बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-3) के पेपर लीक मामले में आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को एक बड़ी सफलता मिली है। महीनों से फरार चल रहे इस धांधली के मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड को आखिरकार पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। इस गिरफ्तारी के बाद अब यह उम्मीद जताई जा रही है कि बिहार में चल रहे बड़े शिक्षा सिंडिकेट का पूरी तरह से भंडाफोड़ होगा।
पेपर लीक कांड के मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी: एक बड़ी कामयाबी
बिहार की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक, BPSC TRE-3, जो हजारों युवाओं के भविष्य से जुड़ी थी, पेपर लीक की वजह से विवादों के घेरे में आ गई थी। इस मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने लगातार छापेमारी के बाद मुख्य आरोपी को उड़ीसा से गिरफ्तार किया है।
आरोपी की पहचान विशाल कुमार चौरसिया और उसके सहयोगियों के नेटवर्क से जुड़े व्यक्तियों के रूप में की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था, लेकिन तकनीकी निगरानी और गुप्त सूचनाओं के आधार पर पुलिस उसे दबोचने में कामयाब रही।

क्या था BPSC TRE-3 पेपर लीक मामला?
15 मार्च 2024 को आयोजित हुई तीसरे चरण की शिक्षक भर्ती परीक्षा के दौरान पेपर लीक की खबरें सामने आई थीं। जांच में पाया गया कि परीक्षा शुरू होने से पहले ही प्रश्नपत्र हजारीबाग के एक बैंक से लीक होकर सॉल्वर गैंग के पास पहुँच गए थे। इसके बाद हजारीबाग में छापेमारी कर सैकड़ों अभ्यर्थियों को रंगे हाथ पकड़ा गया था, जिन्हें परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र रटवाए जा रहे थे।
जांच में हुए चौंकाने वाले खुलासे: कैसे फैला था जाल?
EOU की जांच में यह बात सामने आई है कि यह कोई साधारण पेपर लीक नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी जिसमें कई राज्यों के अपराधी शामिल थे।
1. प्रिंटिंग प्रेस से लेकर सॉल्वर गैंग तक का कनेक्शन
जांच एजेंसियों के अनुसार, पेपर लीक की जड़ें उस प्रिंटिंग प्रेस से जुड़ी थीं जहाँ प्रश्नपत्र छापे गए थे। गिरोह ने प्रिंटिंग प्रेस के कर्मचारियों के साथ साठगांठ कर परीक्षा से कई दिन पहले ही सेट हासिल कर लिए थे।
2. अभ्यर्थियों से वसूले गए थे लाखों रुपये
गिरफ्तार आरोपी और उसके गिरोह ने प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 लाख से 15 लाख रुपये तक का सौदा किया था। अभ्यर्थियों को बसों में भरकर सुरक्षित ठिकानों पर ले जाया गया था, जहाँ उन्हें मोबाइल फोन जमा करवाकर प्रश्नपत्र और उनके उत्तर याद करवाए गए थे।
3. तकनीक का सहारा और फर्जी पहचान
आरोपी पुलिस से बचने के लिए लगातार फर्जी सिम कार्ड और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर रहा था। उसकी गिरफ्तारी से अब उन सफेदपोश चेहरों का भी पर्दाफाश हो सकता है जो इस पूरे सिंडिकेट को संरक्षण दे रहे थे।
बिहार में परीक्षाओं की शुचिता पर उठते सवाल
पिछले कुछ वर्षों में बिहार में पेपर लीक की घटनाएं एक गंभीर समस्या बनकर उभरी हैं। BPSC TRE-3 से पहले भी कई बड़ी परीक्षाओं (जैसे सिपाही भर्ती) के पेपर लीक होने के कारण रद्द करना पड़ा है।
सरकार और प्रशासन की सख्त कार्रवाई
बिहार सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, आर्थिक अपराध इकाई को खुली छूट दी गई है कि वह इस नेटवर्क की तह तक जाए।
• परीक्षा रद्द करना: पेपर लीक की पुष्टि होने के तुरंत बाद BPSC ने TRE-3 परीक्षा को रद्द कर दिया था।
• नए कानून का प्रभाव: बिहार में लागू हुए नए एंटी-पेपर लीक कानून के तहत अब इन आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें भारी जुर्माना और लंबी जेल की सजा का प्रावधान है।
अभ्यर्थियों के भविष्य पर मंडराते बादल
इस पेपर लीक और मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बीच सबसे ज्यादा परेशान वे लाखों अभ्यर्थी हैं जिन्होंने दिन-रात मेहनत की थी। परीक्षा रद्द होने से न केवल उनका समय बर्बाद हुआ है, बल्कि उनके मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर भी बुरा असर पड़ा है।

दोबारा परीक्षा और नई चुनौतियाँ
BPSC अब इस परीक्षा को दोबारा आयोजित करने की तैयारी में है। हालांकि, आयोग के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक ऐसी फुलप्रूफ व्यवस्था बनाने की है जिसे कोई भी सॉल्वर गैंग भेद न सके। अभ्यर्थियों की मांग है कि:
• परीक्षा केंद्रों का चयन सावधानी से किया जाए।
• प्रश्नपत्रों के परिवहन के लिए जीपीएस और डिजिटल लॉक का उपयोग हो।
• सॉल्वर गैंग के सदस्यों को ताउम्र किसी भी परीक्षा से प्रतिबंधित किया जाए।
अब देखना यह होगा कि इस मुख्य आरोपी से पूछताछ के दौरान और कौन से बड़े नाम सामने आते हैं और क्या आयोग आगामी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित कर पाता है।


