Akshay Kumar In Golmaal 5:- लगने वाला है कॉमेडी का तड़का, मुंबई में शुरू हुई शूटिंग!

Akshay Kumar In Golmaal 5

बॉलीवुड के गलियारों से एक ऐसी खबर आई है जिसने सिनेमा प्रेमियों के बीच उत्साह की लहर दौड़ा दी है। रोहित शेट्टी की सबसे सफल और पसंदीदा कॉमेडी फ्रेंचाइजी ‘गोलमाल’ अपने पांचवें भाग के साथ वापस आ रही है। लेकिन इस बार का धमाका दोगुना होने वाला है, क्योंकि ‘खिलाड़ी’ अक्षय कुमार अब इस पागलपंती वाली टोली का हिस्सा बन चुके हैं। फिल्म की शूटिंग आधिकारिक तौर पर मुंबई में शुरू हो चुकी है, जिससे यह साफ हो गया है कि साल 2026-27 बॉक्स ऑफिस पर बड़े रिकॉर्ड टूटने वाले हैं।

रोहित शेट्टी का मास्टरस्ट्रोक: अक्षय बनाम अजय

रोहित शेट्टी ने अपने 52वें जन्मदिन के मौके पर ‘गोलमाल 5’ की घोषणा कर फैंस को सबसे बड़ा तोहफा दिया। अक्षय कुमार ने सोशल मीडिया पर एक मजेदार वीडियो साझा करते हुए इस खबर की पुष्टि की। फिल्म की सबसे बड़ी यूएसपी अक्षय कुमार का किरदार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्षय इस बार कॉमेडी नहीं बल्कि एक ‘विलेन’ के रूप में नजर आएंगे। अजय देवगन (गोपाल) और अक्षय कुमार के बीच टॉम एंड जेरी जैसा मुकाबला देखने को मिलेगा, जो दर्शकों के लिए हंसते-हंसते लोटपोट होने का कारण बनेगा। अक्षय ने इस फिल्म के लिए विशेष रूप से 18 दिन आवंटित किए हैं और चर्चा है कि वह एक अनोखे ‘बाल्ड लुक’ (गंजे अवतार) में दिखाई दे सकते हैं।

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पुरानी गैंग की वापसी और नए चेहरों का तड़का

‘गोलमाल 5’ की सबसे बड़ी ताकत इसकी ओरिजिनल स्टार कास्ट है। अजय देवगन के साथ अरशद वारसी (माधव), तुषार कपूर (लकी), श्रेयस तलपड़े (लक्ष्मण 1) और कुणाल खेमू (लक्ष्मण 2) एक बार फिर पर्दे पर अपनी केमिस्ट्री दिखाएंगे। फैंस के लिए एक और खुशखबरी यह है कि शरमन जोशी की भी इस फ्रेंचाइजी में वापसी हो रही है। महिला कलाकारों की बात करें तो साउथ की मशहूर अभिनेत्री प्रियामणि एक महत्वपूर्ण भूमिका में जुड़ी हैं, जबकि करीना कपूर खान के कैमियो या वापसी को लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है। जॉनी लीवर, संजय मिश्रा और मुकेश तिवारी (वसूली भाई) की मौजूदगी कॉमेडी के स्तर को और ऊंचा ले जाएगी।

Akshay Kumar In Golmaal 5

गोलमाल फ्रेंचाइजी का सुनहरा इतिहास

साल 2006 में शुरू हुई ‘गोलमाल: फन अनलिमिटेड’ से लेकर 2017 की ‘गोलमाल अगेन’ तक, इस सीरीज ने हमेशा दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया है। ‘गोलमाल अगेन’ ने अकेले 200 करोड़ से ज्यादा का कारोबार किया था। अब अक्षय कुमार के जुड़ने से फिल्म की ब्रांड वैल्यू और ज्यादा बढ़ गई है। फिल्म का बजट काफी बड़ा रखा गया है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि फिल्म के म्यूजिक और सैटेलाइट राइट्स से पहले ही भारी रिकवरी की खबरें आ रही हैं। रोहित शेट्टी का ‘कॉमेडी-एक्शन’ स्टाइल इस बार नए विजुअल्स और ग्रैंड स्केल पर देखने को मिलेगा।

शूटिंग शेड्यूल और रिलीज की तारीख

फिल्म के पहले शेड्यूल की शूटिंग फरवरी 2026 में मुंबई में शुरू हुई, जो लगभग एक महीने तक चलेगी। रोहित शेट्टी इस फिल्म को दिसंबर 2026 या 2027 की शुरुआत में रिलीज करने की योजना बना रहे हैं। अक्षय कुमार की एंट्री ने इस प्रोजेक्ट को साल की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में से एक बना दिया है। सोशल मीडिया पर #Golmaal5 और #AkshayKumar ट्रेंड कर रहा है, जो यह दर्शाता है कि फैंस इस जोड़ी को पर्दे पर भिड़ते हुए देखने के लिए कितने बेताब हैं।

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North Korea Japan Missile News: किम जोंग का खौफनाक हमला! एक साथ दागी 10 बैलिस्टिक मिसाइलें, जापान में ‘इमरजेंसी’।

North Korea Japan Missile News

दुनिया इस वक्त एक बारूद के ढेर पर बैठी है। एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच मिडल-ईस्ट में मिसाइलें चल रही हैं, और दूसरी तरफ आज (14 मार्च 2026) सुबह-सुबह उत्तर कोरिया (North Korea) के तानाशाह ‘किम जोंग उन’ ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है।

अचानक खबर आई कि उत्तर कोरिया ने खतरनाक और न्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम ‘बैलिस्टिक मिसाइलें’ (Ballistic Missiles) सीधे जापान की तरफ फायर कर दी हैं। इस खौफनाक कदम के बाद जापान में अफरातफरी मच गई और सरकार को ‘इमरजेंसी अलर्ट’ (Emergency Alert) जारी करना पड़ा। आज ‘ApniVani’ के इस इंटरनेशनल डीप एनालिसिस में हम जानेंगे कि आखिर किम जोंग ने एक साथ इतनी मिसाइलें क्यों दागीं और इसका दुनिया पर क्या असर होगा।

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10 मिसाइलें और ‘इमरजेंसी अलर्ट’ की पूरी कहानी

दक्षिण कोरिया (South Korea) की सेना और जापानी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, आज दोपहर करीब 1:20 बजे उत्तर कोरिया के ‘सुनन’ (Sunan) इलाके से एक के बाद एक कई मिसाइलें आसमान में दागी गईं।

