बिहार की सियासत में बड़ी Political Storm तब मची जब 19 नवंबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक ने 17वीं विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव पारित कर दिया। तुरंत बाद नीतीश कुमार ने अपना इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया और राज्यपाल ने इसे स्वीकार भी कर लिया।
अब NDA, जिसकी चुनाव में निर्णायक जीत हुई है, नई सरकार गठन की तैयारियों में तेज़ी से जुट चुका है। सभी घटक दलों की संयुक्त बैठक में नए मंत्रियों, विभागों और सत्ता-साझेदारी पर लंबी चर्चा हुई।
20 नवंबर: गांधी मैदान में होगा भव्य शपथग्रहण
पटना का गांधी मैदान 20 नवंबर को एक ऐतिहासिक दृश्य का गवाह बनेगा, जहां नीतीश कुमार लगातार 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। सुबह 11:30 बजे होने वाले समारोह में 22–23 मंत्रियों की टीम भी शपथ लेगी—जिसमें JDU–BJP का बराबर प्रतिनिधित्व, साथ ही लोजपा, हम और अन्य NDA के सहयोगी दलों के चेहरे शामिल होंगे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह और देश के 13 से अधिक राज्यों के मुख्यमंत्री बतौर प्रमुख अतिथि इस समारोह में मौजूद रहेंगे। सुरक्षा के मद्देनज़र गांधी मैदान को शपथ तक आम जनता के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया है।
नई विधानसभा का पहला सत्र—फ्लोर टेस्ट से लेकर बजट तक की तैयारी
शपथ के 10–15 दिनों के भीतर बिहार विधानसभा का पहला सत्र बुलाया जाएगा। इसमें नई सरकार की प्राथमिकताएँ, विभागवार चर्चा, फ्लोर टेस्ट, नए स्पीकर का चुनाव और बजट सत्र की रूपरेखा तय की जाएगी। अनुमान है कि दिसंबर के पहले सप्ताह में सदन की कार्यवाही शुरू हो जाएगी।
नई नीति-घोषणाओं के साथ सरकार विकास, कानून व्यवस्था और वेलफेयर योजनाओं पर अपनी दिशा स्पष्ट करेगी।
जनता की उम्मीदें vs विपक्ष के सवाल
जहाँ NDA इस बदलाव को जनादेश का सम्मान और विकासवाद की वापसी बता रहा है, वहीं विपक्ष सत्ता-समीकरण और विधानसभा भंग के फैसले पर सवाल खड़े कर रहा है।
उधर जनता नई सरकार से स्थिरता, तेज़ विकास, रोजगार, सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता की उम्मीद लिए बैठी है। बिहार अब एक नए राजनीतिक अध्याय की ओर बढ़ रहा है—और सबकी नजरें 20 नवंबर के शपथग्रहण पर टिकी हैं।