Dharmendra Pradhan resigns : शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, जानें 3 बड़े कारण और अब कौन बनेगा नया मंत्री!

Dharmendra Pradhan Resigns

भारत की शिक्षा व्यवस्था और राजनीति में आज एक बहुत बड़ा भूचाल आ गया है। पिछले कई हफ्तों से राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले को लेकर चल रहा छात्रों का विशाल आंदोलन आखिरकार रंग लाया है। देश भर में मचे बवाल और छात्रों के भारी दबाव के आगे झुकते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार, 25 जुलाई 2026 को अपने पद से आधिकारिक तौर पर इस्तीफा दे दिया है।

‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले युवा नेता अभिजीत दीपके के नेतृत्व में यह आंदोलन इतना उग्र हो गया था कि सरकार के पास इस इस्तीफे के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था। Apni Vani आज इस ऐतिहासिक इस्तीफे की पूरी इनसाइड स्टोरी, प्रधान के विदाई पत्र का सच, और अगले शिक्षा मंत्री की चुनाव प्रक्रिया का एकदम सटीक विश्लेषण लेकर आया है।

शुरू से अंत तक: आखिर क्यों देना पड़ा यह बड़ा इस्तीफा?

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की असली वजह सिर्फ एक दिन का गुस्सा नहीं, बल्कि मई 2026 से सुलग रही वह आग है जिसने देश के लाखों युवाओं को सड़क पर ला दिया था। 3 मई को आयोजित हुई नीट परीक्षा में जब भयंकर धांधली और पेपर लीक के पुख्ता सुबूत सामने आए, तो सिस्टम ने शुरू में इसे नकारने की कोशिश की, लेकिन जब मामला सीबीआई के हाथों में गया और परीक्षा रद्द करनी पड़ी, तब तक छात्रों का गुस्सा बेकाबू हो चुका था।

20 जून से जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके और उनकी टीम ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था, जिसमें एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल ने आग में घी का काम किया। जब कल केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की छात्रों से हुई मैराथन बातचीत में यह साफ़ हो गया कि बिना शिक्षा मंत्री की बर्खास्तगी के यह आंदोलन खत्म नहीं होगा, तब जाकर 25 जुलाई की दोपहर को धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी।

‘मेरे युवा मित्रों’ के नाम वो भावुक विदाई पत्र

अपने इस्तीफे के ऐलान के साथ ही धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर ‘मेरे युवा मित्रों’ को संबोधित करते हुए दो पन्नों का एक लंबा पत्र साझा किया। इस पत्र में उन्होंने अपनी नाकामी से ज्यादा देश की एकता का हवाला दिया है। प्रधान ने लिखा कि उन्होंने पहले दिन से इस स्थिति की ज़िम्मेदारी ली थी, लेकिन जंतर-मंतर पर चल रहे विरोध को ‘राष्ट्र-विरोधी ताकतें’ अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश कर रही थीं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि वे नहीं चाहते कि किसी भी मेधावी छात्र का भविष्य कानूनी पचड़ों में उलझे या युवाओं के बीच भ्रम का जाल फैले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद देते हुए प्रधान ने कहा कि यह उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य का सवाल था।

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सिस्टम के सामने सवाल: अब कौन और कैसे बनेगा नया शिक्षा मंत्री?

अब पूरे देश और सिस्टम के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि धर्मेंद्र प्रधान की खाली हुई इस कुर्सी पर अगला व्यक्ति कौन बैठेगा और वह कैसे चुना जाएगा। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75 के तहत केंद्रीय मंत्रियों की नियुक्ति सीधे भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है, लेकिन यह नियुक्ति केवल प्रधानमंत्री की सलाह पर होती है। यानी नया शिक्षा मंत्री कौन होगा, इसका अंतिम फैसला पूरी तरह से प्रधानमंत्री के हाथ में है। फिलहाल जब तक किसी नए चेहरे के नाम का औपचारिक ऐलान नहीं होता, तब तक यह मंत्रालय बिना किसी पूर्णकालिक कैबिनेट मंत्री के रहेगा।

नियमों के अनुसार, ऐसी आपातकालीन स्थिति में प्रधानमंत्री किसी अन्य वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री को शिक्षा मंत्रालय का ‘अतिरिक्त प्रभार’ सौंप सकते हैं। वर्तमान में शिक्षा मंत्रालय में दो राज्य मंत्री जयंत चौधरी और सुकांत मजूमदार पहले से मौजूद हैं, जो फिलहाल मंत्रालय का दैनिक कामकाज संभालेंगे। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सरकार अब किसी ऐसे बेदाग और अनुभवी नेता को यह कमान सौंपेगी जो न केवल छात्रों का गुस्सा शांत कर सके, बल्कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में भारी सुधार करके सिस्टम का खोया हुआ भरोसा वापस ला सके।