आमतौर पर उत्तर कोरिया डराने के लिए 1 या 2 मिसाइलें दागता है, लेकिन आज उसने एक साथ 10 बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार कर दी! जैसे ही ये मिसाइलें जापान के ‘ईस्ट सी’ (East Sea) की तरफ बढ़ीं, जापान की नई प्रधानमंत्री ‘सनाए ताकाइची’ (Sanae Takaichi) के ऑफिस ने तुरंत पूरे देश में इमरजेंसी सायरन और एक्स (X) पर अलर्ट जारी कर दिया। आम लोगों को सुरक्षित जगहों पर छिपने की हिदायत दी जाने लगी।

Japan and PM of JAPAN - North Korea Japan Missile News
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क्या मिसाइलें जापान पर गिरीं? (राहत की सांस)

जापान के कोस्ट गार्ड और रक्षा मंत्रालय ने तुरंत अपनी मिसाइल डिफेंस प्रणाली को एक्टिव कर दिया था।

राहत की बात यह रही कि ये मिसाइलें जापान की मुख्य जमीन पर नहीं गिरीं। जापानी न्यूज़ एजेंसी NHK के मुताबिक, सभी मिसाइलें हवा में लगभग 340 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद जापान के ‘एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन’ (EEZ) के बाहर समुद्र में जा गिरीं। हालांकि किसी जान-माल का नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन इस घटना ने समुद्र में चल रहे कमर्शियल जहाजों और उड़ने वाले विमानों के लिए एक बड़ा खतरा पैदा कर दिया है।

Kim Jong Un - North Korea Japan Missile News

किम जोंग उन को अचानक इतना गुस्सा क्यों आया?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर किम जोंग उन ने आज ही के दिन ऐसा क्यों किया? इसके पीछे दो सबसे बड़े कारण हैं:

  • अमेरिका और दक्षिण कोरिया का ‘फ्रीडम शील्ड’ (Freedom Shield): इस वक्त दक्षिण कोरिया और अमेरिकी सेना मिलकर एक बहुत बड़ा मिलिट्री अभ्यास (Drills) कर रही हैं। किम जोंग इसे अपने देश पर ‘हमले की तैयारी’ मानता है। इसी का कड़ा विरोध जताने के लिए उसने यह मिसाइल टेस्ट किया है।
  • डोनाल्ड ट्रंप का बयान: हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया से दोबारा बातचीत शुरू करने का इशारा दिया था। लेकिन किम जोंग ने इसे ‘बकवास’ बताते हुए मिसाइलों की भाषा में जवाब देना ज्यादा सही समझा।
Kim Jong Un With Missiles - North Korea Japan Missile News
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ApniVani की बात

जब दुनिया पहले से ही इतने युद्ध झेल रही है, ऐसे में किम जोंग उन का यह ‘पावर शो’ (Show of Power) बहुत खतरनाक है। अगर गलती से भी एक मिसाइल जापान की जमीन पर गिर जाती, तो अमेरिका को इस युद्ध में सीधा कूदना पड़ता, जो सच में दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की तरफ धकेल सकता है।

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि अमेरिका को अब उत्तर कोरिया के खिलाफ कोई सख्त एक्शन लेना चाहिए? या फिर यह सिर्फ किम जोंग की एक गीदड़भभकी है? अपनी बेबाक राय हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर जरूर साझा करें!

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Nitish Kumar’s security lapse: बेगूसराय में हेलीपैड पर बैल का ‘तांडव’, जान बचाने के लिए फायर ब्रिगेड पर चढ़े पुलिसकर्मी

Nitish Kumar's security lapse

बेगूसराय, बिहार: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। शनिवार, 14 मार्च 2026 को बेगूसराय में आयोजित ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान एक ऐसी घटना घटी जिसने न केवल प्रशासन की तैयारियों की पोल खोल दी, बल्कि सुरक्षाकर्मियों के पसीने छुड़ा दिए। सीएम के आगमन के लिए तैयार किए गए अति-संवेदनशील हेलीपैड क्षेत्र में एक बेकाबू बैल घुस गया, जिससे वहां तैनात पुलिस महकमे में भगदड़ मच गई।

हेलीपैड बना ‘अखाड़ा’, पुलिसकर्मियों को जान के लाले पड़े

घटना बेगूसराय के बीआईएडीए (BIADA) कैंपस की है, जहाँ मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर लैंड करने वाला था। सुरक्षा के कड़े इंतजामों का दावा किया जा रहा था, लेकिन लैंडिंग से कुछ समय पहले ही एक विशाल बैल सुरक्षा घेरा तोड़कर सीधे हेलीपैड के बीचों-बीच पहुँच गया। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने जब उसे भगाने की कोशिश की, तो बैल हिंसक हो गया और उसने जवानों को ही दौड़ाना शुरू कर दिया।

हैरानी की बात यह रही कि बैल के डर से जवान अपनी ड्यूटी छोड़ इधर-उधर भागते नजर आए। स्थिति इतनी भयावह हो गई कि एक पुलिसकर्मी ने अपनी जान बचाने के लिए वहां खड़ी फायर ब्रिगेड की गाड़ी की छत पर शरण ली। करीब 15-20 मिनट तक हेलीपैड पर अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

Nitish Kumar's security lapse

सुरक्षा प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ीं

मुख्यमंत्री जैसे वीवीआईपी (VVIP) की सुरक्षा के लिए ‘नो फ्लाई ज़ोन’ और ‘क्लीन पेरिमीटर’ जैसे कड़े प्रोटोकॉल होते हैं। हेलीपैड के चारों ओर बैरिकेडिंग के बावजूद एक आवारा पशु का अंदर घुस जाना जिला प्रशासन और स्थानीय पुलिस की बड़ी लापरवाही माना जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अगर यह घटना सीएम के हेलीकॉप्टर लैंड करने के दौरान होती, तो कोई बड़ा हादसा हो सकता था। अंततः, लाठियों और शोर-शराबे की मदद से बैल को परिसर से बाहर खदेड़ा गया, जिसके बाद अधिकारियों ने राहत की सांस ली।

समृद्धि यात्रा का समापन और राजनीतिक गलियारों में हलचल

नीतीश कुमार अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के तीसरे चरण के तहत बेगूसराय और शेखपुरा के दौरे पर थे। इस यात्रा का उद्देश्य विकास योजनाओं की समीक्षा करना है, लेकिन इस सुरक्षा चूक ने पूरी चर्चा का रुख मोड़ दिया है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लपकते हुए सरकार पर निशाना साधा है। नेताओं का कहना है कि जो सरकार अपने मुख्यमंत्री को सुरक्षित हेलीपैड मुहैया नहीं करा सकती, वह आम जनता की सुरक्षा क्या करेगी?

