट पहन रखी थी। उसे अंदाजा भी नहीं था कि उसकी गाड़ी में एक बिन बुलाया ‘जहरीला मेहमान’ पहले से बैठा है।
जैसे ही दीपक ने कुछ हरकत महसूस की, सांप ने उसे काट लिया। आम इंसान होता तो चीखता-चिल्लाता और भाग खड़ा होता। लेकिन दीपक ने गजब की हिम्मत (या कहिए जोखिम) दिखाई। उसने सांप के भागने से पहले ही उसे दबोच लिया।
हैरानी की बात यह है कि उसने सांप को मारा नहीं। उसने उस फुफकारते हुए सांप को अपनी जैकेट की जेब में डाल लिया और सीधे जिला अस्पताल की तरफ रिक्शा दौड़ा दिया।
अस्पताल में ‘मौत’ की एंट्री: डॉक्टरों के उड़े होश
असली ड्रामा तब शुरू हुआ जब दीपक जिला अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा। उसकी हालत खराब हो रही थी, जहर फैल रहा था।
डॉक्टरों ने रूटीन सवाल पूछा— “किस चीज़ ने काटा है? कोई कीड़ा था या सांप?”
दीपक ने जवाब देने के बजाय अपनी जैकेट की जेब में हाथ डाला। डॉक्टरों को लगा वह कोई पर्ची या दवा निकाल रहा है। लेकिन अगले ही पल, दीपक ने वह सांप निकालकर डॉक्टर की मेज पर रख दिया।
वहां मौजूद स्टाफ की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई। नज़ारा देख वार्ड में भगदड़ मच गई। तीमारदार अपने मरीजों को छोड़कर भागने लगे। किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि जिस सांप ने इसे डसा है, वह उसे ही अपनी गोद में लेकर घूम रहा है।
वो 1 वजह: आखिर जेब में सांप क्यों लाया दीपक?
जब अफरा-तफरी थोड़ी शांत हुई, तो दीपक ने जो वजह बताई, उसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया।
गांव-देहात में एक पुरानी मान्यता है (जो कई बार मेडिकल लॉजिक भी होती है)— “डॉक्टर को सांप दिखा दोगे, तो इलाज सही होगा।”
दीपक का तर्क सीधा था: “साहब, अगर मैं बस बताता कि सांप ने काटा है, तो आप पूछते कौन सा सांप था? नाग था या करैत? मुझे पहचान नहीं थी। इसलिए मैं ‘सबूत’ ही साथ ले आया ताकि आप सही इंजेक्शन (Anti-venom) लगा सको।”
हालांकि, डॉक्टर इसे पागलपन मान रहे थे क्योंकि इससे उसकी और दूसरों की जान को खतरा बढ़ गया था। लेकिन दीपक के लिए यह जिंदगी और मौत की रेस थी, जिसमें वह कोई रिस्क नहीं लेना चाहता था।
अब कैसी है दीपक की हालत?
गनीमत यह रही कि समय पर अस्पताल पहुंचने और (शायद सांप की पहचान हो जाने के कारण) डॉक्टरों ने तुरंत इलाज शुरू कर दिया।
* दीपक को एंटी-वेनम इंजेक्शन दिए गए हैं।
* फिलहाल वह खतरे से बाहर बताया जा रहा है, लेकिन डॉक्टरों ने उसे निगरानी (Observation) में रखा है।
* वन विभाग को सूचना दी गई है ताकि सांप को सुरक्षित जंगल में छोड़ा जा सके।

निष्कर्ष: बहादुरी या बेवकूफी?
यह घटना सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रही है। कुछ लोग दीपक की हिम्मत की दाद दे रहे हैं, तो कुछ इसे जानलेवा बेवकूफी बता रहे हैं। लेकिन एक बात तय है—मथुरा के जिला अस्पताल के डॉक्टरों को यह रात हमेशा याद रहेगी।
सावधानी: अगर आपको कभी सांप काटे, तो कृपया उसे पकड़ने की कोशिश न करें। सांप की फोटो खींच लेना काफी है, उसे जेब में रखकर अस्पताल ले जाना आपकी जान को दोगुना खतरे में डाल सकता है।
आपका क्या मानना है? क्या दीपक ने सांप को साथ ले जाकर सही किया? कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।
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