Apnivani की बात

यह इस्तीफा भारतीय लोकतंत्र में उस युवा शक्ति की सबसे बड़ी जीत है, जिसने यह साबित कर दिया कि अगर संघर्ष सच्चा हो, तो बड़े से बड़े सिस्टम को भी झुकना पड़ता है। लेकिन असली जीत तब होगी जब नई व्यवस्था में पेपर लीक जैसे अपराध जड़ से खत्म होंगे।

आपकी बेबाक राय: क्या सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से देश की शिक्षा व्यवस्था सुधर जाएगी, या पूरे सिस्टम (NTA) को ही बंद करके नए सिरे से परीक्षा तंत्र बनाना चाहिए? अपनी राय नीचे कमेंट्स में ज़रूर बताएँ!

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Patna student protest July Details: NEET बवाल से लेकर यूनिवर्सिटी मार्च तक, जानें 3 बड़े प्रदर्शनों की पूरी सच्चाई!

Patna student protest

बिहार की राजधानी पटना इन दिनों भारी तनाव और विरोध प्रदर्शनों का मुख्य केंद्र बन गई है। एक ओर नीट पेपर लीक के मुद्दे पर छात्रों का गुस्सा सड़क से लेकर विधानसभा तक गूँज रहा है, तो दूसरी ओर पटना यूनिवर्सिटी के शिक्षक अपने स्वाभिमान के लिए पुलिस के बैरिकेड्स से टकरा रहे हैं। Apni Vani आज आपके लिए किसी सुनी-सुनाई बात की नहीं, बल्कि जुलाई 2026 के आखिरी हफ्ते में हुए इन बड़े प्रदर्शनों की एकदम ज़मीनी और प्रामाणिक रिपोर्ट लेकर आया है। हम विस्तार से जानेंगे कि गांधी मैदान से लेकर लोक भवन तक प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच क्या-क्या हुआ।

NEET पेपर लीक और गांधी मैदान का ‘लोक भवन मार्च’

बुधवार, 22 जुलाई 2026 को पटना की सड़कों पर उस वक्त हालात बेकाबू हो गए, जब ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया प्रोग्रेसिव विमेंस एसोसिएशन के बैनर तले हज़ारों छात्रों ने ‘लोक भवन मार्च’ निकाल दिया। छात्र नीट पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की सख्त मांग कर रहे थे। जब यह विशाल भीड़ गांधी मैदान के पास पहुँची, तो पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए आंसू गैस के गोले दागे, वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया और जमकर लाठीचार्ज किया।

इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भारी झड़प हुई, जिसमें पत्थरबाजी भी देखने को मिली। कई पुलिसकर्मियों को सिर में गहरी चोटें आईं और प्रदर्शन कर रहे कई छात्र भी घायल हुए, जिन्हें तुरंत पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने सख्त कार्रवाई करते हुए पटना में 40 से अधिक छात्रों को हिरासत में लिया है और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के आरोप में 600 से अधिक अज्ञात प्रदर्शनकारियों पर एफआईआर दर्ज की है।

वॉटर कैनन के नीचे छात्रों का ‘डांस’ और वायरल तस्वीरें

इस भीषण तनाव के बीच ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के प्रदर्शन से कुछ ऐसे अनोखे दृश्य भी सामने आए, जिन्होंने इंटरनेट पर लाखों व्यूज बटोर लिए। जब पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन चालू किया, तो छात्र पीछे हटने के बजाय उसी पानी की बौछार के नीचे खुशी से नाचने और गाने लगे। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) और इंस्टाग्राम पर वायरल हुए वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि छात्र पुलिस के बैरिकेड्स पर किसी खिलौने की तरह झूल रहे हैं।

एक छात्र ने तो मज़ाकिया अंदाज़ में पुलिस से यहाँ तक पूछ लिया कि क्या उन्होंने आंसू गैस का इंतज़ाम किया है, क्योंकि उसे पानी का इस्तेमाल होता नहीं दिख रहा। छात्रों के इस रवैये ने इस विरोध प्रदर्शन को इंटरनेट पर एक नई ही पहचान दे दी है।

