अगर आप इस नए साल में अपने घर के बाहर एक चमचमाती नई कार खड़ी करने का सपना देख रहे हैं, तो शायद आपको अपनी प्लानिंग थोड़ी जल्दी करनी होगी। ऑटोमोबाइल मार्केट से एक बड़ी खबर आ रही है—Hyundai, Tata Motors, और BMW समेत कुल 9 बड़े ऑटोमेकर्स ने जनवरी 2026 से अपनी गाड़ियों की कीमतों में 3% तक की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है।
यह खबर उन लोगों के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है जो फेस्टिव सीजन के डिस्काउंट के बाद दाम गिरने का इंतज़ार कर रहे थे। आइए विस्तार से समझते हैं कि आखिर कंपनियां ऐसा क्यों कर रही हैं और आपकी जेब पर इसका कितना असर पड़ेगा।

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं दाम?
कंपनियों का कहना है कि यह फैसला उन्होंने मजबूरी में लिया है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:
• कच्चे माल की बढ़ती कीमत: कार बनाने में इस्तेमाल होने वाले स्टील, एल्यूमीनियम और प्लास्टिक जैसे ‘इनपुट मैटेरियल्स’ के दाम पिछले कुछ महीनों में काफी बढ़ गए हैं।
• रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया लगातार नीचे गिर रहा है। इससे उन कलपुर्जों (parts) की कीमत बढ़ गई है जिन्हें कंपनियां विदेशों से इम्पोर्ट (Import) करती हैं।
• लॉजिस्टिक्स और चिप की समस्या: ग्लोबल सप्लाई चेन में अभी भी कुछ रुकावटें हैं, जिसकी वजह से ट्रांसपोर्टेशन और चिप्स की डिलीवरी महंगी हो रही है।
कौन-कौन सी कंपनियां हैं इस लिस्ट में?
कीमतें बढ़ाने वाली लिस्ट में सिर्फ बजट कारें ही नहीं, बल्कि लग्जरी गाड़ियां भी शामिल हैं। इनमें Hyundai, Tata Motors, Honda, और BMW तो लीड कर ही रहे हैं, साथ ही Mahindra, Kia, MG Motor, Skoda और Toyota भी अपनी कीमतों में बदलाव करने की तैयारी में हैं।
इसका मतलब है कि अगर आप Tata Nexon या Hyundai Creta जैसी पॉपुलर SUV लेने की सोच रहे हैं, तो आपको 20,000 से 50,000 रुपये तक एक्स्ट्रा देने पड़ सकते हैं। वहीं BMW जैसी लग्जरी कारों के लिए यह अंतर लाखों में जा सकता है।
क्या इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) पर भी पड़ेगा असर?
यहाँ एक छोटा सा ‘सिल्वर लाइनिंग’ या राहत की बात हो सकती है। हालांकि अभी टाटा जैसी कंपनियां अपने EV पोर्टफोलियो पर भी विचार कर रही हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि बजट 2026 में सरकार बैटरी इम्पोर्ट ड्यूटी में कुछ कटौती कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो शायद इलेक्ट्रिक कारों के दाम उतने न बढ़ें जितने पेट्रोल-डीजल कारों के बढ़ेंगे। लेकिन फिलहाल के लिए, अनिश्चितता बनी हुई है।

ग्राहकों के लिए हमारी सलाह
अगर आपने मन बना लिया है और फाइनेंस की बात बन चुकी है, तो 31 दिसंबर 2025 से पहले बुकिंग करा लेना ही समझदारी होगी। डीलर्स के पास फिलहाल पुराना स्टॉक मौजूद है और कई शोरूम्स पुराने रेट पर ही गाड़ियां निकालने की कोशिश कर रहे हैं। जनवरी आते ही नई ‘प्राइस लिस्ट’ लागू हो जाएगी और फिर मोल-भाव की गुंजाइश भी कम रहेगी।