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नीतीश कुमार की सुरक्षा में बार-बार होती चूक

यह पहली बार नहीं है जब बिहार के मुख्यमंत्री की सुरक्षा में इस तरह की ढिलाई देखी गई हो।

पिछले कुछ वर्षों के इतिहास पर नजर डालें तो:

  • पटना (2025): एक युवक जेड प्लस सुरक्षा घेरा तोड़कर बंद लिफाफा देने सीएम के करीब पहुंच गया था।
  • बाढ़ (2024): सीएम के कार्यक्रम के ठीक बाद स्वागत गेट गिर गया था।
  • नालंदा (2022): जनसभा के दौरान सीएम के पास धमाका हुआ था और बख्तियारपुर में उन पर हमला भी किया गया था।

क्या सबक लेगा प्रशासन?

बेगूसराय की यह घटना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है, जिससे बिहार पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान लग रहे हैं। वीवीआईपी सुरक्षा में पशु नियंत्रण (Animal Control) एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। अब देखना यह है कि इस गंभीर चूक के लिए किन अधिकारियों पर गाज गिरती है और भविष्य में ऐसी शर्मिंदगी से बचने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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Project GIB Rajasthan: विलुप्त हो रहे ‘गोडावण’ को मिली नई ज़िंदगी! 2 नए बच्चों के जन्म से जुड़ी कहानी

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जब भी देश में जानवरों को बचाने की बात आती है, तो हमारा ध्यान सिर्फ ‘टाइगर’ (बाघ) या हाथियों पर जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा विशाल और खूबसूरत पक्षी भी है, जो डायनासोर की तरह हमेशा के लिए खत्म होने की कगार पर पहुँच गया था?

इस पक्षी का नाम है ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड‘ (Great Indian Bustard), जिसे राजस्थान में प्यार से ‘गोडावण’ कहा जाता है। आज ‘ApniVani’ के इस स्पेशल न्यूज़ सेगमेंट में हम आपके लिए एक बहुत बड़ी और सुकून देने वाली खबर लेकर आए हैं। राजस्थान के ‘प्रोजेक्ट GIB’ (Project GIB) ने एक ऐसा चमत्कार कर दिखाया है, जिसने पूरी दुनिया के वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है! आइए जानते हैं इस ऐतिहासिक सफलता की सबसे बड़ी बातें।

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चमत्कार: 2 नए बच्चों का जन्म (विज्ञान और प्रकृति का मिलन)

राजस्थान के कंजर्वेशन ब्रीडिंग सेंटर (Conservation Breeding Centre) से खबर आई है कि वहां ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के 2 एकदम स्वस्थ और प्यारे बच्चों ने जन्म लिया है।

सबसे ज्यादा हैरानी की बात यह है कि इनमें से एक बच्चे का जन्म प्राकृतिक तरीके (Natural Mating) से हुआ है, जबकि दूसरे बच्चे का जन्म ‘आर्टिफिशियल इन्सेमिनेशन’ (Artificial Insemination – AI) यानी कृत्रिम गर्भाधान तकनीक के जरिए हुआ है। पक्षियों में आर्टिफिशियल इन्सेमिनेशन का सफल होना विज्ञान की दुनिया में एक बहुत बड़ी जीत मानी जाती है। इससे यह साबित हो गया है कि अब हम इस विलुप्त होते पक्षी की आबादी को तेज़ी से बढ़ा सकते हैं।

Great Indian Bustard - Project GIB Rajasthan
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‘हाफ सेंचुरी’ पार: 70 तक पहुंचा कुल आंकड़ा!

एक वक्त था जब पूरे भारत में इन पक्षियों की गिनती उंगलियों पर की जा सकती थी। ये बिजली के तारों से टकराकर या शिकारियों का निशाना बनकर खत्म हो रहे थे।

लेकिन अब, इन दो नए बच्चों के जन्म के साथ ही कैप्टिव ब्रीडिंग सेंटर (यानी सुरक्षित बाड़े) में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड्स की कुल संख्या 70 तक पहुँच गई है! यह राजस्थान वन विभाग (Rajasthan Forest Department) और वन्यजीव विशेषज्ञों की दिन-रात की कड़ी मेहनत का ही नतीजा है। उन्होंने अंडों को रेगिस्तान से सुरक्षित निकाला और उन्हें मशीनों (Incubators) में रखकर इन नए पक्षियों को जीवन दिया है।

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अब अगला कदम: ‘सॉफ्ट रिलीज’ (खुले आसमान की तैयारी)

अब आप सोच रहे होंगे कि क्या ये पक्षी जिंदगी भर पिंजरे या बाड़े में ही रहेंगे? बिल्कुल नहीं!

वन विभाग का अगला और सबसे अहम कदम है ‘सॉफ्ट रिलीज’ (Soft Release)। इसका मतलब है कि सेंटर में पैदा हुए कुछ मजबूत और बड़े बच्चों को अब धीरे-धीरे वापस खुले जंगल और रेगिस्तान में छोड़ा जाएगा।

उन्हें सीधे खतरों के बीच नहीं फेंका जाएगा, बल्कि पहले एक बड़े और सुरक्षित ‘प्री-रिलीज एनक्लोजर’ में रखा जाएगा ताकि वे खुद से शिकार करना और उड़ना सीख सकें। जब वे पूरी तरह से जंगली माहौल में ढल जाएंगे, तब उन्हें पूरी आज़ादी दे दी जाएगी।

ApniVani की बात

राजस्थान वन विभाग का यह प्रयास सच में काबिले तारीफ है। यह सफलता हमें सिखाती है कि अगर इंसान ठान ले, तो वह प्रकृति को बर्बाद करने के साथ-साथ उसे वापस हरा-भरा भी कर सकता है। गोडावण अब सिर्फ राजस्थान का नहीं, पूरे भारत का गौरव बन चुका है।

आपकी राय: क्या आपको लगता है कि सिर्फ बाघों की तरह ही ऐसे दुर्लभ पक्षियों को बचाने के लिए भी देश में बड़े ‘जागरूकता अभियान’ चलाए जाने चाहिए? इस अच्छी खबर को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें और अपनी राय हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर जरूर बताएं!

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Patna Kisan Mela 2026 Details: पटना में लगा किसानों का महाकुंभ! जानिए आम किसान और एग्रीकल्चर स्टूडेंट्स को होने वाले बड़े फायदे

Patna Kisan Mela 2026 Details

कल पटना के मैदान में सिर्फ भीड़ नहीं थी, बल्कि बिहार के भविष्य की तस्वीर दिख रही थी। ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट, आसमान में उड़ते एग्रीकल्चर ड्रोन (Agriculture Drones) और उन्नत बीजों (High-yielding seeds) की जानकारी लेते हजारों किसान!

