Karnataka DGP Viral Video: खाकी पर ‘AI’ का दाग या असली पाप? 3 पुराने सेक्स स्कैंडल जो सिस्टम की पोल खोलते हैं

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हम अक्सर नेताओं के चरित्र पर सवाल उठाते हैं। हम कहते हैं कि राजनीति गंदी है। लेकिन जब कानून का पालन करने वाला सबसे बड़ा अधिकारी—एक DGP (Director General of Police) स्तर का इंसान—गलत वजहों से सुर्खियों में आ जाए, तो जनता का भरोसा हिल जाता है।

कर्नाटक में इन दिनों एक वीडियो ने भूचाल ला दिया है। दावा किया जा रहा है कि वीडियो में राज्य के डीजीपी (आंतरिक सुरक्षा) के. रामचंद्र राव (K. Ramachandra Rao) अपने ही ऑफिस में महिलाओं के साथ आपत्तिजनक स्थिति में हैं।

हालांकि, डीजीपी साहब इसे “AI और डीपफेक” की साजिश बता रहे हैं, लेकिन मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने जांच के आदेश दे दिए हैं। आज हम इस खबर की गहराई में जाएंगे और देखेंगे कि कैसे कुर्सी का नशा, चाहे वो नेता हो या अफसर, सबको एक ही लाइन में खड़ा कर देता है।

Karnataka DGP Viral Video

वायरल वीडियो का सच: ऑफिस या अय्याशी का अड्डा?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो और फोटोज ने कर्नाटक की ब्यूरोक्रेसी को शर्मसार कर दिया है।

आरोप है कि डीजीपी के. रामचंद्र राव अपने आधिकारिक कक्ष (Office) का दुरुपयोग कर रहे थे। वीडियो में उन्हें कुछ महिलाओं के साथ बेहद निजी पलों में देखा गया है।

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह सब एक सरकारी दफ्तर में हो रहा था, जहां जनता की सुरक्षा के फैसले लिए जाते हैं। अगर यह वीडियो सच है, तो यह सिर्फ एक स्कैंडल नहीं, बल्कि “Code of Conduct” की धज्जियां उड़ाना है।

डीजीपी की सफाई: “यह मैं नहीं, AI है”

जैसे ही वीडियो वायरल हुआ, के. रामचंद्र राव ने वही तर्क दिया जो आजकल हर बड़ा आदमी फंसने पर देता है— “यह फेक है।”

  • उन्होंने मुख्यमंत्री और गृह मंत्री को पत्र लिखकर दावा किया है कि:
  • यह वीडियो AI (Artificial Intelligence) और Deepfake तकनीक का इस्तेमाल करके बनाया गया है।
  • उन्हें ब्लैकमेल करने और उनकी छवि खराब करने की साजिश रची जा रही है।
  • उन्होंने खुद इस मामले की CID जांच की मांग की है।

अब सवाल यह है कि क्या AI इतना एडवांस हो गया है, या फिर “AI” अब बड़े लोगों के लिए बचने का सबसे आसान कवच (Shield) बन गया है?

मुख्यमंत्री का एक्शन: जांच या लीपापोती?

मामले की गंभीरता को देखते हुए कर्नाटक के सीएम सिद्धारमैया ने तुरंत एक्शन लिया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण की जांच CID (Crime Investigation Department) को सौंप दी है।

लेकिन जनता सवाल पूछ रही है—क्या एक जूनियर अधिकारी अपने ही विभाग के सबसे बड़े अधिकारी (DGP) के खिलाफ निष्पक्ष जांच कर पाएगा? इतिहास गवाह है कि ऐसे मामलों में अक्सर सबूत मिटा दिए जाते हैं या फाइलें धूल खाती रहती हैं।

यह पहला नहीं है: जब ‘माननीयों’ ने पार की हदें (3 पुराने उदाहरण)

डीजीपी साहब का मामला सच है या झूठ, यह तो जांच बताएगी। लेकिन यह पहली बार नहीं है जब सत्ता के नशे में चूर लोगों ने नैतिकता को ताक पर रख दिया हो। चाहे ‘खाकी’ हो या ‘खादी’, हमाम में सब नंगे नज़र आते हैं।

ज़रा इन 3 बड़े मामलों को याद कीजिए:

प्रज्वल रेवन्ना (पेन ड्राइव कांड – 2024):

अभी कल की ही बात है। कर्नाटक के ही हासन से सांसद प्रज्वल रेवन्ना का “सेक्स स्कैंडल” पूरी दुनिया ने देखा। हजारों वीडियो, सैकड़ों महिलाएं और वह भी एक नेता द्वारा। पहले उन्होंने भी इसे “फर्जी” बताया था, लेकिन बाद में उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा और अंततः जेल जाना पड़ा। यह दिखाता है कि पावर का नशा किस कदर हावी होता है।

रमेश जारकीहोली (CD कांड – 2021):

कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री थे। एक महिला के साथ उनकी सीडी सामने आई, जिसमें नौकरी के बदले शोषण का आरोप था। मंत्री जी को इस्तीफा देना पड़ा। वहां भी “हनी ट्रैप” और “फर्जी वीडियो” का शोर मचा था, लेकिन बदनामी तो हो ही गई।

राघवजी कांड (मध्य प्रदेश):

याद कीजिए मध्य प्रदेश के वित्त मंत्री राघवजी को। अपने ही नौकर के साथ अप्राकृतिक संबंधों के आरोप में उनकी सीडी बनी थी। उन्हें पार्टी से निकाला गया और जेल भी जाना पड़ा।

कनेक्शन क्या है?

चाहे प्रज्वल हों, जारकीहोली हों, या अब कथित तौर पर डीजीपी राव—पैटर्न एक ही है। कुर्सी की ताकत, ऑफिस का एकांत, और यह गलतफहमी कि “हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।”

समाज के लिए चिंता का विषय

जब हम नेताओं के वीडियो देखते हैं, तो हम कहते हैं— “अरे, नेता तो होते ही ऐसे हैं।”

लेकिन जब एक IPS अधिकारी, जिसने वर्दी पहनते वक्त संविधान की शपथ ली थी, ऐसे आरोपों में घिरता है, तो डर लगता है।

अगर रक्षक ही ऑफिस में बैठकर रंगरेलियां मनाएंगे, तो बहन-बेटियों की सुरक्षा कौन करेगा?

क्या सरकारी दफ्तर अब काम की जगह नहीं, बल्कि अय्याशी के अड्डे बन गए हैं?

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सच का सामने आना जरूरी

फिलहाल, हम डीजीपी के. रामचंद्र राव को दोषी नहीं ठहरा सकते क्योंकि जांच जारी है। हो सकता है कि सच में उन्हें फंसाया जा रहा हो। AI का खतरा वास्तविक है।

लेकिन अगर CID की जांच में यह वीडियो असली निकलता है, तो सजा ऐसी मिलनी चाहिए जो नजीर बने। सिर्फ सस्पेंड कर देना काफी नहीं होगा।

और अगर यह वीडियो फेक (Deepfake) है, तो उस बनाने वाले को पकड़ना चाहिए, क्योंकि आज डीजीपी का वीडियो बना है, कल किसी आम आदमी का भी बन सकता है।

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि बड़े अधिकारी और नेता ‘AI’ का बहाना बनाकर अपने पाप छिपा रहे हैं? कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरूर लिखें।

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