बड़ी खुशखबरी! 1 अप्रैल से लागू होगा नया आयकर कानून: अब ₹12.75 लाख तक की सैलरी पर देना होगा ‘Zero’ टैक्स

1 अप्रैल

देश के करोड़ों नौकरीपेशा लोगों के लिए 1 अप्रैल 2026 की तारीख एक ऐतिहासिक बदलाव लेकर आ रही है। केंद्र सरकार ने दशकों पुराने ‘आयकर अधिनियम 1961’ को अलविदा कहते हुए नए ‘आयकर अधिनियम 2025‘ को जमीन पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली है। इस नए कानून का सबसे बड़ा आकर्षण मध्यम वर्ग को मिलने वाली भारी राहत है। अब नई टैक्स व्यवस्था के तहत ₹12.75 लाख तक की सालाना आय वाले वेतनभोगियों को सरकार को एक भी रुपया टैक्स के रूप में नहीं देना होगा।

₹12.75 लाख का गणित: कैसे हुआ टैक्स फ्री?

आम तौर पर लोगों के मन में उलझन है कि जब टैक्स स्लैब ₹12 लाख तक जीरो टैक्स की बात करते हैं, तो ₹12.75 लाख का आंकड़ा कहां से आया? दरअसल, नए कानून में सैलरी क्लास के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन (Standard Deduction) को ₹50,000 से बढ़ाकर ₹75,000 कर दिया गया है।

जब आपकी कुल सालाना आय ₹12,75,000 होती है, तो ₹75,000 की मानक कटौती के बाद आपकी टैक्सेबल इनकम ₹12,00,000 रह जाती है। नए प्रावधानों के तहत ₹12 लाख तक की शुद्ध आय पर सरकार शत-प्रतिशत ‘रिबेट’ (छूट) दे रही है, जिससे प्रभावी टैक्स शून्य हो जाता है। यह कदम सीधे तौर पर उन युवाओं और मध्यम आय वर्ग के परिवारों की बचत बढ़ाएगा जो महंगाई से जूझ रहे हैं।

नए टैक्स स्लैब 2026-27: एक नजर में

नए आयकर कानून ने टैक्स की दरों को और अधिक तर्कसंगत और सरल बना दिया है। अब टैक्स स्लैब कुछ इस प्रकार होंगे:

₹0 – ₹4 लाख: 0% (पूरी तरह मुक्त)

• ₹4 – ₹8 लाख: 5%

• ₹8 – ₹12 लाख: 10%

• ₹12 – ₹16 लाख: 15%

• ₹16 – ₹20 लाख: 20%

• ₹20 – ₹24 लाख: 25%

• ₹24 लाख से अधिक: 30%

विशेष बात यह है कि ₹12 लाख तक की आय पर लगने वाला 5% और 10% का टैक्स ‘टैक्स रिबेट’ के जरिए माफ कर दिया जाएगा, बशर्ते आपकी टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख से ऊपर न जाए।

Form 16 की विदाई और ITR फाइलिंग में सरलता

नए कानून का उद्देश्य केवल टैक्स कम करना नहीं, बल्कि टैक्स भरने की प्रक्रिया को आसान बनाना भी है। अब दफ्तरों में मिलने वाले पारंपरिक Form 16 की जगह नए Form 130 और 131 लेंगे। सरकार का दावा है कि नया सिस्टम आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) पर आधारित होगा, जिससे ITR फाइल करने में लगने वाला समय घटकर महज कुछ मिनट रह जाएगा। जटिल कानूनी भाषा को हटाकर अब सरल हिंदी और अंग्रेजी में प्रावधान लिखे गए हैं ताकि आम नागरिक खुद अपना टैक्स असेसमेंट कर सके।

पुरानी बनाम नई व्यवस्था: किसे होगा फायदा?

हालांकि सरकार नई टैक्स व्यवस्था को प्रमोट कर रही है, लेकिन पुरानी व्यवस्था भी फिलहाल अस्तित्व में बनी रहेगी।

• नई व्यवस्था (New Regime): यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो निवेश के झंझट में नहीं पड़ना चाहते और कम टैक्स रेट का फायदा लेना चाहते हैं। ₹15 लाख तक की आय वालों के लिए यह सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित हो रही है।

• पुरानी व्यवस्था (Old Regime): यदि आपने होम लोन लिया है, एलआईसी (LIC), बच्चों की ट्यूशन फीस और 80C के तहत भारी निवेश किया है, तो पुरानी व्यवस्था अभी भी आपके लिए बेहतर हो सकती है। हालांकि, इसमें ₹12.75 लाख वाली छूट का लाभ नहीं मिलेगा।

