बिहार में मेडिकल और इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहे छात्रों पर पढ़ाई का दबाव जानलेवा बनता जा रहा है। ताज़ा और बेहद दर्दनाक मामला राजधानी पटना से सामने आया है, जहां शेरघाटी के रहने वाले एक छात्र ने फंदे से लटककर अपनी जान दे दी।
मृतक छात्र का नाम सौरभ बताया जा रहा है, जो पिछले कई सालों से नीट (NEET) परीक्षा की तैयारी कर रहा था। लेकिन परीक्षा का दबाव और असफलता का डर उसके लिए इतना भारी पड़ गया कि उसने अपनी जीवन लीला ही समाप्त कर ली। ‘News 11 भारत’ की रिपोर्ट के आधार पर ‘ApniVani’ आपको बता रहा है इस खौफनाक घटना का पूरा सच, कि कैसे एक झूठ बोलकर इस छात्र ने मौत को गले लगा लिया।
पटना के फ्लैट में चचेरे भाइयों के साथ रहता था सौरभ
शेरघाटी का रहने वाला सौरभ अपने डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए राजधानी पटना आया हुआ था।
रिपोर्ट के अनुसार, वह पटना में एक फ्लैट लेकर अपने दो चचेरे भाइयों के साथ रह रहा था और नीट की कड़ी तैयारी कर रहा था। शेरघाटी में बैठे परिवार वालों को उम्मीद थी कि उनका बेटा एक दिन डॉक्टर बनकर गांव लौटेगा, लेकिन उन्हें क्या पता था कि पटना से उसके डॉक्टर बनने की खबर नहीं, बल्कि उसके सुसाइड की मनहूस खबर आएगी।

‘तबीयत खराब है’ का बहाना और फिर उठाया खौफनाक कदम
मंगलवार का दिन इस परिवार के लिए सबसे मनहूस साबित हुआ।
सौरभ ने सुबह अपने चचेरे भाइयों से अचानक कहा कि उसकी तबीयत कुछ खराब लग रही है, इसलिए वह आज कोचिंग नहीं जाएगा। उसके दोनों भाई उसे फ्लैट पर ही छोड़कर कोचिंग चले गए। जब वे कोचिंग से वापस लौटे, तो अंदर का नजारा देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। सौरभ ने घर में ही फंदे से लटककर अपनी जान दे दी थी। ‘तबीयत खराब है’ का वो बहाना असल में उसका आखिरी फैसला था।
कई सालों से कर रहा था तैयारी, पास न होने का था भारी दबाव
आखिर सौरभ ने इतना खौफनाक कदम क्यों उठाया? इसके पीछे का सबसे बड़ा और कड़वा सच है— परीक्षा का मानसिक दबाव।
परिजनों और उसकी मां के अनुसार, सौरभ पिछले कई सालों से लगातार नीट की तैयारी कर रहा था, लेकिन उसे परीक्षा में सफलता नहीं मिल पा रही थी। बार-बार पास न हो पाने के कारण वह भारी मानसिक तनाव और अवसाद (Depression) में चला गया था। इसी सदमे और दबाव के कारण उसने दुनिया को अलविदा कहना ही बेहतर समझा।

ApniVani का कड़ा संदेश
सौरभ की मौत ने एक बार फिर हमारी शिक्षा व्यवस्था और माता-पिता के लिए एक गंभीर चेतावनी दी है। परीक्षा में पास होना ही जिंदगी की इकलौती सफलता नहीं है। बच्चों पर ‘डॉक्टर’ बनने का लगातार दबाव उन्हें अंदर से तोड़ रहा है। ‘ApniVani’ परिवार इस दुख की घड़ी में सौरभ के परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता है।
आपकी क्या राय है?
क्या प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार मिल रही असफलता के कारण छात्रों का इस तरह टूट जाना समाज की विफलता है? इसे रोकने के लिए कोचिंग संस्थानों और सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर दें।