कल (12 मार्च 2026) पटना में एक बार फिर ‘किसान मेले’ (Kisan Mela) का शानदार आगाज़ हुआ था। अक्सर शहर के लोग सोचते हैं कि आखिर यह मेला क्यों लगता है और इसमें ऐसा क्या खास होता है? आज ‘ApniVani’ के इस विशेष ग्राउंड-रिपोर्ट एनालिसिस में हम आपको बताएंगे कि यह मेला सिर्फ किसानों के लिए नहीं, बल्कि कृषि की पढ़ाई कर रहे युवाओं (Agriculture Students) के लिए भी किसी संजीवनी से कम नहीं है।

Patna Kisan Mela 2026 Details
Credit – apnivani

क्या है किसान मेला और यह कब से शुरू हुआ?

किसान मेला कोई आज की नई परंपरा नहीं है। इसकी शुरुआत 1960 के दशक में ‘हरित क्रांति’ (Green Revolution) के दौरान हुई थी।

इसका मुख्य उद्देश्य “लैब टू लैंड” (Lab to Land) यानी ‘प्रयोगशाला से खेतों तक’ ज्ञान को पहुँचाना है। जब कृषि वैज्ञानिक लैब में कोई नया बीज या तकनीक बनाते हैं, तो उसे सीधे किसानों तक पहुँचाने का सबसे अच्छा माध्यम ‘किसान मेला’ ही होता है।

क्या यह सिर्फ बिहार में होता है? बिल्कुल नहीं! यह पूरे भारत में आयोजित होता है। दिल्ली का पूसा संस्थान (IARI), पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी (PAU) लुधियाना, और पंतनगर यूनिवर्सिटी जैसे बड़े संस्थान हर साल फरवरी-मार्च और सितंबर-अक्टूबर (रबी और खरीफ की बुवाई से पहले) इसका आयोजन करते हैं। बिहार में यह ICAR और बिहार कृषि विश्वविद्यालय (BAU) द्वारा बड़े स्तर पर लगाया जाता है।

Patna Kisan Mela 2026 Details
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मेले में क्या-क्या होता है? (The Main Attractions)

इस मेले में खेती से जुड़ी हर छोटी-बड़ी चीज़ का लाइव डेमो (Live Demo) होता है:

  • नई मशीनरी: स्मार्ट ट्रैक्टर, ऑटोमैटिक सीड ड्रिल, और खेतों में कीटनाशक छिड़कने वाले ड्रोन।
  • मिट्टी की जांच (Soil Testing): किसान अपनी मिट्टी का सैंपल लाकर यहाँ फ्री में चेक करवा सकते हैं।
  • वैज्ञानिकों से सीधा संवाद: किसान अपनी फसल की बीमारियां सीधे कृषि वैज्ञानिकों (Agri-Scientists) को बताकर उसका तुरंत समाधान पा सकते हैं।

Patna Kisan Mela 2026 Details

आम किसानों के लिए कैसे फायदेमंद है यह मेला?

एक आम किसान के लिए यह मेला किसी वरदान से कम नहीं है। गाँव का किसान अक्सर पुरानी तकनीकों से खेती करके घाटा सहता है। लेकिन यहाँ आकर उसे पता चलता है कि कम पानी और कम खाद में दोगुनी पैदावार देने वाले ‘उन्नत बीज’ (जैसे गेहूं, धान या मक्के की नई वैरायटी) कहाँ से मिलेंगे। साथ ही, सरकार द्वारा मशीनों पर दी जा रही भारी सब्सिडी (Subsidy) की जानकारी भी उन्हें यहीं से मिलती है।

Agriculture Students - Patna Kisan Mela 2026 Details

एग्रीकल्चर स्टूडेंट्स (B.Sc. Ag) के लिए क्यों है यह ‘गोल्डमाइन’?

अगर कोई युवा B.Sc. Agriculture या इससे जुड़ा कोई कोर्स कर रहा है, तो उसके लिए यह मेला क्लासरूम से सौ गुना ज्यादा अहम है।

  • प्रैक्टिकल एक्सपोज़र: किताबों में ‘सीड टेक्नोलॉजी’ (Seed Technology), हॉर्टिकल्चर (Horticulture) या प्लांट पैथोलॉजी की जो थ्योरी पढ़ाई जाती है, उसका असली प्रैक्टिकल यहाँ देखने को मिलता है।
  • नेटवर्किंग और इंटर्नशिप: यहाँ देश भर के बड़े एग्री-टेक (Agri-tech) स्टार्टअप्स, खाद-बीज की कंपनियाँ और टॉप साइंटिस्ट आते हैं। स्टूडेंट्स यहाँ सीधे कंपनियों से बात करके अपने लिए इंटर्नशिप या फ्यूचर जॉब की सेटिंग कर सकते हैं।
  • रिसर्च आइडिया: जो छात्र अपनी डिग्री के आखिरी सालों में हैं, उन्हें यहाँ से अपनी थीसिस (Thesis) या प्रोजेक्ट के लिए एकदम फ्रेश और ग्राउंड-लेवल के आइडियाज मिलते हैं।
Patna Kisan Mela 2026 Details
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कब लगता है और कितने दिन चलता है?

आमतौर पर यह मेला मौसम और फसल चक्र (Crop cycle) के हिसाब से लगाया जाता है। रबी और खरीफ की फसल से ठीक पहले इसे आयोजित किया जाता है। यह मेला अमूमन 2 से 3 दिनों तक चलता है, ताकि दूर-दराज के गाँवों से भी किसान आसानी से आकर इसका लाभ उठा सकें।

सलाह: कृपया जाने से पहले ICAR की स्थानीय घोषणा या आधिकारिक वेबसाइट देख लें।

ApniVani की बात

किसान मेला सिर्फ एक प्रदर्शनी नहीं है; यह भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ को मजबूत करने का एक बेहतरीन प्लेटफॉर्म है। अगर हम चाहते हैं कि बिहार और देश का किसान समृद्ध हो, तो ऐसे मेलों का आयोजन हर पंचायत स्तर पर होना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी खेती को एक ‘प्रोफेशन’ की तरह अपना सके।

आपकी राय: क्या आपने कभी किसान मेले में हिस्सा लिया है? आपको वहाँ की सबसे अच्छी तकनीक या मशीन कौन सी लगी? अपनी राय हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आकर जरूर साझा करें!

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WhatsApp Chat Security in Hindi: क्या आपकी पर्सनल चैट कोई पढ़ रहा है? WhatsApp से ज्यादा सुरक्षित हैं ये 2 फ्री ऐप्स!

