ईरान-इज़राइल महासंग्राम में ‘विश्वबंधु’ भारत की भूमिका: क्या दिल्ली बनेगा शांति का नया केंद्र?

ईरान-इज़राइल महासंग्राम

मध्य पूर्व (Middle East) में ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ता तनाव इस समय वैश्विक भू-राजनीति का सबसे संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है। जहाँ एक ओर दुनिया के कई शक्तिशाली देश किसी न किसी खेमे का हिस्सा बनते दिख रहे हैं, वहीं भारत ने अपनी ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ (Strategic Autonomy) और संतुलित कूटनीति से सभी का ध्यान खींचा है। जून 2025 से शुरू हुए इस सैन्य टकराव में भारत न केवल अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है, बल्कि शांति के लिए एक महत्वपूर्ण सेतु के रूप में भी उभरा है।

कूटनीतिक संतुलन: दोनों पक्षों से संवाद की कला

भारत ने इस पूरे संकट के दौरान ‘गुटनिरपेक्षता 2.0’ का परिचय दिया है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने लगातार संयम और बातचीत पर जोर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने व्यक्तिगत रूप से इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन के साथ टेलीफोनिक वार्ता की। भारत का संदेश स्पष्ट था—”यह युद्ध का युग नहीं है।”

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भारत की कूटनीति की सबसे बड़ी परीक्षा तब हुई जब उसने शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के उस बयान से खुद को अलग कर लिया जो इज़राइल के खिलाफ कड़ा रुख अपना रहा था। इससे यह स्पष्ट हो गया कि भारत किसी भी दबाव में आए बिना अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर कायम है।

ऑपरेशन सिंधु: संकट के बीच सुरक्षित वापसी

जब ईरान और इज़राइल के आसमान में मिसाइलें गरज रही थीं, तब भारत सरकार की प्राथमिकता अपने 4,000 से अधिक नागरिकों की सुरक्षा थी। ‘ऑपरेशन सिंधु’ के तहत भारत ने एक बार फिर अपनी बेजोड़ रेस्क्यू क्षमता का प्रदर्शन किया। कुल 19 विशेष उड़ानों के माध्यम से ईरान से 2,295 और इज़राइल से 604 भारतीयों सहित कुल 4,415 लोगों को सुरक्षित स्वदेश लाया गया। इस मिशन में आर्मेनिया जैसे देशों के हवाई मार्गों का कुशलतापूर्वक उपयोग किया गया, जो भारत के मजबूत वैश्विक संपर्कों को दर्शाता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडराते बादल

ईरान-इज़राइल संघर्ष केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि एक बड़ा आर्थिक संकट भी है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80-85% आयात करता है। संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 8% तक का उछाल देखा गया है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल 10 डॉलर की बढ़ोतरी होती है, तो इससे भारत की जीडीपी ग्रोथ और महंगाई दर पर सीधा असर पड़ सकता है। इसके अलावा, लाल सागर (Red Sea) के रास्ते होने वाले व्यापार पर भी माल ढुलाई लागत बढ़ने का खतरा मंडरा रहा है।

क्या भारत कर सकता है मध्यस्थता?

दुनिया अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या भारत, ईरान और इज़राइल के बीच मध्यस्थ (Mediator) बन सकता है? इसके पीछे कई ठोस कारण हैं:

दोहरी मित्रता: भारत के इज़राइल के साथ मजबूत रक्षा संबंध हैं, तो वहीं ईरान के साथ चाबहार पोर्ट और ऐतिहासिक सांस्कृतिक जुड़ाव है।

विश्वसनीयता: भारत की छवि एक ऐसे देश की है जिसका अपना कोई गुप्त एजेंडा नहीं है।

वैश्विक नेतृत्व: यूक्रेन संकट के बाद भारत की मध्यस्थता क्षमता पर दुनिया का भरोसा बढ़ा है।

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हालांकि, चुनौतियाँ कम नहीं हैं। इज़राइल और ईरान के बीच की शत्रुता दशकों पुरानी और विचारधारा पर आधारित है। साथ ही, अमेरिका की भूमिका भी इस समीकरण को जटिल बनाती है। लेकिन, भारत जिस तरह से दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ सीधे संपर्क में है, वह भविष्य में ‘बैक-चैनल’ कूटनीति के लिए दरवाजे खोलता है।

ईरान-इज़राइल संघर्ष में भारत की भूमिका केवल एक दर्शक की नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति की रही है। भारत ने सिद्ध कर दिया है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा करते हुए विश्व शांति के लिए भी प्रतिबद्ध है। यदि आने वाले समय में तनाव कम होता है, तो इसमें नई दिल्ली की ‘खामोश कूटनीति’ का बड़ा हाथ होगा।

