तेज प्रताप यादव की पार्टी में बड़ा एक्शन! राष्ट्रीय प्रवक्ता संतोष रेणु निष्कासित, लगा यह गंभीर आरोप

तेज प्रताप यादव

बिहार की राजनीति में हमेशा चर्चा में रहने वाले तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। अपनी नई पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ (Janshakti Janta Dal) के जरिए राजनीतिक जमीन तलाश रहे तेज प्रताप ने आज एक कड़ा फैसला लेते हुए अपनी ही पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता संतोष रेणु (Santosh Renu) को बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

यह खबर इसलिए भी अहम है क्योंकि संतोष रेणु, तेज प्रताप के बेहद करीबी माने जाते थे। आखिर ऐसा क्या हुआ कि रातों-रात इतना बड़ा फैसला लेना पड़ा? आइए जानते हैं पूरा मामला विस्तार से।

तेज प्रताप यादव

क्यों हुई संतोष रेणु पर कार्रवाई?

पार्टी सूत्रों और आधिकारिक बयान के मुताबिक, संतोष रेणु पर भ्रष्टाचार के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस बहाली (Police Recruitment) के नाम पर कई अभ्यर्थियों से लाखों रुपये की वसूली की है।

तेज प्रताप यादव, जो अपनी नई पार्टी को ‘साफ-सुथरी छवि’ वाली पार्टी के रूप में प्रोजेक्ट कर रहे हैं, ने इस मामले को ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत लिया। जैसे ही यह मामला उनके संज्ञान में आया, उन्होंने तुरंत प्रभाव से संतोष रेणु को पद से हटाने और पार्टी से निष्कासित करने का आदेश जारी कर दिया।

आरोपों की मुख्य बातें:

• पुलिस बहाली में धांधली: संतोष रेणु पर आरोप है कि उन्होंने युवाओं को पुलिस में नौकरी दिलाने का झांसा दिया।

• पैसों का लेनदेन: पीड़ितों का दावा है कि नौकरी के बदले उनसे मोटी रकम की मांग की गई थी।

• पार्टी की छवि को नुकसान: पार्टी हाईकमान का मानना है कि ऐसे कृत्यों से संगठन की विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।

तेज प्रताप यादव का कड़ा संदेश

इस कार्रवाई के जरिए तेज प्रताप यादव ने बिहार की जनता और अपने विरोधियों को एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है। उन्होंने साफ कर दिया है कि उनकी पार्टी ‘जनशक्ति जनता दल’ में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है, चाहे वह व्यक्ति कितने भी ऊंचे पद पर क्यों न हो।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आरजेडी (RJD) से अलग होने के बाद तेज प्रताप अपनी एक अलग और सख्त प्रशासक वाली छवि बनाना चाहते हैं। यह कदम उसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।

तेज प्रताप यादव

संतोष रेणु का राजनीतिक भविष्य?

संतोष रेणु, जो अब तक टीवी डिबेट्स और सोशल मीडिया पर तेज प्रताप यादव का पुरजोर बचाव करते नजर आते थे, अब खुद सवालों के घेरे में हैं। पुलिस बहाली के नाम पर ठगी का आरोप न केवल उनका राजनीतिक करियर खत्म कर सकता है, बल्कि उन पर कानूनी कार्रवाई की तलवार भी लटक सकती है।

क्या संतोष रेणु इन आरोपों पर कोई सफाई देंगे? या फिर यह मामला पुलिस जांच की ओर जाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा।

क्या इससे बिहार की राजनीति में बदलाव आएगा? कमेंट करके जरूर बताएं!

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