विधानसभा में भारी हंगामा और विधायकों पर हमला

सड़कों पर मचे इस बवाल की गूंज गुरुवार (23 जुलाई) को बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में भी सुनाई दी। सत्ताधारी एनडीए और विपक्षी दलों के बीच हुए भारी हंगामे के कारण विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार को कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। एनडीए के विधायकों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बुधवार को हुए इस प्रदर्शन में छात्र नहीं, बल्कि असामाजिक तत्व और गुंडे शामिल थे।

इस हिंसा की चपेट में भाजपा के दो विधायक, विनय बिहारी और रोहित पांडे भी आ गए, जिन पर मानसून सत्र में भाग लेने जाते समय प्रदर्शनकारियों ने हमला कर दिया था। हालांकि, इस प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे सीपीआई लिबरेशन के विधायक संदीप सौरभ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह देश के युवाओं का स्वाभाविक गुस्सा है।

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पटना यूनिवर्सिटी के शिक्षकों का स्वाभिमान मार्च

नीट का बवाल थमा भी नहीं था कि गुरुवार, 23 जुलाई 2026 को पटना यूनिवर्सिटी (PU) के सैकड़ों शिक्षकों, गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों और छात्रों ने एक बड़ा मोर्चा खोल दिया। यह प्रदर्शन प्रस्तावित विधायी संशोधनों के खिलाफ था, जिसके तहत 1976 के पटना यूनिवर्सिटी एक्ट और बिहार स्टेट यूनिवर्सिटीज एक्ट का विलय करके एक नया ढांचा बनाने की तैयारी है। पुटा (PUTA) और पीयू (PU) एम्प्लॉइज एसोसिएशन के नेतृत्व में यह मार्च अशोक राजपथ से होते हुए लोक भवन की ओर जा रहा था, लेकिन भारी पुलिस बल ने उन्हें पटना कॉलेज गेट के पास ही रोक दिया।

इसके चलते प्रदर्शनकारी राज्यपाल सह कुलाधिपति सैयद अता हसनैन को अपना ज्ञापन नहीं सौंप पाए। इस 108 साल पुरानी यूनिवर्सिटी के शिक्षकों का स्पष्ट कहना है कि सरकार इस कदम से विश्वविद्यालय की स्वायत्तता (Autonomy) को खत्म करना चाहती है। इसके विरोध में सभी शिक्षक और कर्मचारी शुक्रवार तक सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं, जिससे पूरी शैक्षणिक व्यवस्था ठप हो गई है।

Apnivani की बात

पटना का मौजूदा राजनीतिक और सामाजिक माहौल बेहद गर्म है। सरकार और प्रशासन दोनों ही मोर्चों पर भारी दबाव का सामना कर रहे हैं।

क्या छात्रों पर आंसू गैस छोड़ना और शिक्षकों को उनका ज्ञापन सौंपने से रोकना प्रशासन का सही कदम है? अपनी राय हमें नीचे कमेंट्स में ज़रूर बताएँ!

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PM Vidyalaxmi Education Loan 2026: बिना गारंटी लोन और ‘डिजिटल रुपये’ का सच!

PM Vidyalaxmi Education Loan

देश में युवा शक्ति को सशक्त बनाने और उनके बेहतर भविष्य के लिए हाल ही में कैबिनेट ने ‘पीएम-विद्यालक्ष्मी’ (PM-Vidyalaxmi) योजना को मंजूरी दी है। यह योजना उच्च शिक्षा विभाग द्वारा देखे जाने वाले ‘पीएम-यूएसपी’ (PM-USP) का हिस्सा है, जो केंद्रीय क्षेत्र ब्याज सब्सिडी (CSIS) और शिक्षा ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी फंड योजना (CGFSEL) … Read more

NTA का मास्टरस्ट्रोक: JEE, NEET और CUET में अब खत्म होगा एग्जाम सिटी चुनने का विकल्प, आधार कार्ड के पते से तय होगा सेंटर

NTA

राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 से देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं—JEE Main, NEET UG और CUET UG—के संचालन में एक क्रांतिकारी और कड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। अब तक उम्मीदवार आवेदन फॉर्म भरते समय अपनी पसंद के 4 से 5 परीक्षा शहरों का चयन कर सकते थे, लेकिन अब यह सुविधा पूरी तरह समाप्त कर दी गई है। नए नियमों के अनुसार, उम्मीदवारों को परीक्षा केंद्र अब उनके आधार कार्ड (Aadhaar Card) पर दर्ज स्थायी या वर्तमान पते के आधार पर ही आवंटित किए जाएंगे।

क्यों लिया गया यह बड़ा फैसला?