शेयर बाजार और F&O ट्रेडर्स के लिए चेतावनी

जहां एक तरफ सैलरी क्लास को राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ शेयर बाजार से कमाई करने वालों और फ्यूचर एंड ऑप्शंस (F&O) में ट्रेडिंग करने वालों के लिए नियम सख्त किए गए हैं। शेयर बायबैक और सट्टा आय पर टैक्स की दरों में मामूली बढ़ोतरी की गई है, ताकि सट्टेबाजी को हतोत्साहित किया जा सके और लॉन्ग टर्म निवेश को बढ़ावा दिया जा सके।

1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाला यह नया कानून मध्यम वर्ग के हाथ में ज्यादा ‘डिस्पोजेबल इनकम’ छोड़ेगा। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस वित्तीय वर्ष के अंत तक अपने निवेश और सैलरी स्ट्रक्चर का पुनर्मूल्यांकन जरूर करें। अगर आपकी आय ₹13 लाख के आसपास है, तो नई व्यवस्था आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। 31 जुलाई 2026 तक अपना पहला ITR नए नियमों के तहत फाइल करना न भूलें।

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कार खरीदना अब होगा महंगा: Hyundai से लेकर BMW तक, 9 बड़ी कंपनियां जनवरी से बढ़ा रही हैं दाम

कार

अगर आप इस नए साल में अपने घर के बाहर एक चमचमाती नई कार खड़ी करने का सपना देख रहे हैं, तो शायद आपको अपनी प्लानिंग थोड़ी जल्दी करनी होगी। ऑटोमोबाइल मार्केट से एक बड़ी खबर आ रही है—Hyundai, Tata Motors, और BMW समेत कुल 9 बड़े ऑटोमेकर्स ने जनवरी 2026 से अपनी गाड़ियों की कीमतों में 3% तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।

यह खबर उन लोगों के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है जो फेस्टिव सीजन के डिस्काउंट के बाद दाम गिरने का इंतज़ार कर रहे थे। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर कंपनियां ऐसा क्यों कर रही हैं और आपकी जेब पर इसका कितना असर पड़ेगा।

Hyundai

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम?

कंपनियों का कहना है कि यह फैसला उन्होंने मजबूरी में लिया है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

• कच्चे माल की बढ़ती कीमत: कार बनाने में इस्तेमाल होने वाले स्टील, एल्यूमीनियम और प्लास्टिक जैसे ‘इनपुट मैटेरियल्स’ के दाम पिछले कुछ महीनों में काफी बढ़ गए हैं।

• रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार नीचे गिर रहा है। इससे उन कलपुर्जों (parts) की कीमत बढ़ गई है जिन्हें कंपनियां विदेशों से इम्पोर्ट (Import) करती हैं।

• लॉजिस्टिक्स और चिप की समस्या: ग्लोबल सप्लाई चेन में अभी भी कुछ रुकावटें हैं, जिसकी वजह से ट्रांसपोर्टेशन और चिप्स की डिलीवरी महंगी हो रही है।

कौन-कौन सी कंपनियां हैं इस लिस्ट में?

कीमतें बढ़ाने वाली लिस्ट में सिर्फ बजट कारें ही नहीं, बल्कि लग्जरी गाड़ियां भी शामिल हैं। इनमें Hyundai, Tata Motors, Honda, और BMW तो लीड कर ही रहे हैं, साथ ही Mahindra, Kia, MG Motor, Skoda और Toyota भी अपनी कीमतों में बदलाव करने की तैयारी में हैं।

इसका मतलब है कि अगर आप Tata Nexon या Hyundai Creta जैसी पॉपुलर SUV लेने की सोच रहे हैं, तो आपको 20,000 से 50,000 रुपये तक एक्स्ट्रा देने पड़ सकते हैं। वहीं BMW जैसी लग्जरी कारों के लिए यह अंतर लाखों में जा सकता है।

क्या इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) पर भी पड़ेगा असर?

यहाँ एक छोटा सा ‘सिल्वर लाइनिंग’ या राहत की बात हो सकती है। हालांकि अभी टाटा जैसी कंपनियां अपने EV पोर्टफोलियो पर भी विचार कर रही हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट 2026 में सरकार बैटरी इम्पोर्ट ड्यूटी में कुछ कटौती कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो शायद इलेक्ट्रिक कारों के दाम उतने न बढ़ें जितने पेट्रोल-डीजल कारों के बढ़ेंगे। लेकिन फिलहाल के लिए, अनिश्चितता बनी हुई है।

BMW

ग्राहकों के लिए हमारी सलाह

अगर आपने मन बना लिया है और फाइनेंस की बात बन चुकी है, तो 31 दिसंबर 2025 से पहले बुकिंग करा लेना ही समझदारी होगी। डीलर्स के पास फिलहाल पुराना स्टॉक मौजूद है और कई शोरूम्स पुराने रेट पर ही गाड़ियां निकालने की कोशिश कर रहे हैं। जनवरी आते ही नई ‘प्राइस लिस्ट’ लागू हो जाएगी और फिर मोल-भाव की गुंजाइश भी कम रहेगी।

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