सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: जब 1000 साल के संघर्ष और शौर्य की गूंज से थर्राया अरब सागर, पीएम मोदी ने की शौर्य यात्रा की अगुवाई

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सोमनाथ मंदिर में आज का दिन भारतीय इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के प्रभास पाटन स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ मंदिर में ‘शौर्य यात्रा’ की अगुवाई कर पूरी दुनिया को भारत की अटूट आस्था और अदम्य साहस का संदेश दिया है। यह आयोजन मात्र एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि विदेशी आक्रांताओं के खिलाफ सदियों तक चले संघर्ष और जीत की गौरवगाथा है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व: आस्था और संकल्प का महासंगम

सोमनाथ की पवित्र भूमि पर आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का आज समापन होने जा रहा है। 8 जनवरी से शुरू हुए इस चार दिवसीय महोत्सव का मुख्य आकर्षण आज की शौर्य यात्रा रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जो खुद सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं, सुबह करीब 9:45 बजे इस भव्य जुलूस में शामिल हुए।

इस यात्रा का उद्देश्य उन गुमनाम योद्धाओं को श्रद्धांजलि देना है जिन्होंने सदियों तक सोमनाथ मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। यात्रा में 108 घोड़ों का प्रतीकात्मक जुलूस निकाला गया, जो वीरता और त्याग का प्रतीक है।

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1000 साल का इतिहास और पुनरुद्धार की कहानी

यह वर्ष 2026 सोमनाथ के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इतिहास के पन्ने पलटें तो ठीक 1000 साल पहले, यानी 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी ने इस मंदिर पर पहला बड़ा आक्रमण किया था। इसके बाद सदियों तक इसे बार-बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार भारत की आस्था ने इसे और भव्य रूप में खड़ा कर दिया।

प्रमुख मील के पत्थर:

1026 ईस्वी: गजनवी का पहला विध्वंसक आक्रमण।

1951: लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों से मंदिर का ऐतिहासिक पुनरुद्धार और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा प्राण-प्रतिष्ठा।

2026: पुनरुद्धार की 75वीं वर्षगांठ और आक्रमण के 1000 साल पूरे होने पर ‘स्वाभिमान पर्व’ का आयोजन।

वीर हमीरजी गोहिल: जिनके बलिदान को पीएम ने किया नमन

शौर्य यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री ने मंदिर परिसर के बाहर स्थित वीर हमीरजी गोहिल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। हमीरजी गोहिल उन महान योद्धाओं में से एक थे, जिन्होंने अलाउद्दीन खिलजी की सेना से सोमनाथ की रक्षा करते हुए अपने प्राण त्याग दिए थे। लोक कथाओं में कहा जाता है कि हमीरजी का धड़ कटने के बाद भी वे दुश्मनों से लड़ते रहे थे।

आज की यह यात्रा उन्हीं जैसे हजारों वीरों को समर्पित है, जिनकी वजह से आज सोमनाथ मंदिर शान से अरब सागर के तट पर खड़ा है।

72 घंटे का अखंड ओंकार नाद और ड्रोन शो

पीएम मोदी कल शाम (10 जनवरी) ही सोमनाथ पहुंच गए थे। उन्होंने मंदिर में चल रहे 72 घंटे के अखंड ‘ओंकार’ मंत्र जाप में हिस्सा लिया। इसके बाद रात्रि में एक भव्य ड्रोन शो का आयोजन किया गया, जिसमें सोमनाथ के विनाश और फिर से निर्माण (The Rise of Somnath) की कहानी को आकाश में उकेरा गया। आधुनिक तकनीक और प्राचीन आस्था का यह संगम देखने लायक था।

पीएम मोदी का संबोधन: “सोमनाथ केवल पत्थर की इमारत नहीं, हमारी चेतना है”

शौर्य यात्रा और मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना के बाद प्रधानमंत्री ने एक विशाल जनसभा को संबोधित किया। उनके भाषण के मुख्य अंश इस प्रकार रहे:

सांस्कृतिक गौरव: पीएम ने कहा कि सोमनाथ की कहानी विध्वंस की नहीं, बल्कि ‘विजय’ की कहानी है। यह मंदिर इस बात का प्रमाण है कि सत्य और आस्था को कभी मिटाया नहीं जा सकता।

युवा पीढ़ी को संदेश: उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने इतिहास को जानें और सोमनाथ से संघर्ष की प्रेरणा लें।

विकास और विरासत: पीएम ने इस बात पर जोर दिया कि आज का भारत अपनी विरासत को सहेजते हुए आधुनिकता की ओर बढ़ रहा है।

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न्यूज़ एनालिसिस: क्यों महत्वपूर्ण है यह दौरा?

राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टियों से पीएम मोदी का यह दौरा काफी अहम है:

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: राम मंदिर के बाद सोमनाथ के इस भव्य आयोजन के जरिए सरकार देश की सांस्कृतिक जड़ों को मजबूत करने का संदेश दे रही है।

वैश्विक कूटनीति: सोमनाथ के बाद पीएम मोदी अहमदाबाद में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ (Friedrich Merz) से मुलाकात करेंगे। इससे यह संदेश जाता है कि भारत अपनी परंपराओं के साथ-साथ वैश्विक संबंधों में भी नेतृत्व कर रहा है।

क्या आपको लगता है कि सोमनाथ जैसे ऐतिहासिक स्थलों के माध्यम से युवाओं को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ना आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है? हमें नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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