NTA के इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य परीक्षाओं में होने वाली धांधली, डमी कैंडिडेट और नकल माफिया के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करना है। पिछले कुछ वर्षों में देखा गया था कि संदिग्ध उम्मीदवार जानबूझकर ऐसे दूरदराज के केंद्रों का चयन करते थे जहाँ निगरानी कम हो। अब आधार-लिंक्ड सेंटर एलोकेशन सिस्टम के जरिए छात्र की भौगोलिक स्थिति और उसकी पहचान को सीधे जोड़ दिया गया है। इससे न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि ‘सेंटर फिक्सिंग’ जैसी अनियमितताओं पर भी लगाम लगेगी।

कैसे काम करेगा नया सिस्टम?

जब छात्र 2026-27 के सत्र के लिए आवेदन करेंगे, तो उन्हें अपना आधार नंबर अनिवार्य रूप से लिंक करना होगा। NTA का सॉफ्टवेयर स्वतः ही छात्र के आधार डेटाबेस से उसके पते की पहचान करेगा और छात्र के निवास स्थान के सबसे नजदीकी उपलब्ध परीक्षा केंद्र को अलॉट कर देगा। यह प्रक्रिया पूरी तरह से एआई (AI) संचालित होगी, जिसमें मानवीय हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं रहेगी।

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छात्रों के लिए क्या बदल जाएगा?

1. यात्रा में सुगमता: ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले छात्रों को अब शहरों की लंबी दौड़ नहीं लगानी होगी। उन्हें उनके जिले या निकटतम केंद्र पर ही जगह मिलेगी।

2.आधार अपडेट की अनिवार्यता: यह नियम उन छात्रों के लिए चुनौती बन सकता है जिनका आधार कार्ड पर पता पुराना है या जो पढ़ाई के लिए दूसरे शहर में रह रहे हैं। ऐसे छात्रों को सलाह दी गई है कि वे परीक्षा फॉर्म आने से पहले अपना आधार एड्रेस अपडेट करवा लें।

3. सेंटर बदलने का अनुरोध: अब ‘चॉइस फिलिंग’ का विकल्प न होने के कारण छात्र सेंटर बदलने के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। जो पता आधार में होगा, वहीं परीक्षा देनी होगी।

बायोमेट्रिक और e-KYC पर जोर

NTA ने स्पष्ट किया है कि केवल पता ही नहीं, बल्कि परीक्षा केंद्र पर प्रवेश के समय रियल-टाइम बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन और e-KYC प्रक्रिया को भी अनिवार्य बनाया जा रहा है। इसका मतलब है कि आधार डेटा से छात्र के फिंगरप्रिंट और आंखों की पुतलियों (Iris) का मिलान किया जाएगा। यदि डेटा में थोड़ा भी अंतर पाया गया, तो उम्मीदवार को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

विशेषज्ञों और सरकार की राय

शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, यह सुधार ‘वन नेशन, वन डेटा’ की दिशा में एक बड़ा कदम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से लॉजिस्टिक्स का दबाव कम होगा और परीक्षा केंद्रों पर होने वाली भीड़भाड़ को प्रबंधित करना आसान हो जाएगा। हालांकि, अभिभावक संघों ने मांग की है कि आधार सुधार केंद्रों पर भीड़ को देखते हुए सरकार को विशेष कैंप लगाने चाहिए ताकि छात्रों को अंतिम समय में परेशानी न हो।

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निष्कर्ष और तैयारी के टिप्स

NTA का यह नया नियम 2026 की सभी बड़ी परीक्षाओं पर लागू होगा। परीक्षार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे आधिकारिक वेबसाइट nta.ac.in पर नजर बनाए रखें।

टिप 1: अपने आधार में नाम, जन्म तिथि और पते की स्पेलिंग की जांच अभी कर लें।

टिप 2: यदि आप कोचिंग के लिए किसी दूसरे शहर में हैं और वहीं सेंटर चाहते हैं, तो रेंट एग्रीमेंट के जरिए आधार में ‘Current Address’ अपडेट करा लें।

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पटना में DM ने 11 जनवरी तक कक्षा 8 तक के स्कूल किए बंद, बढ़ती ठंड को देखते हुए जारी हुआ नया आदेश

पटना

बिहार की राजधानी पटना समेत पूरा उत्तर भारत इस समय भीषण शीतलहर और कनकनी की चपेट में है। गिरते तापमान और घने कोहरे के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए पटना जिलाधिकारी (DM) ने जिले के सभी स्कूलों को बंद करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे अभिभावकों और छात्रों को बड़ी राहत मिली है।

पटना DM का आधिकारिक आदेश: कौन से स्कूल रहेंगे बंद?