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पीएम मोदी का ओडिशा दौरा : ₹60,000 करोड़ के पैकेज से स्वास्थ्य, शिक्षा, आवास और कौशल विकास को बड़ी सौगात

पीएम मोदी

पीएम मोदी ने शनिवार को ओडिशा को अब तक की सबसे बड़ी विकास सौगात देते हुए ₹60,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन किया। इन परियोजनाओं में स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास और ग्रामीण आवास जैसे अहम क्षेत्र शामिल हैं। मोदी ने कहा कि ये कदम “विकसित भारत, विकसित ओडिशा” की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।

स्वास्थ्य क्षेत्र में बड़ा निवेश

ओडिशा के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएँ मुहैया कराने के लिए पीएम मोदी ने एमकेसीजी मेडिकल कॉलेज (बेरहामपुर) और वीआईएमएसएआर (संबलपुर) को सुपर स्पेशलिटी अस्पतालों में अपग्रेड करने की आधारशिला रखी। इन अस्पतालों में आधुनिक ट्रॉमा केयर यूनिट्स, मातृ एवं शिशु देखभाल केंद्र, डेंटल कॉलेज और बेड क्षमता में बढ़ोतरी होगी। मोदी ने कहा कि अब ओडिशा के मरीजों को जटिल इलाज के लिए राज्य से बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

ग्रामीण आवास में 50,000 परिवारों को पक्का घर

आवास योजना के तहत प्रधानमंत्री ने अंत्योदय गृह योजना के 50,000 लाभार्थियों को स्वीकृति पत्र वितरित किए। इसके तहत कमजोर वर्गों — जैसे विकलांग, विधवा, और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों — को पक्के मकान और आर्थिक सहायता दी जाएगी। पीएम मोदी ने कहा – “गरीब का सपना है अपना घर। हमारी सरकार यह सपना पूरा करने के लिए हर संभव मदद कर रही है।”

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शिक्षा और अनुसंधान में ₹11,000 करोड़ का निवेश

प्रधानमंत्री ने आठ IITs (तिरुपति, पलक्कड़, भिलाई, जम्मू, धारवाड़, जोधपुर, पटना और इंदौर) के विस्तार का शिलान्यास किया। इस पर करीब ₹11,000 करोड़ का निवेश होगा। इससे अगले चार वर्षों में 10,000 नए छात्रों के लिए सीटें तैयार होंगी और आठ नए रिसर्च पार्क बनाए जाएंगे। मोदी ने कहा कि ये कदम भारत को नवाचार और अनुसंधान का वैश्विक केंद्र बनाएंगे।

कौशल विकास और युवाओं पर फोकस

युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर देने के लिए पीएम मोदी ने ओडिशा स्किल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट फेज-II की शुरुआत की। इसके तहत संबलपुर और बेरहामपुर में वर्ल्ड स्किल सेंटर्स खोले जाएंगे। यहाँ छात्रों को एग्रीटेक, नवीकरणीय ऊर्जा, रिटेल, समुद्री क्षेत्र और हॉस्पिटैलिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में ट्रेनिंग मिलेगी। इसके साथ ही 130 उच्च शिक्षा संस्थानों में मुफ्त वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इस योजना से प्रतिदिन 2.5 लाख छात्रों को मुफ्त डेटा पैक का लाभ मिलेगा।

पीएम मोदी

 

डबल इंजन सरकार उम्मीदें पूरी कर रही है

बीजेपी सांसद बैजयंत जय पांडा ने कहा कि ओडिशा को जो विकास चाहिए था, वह अब डबल इंजन सरकार से पूरा हो रहा है। “आज स्वास्थ्य से लेकर शिक्षा, आवास से लेकर कौशल विकास तक हर क्षेत्र में बड़े प्रोजेक्ट शुरू हुए हैं। यह ओडिशा के सुनहरे भविष्य की नींव है।”

विकसित भारत, विकसित ओडिशा

मोदी ने कहा कि ये सभी प्रोजेक्ट मिलकर ओडिशा को आत्मनिर्भर बनाएंगे और युवाओं को नए अवसर देंगे। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएँ और राज्य को विकास की नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएँ। कुल मिलाकर, पीएम मोदी का यह दौरा केवल परियोजनाओं का शिलान्यास भर नहीं, बल्कि ओडिशा के लिए एक समग्र विकास पैकेज साबित हुआ है, जिसमें ₹60,000 करोड़ से अधिक का निवेश स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल और आवास जैसी मूलभूत ज़रूरतों को पूरा करने पर केंद्रित है।

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