WhatsApp Chat Security in Hindi

आजकल हम सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक अपना सारा समय चैटिंग में बिताते हैं। पर्सनल बातें, बैंक की डिटेल्स या फिर दोस्तों के साथ गपशप— सब कुछ हमारे फोन में कैद है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो बातें आप अपने दोस्तों या करीबियों से कर रहे हैं, क्या वो सच में सिर्फ आप दोनों के बीच हैं?

अक्सर हम Instagram (इंस्टाग्राम) या Facebook (फेसबुक) पर चैट करते हैं, और फिर हमें उसी चीज के विज्ञापन (Ads) दिखने लगते हैं! आज ‘ApniVani’ के इस टेक स्पेशल आर्टिकल में हम आम आदमी की भाषा में समझेंगे कि आखिर WhatsApp की सिक्योरिटी बाकियों से अलग कैसे है और क्या दुनिया में इससे भी ज्यादा सुरक्षित कोई ‘फ्री’ ऐप मौजूद है?

Whatsapp, Facebook and Instagram
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Instagram और Facebook से कैसे अलग है WhatsApp?

अगर आप फेसबुक मैसेंजर या इंस्टाग्राम के नॉर्मल इनबॉक्स में चैट कर रहे हैं, तो वह पूरी तरह से ‘लॉक’ नहीं होती है।

इन ऐप्स पर जो आप लिखते हैं, वो पहले कंपनी के सर्वर (कंप्यूटर) पर जाता है। कंपनी का सिस्टम उन शब्दों को पढ़ सकता है (विज्ञापनों के लिए) और अगर पुलिस या सरकार मांगे, तो वो आपकी पुरानी चैट्स निकालकर दे भी सकते हैं।

लेकिन, WhatsApp में डिफ़ॉल्ट रूप से ‘End-to-End Encryption’ (E2EE) लगा होता है। इसका सीधा मतलब है ‘ताला और चाबी’। जब आप “Hello” लिखकर भेजते हैं, तो WhatsApp उसे एक सीक्रेट कोड (ताले) में बदल देता है। यह कोड इंटरनेट पर उड़ता हुआ आपके दोस्त के फोन तक जाता है। इस ताले की चाबी सिर्फ आपके दोस्त के फोन में होती है। बीच में कोई हैकर, सरकार, या खुद WhatsApp भी इस मैसेज को नहीं पढ़ सकता।

End to End Encryption - WhatsApp Chat Security in Hindi
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‘End-to-End Encryption’ का आइडिया क्यों आया?

कुछ साल पहले तक इंटरनेट पर प्राइवेसी नाम की कोई चीज नहीं थी। मोबाइल कंपनियां और हैकर्स बड़ी आसानी से लोगों के मैसेज पढ़ लेते थे।

फिर साल 2013-14 के आसपास जब दुनिया भर में ‘साइबर जासूसी’ के बड़े मामले सामने आए, तो आम लोगों की निजता (Privacy) खतरे में पड़ गई। पत्रकारों, बड़े राजनेताओं और आम लोगों को एक ऐसे प्लेटफॉर्म की जरूरत महसूस हुई जहां उनकी बातें कोई तीसरा इंसान न सुन सके। इसी डर और जरूरत से ‘सिग्नल प्रोटोकॉल’ (Signal Protocol) का जन्म हुआ, जिसे बाद में WhatsApp ने अपनी ऐप में डाल दिया ताकि लोगों का भरोसा जीता जा सके।

Signal And Session - WhatsApp Chat Security in Hindi
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WhatsApp से भी ज्यादा सुरक्षित हैं ये 2 ‘फ्री’ ऐप्स!

भले ही WhatsApp आपके मैसेज नहीं पढ़ सकता, लेकिन वह आपका ‘मेटाडेटा’ (Metadata) जरूर इकट्ठा करता है। यानी WhatsApp को पता है कि आप किससे, कब, कितनी देर और कहाँ से बात कर रहे हैं। अगर आपको इससे भी ज्यादा तगड़ी प्राइवेसी चाहिए, तो ये 2 फ्री ऐप्स सबसे बेस्ट हैं:

  1. Signal (सिग्नल): यह दुनिया का सबसे सुरक्षित चैट ऐप माना जाता है। इसे दुनिया के सबसे बड़े टेक एक्सपर्ट्स और खुद एलन मस्क भी प्रमोट करते हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आपका कोई भी डेटा (Metadata) स्टोर नहीं करता। इसके सर्वर्स पर सिर्फ आपका फोन नंबर सेव होता है, उसके अलावा कुछ भी नहीं!
  2. Session (सेशन): अगर आप अपना फोन नंबर भी किसी को नहीं देना चाहते, तो ‘सेशन’ ऐप आपके लिए है। यह ऐप बिना फोन नंबर के एक सीक्रेट आईडी (ID) बनाता है। यह ‘डिसेंट्रलाइज्ड’ (Decentralized) नेटवर्क पर काम करता है, जिसे हैक करना लगभग नामुमकिन है।

ApniVani की बात

डिजिटल दुनिया में 100% सुरक्षित कुछ भी नहीं है, लेकिन सही जानकारी होना सबसे बड़ा हथियार है। अगर आप नॉर्मल गपशप कर रहे हैं, तो WhatsApp ठीक है। लेकिन अगर आप अपनी प्राइवेसी को लेकर बहुत ज्यादा सीरियस हैं, तो Signal जैसे ऐप्स की तरफ शिफ्ट होना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है।

आपकी राय: आप अपनी पर्सनल चैटिंग के लिए सबसे ज्यादा कौन सा ऐप इस्तेमाल करते हैं— WhatsApp, Instagram या Telegram? अपनी राय और इस टेक हैक पर अपने विचार हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आकर जरूर शेयर करें!

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Iran War Effects on India: आपकी जेब कट रही है या भर रही है? इस महायुद्ध से भारतीयों को हो रहे 3 बड़े फायदे और नुकसान

Iran War Effects on India

मिडिल-ईस्ट में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच जो मिसाइलें चल रही हैं, आपको लग रहा होगा कि वह तो भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर है, हमें क्या फर्क पड़ेगा?