पटना के जिलाधिकारी ने धारा 144 (अब नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत प्रासंगिक प्रावधान) के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए शैक्षणिक गतिविधियों पर रोक लगाई है।

पटना

आदेश का मुख्य विवरण

• कक्षा सीमा: नर्सरी से लेकर कक्षा 8वीं तक के सभी बच्चों के लिए शैक्षणिक गतिविधियां प्रतिबंधित रहेंगी।

• समय सीमा: स्कूलों को फिलहाल 11 जनवरी 2026 तक बंद रखने का निर्देश दिया गया है।

• स्कूलों के प्रकार: यह आदेश पटना जिले के अंतर्गत आने वाले सभी सरकारी, निजी (Private), सहायता प्राप्त और प्री-स्कूलों पर समान रूप से लागू होगा।

बड़ी कक्षाओं के लिए नियम

कक्षा 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं पूरी तरह बंद नहीं की गई हैं, लेकिन उनके समय में बदलाव किया गया है। ऊपर की कक्षाओं का संचालन सुबह 10:30 बजे से पहले और शाम 3:30 बजे के बाद नहीं किया जा सकेगा, ताकि छात्र ठंडी हवाओं से बच सकें।

क्यों लिया गया स्कूल बंदी का फैसला?

बिहार में पिछले 48 घंटों से पछुआ हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है। पटना का न्यूनतम तापमान गिरकर 7 से 8 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया है।

• घना कोहरा: दृश्यता (Visibility) कम होने के कारण स्कूल बसों और अन्य वाहनों के साथ दुर्घटना का खतरा बढ़ गया था।

• बच्चों का स्वास्थ्य: छोटे बच्चों में कोल्ड डायरिया, निमोनिया और सर्दी-खांसी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों ने भी छोटे बच्चों को सुबह की ठंड से बचाने की सलाह दी थी।

• कोल्ड डे की स्थिति: मौसम विभाग (IMD) ने ‘येलो अलर्ट’ जारी करते हुए अगले कुछ दिनों तक धूप न निकलने की संभावना जताई है।

मौसम विभाग का अनुमान: आगे कैसा रहेगा हाल?

मौसम विज्ञान केंद्र, पटना के अनुसार, बिहार के अधिकांश जिलों में अगले 3 से 4 दिनों तक राहत मिलने के आसार नहीं हैं।

• पछुआ हवाओं का प्रभाव

हिमालयी क्षेत्रों से आ रही ठंडी हवाओं के कारण बिहार के मैदानी इलाकों में कनकनी बनी रहेगी। पटना के अलावा गया, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया जैसे जिलों में भी तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

• कोहरे का असर

सड़कों पर दृश्यता 50 मीटर से भी कम दर्ज की गई है, जिससे न केवल सडक यातायात बल्कि ट्रेनों और फ्लाइट्स के शेड्यूल पर भी बुरा असर पड़ा है।

अभिभावकों और स्कूलों के लिए निर्देश

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई स्कूल इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

• ऑनलाइन क्लासेज: कई निजी स्कूलों ने वैकल्पिक रूप से ऑनलाइन कक्षाएं शुरू करने का निर्णय लिया है ताकि बच्चों की पढ़ाई का नुकसान न हो।

• टीचर और स्टाफ: स्कूलों को बंद करने का आदेश केवल छात्रों के लिए है। शिक्षक और अन्य गैर-शिक्षण कर्मचारी (Non-teaching staff) स्कूल आ सकते हैं और प्रशासनिक कार्य निपटा सकते हैं।

• सुरक्षा प्रोटोकॉल: जिलाधिकारी ने माता-पिता से अपील की है कि वे बच्चों को गरम कपड़े पहनाएं और बेवजह घर से बाहर न निकलने दें।

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बिहार के अन्य जिलों की स्थिति

पटना ही नहीं, बल्कि बिहार के कई अन्य जिलों जैसे भागलपुर, बक्सर और छपरा में भी स्थानीय प्रशासन ने इसी तरह के आदेश जारी किए हैं। राज्य भर के आंगनवाड़ी केंद्रों को भी फिलहाल बंद रखा गया है। बोर्ड परीक्षाओं (BSEB 2026) की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है क्योंकि उनके प्रैक्टिकल एग्जाम्स भी नजदीक हैं।

क्या आपके क्षेत्र में भी ठंड के कारण स्कूलों की छुट्टियां बढ़ा दी गई हैं? हमें कमेंट बॉक्स में बताएं और अपने जिले का नाम जरूर लिखें।

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