दुनिया के नक्शे पर एक ऐसी हलचल हुई है जिसने शीत युद्ध के दौर की यादें ताजा कर दी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने वेनेजुएला में एक गुप्त लेकिन बेहद आक्रामक सैन्य अभियान चलाकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर लिया है। इस घटना ने न केवल दक्षिण अमेरिका बल्कि पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक समीकरणों को हिला कर रख दिया है। भारत समेत दुनिया के कई देशों ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिससे वैश्विक तनाव चरम पर पहुंच गया है।

वेनेजुएला संकट: लोकतंत्र की बहाली या संप्रभुता पर हमला?
बीते कुछ दिनों से वेनेजुएला की सीमाओं पर अमेरिकी सैन्य हलचल देखी जा रही थी, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि ट्रंप प्रशासन इतनी जल्दी और इतनी बड़ी कार्रवाई करेगा। अमेरिकी विशेष बलों (Special Forces) ने कराकस स्थित राष्ट्रपति भवन के पास एक ऑपरेशन को अंजाम दिया, जिसके बाद निकोलस मादुरो को हिरासत में लेने का दावा किया गया।
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि मादुरो सरकार अवैध थी और वेनेजुएला के लोग लंबे समय से तानाशाही और आर्थिक कंगाली झेल रहे थे। अमेरिका इसे “लोकतंत्र की बहाली” कह रहा है, जबकि रूस, चीन और क्यूबा जैसे देशों ने इसे एक संप्रभु राष्ट्र की स्वतंत्रता पर सीधा हमला करार दिया है।
भारत का रुख: “गहरी चिंता” और कूटनीतिक संतुलन
भारत के विदेश मंत्रालय ने इस घटनाक्रम पर अपनी पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया में “गहरी चिंता” व्यक्त की है। नई दिल्ली में जारी एक बयान में कहा गया है कि किसी भी देश की आंतरिक समस्याओं का समाधान बाहरी सैन्य हस्तक्षेप के बजाय बातचीत और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं से होना चाहिए।
भारत की चिंता के तीन मुख्य कारण हैं:
• ऊर्जा सुरक्षा: वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े कच्चे तेल के भंडार वाले देशों में से एक है। भारत वहां से भारी मात्रा में तेल आयात करता रहा है। अस्थिरता का मतलब है तेल की कीमतों में उछाल।
• अंतरराष्ट्रीय कानून: भारत हमेशा से देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की वकालत करता रहा है।
• प्रवासी भारतीय: वेनेजुएला और पड़ोसी लैटिन अमेरिकी देशों में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा अब सरकार की प्राथमिकता बन गई है।
ट्रंप प्रशासन की रणनीति और वैश्विक प्रतिक्रिया
डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद संभालने के बाद से ही वेनेजुएला के प्रति “जीरो टॉलरेंस” की नीति अपनाई थी। व्हाइट हाउस के प्रेस सचिव के अनुसार, यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी और मानवाधिकारों के हनन को रोकने के लिए जरूरी थी।
रूस और चीन की कड़ी चेतावनी
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इस कार्रवाई को “अंतरराष्ट्रीय डकैती” बताया है। वहीं चीन ने कहा है कि अमेरिका आग से खेल रहा है और इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। जानकारों का मानना है कि यदि स्थिति नहीं संभली, तो यह एक नए छद्म युद्ध (Proxy War) में बदल सकती है।
वेनेजुएला की वर्तमान स्थिति और मानवीय संकट
वेनेजुएला पिछले एक दशक से अधिक समय से आर्थिक मंदी, अत्यधिक मुद्रास्फीति (Hyperinflation) और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। लाखों लोग देश छोड़कर जा चुके हैं। मादुरो की गिरफ्तारी के बाद अब कराकस की सड़कों पर सेना और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें शुरू हो गई हैं।
क्या हैं जमीनी हालात?
• सैन्य नियंत्रण: वेनेजुएला की सेना के एक बड़े हिस्से ने अभी तक अमेरिका समर्थित विपक्षी नेताओं का साथ नहीं दिया है, जिससे गृहयुद्ध का खतरा बना हुआ है।
• आर्थिक प्रभाव: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में आज सुबह 5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
• कम्युनिकेशन ब्लैकआउट: वेनेजुएला के कई हिस्सों में इंटरनेट और बिजली की सप्लाई बाधित है।
भारत के लिए क्या हैं चुनौतियां?
भारत के लिए यह स्थिति “कांटों की सेज” जैसी है। एक तरफ अमेरिका के साथ मजबूत होते रणनीतिक संबंध हैं, तो दूसरी तरफ रूस के साथ पुरानी दोस्ती और ऊर्जा की जरूरतें।
• तेल की कीमतें: यदि वेनेजुएला का संकट लंबा खिंचता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे महंगाई पर दबाव बढ़ेगा।
• गुटनिरपेक्षता की परीक्षा: क्या भारत खुलकर अमेरिका की आलोचना करेगा या मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा? दिल्ली में इस पर उच्च स्तरीय बैठकें जारी हैं।

भू-राजनीतिक विशेषज्ञों की राय
विदेशी मामलों के जानकारों का कहना है कि यह “डॉक्ट्रिन ऑफ इंटरवेंशन” का नया अध्याय है। ट्रंप प्रशासन यह संदेश देना चाहता है कि वह अपने पड़ोसी क्षेत्र (Western Hemisphere) में किसी भी विरोधी शक्ति को बर्दाश्त नहीं करेगा। हालांकि, यह कदम वैश्विक कूटनीति के लिए एक खतरनाक मिसाल पेश कर सकता है।
प्रमुख तिथियां और घटनाक्रम:
• 3 जनवरी 2026: वेनेजुएला सीमा पर अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती।
• 4 जनवरी 2026 की रात: कराकस में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसी कार्रवाई।
• 5 जनवरी 2026: निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि।
वेनेजुएला में मादुरो की गिरफ्तारी ने 21वीं सदी की राजनीति में एक नया मोड़ ला दिया है। यह केवल एक देश के नेता को बदलने की बात नहीं है, बल्कि यह विश्व व्यवस्था (World Order) को दी गई चुनौती है। भारत की “संवाद और शांति” की अपील इस वक्त सबसे तार्किक लगती है, क्योंकि युद्ध या सैन्य कार्रवाई कभी भी स्थायी समाधान नहीं हो सकती।
आने वाले दिनों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में इस पर गर्मागर्म बहस होने की उम्मीद है। क्या अमेरिका वहां अपनी कार्रवाई को सही साबित कर पाएगा? या फिर वेनेजुएला एक और वियतनाम या लीबिया बनने की राह पर निकल चुका है? यह तो समय ही बताएगा।
क्या आपको लगता है कि किसी देश में लोकतंत्र की बहाली के लिए विदेशी सैन्य हस्तक्षेप जायज है? अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।
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