अगर आप ऐसा सोच रहे हैं, तो आप बहुत बड़ी गलतफहमी में हैं! आज सुबह जब आप सोकर उठे, तो आपके टूथपेस्ट से लेकर आपकी गाड़ी के पेट्रोल और आपकी सेविंग्स तक, सब कुछ इस युद्ध की चपेट में आ चुका है। आज ‘ApniVani’ के इस एक्सक्लूसिव एनालिसिस में हम सीधे आपकी बात करेंगे। अगर आप भारत में रहते हैं, तो आइए जानते हैं कि इस ग्लोबल क्राइसिस में आप कहां फंस गए हैं और कहां आपको फायदा हो रहा है।

LPG And Petrol - Iran War Effects on India
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आपका सबसे बड़ा नुकसान: पेट्रोल, गैस और किचन का बिगड़ता बजट

अगर आप रोज़ बाइक या कार से सफर करते हैं, तो सबसे तगड़ी चोट सीधे आप पर पड़ने वाली है।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल और 60% एलपीजी बाहर से मंगाता है। लाल सागर (Red Sea) और हर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हो रहे हमलों के कारण तेल और गैस की सप्लाई चेन टूट गई है।

क्या हो रहा है आपके साथ? एलपीजी कमर्शियल सिलेंडर के दाम पहले ही आसमान छू चुके हैं (जिससे आपके फेवरेट होटल का खाना महंगा हो गया है)। कच्चे तेल के दाम इंटरनेशनल मार्केट में 90 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुके हैं। अगर युद्ध एक-दो हफ्ते और खिंचा, तो चुनाव के बावजूद भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ने तय हैं। ट्रांसपोर्टेशन महंगा होने का सीधा मतलब है— दाल, चावल और सब्जियों का आपकी थाली तक महंगा पहुंचना।

Market Crash - Iran War Effects on India
Credit -Indira Securities

निवेशकों को डबल अटैक: शेयर बाजार क्रैश, लेकिन ‘सोना’ दे रहा बंपर मुनाफा!

अगर आप शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड में पैसे लगाते हैं, तो आपने देखा होगा कि आपका पोर्टफोलियो पिछले कुछ दिनों में लाल (Red) हो गया है। युद्ध की घबराहट में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर भाग रहे हैं, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी में भारी गिरावट आ रही है।

लेकिन यहाँ आपका फायदा भी है! जब भी दुनिया में युद्ध होता है, लोग शेयर बाजार छोड़कर सबसे सुरक्षित चीज़ में पैसा लगाते हैं— और वो है ‘सोना’ (Gold)। अगर आपके घर में सोना रखा है या आपने गोल्ड बांड्स (SGB) में निवेश किया हुआ है, तो बधाई हो! बिना कुछ किए आपकी संपत्ति की कीमत रॉकेट की तरह बढ़ गई है। भारत में सोने के दाम हर दिन नए ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं।

India And Prime Minister - Iran War Effects on India
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भारत का ‘हिडेन’ फायदा: दुनिया को सिर्फ हमारी तरफ उम्मीद

जहां दुनिया के कई देश इस युद्ध में किसी न किसी का पक्ष लेकर फंस गए हैं, वहीं भारत की न्यूट्रल (Neutral) विदेश नीति इस वक्त सबसे बड़ा ‘ब्रह्मास्त्र’ साबित हो रही है।

  • एक्सपोर्ट का नया मौका: जब चीन और यूरोप के देशों की सप्लाई चेन डिस्टर्ब होती है, तो ग्लोबल मार्केट में भारत के लिए एक बड़ा स्पेस बनता है। दवाइयां (Pharma), गेहूं, चावल और टेक्सटाइल के एक्सपोर्ट में भारत को बहुत बड़े ऑर्डर्स मिल रहे हैं।
  • डिफेंस सेक्टर की चांदी: दुनिया देख रही है कि युद्ध में कैसे हथियारों की जरूरत पड़ रही है। ऐसे में भारत का ‘मेक इन इंडिया’ डिफेंस एक्सपोर्ट (जैसे ब्रह्मोस मिसाइल और आर्टिलरी गन्स) दूसरे देशों को बहुत आकर्षित कर रहा है, जिससे देश के खजाने में डॉलर आ रहे हैं।

ApniVani की बात: सतर्क रहने का वक्त

कुल मिलाकर बात यह है कि एक आम भारतीय के तौर पर शॉर्ट-टर्म में हमारी और आपकी जेब पर महंगाई की सीधी मार पड़ रही है। जब तक यह युद्ध शांत नहीं होता, तब तक बड़े खर्चे करने से बचें और अपनी सेविंग्स को मजबूत रखें। लेकिन लॉन्ग-टर्म में, भारत ग्लोबल इकॉनमी में एक मजबूत पिलर बनकर उभर रहा है।

आपकी राय: इस युद्ध के कारण क्या आपने भी अपने शहर में चीजों के दाम बढ़ते हुए महसूस किए हैं? क्या आपका शेयर बाजार का पोर्टफोलियो भी डाउन चल रहा है? अपनी राय और अपना अनुभव हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आकर जरूर शेयर करें!

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Girl Climbs Mobile Tower: पुलिस के फूले हाथ-पांव गोपालगंज में ‘शोले’ जैसा हाई वोल्टेज ड्रामा

Girl Climbs Mobile Tower

गोपालगंज (बिहार): प्यार में इंसान किसी भी हद तक जा सकता है, यह कहावत बिहार के गोपालगंज जिले में सच साबित हुई। यहां एक युवती ने अपने प्रेमी की पुलिस हिरासत से रिहाई सुनिश्चित करने के लिए फिल्मी अंदाज में 100 फीट ऊंचे मोबाइल टावर पर चढ़कर जबरदस्त हंगामा किया। घंटों चले इस ‘हाई-वोल्टेज ड्रामे’ ने न केवल ग्रामीणों की धड़कनें बढ़ा दीं, बल्कि प्रशासन के भी पसीने छुड़ा दिए। इस पूरी घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है।

क्या है पूरा मामला?

यह दिलचस्प और हैरान कर देने वाला मामला गोपालगंज के भोरे थाना क्षेत्र के बनकटा जागीरदारी गांव का है। जानकारी के अनुसार, बनकटा मल गांव निवासी अर्पिता कुमारी और उसी गांव के पवन चौहान के बीच पिछले 7 सालों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। दोनों एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे, लेकिन उनके परिवार वाले इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे।

गुरुवार रात जब अर्पिता अचानक अपने घर से लापता हो गई, तो उसके परिजनों ने प्रेमी पवन चौहान पर अपहरण का आरोप लगाते हुए थाने में शिकायत दर्ज करा दी। पुलिस ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए पवन को हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए थाने ले गई।

Girl Climbs Mobile Tower

100 फीट ऊंचे टावर पर ‘मौत का खेल’

