Opposition Role India: टी-शर्ट उतारकर प्रदर्शन! विपक्ष की 3 गलतियां जो देश को कर रहीं शर्मसार

Opposition Role India

लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष (Opposition) का होना बहुत जरूरी है। विपक्ष का काम सत्ताधारी पार्टी की गलतियों पर सवाल उठाना, महंगाई पर बात करना और जनता की आवाज बनना है। लेकिन एक आम हिंदुस्तानी के मन में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सरकार का विरोध करते-करते हमारे देश का विपक्ष खुद ‘देश का विरोध’ करने लगा है?

हाल ही में दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे ग्लोबल ‘इंडिया AI इम्पैक्ट समिट 2026’ में इंडियन यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने टी-शर्ट उतारकर (Shirtless) प्रदर्शन किया। इस घटना ने सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या विरोध जताने के लिए अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपने ही देश की फजीहत कराना सही है? आज ‘ApniVani’ के इस विशेष विश्लेषण में हम विपक्ष की उन 3 घटनाओं पर नजर डालेंगे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को असहज किया है।

Shirtless in Ai Summit
The Indian Express

AI समिट में ‘शर्टलेस’ प्रदर्शन: मंच अंतरराष्ट्रीय, लेकिन राजनीति लोकल

भारत मंडपम में आयोजित AI इम्पैक्ट समिट एक बड़ा ग्लोबल इवेंट था, जहां फ्रांस के राष्ट्रपति समेत दुनियाभर के दिग्गज टेक लीडर्स और राष्ट्रप्रमुख हिस्सा ले रहे थे। इसी बीच, यूथ कांग्रेस के कुछ कार्यकर्ता वहां पहुंचे और अपनी शर्ट उतारकर प्रधानमंत्री के खिलाफ नारे लगाने लगे। प्रदर्शनकारियों ने “PM is compromised” के नारे लगाए और भारत-अमेरिका ट्रेड डील का विरोध किया।
आलोचकों और सत्ता पक्ष का कहना है कि जब विदेशी मेहमान भारत की तकनीकी ताकत देखने आए हों, वहां ‘टॉपलेस’ (Topless) और ‘ब्रेनलेस’ होकर हंगामा करना देश की बदनामी कराता है। बीजेपी के कई नेताओं ने इसे ‘राष्ट्रीय शर्म’ (National Shame) करार दिया है।

Rahul Gandhi

सर्जिकल स्ट्राइक और पाकिस्तान पर बयानबाजी

यह पहली बार नहीं है जब घरेलू राजनीति के कारण देश की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नुकसान पहुंचा हो। जब भी देश की सेना कोई बड़ा कदम उठाती है, तो राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो जाती है। चाहे वह पाकिस्तान में घुसकर की गई सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike) हो या एयर स्ट्राइक, मुख्य विपक्षी दल के कुछ नेताओं ने सरकार से ‘सबूत’ मांग लिए थे।

अंतरराष्ट्रीय मंचों और पाकिस्तानी मीडिया में इसका सीधा संदेश यह गया कि भारत के अंदर ही लोग अपनी सेना के दावों पर सवाल उठा रहे हैं। सरकार को घेरने के चक्कर में ऐसे बेतुके बयान सीधे तौर पर दुश्मन देश के प्रोपेगेंडा को मजबूत करते हैं।

China and Arunachal Pradesh Dispute

चीन और अरुणाचल प्रदेश: दुनिया के सामने कमजोर पक्ष रखना

विपक्ष की भूमिका पर तीसरा बड़ा सवाल चीन (China) और सीमा विवाद (Border Dispute) को लेकर उठता है। कई बार विपक्षी नेताओं ने विदेशी मीडिया के सामने या संसद में यह दावा किया है कि चीन ने हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया है या अरुणाचल प्रदेश में गांव बसा लिए हैं। जानकारों का मानना है कि कूटनीति (Diplomacy) का पहला नियम है कि बाहरी खतरों के खिलाफ पूरा देश एकजुट दिखना चाहिए।

जब देश का ही विपक्ष दुनिया के सामने ऐसी बातें करता है, तो चीन इसी का फायदा उठाकर अपनी विस्तारवादी नीतियों को सही ठहराने की कोशिश करता है। घरेलू राजनीति के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) पर ऐसे बयान देश के मनोबल को गिराते हैं।

AI Summit India

ApniVani की बात

लोकतंत्र में विपक्ष के बिना सरकार तानाशाही कर सकती है, इसलिए विपक्ष का मजबूत होना जरूरी है। विपक्ष को पूरी आजादी है कि वह बेरोजगारी, महंगाई और घरेलू मुद्दों पर सड़क से संसद तक सरकार की ईंट से ईंट बजा दे।

लेकिन जब बात AI समिट जैसे ग्लोबल इवेंट्स की हो, या सीमा पर खड़े दुश्मनों की हो, तो वहां ‘पार्टी लाइन’ से ऊपर उठकर ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) की सोच होनी चाहिए। एक आम हिंदुस्तानी भी यही चाहता है कि विपक्ष तार्किक (Logical) मुद्दे उठाए, न कि केवल सुर्खियां बटोरने के लिए टी-शर्ट उतारकर देश की जग-हंसाई कराए।

आपकी राय: क्या आपको भी लगता है कि AI समिट जैसे अंतरराष्ट्रीय मंच पर किया गया यह प्रदर्शन गलत था, या विपक्ष के पास अपनी बात रखने का यही एक तरीका बचा है? कमेंट बॉक्स में अपनी बेबाक राय जरूर लिखें।

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