अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया है। पाकिस्तानी वायुसेना के हवाई हमले के जवाब में अफगान सेना ने सीमा पर जबरदस्त जवाबी कार्रवाई की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अफगानिस्तान ने 15 पाकिस्तानी सैन्य पोस्ट्स पर कब्जा कर लिया है और कई पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराने का दावा किया है। यह संघर्ष दुर्दांता लाइन पर केंद्रित है, जहां दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं। तालिबान शासन के बाद भी अफगानिस्तान की सेना ने अपनी ताकत दिखाई है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा बन गया है।

पाकिस्तानी हवाई हमले ने भड़काया विवाद
पाकिस्तान ने अफगान सीमा पर कथित आतंकी ठिकानों को निशाना बनाते हुए हवाई हमले किए, जिसमें अफगानिस्तान ने कई निर्दोष नागरिकों के मरने का आरोप लगाया। इसके जवाब में अफगान सेना ने तुरंत रणनीतिक हमला बोल दिया। आधिकारिक बयानों में अफगान पक्ष ने कहा कि उनके सैनिकों ने रातोंरात ऑपरेशन चलाकर 15 महत्वपूर्ण पोस्ट्स पर नियंत्रण हासिल कर लिया। इन पोस्ट्स में हथियार, गोला-बारूद और निगरानी उपकरण भरे पड़े थे। पाकिस्तानी सेना को भारी नुकसान हुआ, जिसमें कम से कम 20-25 सैनिक मारे गए। यह घटना 26 फरवरी 2026 को शुरू हुई, जो अब पूर्ण युद्ध का रूप ले रही है।
अफगानिस्तान का दावा: दर्जनों पाक सैनिक ढेर
अफगानिस्तान के रक्षा मंत्रालय ने प्रेस रिलीज जारी कर दावा किया कि उनके बहादुर सैनिकों ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को करारा जवाब दिया। “हमने दुश्मन की 15 चौकियां फतह कीं और सैकड़ों गोलियां चलाकर कई सैनिकों को मार गिराया,” मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में अफगान सैनिक पाकिस्तानी पोस्ट्स पर तिरंगा फहराते नजर आ रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि यह अफगान प्रोपेगैंडा है, लेकिन स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि हो रही है कि सीमा पर भारी गोलीबारी हुई। यह संघर्ष कंधार और कुंनर प्रांतों में फैल चुका है।
दुर्दांता लाइन: पुराना विवाद, नया संकट
दुर्दांता लाइन, जो 1893 में ब्रिटिश काल में खींची गई थी, हमेशा से अफ-पाक तनाव का केंद्र रही। तालिबान के सत्ता में आने के बाद पाकिस्तान ने बार-बार आतंकी हमलों का हवाला देकर अफगानिस्तान पर दबाव बनाया। लेकिन इस बार अफगानिस्तान ने चुप्पी तोड़ दी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जंग आर्थिक संकट और आंतरिक दबाव से प्रेरित है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था डगमगा रही है, वहीं अफगानिस्तान अपनी संप्रभुता साबित करने को बेताब। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर भारत और अमेरिका, नजर रखे हुए हैं।
क्षेत्रीय प्रभाव: भारत के लिए क्या मतलब?

इस जंग का असर पूरे दक्षिण एशिया पर पड़ेगा। भारत, जो पहले से पाकिस्तान पर नजर रखता है, अब अफगानिस्तान को समर्थन दे सकता है। संसद में बहस छिड़ गई है कि क्या यह पाकिस्तान को कमजोर करने का मौका है। सीमा पर शरणार्थी संकट बढ़ सकता है, और तेल कीमतें प्रभावित होंगी। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है, लेकिन युद्धविराम की कोई उम्मीद नहीं। अफगानिस्तान की जीत से तालिबान की साख बढ़ेगी, जबकि पाकिस्तान को आर्मी चीफ असीम मुनीर पर सवाल उठेंगे।
आने वाले दिन: युद्ध या शांति?
अभी स्थिति तनावपूर्ण है, दोनों सेनाएं और सैन्यबंदी कर रही हैं। अफगानिस्तान ने पोस्ट्स पर मजबूत पकड़ बना ली, लेकिन पाकिस्तान जवाबी हमला प्लान कर रहा। वैश्विक शक्तियां मध्यस्थता की कोशिश करेंगी, पर इतिहास गवाह है कि अफ-पाक विवाद आसानी से सुलझते नहीं। भारत को अपनी सीमाओं पर सतर्क रहना होगा। यह घटना 2026 के सबसे बड़े भू-राजनीतिक संकट के रूप में दर्ज हो सकती है।
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