अपने प्रेमी की गिरफ्तारी की खबर सुनते ही अर्पिता का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। शुक्रवार सुबह उसने गांव के पास स्थित एक ऊंचे मोबाइल टावर को चुना और उस पर चढ़ गई। टावर के ऊपर से चिल्लाते हुए अर्पिता ने धमकी दी, “अगर मेरे प्रेमी को तुरंत रिहा नहीं किया गया, तो मैं यहीं से कूदकर जान दे दूंगी।” युवती की इस जिद ने मौके पर मौजूद सैकड़ों लोगों और पुलिस बल को हक्का-बक्का कर दिया।

जब पुलिस को लानी पड़ी ‘हथकड़ी’ में रिहाई

पुलिस ने पहले तो युवती को समझा-बुझाकर नीचे उतारने की कोशिश की, लेकिन अर्पिता अपनी मांग पर अड़ी रही। स्थिति की गंभीरता और युवती की जान को खतरे में देख, पुलिस को झुकना पड़ा। नाटकीय घटनाक्रम के तहत, पुलिस ने हिरासत में लिए गए प्रेमी पवन चौहान को हथकड़ी लगी हालत में पुलिस जीप से टावर के नीचे लाया।

जैसे ही अर्पिता ने नीचे अपने प्रेमी को देखा, उसका गुस्सा शांत हुआ। पवन और पुलिस के आश्वासन के बाद अर्पिता धीरे-धीरे नीचे उतरी। नीचे आते ही पुलिस ने उसे सुरक्षित अपनी हिरासत में लिया और मेडिकल जांच के लिए भेजा।

Girl Climbs Mobile Tower

‘शोले’ की ‘बसंती’ से हो रही तुलना

सोशल मीडिया पर इस घटना के वीडियो को लोग धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की मशहूर फिल्म ‘शोले’ से जोड़कर देख रहे हैं। फर्क सिर्फ इतना है कि फिल्म में ‘वीरू’ पानी की टंकी पर चढ़ा था, जबकि असल जिंदगी की इस कहानी में ‘बसंती’ ने मोबाइल टावर का सहारा लिया। इंस्टाग्राम, ट्विटर और यूट्यूब पर लोग तरह-तरह के कमेंट्स कर रहे हैं और इसे बिहार की सबसे अनोखी प्रेम कहानियों में से एक बता रहे हैं।

पुलिस का बयान और आगे की कार्रवाई

स्थानीय पुलिस के अनुसार, यह मामला पूरी तरह से प्रेम प्रसंग और पारिवारिक विवाद से जुड़ा है। प्रेमी पर अपहरण का जो आरोप लगाया गया था, युवती के सुरक्षित मिलने के बाद उसकी स्थिति बदल गई है। फिलहाल पुलिस दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर रही है और शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए काउंसलिंग का सहारा ले रही है। प्रशासन का कहना है कि कानून के दायरे में रहकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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Nari Shakti in STEM Education: शिक्षा मंत्री का बड़ा दावा! विकसित भारत की नींव बनेंगी महिलाएँ, जानिए शिक्षा में आए 3 ऐतिहासिक बदलाव

Nari Shakti in STEM Education

भारत की ‘नारी शक्ति’ अब सिर्फ घरों को नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को संभाल रही है।” यह लाइनें सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि नए भारत की सच्चाई हैं। हाल ही में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने एक ताज़ा लेख में इस बात पर मुहर लगाई है कि कैसे साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित (STEM) में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी पूरे देश की दिशा बदल रही है।

उन्होंने साफ कहा कि भारत का ‘विकसित भारत’ (Viksit Bharat) बनने का सपना बिना नारी शक्ति के अधूरा है। लेकिन अगर हम इतिहास के पन्ने पलटें, तो महिलाओं की शिक्षा का यह सफर इतना आसान नहीं था। आइए गहराई से समझते हैं कि बीते कल और आज के इस ‘नॉलेज इकोनॉमी’ (Knowledge Economy) के दौर में क्या और कैसे बदला है।

Nari Shakti in STEM Education

बीते कल का सच: जब दायरा सिर्फ ‘होम साइंस’ तक सीमित था

अगर हम कुछ दशकों पहले (1980 या 1990 के दशक) की बात करें, तो महिलाओं की शिक्षा को लेकर समाज का नज़रिया बहुत संकुचित था।

  • विषयों का बंटवारा: उस दौर में यह मान लिया गया था कि लड़कियां सिर्फ ‘आर्ट्स’ (Arts) या ‘होम साइंस’ (Home Science) ही पढ़ सकती हैं। साइंस (Science) और गणित को तो सीधे तौर पर “लड़कों का विषय” कह दिया जाता था।
  • रिसर्च में शून्य भागीदारी: लड़कियों को हायर एजुकेशन (Higher Education) के लिए बाहर भेजना या सालों तक रिसर्च फेलोशिप करने की अनुमति देना आम परिवारों में किसी पाप से कम नहीं माना जाता था। परिवार का मुख्य फोकस लड़की को थोड़ी-बहुत शिक्षा देकर उसकी शादी करने पर होता था।

Nari Shakti in STEM Education

आज की तस्वीर: STEM में आधी आबादी का शानदार दबदबा

आज हालात पूरी तरह से पलट चुके हैं। शिक्षा मंत्री ने अपने लेख में जिन प्रमुख ट्रेंड्स का जिक्र किया है, वे वाकई हैरान करने वाले हैं:

  • STEM में बंपर एनरोलमेंट: आज इंजीनियरिंग कॉलेज हों या मेडिकल यूनिवर्सिटीज़, लड़कियों का प्रतिशत हर जगह तेजी से बढ़ रहा है। भारत आज दुनिया के उन चुनिंदा देशों में से एक है जहाँ STEM ग्रेजुएट्स में महिलाओं का प्रतिशत 40% से अधिक है।
  • हायर एजुकेशन और रिसर्च: जहाँ पहले महिलाएँ ग्रेजुएशन के बाद पढ़ाई छोड़ देती थीं, वहीं आज रिसर्च फेलोशिप (Research Fellowships) और पीएचडी (PhD) प्रोग्राम्स में लड़कियां लड़कों को कड़ी टक्कर दे रही हैं। चंद्रयान-3 से लेकर भारत के स्वदेशी डिफेंस प्रोजेक्ट्स तक, महिला वैज्ञानिक इस मोर्चे को लीड कर रही हैं।

Developed India

‘विकसित भारत’ और नॉलेज इकोनॉमी की नई लीडर्स

भारत ने 2047 तक एक पूर्ण विकसित राष्ट्र (Viksit Bharat) बनने का जो लक्ष्य रखा है, उसकी चाबी ‘नॉलेज इकोनॉमी’ में है।

