Sensex-Nifty में हाहाकार! साल 2026 के पहले हफ्ते में ही क्यों डूबे निवेशकों के पैसे? जानें क्या है असली वजह

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नए साल का जश्न अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि भारतीय शेयर बाजार के गलियारों से निवेशकों के लिए चिंता भरी खबर सामने आई है। साल 2026 के पहले हफ्ते के आखिरी कारोबारी सत्रों में Sensex (सेंसेक्स) और Nifty (निफ्टी) में हल्की लेकिन डराने वाली गिरावट दर्ज की गई। जहां निवेशक उम्मीद कर रहे थे कि बाजार नई ऊंचाइयों को छुएगा, वहीं वैश्विक अनिश्चितताओं ने इस रफ्तार पर ब्रेक लगा दिया है। आइए जानते हैं क्या है Sensex-Nifty बाजार की इस गिरावट के पीछे की 5 बड़ी वजहें और क्या आपको अभी शेयर बेचना चाहिए या खरीदना?

बाजार में गिरावट के 5 प्रमुख कारण

वैश्विक बाजारों में मंदी की आहट: अमेरिकी फेडरल रिजर्व और यूरोपीय बाजारों से आने वाले संकेत सकारात्मक नहीं रहे हैं। ब्याज दरों में बदलाव की आशंका ने निवेशकों के मन में डर पैदा कर दिया है।

प्रॉफिट बुकिंग (Profit Booking): पिछले कुछ हफ्तों में कई शेयरों ने अच्छा रिटर्न दिया था। ऐसे में बड़े निवेशकों (FIIs) ने अपना मुनाफा वसूलना शुरू कर दिया है, जिससे बाजार नीचे आया।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव ने भारतीय बाजार के सेंटिमेंट को प्रभावित किया है।

भू-राजनीतिक तनाव: दुनिया के कुछ हिस्सों में चल रहे तनाव ने सप्लाई चेन को लेकर फिर से चिंताएं बढ़ा दी हैं।

आईटी और बैंकिंग सेक्टर में सुस्ती: निफ्टी के भारी भरकम शेयर जैसे TCS, Infosys और HDFC Bank में कमजोरी ने सूचकांक को नीचे खींचने का काम किया।

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अगले हफ्ते क्या होगा?

बाजार के जानकारों का मानना है कि यह गिरावट केवल एक ‘हेल्दी करेक्शन’ हो सकती है। अगर सोमवार को बाजार फिर से संभलता है, तो हमें रिकवरी देखने को मिल सकती है। हालांकि, रिटेल निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे हड़बड़ी में कोई फैसला न लें।

विशेषज्ञ की सलाह: “बाजार में जब गिरावट हो, तब अच्छी कंपनियों के फंडामेंटल्स चेक करें। गिरावट हमेशा खरीदारी का मौका लेकर आती है, बशर्ते आप लंबी अवधि (Long Term) के लिए निवेश कर रहे हों।”

निवेशक अब क्या करें?

SIP चालू रखें: बाजार गिरने पर आपके SIP का फायदा बढ़ जाता है क्योंकि आपको कम कीमत पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं।

पेनी स्टॉक्स से बचें: इस अनिश्चितता के दौर में छोटे और कमजोर फंडामेंटल्स वाले शेयरों (Penny Stocks) से दूर रहें।

सेक्टर पर नजर: इस हफ्ते ऑटो और रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर पर नजर रखें, वहां कुछ हलचल देखी जा सकती है।

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2026 की शुरुआत थोड़ी चुनौतीपूर्ण रही है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को देखते हुए यह उम्मीद है कि बाजार जल्द ही वापसी करेगा। अगर आप शेयर बाजार में नए हैं, तो हमेशा किसी वित्तीय सलाहकार से सलाह जरूर लें।

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शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव : बुधवार की तेजी गुरुवार को गिरावट में बदली

शेयर बाजार

भारतीय शेयर बाजार में इस हफ्ते जबरदस्त उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बुधवार को आई जबरदस्त तेजी के बाद गुरुवार को बाजार ने करवट बदली और भारी गिरावट के साथ बंद हुआ। दो दिनों के इस उतार-चढ़ाव ने निवेशकों की उम्मीदों और मुनाफे — दोनों को झटका दिया।

29 अक्टूबर : निफ्टी और सेंसेक्स में जोरदार तेजी, ऑल-टाइम हाई के करीब पहुंचा बाजार

बुधवार को शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी रही। BSE सेंसेक्स 368.97 अंक की बढ़त के साथ 84,997.13 पर बंद हुआ। NSE निफ्टी 117.70 अंक उछलकर 26,053.90 के स्तर पर पहुंच गया। यह तेजी मुख्य रूप से वैश्विक बाजारों में सकारात्मक रुझान, अमेरिकी फेड की ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदों, और घरेलू निवेशकों की खरीदारी से प्रेरित थी। बैंकिंग, आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों में जबरदस्त तेजी देखने को मिली।

HDFC Bank, Infosys, Maruti Suzuki और TCS जैसे शेयरों ने बाजार को ऊपर खींचा। निफ्टी अपने ऑल-टाइम हाई 26,100 के स्तर को छूने के करीब पहुंच गया था।

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30 अक्टूबर : एक दिन में पलटी तस्वीर, सेंसेक्स-निफ्टी लाल निशान में

गुरुवार को बाजार ने अचानक ब्रेक लगा दिए।

सेंसेक्स 592.67 अंक (0.70%) गिरकर 84,404.46 पर बंद हुआ। निफ्टी 176.05 अंक (0.68%) की गिरावट के साथ 25,877.85 पर आ गया। इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में एक ही दिन में करीब ₹3.5 लाख करोड़ रुपये की कमी आई।

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त टिप्पणी, FII द्वारा भारी बिकवाली, और वैश्विक बाजारों की कमजोरी इस गिरावट के मुख्य कारण रहे। रिलायंस, टाटा स्टील, और SBI जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी मुनाफावसूली हावी रही।

निवेशकों के लिए संकेत

मार्केट विशेषज्ञों के अनुसार, यह गिरावट एक स्वाभाविक करेक्शन (natural correction) है और फिलहाल 25,800–26,000 के दायरे में सपोर्ट बनता दिख रहा है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लंबी अवधि के निवेशक घबराएं नहीं, बल्कि अच्छी कंपनियों में हर गिरावट पर धीरे-धीरे निवेश बढ़ाएं।

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