Historic Oath Ceremony — 7 देशों के Chief Justices पहली बार CJI एक मंच पर 24 नवंबर 2025 को राष्ट्रपति भवन के दरबार हॉल में भारतीय लोकतंत्र का एक ऐतिहासिक अध्याय लिखा गया, जब Justice Surya Kant ने भारत के 53वें Chief Justice of India के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें संविधान की शपथ दिलाई।
इस समारोह की विशेषता यह रही कि—
- भारत के इतिहास में पहली बार 7 देशों के मुख्य न्यायाधीश (भूटान, केन्या, श्रीलंका, नीदरलैंड्स, ब्राज़ील, नेपाल और मॉरीशस) इस अवसर के साक्षी बने।
- सुप्रीम कोर्ट के सभी जज, पूर्व CJIs, वरिष्ठ अधिवक्ता, संवैधानिक विशेषज्ञ और Justice Surya Kant का परिवार मौजूद रहा।
- यह आयोजन भारत की global judicial diplomacy और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय सम्मान का नया संकेत माना गया।
न्यायिक सुधार, तकनीक और पारदर्शिता — Justice Surya Kant की प्राथमिकताएँ

शपथ ग्रहण के बाद Justice Surya Kant ने कहा—
“न्याय व्यवस्था का लक्ष्य भय नहीं, भरोसा है। हर नागरिक को आसान, तेज और सुलभ न्याय मिलना चाहिए।”
उनके एजेंडा की मुख्य बातें:
•Pendency Reduction: लंबित मामलों को तेज़ी से निपटाना
•ADR & Mediation: मुक़दमों के बाहर विवाद समाधान को बढ़ावा
•Digital Judiciary: AI-assisted listing, e-courts 2.0, virtual hearings
•Judicial Sensitivity: ग्रामीण भारत तक न्याय की पहुँच और पीड़ित-केंद्रित न्याय
•Transparency: प्रक्रिया में खुलापन और institutional accountability
उनका कार्यकाल फरवरी 2027 तक रहेगा, जो कई बड़े संवैधानिक और सामाजिक मामलों के लिए निर्णायक माना जा रहा है। देश की उम्मीदें — “नया CJI, नया Judicial Era” उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और कानून मंत्री ने सोशल मीडिया पर उन्हें शुभकामनाएँ देते हुए न्यायपालिका में समरसता, तकनीकी सुधार और तेज़ न्याय की अपेक्षाएँ व्यक्त कीं।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन और युवा वकीलों में उत्साह है कि उनके नेतृत्व में—
•कोर्ट अधिक tech-friendly बनेगा
•केस मैनेजमेंट तेज़ होगा
•और न्याय जनता के और करीब आएगा
देशभर की कानूनी बिरादरी मानती है कि न्यायमूर्ति सूर्यकांत भारत की न्यायिक प्रणाली में स्थिरता, संवेदनशीलता और सुशासन का नया अध्याय जोड़ेंगे।