नॉलेज इकोनॉमी का मतलब है ऐसी अर्थव्यवस्था जो नई सोच, पेटेंट्स, सॉफ्टवेयर, एआई (AI) और रिसर्च पर चलती हो। धर्मेंद्र प्रधान जी का यह कहना बिल्कुल सटीक है कि जब देश की आधी आबादी (महिलाएं) इस ज्ञान-आधारित सेक्टर में कदम रखती है, तो देश का विकास दोगुना हो जाता है। आज की महिलाएँ सिर्फ नौकरियां नहीं कर रही हैं, बल्कि नए-नए स्टार्टअप्स खोलकर लाखों लोगों को रोजगार भी दे रही हैं।

Dharmendra Pradhan

ApniVani की बात (Conclusion)

शिक्षा मंत्रालय का यह ताज़ा अपडेट इस बात का सबूत है कि सरकार भी मान चुकी है कि देश को विश्वगुरु बनाने का रास्ता महिलाओं के सशक्तिकरण से होकर ही गुज़रता है। पुरानी बेड़ियों को तोड़कर आज की इस हाई-टेक और ‘साइंस-ड्रिवेन’ उड़ान तक का भारत की बेटियों का यह सफर हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है।

आपकी राय: क्या आपको भी लगता है कि आज के दौर में लड़कियां साइंस और टेक्नोलॉजी के फील्ड में लड़कों से बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं? इस विषय पर अपनी बेबाक राय हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आकर तुरंत शेयर करें!

और हाँ, अगर इन सीरियस और एजुकेशनल खबरों से थोड़ा ब्रेक लेकर आप किसी नई थ्रिलर फिल्म या वेब सीरीज का मजा लेना चाहते हैं, तो सबसे निष्पक्ष और कड़क रिव्यू के लिए हमारे यूट्यूब चैनल ‘Topi Talks‘ को अभी सब्सक्राइब करें!

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Bihar LPG Price Hike: पटना से लेकर गांव तक गैस के दाम में आग! बिहार में आम आदमी को रुलाने वाले 3 बड़े कारण

Bihar LPG Price Hike

महंगाई की मार से बिहार का आम आदमी पहले ही परेशान था, लेकिन अब गैस सिलेंडरों के बढ़ते दाम और सप्लाई की कमी ने जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। दुनिया के एक कोने (मिडिल-ईस्ट) में चल रहे युद्ध का सीधा असर अब पटना की सड़कों और बिहार के छोटे-बड़े होटलों तक पहुंच गया है।

कमर्शियल एलपीजी (19kg) के दामों में आए हालिया उछाल ने रेस्टोरेंट मालिकों से लेकर सड़क किनारे ठेला लगाने वालों तक की कमर तोड़ दी है। आज ‘ApniVani’ के इस डीप एनालिसिस में हम समझेंगे कि आखिर बिहार में गैस की कीमतों में अचानक यह आग क्यों लगी है और इसके पीछे के 3 सबसे बड़े और कड़वे सच क्या हैं।

Bihar LPG Price Hike
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होटलों और छोटे व्यापारियों पर डबल मार

बिहार में चाहे पटना का कोई बड़ा रेस्टोरेंट हो या नुक्कड़ पर लिट्टी-चोखा और समोसे की दुकान, हर जगह कमर्शियल एलपीजी (19kg सिलेंडर) का इस्तेमाल होता है।

हाल ही में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने कमर्शियल सिलेंडर पर दी जाने वाली छूट खत्म कर दी है और बेस प्राइस में भी भारी इजाफा किया है। इसके चलते पटना में 19 किलो वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमत अब 2000 रुपये के आंकड़े को पार कर गई है (अलग-अलग जिलों में ट्रांसपोर्टेशन के हिसाब से रेट थोड़ा बदल सकता है)। इसका सीधा असर यह हो रहा है कि होटलों का मेन्यू महंगा हो रहा है और कुछ छोटे दुकानदारों को तो अपना काम कुछ दिनों के लिए बंद करने की नौबत आ गई है।

Iran and Israel War
Credit -TRENDS Research & Advisory

ईरान-इजरायल युद्ध: दुनिया का संकट, बिहार का नुकसान

अगर आप सोच रहे हैं कि सिर्फ तेल कंपनियां दाम बढ़ा रही हैं, तो कहानी का एक बड़ा हिस्सा आप मिस कर रहे हैं। इस महंगाई की असली जड़ें मिडिल-ईस्ट में चल रहे ‘ईरान-इजरायल’ युद्ध में हैं।

भारत अपनी जरूरत का लगभग 60% एलपीजी बाहर से मंगाता है, जिसका एक बहुत बड़ा हिस्सा मिडिल-ईस्ट से होते हुए समुद्री रास्ते (Strait of Hormuz) से आता है। इस वक्त युद्ध के कारण वहां जहाजों पर हमले हो रहे हैं, जिससे सप्लाई चेन बुरी तरह टूट गई है। पीछे से माल (गैस) आ ही नहीं रहा है, और जब मार्केट में गैस की सप्लाई कम होगी और डिमांड ज्यादा होगी, तो जाहिर सी बात है कि बिहार तक आते-आते इसके दाम आसमान छूने लगेंगे।

Bihar LPG Price Hike
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घरेलू गैस (14.2kg) और आम आदमी का बजट

सिर्फ कमर्शियल सिलेंडर ही नहीं, आम आदमी के घर में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो वाले घरेलू सिलेंडर की कीमतों में भी बदलाव की सुगबुगाहट तेज हो गई है।

हालांकि सरकार ने चुनाव और आम जनता की नाराजगी से बचने के लिए घरेलू गैस के दामों को काफी हद तक कंट्रोल करने की कोशिश की है, लेकिन इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल और गैस की कीमतें जिस तरह से बढ़ रही हैं, उससे यह तय माना जा रहा है कि घरेलू बजट भी जल्द ही बिगड़ने वाला है। इसके साथ ही ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ने से खाने के तेल और दालों जैसी रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बिहार के लोकल मार्केट्स में तेज होने लगे हैं।

ApniVani की बात

यह संकट साफ तौर पर यह दिखाता है कि आज की ग्लोबल दुनिया में जब बाहर कहीं सप्लाई चेन टूटती है, तो उसकी सीधी मार हमारे और आपके किचन पर पड़ती है। जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हालात सामान्य नहीं होते, तब तक बिहार के लोगों और होटल मालिकों को इस महंगाई का डटकर सामना करना ही पड़ेगा।

आपकी राय: गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों का आपके घर के बजट या आपके फेवरेट होटल के खाने पर कितना असर पड़ा है? अपनी राय और अपने शहर का हाल हमारे इंस्टाग्राम पेज @9vaniapni पर आकर जरूर साझा करें!

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