NTA का मास्टरस्ट्रोक: JEE, NEET और CUET में अब खत्म होगा एग्जाम सिटी चुनने का विकल्प, आधार कार्ड के पते से तय होगा सेंटर

NTA

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं—JEE Main, NEET UG और CUET UG—के संचालन में एक क्रांतिकारी और कड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब तक उम्मीदवार आवेदन फॉर्म भरते समय अपनी पसंद के 4 से 5 परीक्षा शहरों का चयन कर सकते थे, लेकिन अब यह सुविधा पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। नए नियमों के अनुसार, उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र अब उनके आधार कार्ड (Aadhaar Card) पर दर्ज स्थायी या वर्तमान पते के आधार पर ही आवंटित किए जाएंगे।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

NTA के इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य परीक्षाओं में होने वाली धांधली, डमी कैंडिडेट और नकल माफिया के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है। पिछले कुछ वर्षों में देखा गया था कि संदिग्ध उम्मीदवार जानबूझकर ऐसे दूरदराज के केंद्रों का चयन करते थे जहाँ निगरानी कम हो। अब आधार-लिंक्ड सेंटर एलोकेशन सिस्टम के जरिए छात्र की भौगोलिक स्थिति और उसकी पहचान को सीधे जोड़ दिया गया है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि ‘सेंटर फिक्सिंग’ जैसी अनियमितताओं पर भी लगाम लगेगी।

कैसे काम करेगा नया सिस्टम?

जब छात्र 2026-27 के सत्र के लिए आवेदन करेंगे, तो उन्हें अपना आधार नंबर अनिवार्य रूप से लिंक करना होगा। NTA का सॉफ्टवेयर स्वतः ही छात्र के आधार डेटाबेस से उसके पते की पहचान करेगा और छात्र के निवास स्थान के सबसे नजदीकी उपलब्ध परीक्षा केंद्र को अलॉट कर देगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह से एआई (AI) संचालित होगी, जिसमें मानवीय हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।

NTA
ApniVani

छात्रों के लिए क्या बदल जाएगा?

1. यात्रा में सुगमता: ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले छात्रों को अब शहरों की लंबी दौड़ नहीं लगानी होगी। उन्हें उनके जिले या निकटतम केंद्र पर ही जगह मिलेगी।

2.आधार अपडेट की अनिवार्यता: यह नियम उन छात्रों के लिए चुनौती बन सकता है जिनका आधार कार्ड पर पता पुराना है या जो पढ़ाई के लिए दूसरे शहर में रह रहे हैं। ऐसे छात्रों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा फॉर्म आने से पहले अपना आधार एड्रेस अपडेट करवा लें।

3. सेंटर बदलने का अनुरोध: अब ‘चॉइस फिलिंग’ का विकल्प न होने के कारण छात्र सेंटर बदलने के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। जो पता आधार में होगा, वहीं परीक्षा देनी होगी।

बायोमेट्रिक और e-KYC पर जोर

NTA ने स्पष्ट किया है कि केवल पता ही नहीं, बल्कि परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के समय रियल-टाइम बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और e-KYC प्रक्रिया को भी अनिवार्य बनाया जा रहा है। इसका मतलब है कि आधार डेटा से छात्र के फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतलियों (Iris) का मिलान किया जाएगा। यदि डेटा में थोड़ा भी अंतर पाया गया, तो उम्मीदवार को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

विशेषज्ञों और सरकार की राय

शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह सुधार ‘वन नेशन, वन डेटा’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से लॉजिस्टिक्स का दबाव कम होगा और परीक्षा केंद्रों पर होने वाली भीड़भाड़ को प्रबंधित करना आसान हो जाएगा। हालांकि, अभिभावक संघों ने मांग की है कि आधार सुधार केंद्रों पर भीड़ को देखते हुए सरकार को विशेष कैंप लगाने चाहिए ताकि छात्रों को अंतिम समय में परेशानी न हो।

NTA
ApniVani

निष्कर्ष और तैयारी के टिप्स

NTA का यह नया नियम 2026 की सभी बड़ी परीक्षाओं पर लागू होगा। परीक्षार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट nta.ac.in पर नजर बनाए रखें।

टिप 1: अपने आधार में नाम, जन्म तिथि और पते की स्पेलिंग की जांच अभी कर लें।

टिप 2: यदि आप कोचिंग के लिए किसी दूसरे शहर में हैं और वहीं सेंटर चाहते हैं, तो रेंट एग्रीमेंट के जरिए आधार में ‘Current Address’ अपडेट करा लें।

