जब भी देश में जानवरों को बचाने की बात आती है, तो हमारा ध्यान सिर्फ ‘टाइगर’ (बाघ) या हाथियों पर जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा विशाल और खूबसूरत पक्षी भी है, जो डायनासोर की तरह हमेशा के लिए खत्म होने की कगार पर पहुँच गया था?
इस पक्षी का नाम है ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड‘ (Great Indian Bustard), जिसे राजस्थान में प्यार से ‘गोडावण’ कहा जाता है। आज ‘ApniVani’ के इस स्पेशल न्यूज़ सेगमेंट में हम आपके लिए एक बहुत बड़ी और सुकून देने वाली खबर लेकर आए हैं। राजस्थान के ‘प्रोजेक्ट GIB’ (Project GIB) ने एक ऐसा चमत्कार कर दिखाया है, जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है! आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक सफलता की सबसे बड़ी बातें।

चमत्कार: 2 नए बच्चों का जन्म (विज्ञान और प्रकृति का मिलन)
राजस्थान के कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर (Conservation Breeding Centre) से खबर आई है कि वहां ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के 2 एकदम स्वस्थ और प्यारे बच्चों ने जन्म लिया है।
सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि इनमें से एक बच्चे का जन्म प्राकृतिक तरीके (Natural Mating) से हुआ है, जबकि दूसरे बच्चे का जन्म ‘आर्टिफिशियल इन्सेमिनेशन’ (Artificial Insemination – AI) यानी कृत्रिम गर्भाधान तकनीक के जरिए हुआ है। पक्षियों में आर्टिफिशियल इन्सेमिनेशन का सफल होना विज्ञान की दुनिया में एक बहुत बड़ी जीत मानी जाती है। इससे यह साबित हो गया है कि अब हम इस विलुप्त होते पक्षी की आबादी को तेज़ी से बढ़ा सकते हैं।

‘हाफ सेंचुरी’ पार: 70 तक पहुंचा कुल आंकड़ा!
एक वक्त था जब पूरे भारत में इन पक्षियों की गिनती उंगलियों पर की जा सकती थी। ये बिजली के तारों से टकराकर या शिकारियों का निशाना बनकर खत्म हो रहे थे।
लेकिन अब, इन दो नए बच्चों के जन्म के साथ ही कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर (यानी सुरक्षित बाड़े) में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड्स की कुल संख्या 70 तक पहुँच गई है! यह राजस्थान वन विभाग (Rajasthan Forest Department) और वन्यजीव विशेषज्ञों की दिन-रात की कड़ी मेहनत का ही नतीजा है। उन्होंने अंडों को रेगिस्तान से सुरक्षित निकाला और उन्हें मशीनों (Incubators) में रखकर इन नए पक्षियों को जीवन दिया है।

अब अगला कदम: ‘सॉफ्ट रिलीज’ (खुले आसमान की तैयारी)
अब आप सोच रहे होंगे कि क्या ये पक्षी जिंदगी भर पिंजरे या बाड़े में ही रहेंगे? बिल्कुल नहीं!
वन विभाग का अगला और सबसे अहम कदम है ‘सॉफ्ट रिलीज’ (Soft Release)। इसका मतलब है कि सेंटर में पैदा हुए कुछ मजबूत और बड़े बच्चों को अब धीरे-धीरे वापस खुले जंगल और रेगिस्तान में छोड़ा जाएगा।
उन्हें सीधे खतरों के बीच नहीं फेंका जाएगा, बल्कि पहले एक बड़े और सुरक्षित ‘प्री-रिलीज एनक्लोजर’ में रखा जाएगा ताकि वे खुद से शिकार करना और उड़ना सीख सकें। जब वे पूरी तरह से जंगली माहौल में ढल जाएंगे, तब उन्हें पूरी आज़ादी दे दी जाएगी।
ApniVani की बात
राजस्थान वन विभाग का यह प्रयास सच में काबिले तारीफ है। यह सफलता हमें सिखाती है कि अगर इंसान ठान ले, तो वह प्रकृति को बर्बाद करने के साथ-साथ उसे वापस हरा-भरा भी कर सकता है। गोडावण अब सिर्फ राजस्थान का नहीं, पूरे भारत का गौरव बन चुका है।
आपकी राय: क्या आपको लगता है कि सिर्फ बाघों की तरह ही ऐसे दुर्लभ पक्षियों को बचाने के लिए भी देश में बड़े ‘जागरूकता अभियान’ चलाए जाने चाहिए? इस अच्छी खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और अपनी राय हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर जरूर बताएं!
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