Read more

यूपी में ‘Aadhaar Card’ अब जन्म-तिथि प्रमाण नहीं, नया आदेश क्या है जानिए

Aadhaar Card

उत्तर प्रदेश सरकार ने 28 नवंबर 2025 को एक बड़ा फैसला लिया है — अब Aadhaar Card को जन्म प्रमाण पत्र या “डेट ऑफ बर्थ (DOB)” के आधिकारिक प्रमाण के रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस फैसले के तहत, राज्य के तमाम विभागों को सूचित किया गया है कि आधार कार्ड को जन्मतिथि प्रमाण के रूप में इस्तेमाल करना बंद करें।

➤ नया आदेश क्या कहता है

आदेश के अनुसार, Aadhaar Card में दर्ज जन्मतिथि को DOB के प्रमाण के रूप में नहीं माना जाएगा। इस बदलाव के पीछे कारण यह बताया गया है कि आधार बनवाते समय जन्म प्रमाण-पत्र, अस्पताल रिकॉर्ड या स्कूल-दर्ज किए दस्तावेज़ अनिवार्य नहीं होते। आमतौर पर जन्मतिथि व्यक्ति द्वारा स्वयं दर्ज कराई जाती है। इसलिए, आधार की DOB जानकारी पर भरोसा करना सुरक्षित नहीं माना गया। राज्य का निर्देश है कि सरकारी या अर्द्ध-सरकारी किसी भी प्रक्रिया — जैसे भर्ती, पेंशन, सेवाओं में आवेदन, प्रमाणीकरण आदि — में आधार कार्ड को DOB प्रमाण की तरह नहीं माना जाए।

➤ अब कौन-कौन से दस्तावेज मान्य होंगे

  • अगर किसी नागरिक को अपनी जन्मतिथि साबित करनी है, तो अब उन्हें इनमें से कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत करना होगा:
  • नगरपालिका, नगर निकाय, ग्राम पंचायत आदि द्वारा जारी किया गया जन्म प्रमाण पत्र (Birth Certificate)
  • अस्पताल या स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी जन्म संबंधी रिकॉर्ड
  • स्कूल या कॉलेज प्रमाण पत्र / प्रवेश प्रमाण पत्र / हाई-स्कूल या माध्यमिक विद्यालय की अंकतालिका जिसमें जन्मतिथि हो दर्ज
  • पासपोर्ट (जहाँ लागू हो)
  • इन दस्तावेजों को ही अब जन्मतिथि प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जाएगा; Aadhaar Card नहीं।

Aadhaar Card

➤ सरकार ने ऐसा क्यों किया?

कारण : Aadhaar Card बनवाते समय DOB की पुष्टि के लिए कोई मान्य दस्तावेज — जैसे जन्म प्रमाण पत्र या अस्पताल/स्कूल से जारी रिकॉर्ड — दिखाना अनिवार्य नहीं होता। इसलिए DOB अक्सर “स्व-घोषित” (self-declared) या अनुमानित होती है।

सरकार का कहना है कि इस तरह के दस्तावेजों की स्वीकार्यता से दस्तावेज़ी गलतियाँ या धोखाधड़ी (fraud) की संभावना कम होगी।

➤ इस फैसले का असर

  • जिन लोगों के पास पहले सिर्फ Aadhaar Card था और कोई अन्य जन्म प्रमाण नहीं — उन्हें अब सरकारी नौकरियों, पेंशन, योजनाओं या अन्य सेवाओं के लिए आवेदन में परेशानी हो सकती है। उन्हें वैध जन्म प्रमाण पत्र बनवाना पड़ेगा।
  • स्कूल-कॉलेज दाखिले, पहचान वेरिफिकेशन, सरकारी लाइसेंस या लेखा-जोखा आदि के समय अब DOB प्रमाण के लिए वही दस्तावेज मान्य होंगे।
  • विभागों, पंचायतों, नगरपालिका आदि सभी स्तरों पर इस नए आदेश का कड़ाई से पालन अनिवार्य होगा।

➤ क्या बदलाव केवल यूपी तक सीमित है?

नहीं — साथ ही Maharashtra Government ने भी ऐसा ही आदेश जारी किया है, जहाँ आधार कार्ड को जन्म प्रमाण पत्र नहीं माना जाएगा और आधार-आधारित “Delayed Birth Certificate” को रद्द किया जा रहा है।

Read more